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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Dekh giridharan tunn vrishbhan kii lully .. latpati paag parr | देख गिरिधरन तन वृषभान की लली ॥ लटपटी पाग पर
कुलही चरन लोटत ऐ तो जीन गहरुकर बात नाहिन भली ॥।१॥ पुन्य पूरव कूले
नाथ त्रैलोकबर रसिकरस रास मय समझ मनमें अली ॥। गोविंद प्रभु अंग वर लई
हीये संग कर गोपीजनके जुधमें मान तज के चली ।२॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-167 | Kedaro |
Bunn tey baney aavat maaee vrajnath ..| | बन ते बने आवत माई ब्रजनाथ ॥|
गावत गोरी राग बलल्लभ बालक साथ ॥ १॥
कसुंभी पाग सिर कुलह चंपक भरी सेहरौ कहूँ कहूँ कुसुम सिधिलाथ॥
बजावत पत्र शृंग कोलाहल आवत घोष पथ ॥ २॥।
प्रिय सखा भुज अंस लीला धरें रतन खचित मुरली सोहै हथ ॥
गोविंद प्रभु के मुखारबिंद पर वारों कोटिक मनमथ ॥।३॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-167 | Bihaag |
Bunny mohansir paag sankare pechan chokri .. kulhai surang kusum | बनी मोहनसिर पाग सांकरे पेचन चोकरी ॥ कुल्है सुरंग कुसुम
भरी और सेहरो चंपकभरी छबि लाग।॥।१॥
सूथनलाल पीतवरुनी और अरगजा मौजें शोभित स्थाम सुभाग ॥
गोविंदप्रभुकों ब्रजवासिन प्रति छिन छिन नव अनुराग ॥२॥ | Shringaar - Kulhe | NityaPad-167 | Bihaag |
Baithe harikunj navarangaradhesang pahare chhootebandh anga vagolal . | बैठे हरिकुंज नवरंगराधेसंग पहरे छूटेबंध अंग वागोलाल ।
लटपटीपाग शिरसुरंग मजलीन कुल्हे र तन शिरपेच कचढरकरही अर्धभाल ॥।१॥
प्यारीतनकंचुकी छापेदार पहेरि सोधेभरी महेकरही अंगबाल।। लालगिरिधरनछबि
निरख गतिविवसभई सरस दड़ रिझ्ल ललिता ललितमाल ॥।२॥। | Shringaar - Kulhe | NityaPad-167 | Saarang |
Latpati paag bunny sir aaj. tedhhi dharee chandrika sunder bhaee | लटपटी पाग बनी सिर आज। टेढी धरी चंद्रिका सुन्दर भई
मनन््मथ मन लाज ॥ १॥ नखसिख बानिक कहत न आजे लटपटे भूषन साज |
परमानंददासको ठाकुर नवलकुंवर ब्रजराज ॥। २॥ | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-168 | Bilawal |
Way dekho aavat hain giridhari . kachhuk gaay aage aru paachhe sobhit | वे देखो आवत हैं गिरिधारी । कछुक गाय आगे अरु पाछे सोभित
संग सखा री ॥ १॥| खस रही पाग लटपटी सुन्दर अपने हाथ सँवारी | मोतिनकी
लर उरके ऊपर रुरकत वनमाला री | २॥ अंग-अंग छबि उठत तरंगन का पै जात
निहारी। भश्रीविद्ठल गिरिधरन सबन में चाह तिहारी न््यारी ॥३॥ | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-168 | Gori |
Poochhat janani kahaan tey aaye | aaj gayo srivallabh key ghar | पूछत जननी कहां ते आये | आज गयो श्रीवल्लभ के घर
बहोतक लाड लडाये ।।१॥ विविध भांति पट भूषन ले ले सरस सिंगार बनाये।
सीस पाग सिरपेच जु बांधे मोरचन्द्रिका लाये ॥ २॥ बहो त भाँति पकवान मिठाई
विंजन सरस बनाये। पायस आदि समर्पे मोहि मेरी लीला गाये॥। ३॥ प्रेम सहित
वलल्लभमुख निरखत और न कछु सुहाये। रसिक प्रीतम जु कहत जननी सों आज
अधिक सुख पाये ॥।४॥ | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-168 | Aasawari |
Aaj baney mohan rung bheene. kesari paag sithil alkawali | आज बने मोहन रंग भीने। केसरी पाग सिथिल अलकावलि
सीस चन्द्रिका ठीने ॥ १॥| केसरी वागो अति ही राजे हरी इजार चरनन में दीने ।
हार हमेल दरपन ले निरखत रसिक प्रीतम जु चरनन दीने ॥ २॥। | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-168 | Aasawari |
Dharey baanki paag baanki chandrika baank biharilal .. baanki chaal | धरे बांकी पाग बांकी चन्द्रिका बांक बिहारीलाल ॥ बांकी चाल
बांकी गति बांके वचना रसाल ॥१॥ बांको तिलक बांकी भ्र्रेख बांकी पहिरे
गुंजामाल॥ गोवरधन अपने कर धरके बांके भये गोपाल ।।२॥ सांकरी जु खोर
बांकी हम सूथी हैं गिरिधरलाल | नंददास सूधे किन बोलो बरसाने की तुम जो
ग्वाल ॥३॥ | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-168 | Poorvi |
Aaj sir raajat topi laal | rupanidhan sthaamghan | आज सिर राजत टोपी लाल | रूपनिधान स्थामघन
सुन्दर उर राजत बनमाल॥ १॥ वनतें आवत कमल फिरावत गावत गीत रसाल।
रामदास प्रभुकी छवि निरखत मोह रही व्रजबाल ।। २।। | Shringaar - Topi | NityaPad-169 | Hameer Kalyan |
Sobhit laalan lalit tribhangi. phool gulabi dhoti pahire topi | सोभित लालन ललित त्रिभंगी। फूल गुलाबी धोती पहिरे टोपी
धरे सुरंगी ॥ १॥॥ चंदनको तन लेप कियो है सोहत सीस कलंगी। परमानंद प्रभु
बालरस क्रीडत हाथ फिरावत बंगी ॥२॥ | Shringaar - Topi | NityaPad-169 | Saarang |
Sohat maaee mohan nandako laal. larika sanga sakal gokul key | सोहत माई मोहन नं दको लाल। लरिका संग सकल गोकुल के
गावतगीत रसाल ॥ १॥ सिर टोपी कटि आड बंध सोहे उर बैजयंतीमाल | विविध
ख्याल करत अर्भक संग बलबल दास गोपाल ॥। २॥। | Shringaar - Topi | NityaPad-169 | Saarang |
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