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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aaj sakhee mohan atee baney. sees tiparo farharat baruhachand | आज सखी मोहन अति बने। सीस टिपारो फरहरात बरुहाचंद
अ लक बीच चंपकली अति गने ॥९॥ लाल काछ कटि छुद्रघंटिका नूपुर
रुनझुनात गति लेत ग्रग्रता ग्रग्रता तत तरंग सने ॥ गोविन्द प्रभु रसभरे नृत्य करत
सकल कला गुन प्रवीन व्रजनुपति निपुने ॥२॥। | Shringaar - Useer Mahal | NityaPad-171 | Yaman |
Shyam sunder bunn khelat sakhan sanga bibidh khel .. kalindani | श्याम सुन्दर बन खेलत सखन संग बिबिध खेल ।। कालिंदनी
तट बांधी फेंट पट करत जुध भुज जु परस्पर पेल ॥१॥| काहुकी मुरली चोरत
काहुकी संग षष्ठी काहुको छीको नाडो काहुकी चोरत सेली ॥ गोविंद पिय रस
भरे निर्तत सखाके ग्रीवा भुज मेली ॥२॥ | Shringaar - Useer Mahal | NityaPad-171 | Saarang |
Aaj atee sohat nandkishore.. sir kulahi tiparo raajat bunny | आज अति सोहत नंदकिशोर॥ सिर कुलही टिपारो राजत बनी
चंद्रिका मोर ॥१॥ मललकाछ कटि बांध पीत पर अंग अंग छबि बोर ॥ सुंदर मैन
बंक अबलोकित रसिक प्रान चितचोर ।॥।२॥ | Shringaar - Useer Mahal | NityaPad-171 | Saarang |
Vanaten aavat natwarlal .. jhoomat aavavat matt gayand | वनतें आवत नटवरलाल ॥ झूमत आववत मत्त गयन्द
सम छबि निरखत व्रजबाल ॥ १॥ सीस टिपारो बन्यो अनुपम मल्लकाछ कटि
राजे । पग नूपुर धुनि रुनझुन बाजे हँसत कमल कर साजे ॥।२॥ सुरभिवृन् द चहुँ
दिस रही ठाडी सिंघ पोर आनंदे।॥। सूरनिरखी मुख अति प्रफुल्लित मात जसोदा
नंदे ॥ ३॥। | Shringaar - Useer Mahal | NityaPad-171 | Hameer Kalyan |
Merrie akhiyan dekhyo giridharbhaave .. kahaa kahun toson suna | मेरी अखियन देख्यो गिरिधरभावे ॥ कहा कहुं तोसों सुन
सजनी उतहीं क्यों उठि धावे ॥ १॥ मोर मुकुट काननकुंडल सखी तन गति सबें
बिसरावे ॥ बाजूबंद कंठ मनि भूषण निरखि निरखि सचु पाते ॥ २॥ छीतस्वामी
कटि क्षुद्र घंटिका नूपुर पदहि सोहावे ॥ यह छबि बसत सदा विट्वल उर मो मन
मोद बढावे ॥३।। | Shringaar - Mukut | NityaPad-172 | Bilawal |
Morco sir mukat banyo morr heakey maalaa .. dulhanasi | मोरको सिर मुकट बन्यो मोर हीकी माला ॥ दुलहनसि
राधाजु दुल्हेहो नंद लाला।। १॥ बचन रचन चार हास: गावत ब्रजबाला ॥। धोंधीके
प्रभु राजतहें मंडल गोपाला ॥२॥ | Shringaar - Mukut | NityaPad-172 | Bhairav |
Syaamtan priya bhookh naan biraje . kanak manimukut kundal | स्यामतन प्रिया भूख न बिराजे । कनक मनिमुकुट कुंडल
श्रवन वनमाल अधरमधुरी धरे नाहि छाजे ॥| १॥ निरख अब परस्पर रीझे दोऊनार
बर गयो तजी विरह रस प्रेम पागे। सूर प्रभु नागरी हसत मनमें रसत बसन मन
स्याम के बड़े भागे ॥२॥ | Shringaar - Mukut | NityaPad-172 | Bhairav |
Sakhee nandako nandan saanvaro mero chita chor jaayari .. roop anoop | सखी नंदको नंदन सांवरो मेरो चित चोर जायरी ॥ रूप अनूप
दिखायके सखी गयो है अचानक आयरी ॥।१॥ टेढी चलनि मधुर चंचल गति
टेढे नेन चलायरी ॥ टेढी हीं कछु व्हे रहे हे सखी मधुर बेंन बजायरी ॥२॥। कानन
कुंडल मोर मुकुट छबि सोभा बरनी न जायरी ॥ चतुर्भुज प्रभु प्रानको प्यारो सब
रसिकनको रायरी ॥।३॥। | Shringaar - Mukut | NityaPad-172 | Bhairav |
Dhanhari naine dhana rupradha | dhanya yeh mukut dhana dhanya pratibimb | धनहरि नेन धन रूपराधा | धन्य यह मुकुट धन धन्य प्रतिबिंब
मुख धन्य दंपत्ति रहत भेख आधा ॥।१॥ धन धन सिंगार धन धन्य निरख सुखनि
स्थाम धन्य छबि लूटलुटत मुरारी। सूरप्रभु चतुर चतुरानबल नागरी रहे प्रति बिंब
पर नेन जोरी ॥२॥ | Shringaar - Mukut | NityaPad-172 | Bhairav |
Dekhari dekh navarkunj ghana saghan tarr thaade girivardharan rung | देखरी देख नवर्कुंज घन सघन तर ठाडे गिरिवरधरन रंग
भीने। मुकुट सिर लाल कटि काछििनी बेनु कर राधिका संग भुज अंस दीने ॥ १॥
मकरकुंडल स्रवन झलक अंग पर रही मानों चंदन जु तन खोर कीने ॥। निररित्रि
गोविन्द छबि सघन नंदनंदकी बारि तनमन दोउ प्रेम भ ीने ।। २॥॥ | Shringaar - Mukut | NityaPad-172 | Bilawal |
Morr mukut katkaachhani janani paharaave .. shyam anga bhushan | मोर मुकुट कटकाछनी जननी पहरावे ।। श्याम अंग भूषण
सजे बिंदुका जो बनाबे ॥१॥ नूपुर कंकन किंकिनी कर बेन गहावे ॥ मुसकनमें
मन हरे वस ताप जनावे ॥|२॥ ब्रजरानी आई तहां दरपन दरसावे ॥| भोग अरप
बीरा दियो सुख सूर बढावे ।॥।३॥ | Shringaar - Mukut | NityaPad-172 | Bhairav |
Aage krishna paachhe krishna ita krishna oota krishna jita dekho tita tita | आगे कृष्ण पाछे कृष्ण इत कृष्ण ऊत कृष्ण जित देखो तित तित
कृष्णमई री। मोर मुकुट धरें कुंडल करन भरें मुरली मधुर ध्वनि तान नई री ।।१॥
काछिनी कांछे लाल उपरेना पीट पट तिहिंकाल शोभा देख थकित भई री ।
छीतस्वामी गिरिधर बिट्डलेश प्रभुवर निरखत छबि अंग अंग छई री ।२॥ | Shringaar - Mukut | NityaPad-173 | Poorvi |
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