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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Praatasamegiridharaadhaau mukhdekhat darpan mein .. | प्रातसमेगिरिधरराधादोऊ मुखदेखत दर्पण में ॥
जो रकपोलकहत आपस में तुमनीकेकिधोंहमनीकी औरकरोविचार सोचअपने मनमें ॥|९॥
हरिकीलटपटीपागविराजत उनकीबिथुरी अलक मांगशिधिल गोरेतनमें॥
गोवर्धनधारी इतनीबाख जेहे उमगचली युगलरूप वसिधोरी स्थामतन में ॥२॥ | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-157 | Devgandhar |
Mohanlalke charanarvind trividhtapahari .| | मोहनलालके चरणारविंद त्रिविधतापहारी ।|
कहिनजात कौनपुण्य करजूसिरधारी ॥१॥
निगमजाकीसाखबोले सेवकअधिकारी ॥ धीवरकुल अभयकीनो अहिल्याउद्धारी ॥
ब्रह्माजाकोपारनपाबे गोपलीलावपुधारी ॥ आसकरणप्रभु पदपराग परममंगलकारी ।। ३॥। | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-157 | Bilawal |
Shobhaaj bhalibani aaee .. jalsutauparhansbirajat taparinder badhudadsai ..1.. | शोभाआज भलीबनि आई ॥ जलसुतऊपरहंसबिराजत तापरइंद्र बधूददसाई ॥१॥
दधिसुतलियो दियोदधिसुतमें यह छबिदेख नंदमुसकाई ॥
नीरजसुतबाहनकोभक्षण सूरस्यामले कीर चुगाई ॥२॥ | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-157 | Bilawal |
Sundarswarup atisevasonsasaras marag praveenayaate jhaanhunkathit hain.. | सुंदरस्वरूप अतिसेवासोंसससरस मारग प्रवीणयाते झानहुंकथित हैं॥
तैसोईबागोबनाय तैसीयझुकरहीपाग चंद्रकासवारनी के फेटाहुं कसतहैं।।१॥
मोतीमालगुंजहार हियेपदककंठलाल सूथनसंभारचरणजेहर सजत हैं ॥
करके शृंगार गिरिधारी जूकोबारबार आरसीदिखाय श्रीहरिरायजु हँसत हैं।।२।। | Ushnakal - Shringar Dharayve | NityaPad-157 | Devgandhar |
Sundermukh parr bavaaro tona .. benibarankimuduvena ..1.. | सुंदरमुख पर बवारो टोना ।। बेनीबारनकीमूदुवेना ॥१॥
खंजननयनन अंजसो हे भ्रोहनलोयन लोना ॥
तिरछीचितवनयों छबिलागे कंजपलन अलिछोना ॥२॥
जोछबिहे वृषभानसुतामें सोछबिनाहिनसोना ॥
नंददास अविचलयहजोरी राधास्थाम सलोना ॥।३॥ | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-157 | Bilawal |
Yeye dounagar dhota mycongopakebeta .. | ये दोऊनागर ढोटा माईकौनगोपकेबेटा ॥
इनकीबात कहा कहो तोसों गुणनबड़े देखन के छोटा ॥१॥
अग्रज अनुजसहोदरजोरी गौरस्यामग्रथित सिरचोटा ||
नंददासबलबल यहमूरति लीलाललित सबहीविधिमोटा ॥२॥। | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-157 | Bilawal |
Aajbanyonvarang piaro .. vrajavanitamil kyonniharo ..|1.. | आजबन्योनवरंग पियारो ॥ ब्रजवनितामिल क्योंननिहारो ॥|१॥
लटपटीपाग महावरपागे। कुंवरमनावत अतिबडभागे।॥। २॥।
मीलांबर नखरेखजोसोहे॥ देखतमन्मथको मनमोहे ॥ ३॥
कहूंचंदन कहूंवंदनकी छबि ।। अंगरागबहुभांतिरह्मोफबि ॥|४॥
मदनमोहनपिय यहविधदेखों ।। दासगोपाल जीवनफल लेखों ॥५।। | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-157 | Bilawal |
Dekhocharchandaekathaur .. chitavarhinitambini | देखोचारचंदएकठौर ॥ चितवरहीनितंबिनी
पियसंगसारसुताकी ओर ॥। १॥ द्वैविधुकीगति स्थामबरण है द्वैविधुकीगतिगौर॥।
जाकेमध्यचारशुकराजत द्यफलआठचकोर ॥ २॥ शशिशशिसंगप्रवालकुंदअलि
तहां अरुओमन मोर ॥ सूरदासप्रभुउठभयरूपनिधि बलबलयुगलकिशोर ॥। ३॥। | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-158 | Bilawal |
Dekhsakhiek adbhutaroop .. aeka ambujmadhyadekhiyatabisadhisa.._ ..1.. | देखसखीएक अद्भुतरूप ।। एक अंबुजमध्यदेखियतबीसदधिसुतयूप.._ ॥१॥
एक अबली दोयजलचर उभयअर्कअनूप ॥
पंचवारजएकहीढिंग कहोकहास्वरूप ॥२॥
शिशुगत में भईशोभाअर्थकरोबिचार |
सूरश्रीगोपालकी छब्रि राखिये उरधार ॥। ३॥ | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-158 | Bilawal |
Dekhiyatprakat dwadashmeen ... khatindudwadash taranishobhit vimaluduganatin ...1.. | देखियतप्रकट द्वादशमीन ॥। खटइंदुद्वादश तरणिशोभित विमलउडुगणतीन ॥।१॥
दशअष्टअंबुजकीर खठमणिकोकिलोस्वर एक ॥ द्वादशविद्रुम दामिनीखटब्यालतीनबिशेक ॥२॥
त्रिवल ीपर श्रीफलविराजत परस्परब्रजनार ॥ कुंवरगिरिधर कुँव॒रिछबिपर सूरजनबलहार ।। ३॥। | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-158 | Bilawal |
Adbhut aeka anupambagh || yugalkamal parr gajwar kreedat | अद्भुत एक अनुपमबाग || युगलकमल पर गजवर क्रीडत
तापरसिंहकरतअनुराग ॥ १॥ हरिपरसरवरसरपरगिरिवर तापरफूलेकंज पराग ॥।
रुचिरकपो ततसत ताऊपर तापरअरुणअमृत फललाग ।।२॥ फलपरपुष्प
पुष्पपरपललव तहांवसतशुकपिकमृगखाग || खंजनधनुषचंद्र ताऊपर तहींबसत
एक मणिधरनाग ॥ ३॥ यहरसविरसहोतनहीं कबहू शोभानेक करत नहिं त्याग ॥
सूरदासप्रभुवसतनिरंतर तिहिंहित बाढ्यों सिंधुसुहाग ॥४॥। | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-158 | Bilawal |
Inmein koo vrishbhankishori .. sthambataydeho apane curr | इनमें को वृषभानकिशोरी ॥ स्थामबतायदेहो अपने कर
बालापन की जोरी ॥१॥ वहदेखो ठाडी युवतिनमें नीलवसन तनगोरी ॥। बालापनमें
मोहिसिखायो छलबलबहुविध चोरी ॥२॥ तिहारेगुणनकी ग्रथितमाल
भैंउरहीते नहीछोरी ॥। सूरदासप्रभु तिहारे मिलनको जैसेपाट की डोरी ।।३॥ | Ath Shringaar Sanmookh | NityaPad-159 | Bilawal |
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