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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Bhogshungarayashodamaiah srivitthalnathke haath koo bhaaven .. | भोगशुंगारयशोदामैया श्रीविद्डलनाथके हाथ को भावें ॥
नीकेंन्हायशुंगाककरतहै आछीरुचिसों मोहिपागबंधाबें. ॥१॥
तातेसदांहौउहां हीरहतहों तूडर माखन दूधछिपावें ॥
छीतस्थामीगिरिधरन श्रीविद्धल निरखनयना त्रयतापनसादें ।। २।। | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-154 | Bilawal |
Aavo gopal shoongaarbanaaun .. | आवो गोपाल शूंगारबनाऊं ॥
विविधसुगंधनकरो उबटनो पाछेउष्णजल लेजु न्हवाऊं ॥ १॥
अंगअगोछ गुहूंतेरीबेनी फूलन रुचरुचमाल बनाऊं ॥
सुरंगपाग जरतारीतोरारत्नखचित शिरपेचबंधाऊं ।२॥
बागोलाल सुनेरीछापो हरीड़जारचरणन विचराऊं ॥
पदुकासरस बेंजनीरंगको हँसलीहार हमेल बनाऊं॥। ३॥
गजमोतिनकेहार मनोहर वनमालाले उरपहराऊं।।
लेदर्पण देखोमेरे प्यारे निरखनिरख उर नयनसिराऊं ॥।४॥
मधुमेवा पकवानमिठाई अपनेकरले तुम्हें जिबाऊं ॥|
विष्णुदासको यही कृपाफल बाललीलाहों निशदिनगाऊं ॥५।॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-154 | Bilawal |
Myrie praatkaal nandlal pagbandhawat baldikhawat darpan bhalarholasi .. | माईरी प्रातकाल नंदलाल पागबंधावत बालदिखावत दर्पण भालरहोलसि ।।
सुंदर नवकरनबीच मभंजुमुकरकीछबि रहीफबिमानों गहि
आन्योहै युगकमलनशशि ।॥|१॥
बिचबिचचितकेचोर मोरचंद्र माथेंदिये
तिनढिंगरत्न पेचबांधतहैंकस ।।
नंददासललितादिक ओटभये अवलोकत
अतुलितछबिकहिनजात फूलझरेंहँस ॥ २॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-154 | Bilawal |
Khulyohemukesichira kalginagjatitahira dhingsirpechalalit sambharyonhai ..| | खुल्योहेमुकेसीचीरा कलगीनगजटितहीरा ढिंगसिरपेचललित संभारयोंहै ॥|
जंघाऊपर कमलकाछिनी कंचन के विविधरंगएकछोर पटकाकोछेल तासोंडारयोहै ॥१॥
दुगदुगी कंठमोतीमाल कंठीकंठसोहेलालशोभित वनमालवेंदीभाललाल आज मैंनिहार॒योहै।
गोलगोल पहुँचनमें पहुँचीरत्नजटित एँठवेकरानमें मेरोमनडारथो है ॥२॥
नखशिखशुंगारबनाये निरखलोचन अधघाये अरुगहनोसबनखसियलों र॒त्नजटित
धारयो है ॥ कहत बल नंदनंदन वृषभानकीदुलारी आजहीयह लाडिलोतें नीकेहीशुंगार्यो है ॥ ३।। | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-154 | Bilawal |
Pitambar koo cholana paharavatmaiah | kanakchhaap tapardhari | पीतांबर को चोलना पहरावतमैया | कनकछाप तापरधरी
जझीनी एक तनैया ॥१॥
लालइजारचुनायकी औरजरकसी चीरा ॥
पहुँचीरत्नजरायकी उरराजतहीरा ॥। २॥|
ठाडी निखयशोमति फूली अंगसमैया ॥।
काजर लेबिंदुकादियो व्रजजनमुसकैया ।। ३।।
नंदबाबा मुरलीदई कह्योऐसेंबजैया।।
जोईसुने ताकोमनहरे परमानंद बलजैया ॥।४।॥। | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-155 | Bilawal |
Shyam shyam praat uthhe bethe arasparas dou karat singar |. | श्याम श्याम प्रात उठे बेठे अरसपरस दोउ करत सिंगार |।
लटपटी पाग सँवारत एयामा अलक सँवारत नंदकुमार ॥ १॥
एक पहेनी वाकी मोतिनमाला एक पहनी वाको नवसर हार॥
श्रीभट जुगलकिसोर द्युति मेरे आंगन करत बिहार ॥२॥। | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-155 | Devgandhar |
Kusum kunj madhi karat singar .. | कुसुम कुंज मधि करत सिंगार ॥
प्यारी पियहीं फुलेल लगावत कोमल कर सुरजावतवार ॥ १॥
चंदन घसि अंग मज्जन कीनो यमुना जल झरी कर धार ॥|
न्हाय बहीरी अंग पोंछि स्वच्छ कर सरस बसन पहरावत हार ॥२॥
पीत पिछोरी बांधि फेंट कसि तापर कटि किंकिनी झनकार॥।
फेंटा पीत शीश वांध्यो कटि दुहु दिश अलक लटकि घुघरार ॥ ३॥|
दोउ चरन नूपुर धुन बाजत कंठ पदक सुज मुक्ताहार॥
बाजु बंध जटित हथ पोची पुष्पमाल पहरें करि प्यार ॥।3॥
पुष्प गुच्छपर मोर चंद्रिका ले दर्पन देखत रिझवार।|।
चतुर्भुजदासश्याम मुख निरखत तन मन धन कीनो बलिहार ॥५॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-155 | Devgandhar |
Aajatan radhasjatshungar .. neerajsutwahan koo bhkshan | आजतन राधासजतशुंगार ॥ नीरजसुतवाहन को भ्क्षण
अरुणस्यामरंकोनविचार ॥ १॥ मुद्रापति अचवनतनयासुत उरहीबनावतहार ॥।
सारंग_ सुतपतिवशकरिवेको अक्षतलेपूजतरिपुमार ॥२॥ पारथपितु
आसनसुतशोभित स्यामघटाबगपांतविचार ॥। सूरदास प्रभु हंसासुतातटविहरत
राधानंदकुमार ॥।३॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-155 | Bilawal |
Aajshungaarnirakhsyaamaako neeko banyostham manbhawat... | आजशुंगारनिरखस्यामाको नीको बन्योस्थाम मनभावत॥।
यह छबि तनहींलखायोचाहत करगहिके नखचंददिखावत ॥१॥
मुखजोरें प्रतिबिंबविराजत निरखभिरखमनमें मुसकावत ॥।
चतुर्भुजप्रभु गिरिधर श्रीराधा अरसपरसदोऊ रीझरिझावत ॥। २॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-156 | Devgandhar |
Piya pyaari key karat singar. saras sugandh phulel lagawat komal curr sambhaarat vaar ..1.. | पिय प्यारी के करत सिंगार। सरस सुगंध फुलेल लगावत कोमल कर संभारत वार ॥१॥
पीत कुसुम सिर बेनी ग ूंथी सिंदुर मांगजो भरत समार।
टेढी लर लटकन मटकनपर गलित कुसुम सिर भार ॥ २॥
लेहिंगा कटितट क्षुद्र घँटिका अंगियापर गज मोतीनहार |
पोंची कंकण जराव बठोना एक एक कर बिच चूरी चार ॥|३॥
सारी सरस कंसुभी सोहेले दरपन देखत रिझवार ॥।
रामदास पीय प्यारी उपर तन मन धन डारत सब वार ।।४॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-156 | Devgandhar |
Subhagshungar nirakhmohanko ledarpankar piyahidikhaaven | | सुभगशुंगार निरखमोहनको लेदर्पणकर पियहिदिखावें |
आपनमेकनिहारियेबलजाऊं आजकी छबि कछूकहत न आवें॥ १॥
भूषणवसन रहेफबिठांईठांई अंगअंगछबि चितहिचुरावें॥।
रोमरोमप्रफुल्लित ब्रजसुंदरि फूलन रचिरचि मालबनावें ॥२॥
अंचलवार करत न्योंछाबर तनमन अति अभिलाष बढावें ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरकोस्वरूप सुधापीवतनयनपुट तृप्तिनपावें ॥। ३॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-156 | Devgandhar |
Aajkoshungar subhagsanware gopaljuko kahat nabanaavabe dekhenhin banaaven .. | आजकोशूंगार सुभगसांवरे गोपालजूको कहत नबनआवबे देखेंहीं बनआवें ॥
भूषनवसनभांतिभांति अंग अंग छबि कहीनजात लटपटी सुदेशपाग चित्तकोचुरावें ॥१॥
मकरकुंडल तिलकभाल कस्तूरी अतिरसाल
चितबनलोचनविशाल. कोटिकामलजावें ॥
कंठसरी बनमाल फ़ेटाकटिछोरनछबि निरखतत्रिभुवनत्रिया धीरनमनलावें।। २॥
मेरेसंगचलनिहार ठाढ़ेहरिकुंजद्धार हितकीचितबातकहूं जोतेरेजियभावें ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधर नखसिखसुंदरसुजा न बडभागिनताहिगिनो सुजातहीलपटावें ॥। ३।। | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-156 | Devgandhar |
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