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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aaj atee sobhit haye nandlal | navchandanko lape kiyo haye taa | आज अति सोभित है नंदलाल | नवचंदनको लेप कियो है ता
पर मोतिन माल ॥१॥ खासाको कटि बन्यो पिछोरा कुलह जु सुतरु सोहे
भाल। कुन्द मालती कंठ विराजत बीच बीच फूल गुलाल ॥२॥ सारंग राग
अलापत गावत मधुर मधुर सुरताल। गोविन्द प्रभुकी या छबि निरखत मोहि रही
ब्रजबाल | ३॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-165 | Saarang |
Terihon balbal jaauun giridharan chhabile .. kulhe chhabili | तेरीहों बलबल जाऊं गिरिधरन छबीले ॥ कुल्हे छबीली
पागछबीली अलक छबीली तिलक छबीले नयनछबीलो प्यारीजू के
रंगरंगीले।१॥ अधर छबीले वसन छबीले वैनछबीले हो अतिसरसुढीले ।।
गोविंदाप्रभु नखसिख अंगोअंग लालन रसीले ।।२॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-165 | Kanharo |
Khelatlal apane rasmagana .. girigiruthat ghuturubantekat | खेलतलाल अपने रसमगना ॥ गिरिगिरउठत घुटुरुबनटेकत
किलककिलकजननी उर लगना ॥ १॥| पायपैंजनी और पनसूरा कटि किंकिणी
पहुँचीजरीकंकना ॥ हारहमेलहँसली औरदुलरी कंठसिरीलटकन छबि
बघना॥। २॥ कुलहीलाल और पीतझगुलिया रिंगनकरतनंदजूके अंगना ॥२॥
निरखतदास जायबलहारी चिरजीयो यशोदाकोछगना ।।३॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-165 | Dhanashree |
Aajki baanik kahee najaay .. rahee dhas paag laal aadhe | आजकी बानिक कही नजाय ॥ रही धस पाग लाल आधे
सिर कुल्हे चंपक तापर हीरा लटकाय ॥१॥ वरुनी पीत पहरे छूटे बंद अरगजा
मोजें तन बिंबित स्थाम झांई ॥ दरशनीय वनमाल तिलक देखिये बिथके कोटि
मदन और गोविंद बलबल बलजाई ॥।२॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-165 | Kanharo |
Raakhi hoe alak beach champak cully gunny gunny. jagamagaat heera | राखी हो अलक बीच चंपक कली गनी गनी। जगमगात हीरा
लाल कुलह पर पाग जु अति बनी ॥ १॥ सुभग तरुन मदमाते लोचन मुसिक्याते
अनी अनी | गोविन्द प्रभु ब्रजराज कुंवर वर धनि धनि हो घनी घनी ॥॥२॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-166 | Kanharo |
Pichhora khasako cutty jheeno. kesar ghor chandan anga chhirkat | पिछोरा खासाको कटि झीनो। केसर घोर चंदन अंग छिरकत
बहोत अरगजा भीनो ॥।१॥ कुल्हे केसर भरी चन्द्रिका अति विचित्र मुखमंडन
कीनो। कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर प्रीतम परम प्रवीनो ॥।२॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-166 | Hameer |
Mohan tilak gorochan mohan mohan lalaat atee raajai | mohan | मोहन तिलक गोरोचन मोहन मोहन ललाट अति राजै | मोहन
सिर पर मोहन कुलही मोहन सुरंग अति भ्राजै ॥। १॥ मोहन स्वन कुसुम जु मोहन
कपोल अवतंस विराजै। मोहन अधरपुट पै मोहन मुरलि मोहन कल बाज ॥२।।
मोहन मुखारबिंद पै झूमत मोहन अलक अलि मधु काजै। गोविन्द प्रभु नखसिख
जु मोहन मोहन घोख सिरताजै | ३॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-166 | Gori |
Ladley lalki bandas kahee napreho || kulhe champak bhariho atee | लाडले लालकी बंदस कही नपरेहो || कुल्हे चंपक भरीहो अति
सुरंग और लटपटी पाग रही आधे सिरधस ॥॥१॥ वरुणी पीत हरे छूटी बंद
अरगजामोजैसो स्थाम उरस ॥ गोविंदप्रभु सुरत शिथिल दंपति प्रेम गलित बैठी
कुंजमहलतें निकस ॥२।॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-166 | Iman |
Baneri laal giridhari baanik parr bal bal jaanee .. champak bharee | बनेरी लाल गिरिधारी बानिक पर बल बल जांई ॥ चंपक भरी
कुलही सिर लटकत कसुंभी पाग छबि भारी ॥ १॥। बरन पीत श्याम अंग पर ओर
अरगजा सोभे मन्मथ मनोहारी ॥ गोविन्द प्रभु रीझे वृषभाननंदिनी कंचुकी खोलि
भरत अंकवारी ॥ २॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-166 | Nat |
Sohat kanak kusum curran .. or sohe motin avtans latkan | सोहत कनक कुसुम करन ॥ ओर सोहे मोतिन अवतंस लटकन
मनमथ हरन ॥९॥| लाल पाग आधी सिर कुल्हे चंपक भरन ॥। गोविंद प्रभु
सिंघद्वारों ठाडे चपल अरु भुज भरन ॥ २॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-166 | Poorvi |
Baanak bunn thhan thaado ree mohan sunder jamuna teer | | बानक बन ठन ठाडो री मोहन सुंदर जमुना तीर |
सीस कुल्हे चंदन खोर कीए कुटील अलक शप्रों पैं धनुष दृग खंजन स्याम बरन नासा कीर ॥ १॥॥
अधर दसन अधर बिंब चुवक गाढे ग्रीवा मुक्त माल बिसाल बिराजत चिन्ह नव कट गंभीर ॥
पग नूपुर रूनक झुनक पीत बसन मदन मोहन
कर मुरली गोविंद' प्रभु गोप रूप गोपीनाथ बलबीर ॥। २॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-167 | Saarang |
Musak uthaavat sees. houn daasi tum rasik siromani sakal | मुसक उठावत सीस। हों दासी तुम रसिक सिरोमणि सकल
लोकके ईश ॥। १॥। कुल्हे सुरंग राजत हें सीस पर सखीजन देत असीस। सूरस्याम
सुख सैया पोढे जगजीवन जगदीश ॥ २॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-167 | Bihaag |
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