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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Atar gulab neer parada lapate useer trividh sameer kii jhakor hain karein..
अतर गुलाब नीर परदा लपटे उसीर त्रिविध समीर की झकोर हैं करें॥ छूटति फुहारे हौद भरे अति भारे सारे नाना बिधि चादरन की धार बहवौ करें ॥।१॥ रंग जमें राग गुन रहत सारंग की धुनि ग्रीषम निवास गुनीगान कहवौ करें।। ऐसे निज मंदिर में बिराजे बालकृष्ण प्रभु ब्रजाधीस' आठों पहर दरसन देवौ करें | २॥।
Khaskhane
NityaPad-161
Bilawal
Mukhson mukh milaay dekhat rc...|
मुखसों मुख मिलाय देखत आरसी।॥| विकसत नीलकमल ढिंग उदित भयो कैधों शशी ॥१॥ निरख बदन मुसकाय परस्पर करत बिहार गिरि जात अंक हँसी।। गोविंदप्रभु प्यारीजु परस्पर दंपति प्रेरि प्रेमफँसी ।। २।।
Khaskhane
NityaPad-161
Bilawal
Mero mukhnikoke terori pyaari ..
मेरो मुखनीकोके तेरोरी प्यारी ॥ दर्पनले देखो मुगनयनी सांची कहो वृषभान दुलारी ॥ १॥ तुमहो नंदजूके छैलछबीलै हमहैं गुजरियां दासी तुम्हारी । कृष्णदासप्रभु गिरिधरनागर चरणकमल पर राधाजु बारी ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-161
Bilawal
Larkai mein jobanki chhabi dekho sunder nayanan bharbhar ...
लरकाई में जोबनकी छबि देखो सुंदर नयनन भरभर ॥। बिथुरी अलक बदन छबि राजत सुरत केलि मानो सीख दई हर ॥। १॥ गंड चखोडापर चख बिंदुला चिह्न किये मानो चुंबन करकर ॥ नेन सलोने भ्रमर भमत मानो ललितगिरा राजत अति तोतर ॥२॥ आंगन डोलत फिरत महागज लेत सखी लरकारे भुजन भर ॥ सूरस्यथाम सब समे महारस देत लाला पावत सुख नागर ॥। ३॥
Khaskhane
NityaPad-161
Pancham
Suman munn gopallal sunder atee rupjal mitanten janjal nirakhat sub gopbal ..
सुमन मन गोपाललाल सुंदर अति रूपजाल मिट॒टें जंजाल निरखत सब गोपबाल ।। मोरमुकुट सीसधरे बनमाला सुभगगरे सबकोमन हरेदेख कुंडलकी झलकगाल ॥ १॥। आभूषन अंगसोहे मोतिनके हार पोहे कंठ सरि मोहेद्रग गोपीन निरखत निहाल ॥| छीतस्वामी गोवरधनधारी कुंवर नंद सुबन गायनके पाछें पाछें धरतहें लटकीली चाल ॥॥२॥
Khaskhane
NityaPad-161
Bilawal
Sunder shyam chhabilo dhota daar gayo mope madan thagori ..
सुंदर श्याम छबीलो ढोटा डार गयो मोपे मदन ठगोरी ॥ निर्तत गावत वेनु बजावत संग सखा हलथर की जोरी ॥१॥| कबहुंक गेंदन मार नचावत ग्वाल भजावत हें चहु ओरी ॥ चंचल बाजत चावत धावत कबहुंक आय होत ईक ठोरी ॥ २॥ कुंदनलाल लाल लोचन छबि-शीश पगा ओढे पीत पिछोरी ॥ सूरदास प्रभु मोहन मागर कुहांरि करूँ क्िनी जगजोरी ॥।३॥
Shringaar Darshan - Paga Shringaar
NityaPad-162
Bilawal
Akhiyaan kaahu kii naan lago .. saanvaro sou dhota kaahu koo jasir
अखियां काहू की न लगो ॥ सांवरो सो ढोटा काहु को जासीर ग्वाल पगो ॥ रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोम रोम प्रति मदन जग्यो ॥ सुनि कृष्णदास लाल गिरिधर विन को काहु को न सगो ।।२॥
Shringaar Darshan - Paga Shringaar
NityaPad-162
Saarang
Banyo maaee pagaa sthaam sir neeko .. dhoti or uparna odhe
बन्यो माई पगा स्थाम सिर नीको ॥ धोती ओर उपरना ओढे ओर गहेनो मोतीको ।॥१॥ अंग अरगजा कमल हाथ में लीनु मिल्यो भावतो जीकों ॥ नेन चकोर चंद मुख निरखत रसिक प्रीतम सबहीको ॥।२॥॥
Shringaar Darshan - Paga Shringaar
NityaPad-162
Saarang
Laal tum seekhe hoe curran dagaa.... rajani anat jaay sukh
लाल तुम सीखे हो करन दगा।॥। रजनी अनत जाय सुख बिलसत धरचदो है शीश पगा ॥॥१॥ ओढे कवाय लालचन्द्र छीपावत अब तुमरी बिध जानी || कुंभनदास प्रभु गोवर्द्धन धर रहत नहीं कछु छानी ॥। २॥
Shringaar Darshan - Paga Shringaar
NityaPad-162
Ramkali
Arie yeh cone chhabilo yaa key sheesh pagaa .. saanware varan anga anga
अरि येह कोन छबीलो या के शीश पगा ॥ सांवरे वरन अंग अंग सुंदर धरच्ो हे शीश पगा ॥१॥ कुटिल अलक बदन पर राजत कुंडल जटित नगा॥ मेरो मन अटक्यो वा मूरति बांध्यो प्रेम तगा ॥२॥॥| श्याम समें गायन के पाछें सखा मंडली संगा ॥ कृष्णदास गिरिधर जुकी बानिक दिनदिन नव नव रंगा ॥ ३॥
Shringaar Darshan - Paga Shringaar
NityaPad-162
Gori
Harr banate baney aavat nand nandan sheesh pagaa | orey peet pichhoi roopraat
हर बनते बने आवत नंद नंदन शीश पगा | ओरे पीत पिछोई रूपरात जदुपति जगवंदन ॥१॥ संध्या समें ख्रिरक के द्वारे अपने अपने भाव विरारत ॥ नंददास प्रभु को मुख मिरखत त्रिविध ताप तनते सब टारत ॥ ३।।
Shringaar Darshan - Paga Shringaar
NityaPad-162
Gori
Gope key bhekh gopal gaayan hait drigan sukhdet ....
गोप के भेख गोपाल गायन हेत दृगन सुखदेत ।॥। शिर सुभग फेंटा सखी ॥। परस रहो भ्रों पर पेज पच भास ढर लागत सोहावनो दाहेंनो ओरि सखी ॥१॥ लेत आकसि चितवन चारू चलन गती गोपिजन मन वसन आनन अमेंठा सखी ॥। धाय सनमुख जाय दास परमानंद चाह क्षित करत यों करिये भेंटा सखी ॥३॥।
Shringaar - Fenta
NityaPad-163
Bilawal

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