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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Bhalenju bhalein aaye momen bhaaye pyaare ratike chinh duraaye ..
भलेंजु भलें आये मोमन भाये प्यारे रतिके चिन्ह दुराये ।। सबरस दे आये अंजन लीक लाये अधरन रंगपाये कहां जाय ठगाये ॥१॥ हौंहीं जानत और कोई नहीं जानत घड छोल बतियां बनाय तुम लाये ॥ नंददासप्रभु तुम बहुनायक हम गँवार तुम चतुर कहाये ॥ २॥।
Khandita
NityaPad-151
Devgandhar
Saanche bhaye aae parbhaat | nand-nandan ! rajani kahaan jaage ?
साँचे भए आए परभात | नंद-नंदन ! रजनी कहां जागे ? कहिये साँवलगात ! पीक कपोलनि लगी तुम्हारें, जावक भाल लखात। उर हि विराजित बिन-गुन माला, मो तन लखि सकुचात | भली करी, अब तहीं पगु धारौ जहाँ बिताई रात। 'छीत-स्वामी' गिरिधर ! काहे को झूठीं सौहें खात ॥।
Khandita
NityaPad-151
Devgandhar
Laalan antaratimaan ayehoju merey geh raseele nayan bayne tutaraat ..
लालन अनतरतिमान आयेहोजू मेरे गेह रसीले नयन बेन तुतरात ॥ अंजन अधर धरें पीक लीक सोहें तोहें काहेकोंदुराबत झूठी सोहें खात।॥।१॥ वातेंहू बनावत बातहु नआवत एतेपर रतिके चिन्ह दुरात तिरछे चितवत गात ॥ नंददासप्रभु प्यारी के वचनसुन भूले नाम वहीको निसरजात ॥।२॥।
Khandita
NityaPad-152
Bilawal
Aho bhatu peak leak kitt laagi.. moso kahaa durawat aalee
अहो भटु पीक लीक कित लागी॥ मोसो कहा दुरावत आली स्याम रंग रस पागी ॥१॥ कहें देत नैना रतनारे विरह बेदना जागी ॥ कृष्णदासप्रभु संग मिली री देखियत तू बड़भागी ।।२।।
Khandita
NityaPad-152
Bilawal
Jaage hoe juu rawre yeye nainna kyon naan kholo ..
जागे हो जू रावरे ये नैंना क्यों न खोलो ॥ भये हो त्रिया बस, रैनि जागे सब रस, भोर भए उठि आए भूले कहाँ डोलो ॥ चंदन लगाए गात, अति ही कहा अलसात, नागरी की पीक लीक कपोलों ॥ पीतांबर भूलि आए प्यारी जू को पट लाए भोर भए उठि सूर कहि आइ जोलो ॥२॥
Khandita
NityaPad-152
Bilawal
Pratsamendathath yashomatijanani giridharsut koo ubatanhavaabe ...
प्रातसमेंडठठ यशोमतिजननी गिरीधरसुत को उबटन्हवाबे ॥। करतशुंगार वसन भूषणले फूलन रुचिरुचिपागबनावे ।।१॥ छूटेबंदबागो अतिसोहत विचविच अरगजा चोवालावे ॥ सूथनलाल फोंदनाफबिरह्यो यह छबि निरखनिरख सचुपावे ॥२।॥| विविधकुसुमकीमाल कंठथर श्रीकरमेंलै वेणुगहावे।। ले दरपण सुतकोमुखनिरखत गोविंदतहां चरणरज पावे ।।३॥
Abhyang
NityaPad-152
Devgandhar
Karmodakmakhranamishreele kuvarkesang dolat nandrani ..
करमोदकमाख्रनमिश्रीले कुवरकेसंग डोलत नंदरानी ॥ मिसकर पकर न्हवायोचाहतबोलत मधुरी बानी ।।१॥| कनकपथ आंगनमें राख्योसीतउष्णधर्‌यो पानी ॥ कनककटोरा सोधो उबटना चंदनकांकसी आनी ॥२॥ यों लाईमंजनहित जननीचितचतुराई ठानी ॥ मनमेंमतो करत उठभाजें दुखित के अरुझानी ॥|३॥ निरखनयनभर देखत रानीशोभाकहत न बानी ॥ गातसचिक्कण योराजेंतहै ज्यौघनतडित लपटानी ।।४॥ आओ मनमोहनमेरे ढिंग बात कहूं एकछानी ॥| खिलौनाएक तातजोलाये बलअजहूनहिंजानी ॥।५॥। राज कुंवर अधन्हातोभाजो ताकीकहूंकहानी ॥ बेनीनबाढी रहीतनकसीदुलहनिदेखहंसानी ।।६।। बैठे आयन्हाय पटपहरे आनंदमनमें आनी | विष्णुदासगिरिधरन सयाने मात कही सोईमानी ॥।७॥
Abhyang
NityaPad-152
Devgandhar
Manjankarat gopalchaukipar ..
मंजनकरत गोपालचौकीपर ॥ अतिसुगंधफुलेलउबटनो विविधभांत कीसोझराखीधर ।। १॥| प्रथमन्हवाय फिरकेसरचर्चत शोभित अंगअंगसुंदरवर ॥ ब्रजगोपी सबमिलगावत हैं अंग उबटकर परससीसकर ।॥।२॥ विविधभांति शुंगारकरत हैं अपनीअपनी रूचिसुघरवर ॥ लेदर्पण श्रीमुखहिदिखावतनिरखनिरख नयनहँसेहरि ॥३॥ भांतिभांतिसामग्रीकरकर लेआयीसब घरघर |। छीतस्वामीगिरिधरन आरोगत अतिआनंदप्रफुल्लितकर ।।४॥
Abhyang
NityaPad-153
Devgandhar
Yashumati jabahi kahyo nhabavanroy gayehari lotatari ..
यशुमति जबही कह्यो न्हबावनरोय गयेहरि लोटतरी ॥ तेलउबटनोले आगेंधर लालहीचोटीपोततरी ॥१॥ मैंबलजाऊ इनमोहनकीकितरोवत बिन काजे ॥ पाछे धरराख्योचुरायके उबटनोतेलसमाजे ।। २॥ महरिबहुत बिनती कर राखतमानत नहीं कन्हाई।। सूरस्याम अतिहीबिरुझानें सुरमुनिअंतनपाई ॥।३॥
Abhyang
NityaPad-153
Devgandhar
Aaj mohi aagam agam janaayo ..
आज मोही आगम अगम जनायो ॥ सोंधों छानी अरगज़ाचंदन आंगन भवन लीपायों॥ १॥। आगम आवन जान प्रीतम कों गोपीजन मंगलगायो ॥ आनंद उर न समाय सखी नव साजि सिंगार बनायों ॥२॥ तन सुखपागपिछोरा झीनो केसर रंग रंगायो ॥ मुक्ता के आभूषन गुही मनी पहिरावतहुलसायो ॥। ३॥ पंखा बहु सिर प्रीतम को, नित राखुंगी छिरकायों ॥। ग्रीषम ऋतुसुख देति नाइक यह औसर चलि आयो।। आबेंगे महेमान आज हरि भाग्य बडेदिन पायों॥ कुंभनदास' नव नेह नई ऋतु आगम सुजस सुनायों ॥४॥।
Abhyang
NityaPad-153
Bilawal
Kahaa ochhihvaijaihejat ..
कहा ओछीहवैजैहेजात ॥ सुनयशुमति तुमबडरनआगेंजोछिन एक बितात ॥१॥ अतिनीको सतभावभलाई जो यातनतेकीजे ।। मायबापको नामलिवाबत लोकमांझ यशली जे । २॥ सासननद और पारपरोसनहँस बहु भांतकह्यो ॥ तौहूमोहि तिहारेघरबिन नाहिन परत रह्मो ॥३॥ बोललेहोसंकोचकरो जिनजबतुमसुतहि न्हवावो ॥ श्रीविद्डलगिरिधरलालको मोहीपेंउबटाबो ॥।४॥
Abhyang
NityaPad-153
Devgandhar
Karatshungar maiyamanbhawat ||
करतशूंगार मैयामनभावत || सीतलजल उष्ण करराख्योलेलालन को बैठ न्हवावत ॥|१॥ अंगअंगोछ चौकीबैठारत प्रथमहीले तनिया पहरावत ॥ देखोमेरेलाल औरसबबालक घरघरतें कैसे बनआवत ॥२॥ पहरोलाल झगाअतिसुंदर आंख आंजके तिलकबनावत ॥ सूरदासप्रभु खेलतआंगन लेतबलैया मोदबढावत ।॥।३॥
Abhyang
NityaPad-153
Devgandhar

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