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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Chhoote bund sondhe soun lapatai tedhhi tedhhi pagiya munn mohe | kanchan | छूटे बंद सोंधे सों लपटै टेढी टेढी पगिया मन मो हे | कंचन
चोलना यह छबि निरखत काम बापुरो को है ॥१॥ लाल इजार गरे वनमाल
गुंजमाल श्रुति कुंडल सोहे । रसिक रसाल गुपाल लाल गढ़यो कीमत
कीमत जो है ॥२॥ | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-169 | Adano |
Arichal dekhat laal bihaari laal paag pataki rahee bhuvpar | अरीचल देखत लाल बिहारी लाल पाग पटकी रही भुवपर
अलकबनी घुघरारी ॥१॥ तापर मोरचंद्रिका राजत श्रवनकुंडल छबिभारी ॥
परमानंदस्वामी के उपर सर्वस्व देहूं बारी ॥२॥। | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-169 | Saarang |
Aaj atee neeke baneri gopal . khasako cutty banyo | आज अति नीके बनेरी गोपाल । खासाको कटि बन्यो
है पिछोरा उर मोतिनकी माल ॥।१॥| पाग चौकरी सीस बिराजत चंदन सोहत
भाल | कुंडल लोल कपोल विराजत कर पहोंची वनमाल ॥|२॥ धेनु चराय
सखन संग आवत हाथ लकुटिया लाल। परमानंद प्रभुकी छबि निरखत मोहि
रही ब्रजबाल ।। ३॥। | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-169 | Hameer Kalyan |
Saanvaro jabaten drishti paryo . bhekh kisor syathaamghan sunder anga- | साँवरो जबतें दृष्टि पर्यो । भेख किसोर स्यथामघन सुन्दर अंग-
अंग प्रेम भयों ॥ १॥। टेढी पाग लटक रहि ता पर पेय जराय जर्यो। साजे वागे रस
अनुरागे मनमथ मान हर्यों ॥।२॥ मो तन हेर हँसे मनमोहन सुधबुध सब विसर्यों ।
श्री विद्दुल गिरिधरन छबीलो नयनन मांझ अर्यो ॥। ३॥। | Shringaar - Paag Chandrika | NityaPad-169 | Adano |
Useer mahal mein raajat douu jan .. sheesh tiparo sohe laal key | उसीर महल में राजत दोऊ जन ॥ शीश टिपारो सोहे लाल के
श्वेत साड़ी फबि रहि प्यारीतन ।। ९॥॥ आस पास बृज युवती ठाडी करत बीजना
वारत हैं तन ॥| चतुरबिहारी दम्पत्ति अद्भुत छवि बरन सके ऐसौ को
है कबि जन ॥२॥ | Shringaar - Tiparo | NityaPad-170 | Saarang |
Chhabilo laal duhat dhenudhauri .. maathe kamal varan koo tiparo | छबीलो लाल दुहत धेनुधौरी ॥ माथे कमल वरण को टिपारो
ओढे पीतपिछोरी ॥१॥॥ कहारी कहूं कछु कहत न आबे डारी कठिन ठगोरी ॥
कुंभभदास प्रभु सुख गिरिधर को जब भेटूं भर कौरी ॥॥२॥ | Shringaar - Tiparo | NityaPad-170 | Saarang |
Govind ladiloldbora.. apane rung firat gokul mein shyamvaran | गोविंद लाडिलोलडबोरा॥ अपने रंग फिरत गोकुल में श्यामवरण
जैसे भोंरा ॥१॥ किंकिणी क्वणित चारु चल कुंडल तनचंदनकी खोरा ॥
नृत्यतगावत वसन फिरावत हाथ फूलन के झोरा ॥२॥ माथे कनकवरण को
दिपारो ओढे पीत पिछोरा ॥ परमानंददास को जीवन संगडिठो नागोरा ॥ ३॥ | Shringaar - Tiparo | NityaPad-170 | Saarang |
Naval kadamb chhaanh tarr thaade shobhit hain nandlal .. sees tiparo | नवल कदंब छाँह तर ठाडे शोभित हैं नंदलाल ॥ सीस टिपारो
कटिलाल काछिनी पीतांबर वनमाल ॥१॥ नृत्यत गावत वेणुबजाबत सुरभी
समूहन जाल ॥ परमानंददास को ठाकुर लीलाललित गोपाल ॥२॥। | Shringaar - Tiparo | NityaPad-170 | Saarang |
Nirtat russ dou bhaai rung | sulap sanch gati lait gragrat kitt dhiki | निर्तत रस दोउ भाई रंग | सुलप संच गति लेत ग्रग्रत किट धिकि
द्विम-द्रम बाजत मुदंग ।। ९॥॥ कनक बरन टिपारो सिर कमल बरन काछिनी कटि
बनजधातु अति विचित्र सोहे स्याम अंग ॥ गोविन्द प्रभु त्रैलोक विमोहत देखत
ठगेसे ठाडे रहे कोटि अनंग ॥२॥। | Shringaar - Tiparo | NityaPad-170 | Todi |
Vimal kadambamool avalambit thaadehen piyabhanu sutatat .. sees | विमल कदंबमूल अवलंबित ठाडेहें पियभानु सुतातट ॥ सीस
टिपारो कटिलालकाछिनी उपरेना फरहरत पीतपट ।॥१॥॥ पारजात अवतंसरुरत
सख्ती सीससेहरोबनी अलकलट ॥ विमल कपोल कुंडलकी शोभा मंदहास
जीतेकोटिमदनभट ॥२॥ वाम कपोल वामभुजपरधर मुरली बजावत
तानविक्कटछट ॥ गोविंदप्रभुकेजू श्रीदामाप्रभूतिसखा करत प्रसंसा
जयनागरनट ॥३॥ | Shringaar - Tiparo | NityaPad-170 | Todi |
Laalan sir sohat heju tiparo .. mulllakaachh kaachhe chhabi aachhe | लालन सिर सोहत हेजु टिपारो ॥ मल्लकाछ काछे छबि आछे
मुरली बजावत प्यारो | १॥। बनबन ठाडे सखा अंसभुज जहां हे बमुना किनारो ॥
सूरदासप्रभु बेनु बजावत उठत तरंग रंग भारो ॥२॥ | Shringaar - Useer Mahal | NityaPad-171 | Saarang |
Sumiri munn gopallal sunder atee roop-jaal. mitty haye janjal | सुमिरि मन गोपाललाल सुंदर अति रूप-जाल। मिटि है जंजाल
सकल निरखत सँग गोप - बाल ॥१॥ मोर - मुकुट सीस धरैं बनमाला
सुभग गरैं। सब कौ मन हरें, देखि कुंडल की झलक गाल ॥ २॥ आशभूषन अंग
सोहैं, मोतिनि कौ हार पोहैं। कंठसिरी दृूग मोहै गोपी निरखति निहाल ॥।३॥
“छीत-स्वामी' गोवर्धन - धारी कुंवर मंद सुबन । गांइनि के पाछें-पाछैं
पग धरत हैं लटकीली चाल ॥।४॥। | Shringaar - Mukut | NityaPad-171 | Bhairav |
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