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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Kahaanlovaranon sundartai .. khelat kunwarkanak aangan mein
कहांलोवरनों सुंदरताई ॥ खेलत कुंवरकनक आंगन में नयननिरख सुखदाई ॥। १।। श्वेत कुलहि शिरस्यामसुंदर के बहुविधिरंग बनाई ॥। मानोंनवघन ऊपरराजत मधुवा धनुषचढाई॥। २॥ श्वेतपीत अरुअसितलालमणि लटकन भालरुराई ॥| मानो असुरदेवगुरुसनिमिलि-भूमीसुतसमुदाई ॥।३॥ अतिसुदेश मनहरत कुटिलकच लोचनमुखसकुचाई।॥। मानों मंजुलकंजकोशपर अलिअवली फिर आई ॥४॥ दूधदंत अधरनछबि अद्भुत अलपतलपजलझाई।। किलकत हँसत दुरत प्रकटतमानों घनमेंविद्युललाई ॥५।। खंडितवचनदेत पूरणसुख अद्भुत यह उपमाई | घुटुरुवनचलत उठत प्रमुदितमन सूरदास बलजाई ॥। ६॥।
Shringaar - Kulhe
NityaPad-163
Ramkali
Lalke fenta ainthaa ametha banyo fabyo bhraguti bhaal parr naval
लालके फेंटा ऐंठा अमेठा बन्यो फब्यो भ्रगुटी भाल पर नवल नंदलालके आवत बनते बने सांझ सुरभिन मांझ ।। अटक लटक नरही दूृगन ब्रजबालक॥। ९॥ चलत गजगति चाल मनहरत तेहि काल बाहु अंस न धरें सखा प्रिय ग्वालके ॥। गोपीजन युथ जुूरे द्वार द्वारा खड़ी निरख नंदलाल युवती जन जालके ॥२॥
Shringaar - Fenta
NityaPad-163
Hameer
Fabyon fenta lalit laal key shish parr nirakhi chhabi madhuri akhiyaan siratari ..
फब्यों फेंटा ललित लाल के शिश पर निरखी छबी माधुरी अखियां सिरातरी ॥ प्रेमड़ी बावरी हों सखी व्हे रही सुध बुध बिसर गई द्वार व्हे जातरी ॥१॥ रूप के गर्व कछू आव आदर कियो बहोरो कृपाल मुस्कातरी ।। दास कुंभन नाथ गोवर्धनधर साथ गोपीजन रीझ मिल सांमरे गातरी ॥२॥
Shringaar - Fenta
NityaPad-163
Bilawal
Poot maharko khirak dohawat gaiya ..
पूत महरको खिरक दोहावत गैया ॥ संध्यासमे बांधे फेंटा गरे गुंजमाल पहेरे तनिया ठाडे हैं अधपैया ॥॥१॥ कोंधनी बनी हाथ हसंतातर रूप मोहनी मदन हरैया।। रसिक प्रीतम की बानिक निरखत लीजे रीझ बलैया ॥ २॥
Shringaar - Fenta
NityaPad-163
Hameer
Mohan mohani sirpag .. mohanbhantivichitrasambhari
मोहन मोहनी सिरपाग ॥ मोहनभांतिविचित्रसंभारी श्रीदामाअनुराग ॥१॥ उज्ज्वलस्थामसुदेशविराजत कुल्हेफूलपराग ॥ देखतन अघात सुभगतासीमा कृष्णदासबडभाग ॥।२॥।
Shringaar - Kulhe
NityaPad-164
Dhanashree
Aaj atirajat nandkishore .. sir parr kulhetiparoshobhit
आज अतिराजत नंदकिशोर ॥ सिर पर कुल्हेटिपारोशोभित धरेंपख्लौबामोर ॥॥१॥ मलल्‍लकाछकटिबांधेफेंटा सरससुगंधदुछोर ॥ बलबलसुंदरबदन कमल पर रसिकप्रीतमचितचोर ।। २॥।
Shringaar - Kulhe
NityaPad-164
Dhanashree
Apano gopal kii balhari .. nanavidhirchifulbanai
अपनो गोपाल की बलहारी ॥ नानाविधिरचिफूलबनाई भलीबानी हेधारी ॥१॥ सोंधेसहित सुदेशकेशबिच बांकीकुल्हे विधारी ।। गोपीजन के अनुराग भाग्यसब बांधसुहस्तसंवारी ॥२॥ निरखनिरखफूलत नंदरानी सुखकी रास विचारी ॥ परमानंदस्वामी के ऊपर सर्वस्वदीजैवारी ॥।३॥ # राग धनाश्री अ मोहन मोहनी सिरपाग ॥ मोहनभांतिविचित्रसंभारी श्रीदामाअनुराग ॥१॥ उज्ज्वलस्थामसुदेशविराजत कुल्हेफूलपराग ॥ देखतन अघात सुभगतासीमा कृष्णदासबडभाग ॥।२॥।
Shringaar - Kulhe
NityaPad-164
Dhanashree
Kreedat manimay anganrang .. pitatafatakijhaguli banihai
क्रीडत मणिमय आंगनरंग ॥ पीतताफताकीझगुली बनीहै कुलही लालसुरंग ॥ कटिकिंकिणीघोषविस्मितसखी धायचलत-बलसंग ॥ गोसुत पूँछ भ्रमावत करगहिं पंकरागसोहेअंग ॥ २॥ गजमोतिनलरलटकनशोभित सुंदरलहरतरंग॥। गोविंद प्रभुकेजु अंगअंगपर बारों कोटिअनंग ॥ ३॥
Shringaar - Kulhe
NityaPad-164
Dhanashree
Khelat laal apane russ magana ..
खेलत लाल अपने रस मगना ।। गिर गिर उठत घुटुरुवन टेकत किलक किलक जननी उर लगना ॥१॥| पाय पैंजनी अरु पनसूरा कटि किंकनी पहुंची जरी कंकना ॥ हार हमेल हँसुली अरु दुलरी कंठसरी लटकन छबि वघना॥२॥ कुलही लाल अरु पीत झगुलिया रिंगनकरत नंदजुके अंगना।। निरखतदास जाय बलिहारी चिरजीयो यसोदाको ललना ॥३॥
Shringaar - Kulhe
NityaPad-164
Bilawal
Shobhitsthamatan peetajhguliya .. . kulhilal
शोभितस्थामतन पीतझगुलिया ॥ . कुलहीलाल लटकनछविबघना चलनसिखावत मैया ॥|९॥ डगमगातपगधरतमनो हर अतिराजतपैंजनियां | यशुमतिमनप्रफुल्लित अति आनंदसों लेतबलैयां पुनपुनियां ॥॥॥ किलककिलक करलेतखिलौना प्रेममगनहुलैसैया ॥ अरबरायदेखत फिरपाछे चलत घुटुरुबन धैया । ३॥ गोपवधू मुखकमलनिहारत लालन सब सुखदेया | ब्रजलीलाब्रह्मादिक दुर्लभ गावतदाससदैया ॥४।।
Shringaar - Kulhe
NityaPad-164
Dhanashree
Balbal aaj kii baniklal .. kasumbhipagpit kulhe
बलबल आज की बानिकलाल ॥ कसुंभीपागपीत कुल्हे भरतकुसुमगुलाल ॥१॥ विश्वमोहन नवकेसर कोतिलकभाल ॥ सुंदरमुखकमल लपटावतही मधुपजाल ॥२॥ वरणीपीत बिथुरत बंद सुभग उरविशाल ॥ गोविंदाप्रभुके पद नखपरसत तरुणतुलसीमाल ॥। ३॥
Shringaar - Kulhe
NityaPad-165
Saarang
Kanak kusum atishobhit shravanan ..| ghoomat arun tarun
कनक कुसुम अतिशोभित श्रवणन ॥| घूमत अरुण तरुण मदमाते मुसुकात आनन ॥। १॥ गोल पाग पर कुल्हे सुरंग तामें अलक रेख बनी ॥। गोविंदप्रभु त्रेलोक विमोहत कौस्तुभमणी ।।२॥
Shringaar - Kulhe
NityaPad-165
Kalyan

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