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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Jasomatiken hoe aaj gairi curry singar thaade nandanandan nirakhi
जसोमतिकें हो आज गईरी करि सिंगार ठाड़े नंदनंदन निरखि बदन हों थकित भइड्टरी | १॥ लोभी लोभपरसथो मन मेरो रूप रास अंग अंग छईरी ॥ कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर हँसि मोंसो कछु बात कहिरी ॥२॥
Ath Shringaar Sanmookh
NityaPad-159
Bilawal
Nandbhavanako bhushanmai ..| yashudakolal veer haldhar koo
नंदभवनको भूषणमाई ॥| यशुदाकोलाल वीर हलधर को राधारमण सदासुखदाई ॥१॥ इंद्रकोइंद्र देवदेवन को ब्रह्म को ब्रह्म अधिक अधिकाई ।। कालकोकाल ईशईशन को वरण कोवरण महावरदाई ॥।२॥ शिवकोधन संतन को सर्वस्व महिमा वेदपुराणनगाई ॥ नंददास को जीवन गिरिधर गोकुल मंडन कुंवर कन्हाई ।।३।।
Ath Shringaar Sanmookh
NityaPad-159
Bilawal
Koee aeka saanvarori itahabaiaavejaaee .. geongionyanan
कोई एक सांवरोरी इतहबैआवेजाई ॥ ज्योंज्यॉनयनन देखियेरी त्योत्यॉमन ललचाई ॥९॥ वदनमदनमनमोहना घुंघरवारे केश ॥ मोहनमूरति माधुरी नृत्यतमनोहरवेश ॥२॥| श्यामवरणहियो वेधियो जोबनमदछकेनैन ॥ रूपठगोरीमोहिलगीरी बिनदेखेनहिंचैन ॥३॥ धीरहरनबडरीभुजारी मदगजराजकी चाल ॥ _ उरदेखेंमनआवही ह॒वैरहियेबनमाल ॥।४॥ समझाये समझतनहीं रहीं छक मनरह्योभोय ॥॥ रामरायप्रभुसोरमी कहिभगवान सखीसोय ।।५॥।
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NityaPad-159
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Larlataksohe lalke .. jaanoghanmein vidhumandalrajat
लरलटकसोहे लालके ॥ जानोघनमें विधुमंडलराजत करनवनीत गोपालके ॥१॥ स्थामगातपर दश्चिकेछींटा उड्डुगणछबि नयनविशालके ।। आसकरनप्रभु मोहननागर प्रेमपुंज व्जबालके ।। २॥।
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NityaPad-159
Bilawal
Sundardhotakaunako sundarmridubani .. sundarbhalatilakadiye
सुंदरढोटाकौनको सुंदरमृदुबानी ॥ सुंदरभालतिलकदिये सुंदर मुखकानी ॥ १॥। सुंदनयननहरलियो कमलनकोपानी ॥ सुंदरतातिहूलोककी लेब्रजमें आमी ॥२॥| भेदबतयोग्वालिनी जायोनंदरानी ।। परमानंदप्रभुमात यशोमति सबसुखसों लपटानी ॥३॥
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NityaPad-159
Bilawal
Sakhee nandako nandan saanvaro mero chita chor jaayari.
सखी नंदको नंदन सांवरो मेरो चित चोर जायरी। रूप अनुप दिखायके सखी गयो हे अचानक आयरी ।।१॥ टेढी चलनि मधुर चंचल गति टेढे नेन चलायरी । टेढी हीं कछु छ्वे रहे हे सखी मधुर बेंन बजायरी ॥ ३॥ कानन कुंडल मोर मुकुट छबि सोभा बरनी न जायरी | चतुर्भुज प्रभु प्रानको प्यारो सब रसिकनको रायरी ॥। ३॥।
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NityaPad-160
Bilawal
Kahaa ree kaho manmohan koo sukh barnat mopai barnyo naan jaay.
कहा री कहो मनमोहन को सुख बरनत मोपै बरन्यो न जाय। आलिंगन परिरंभन चुंबन अधरामृत रसपीवत पिवाय ॥१॥ निस वासर संग तजत न तिल भर राखथ अपुने हृदय लगाय॥। कृष्णदास' ढिंग ठाडी ललिताकर लै बीन बजावत गाय ॥। २॥।
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Aaj atee shobhit haye nandlal ..| core kesari dhoti pahare
आज अति शोभित हे नंदलाल ॥| कोर केसरी धोती पहरे ओर उपरना लाल ॥१९॥| चंदन अंग लगाय सांवरो अरु राजत बन माल ।॥। अति अनुराग भरी ब्रजबनिता बल बल दास गोपाल ॥ २॥
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Jaba bhaar jey hari jaraai sub loga bhaar tulsi key bheej bhaar nasikako besar.
जब भार जे हरि जराई सब लोग भार तुलसी के भीज भार नासिकाको बेसर। मालाभार चुनरी आप मासा भार चार फुलनभरी अंगियासो भीजरही केसरी ॥१॥ नासापर शुक बाहु कंठ पर कपोत वारूँ सुरन पर पीक वारु बेनी पर सेसरी | कहें गुनि तानसेन बरनी न जात छबि जाकी कटी पर वारो कोटि कोटि के हरि ॥२॥।
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NityaPad-160
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Aaj baney mohan rung bheene.
आज बने मोहन रंग भीने। केसरी पाग सिथिल अलकावलिसीस चन्द्रिका दीने ।१॥| केसरी वागो अति राजत हि हरी इजार चरननमें दीने । हार हमेल दरपन ले निरखत रसिक' प्रीतम चरनन दीने ॥ २॥
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Aasawari
Ulati phir aavatahi nijaddawar ..
उलटी फिर आवतही निजद्दवार ॥ गृहआंगनसुहात नतबतेदेख्योनंद-कुमार ॥ १॥ सुंदरस्थामकमलदल लोचनसुंदरताजु अपार ॥ तादिनतें आतुरयहमनतन चितवत बारंबार ॥ २॥। भोरभवनते निकसेमोहन चलत गयंदसुढार ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधरनमिलनकों करत अनेक विचार ॥। ३॥।
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Aasawari
Chadh govardhan sikhar saanvaro bolat dhori dhen |
चढ़ गोवर्धन सिखर सांवरो बोलत धोरी धेन | पीत बसनसिर मोर चंद्रकाधर मोहन मुख बेन ॥।१॥। बन जु धात विचित्र किये हैं संग सखासब सेन ॥ कुमनदास प्रभु दोहे दोहे गैया मथ मथ पीवत धेन ॥२॥।
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