top of page
Kirtan Title
Kirtan
Category
Book-Page#
Raag
Lalit laal srigopal soiye naan praatkaal yashoda maiya lait balaiya bhor bhayo baare..
ललित लाल श्रीगोपाल सोइये न प्रातकाल यशोदा मैया लेत बलैया भोर भयो बारे॥ उठो देव करूं सेव जागिये देवादिदेव नंदराय दुहत गाय पीजिये पय प्यारे ॥१॥ रविकी किरण प्रकट भई उठो लाल निशा गई दशधिमथत जहां तहां गावत गुण तिहारे ॥ नंदकुमार उठे विहस कृपादृष्टि सब पे वरषयुगल चरण कमलन पर परमानंद वारे ॥ २॥
Jagayeve
NityaPad-017
Bhairav
Bhor bhayein bal jaauun jaago nandananda .. tamchar khaga karat ror
भोर भयें बल जाऊं जागो नंदनंदा ॥ तमचर खग करत रोर अवनीपें होत सोर तरणिकी क्विरण तपें चंद भयो मंदा ॥१॥ भयो प्रात रजनीगई चकवी आनंद भई वेग मोचन करो सुरभीकुल फंदा )। उठो भोजन करो मुकुट माथें धरो सखिन प्रति दरस देहो रूपनिधि कंदा ॥२॥ त्रिया दधिमथन करें मधुरे स्वर श्रवण धरें कृष्णगुण विमल यश कहत आनंदा ॥ निजजननयन आधार जगजीवनगुणन गुणकथनकों कहत श्रुति छंदा ॥। ३॥।
Jagayeve
NityaPad-017
Bhairav
Uthhe nandlal sunat janani mukh-vaani ..
उठे नंदलाल सुनत जननी मुख-वानी ॥ आलस भरे नयन उठे शोभा की खानी ॥|१॥| गोपीजन थकित भई चितवत सखी ठाढी ।। नयन कर चकोर चंदवदन प्रीत बाढी ॥|२॥ माता जल झारी लिये कमलमुख पखोारें ॥ मीरहू को परस करत आलस विचाोरें ॥३॥ सखा द्वारे ठाडे सब टेरतहें तुमकों ॥। यमुनातट चलो स्थाम चारन गोधनकों ॥४॥ सखा सहित जेबत बल भोजन कछू कीनो ॥ सूरस्याम हलधरसंग सखा बोल लीनों ॥५॥
Jagayeve
NityaPad-018
Bhairav
Utho hoe nandkumar bhayo bhansar jagawat nandrani .. jhaarike
उठो हो नंदकुमार भयो भनसार जगावत नंदरानी ॥ झारीके जल वदन पखारो सुत कहि सारंगघानी ॥।९॥| माखन रोटी ओर मेवा भावे सो लीजे आनी ॥ सूरदास मुख निरख यशोदा मन ही मन सिहानी ॥। २॥
Jagayeve
NityaPad-018
Bhairav
Jaago jaago merey jagat ujiyaare ..
जागो जागो मेरे जगत उजियारे ॥ कोटि मदन वारो मुसकनि पर कमलनयन अखियन के तारे ॥१॥ सुरभी वच्छ गोपाल निशंक। ले यमुना के तीर जाओ मेरे प्यारे ॥|। परमानंद कहत नंदरानी दूरंजिन जाओ मेरेब्रजरखवबारे ॥ २।॥
Jagayeve
NityaPad-018
Bhairav
Jaagiye gopallal anandanidhi nandbal yashomati kahey waranwar bhor bhayo pyaare .
जागिये गोपाललाल आनंदनिधि नंदबाल यशोमति कहे वारंवार भोर भयो प्यारे । नयनकमलसे विशाल पढत वापिकामराल मदनललित वदन ऊपर कोटि वारिडारे ॥ १॥ ऊगत अरूण विगत शर्बरी शशिकी किरण हीन दीप मलीन छीन झुति समूह तारे ॥ मानों ज्ञान घन प्रकाश वीते सब भवविलास आस त्रास तिमिर तोष तरणि तेज जारे ॥ २ बोलत खग मुखर निकर मधुरघोष प्रति सुनों परम प्राणजीवन धनमेरे तुमबारे ॥ मानों बंदी मुनिसूत बूंद मागधगण बिरद बदत जय जय जय जयति यश तुमारो उच्चारे |३॥ विकसत कमलावली चले फंदचंचरीक गुंजत कलमधुर ध्वनि त्याग कंजन न्यारे ॥ मानोंबैराग्य पाय शोक कूपग्रह विहाय प्रेममत्त फिरत भुत्य गुनत गुन तिहारे ॥॥४॥ सुनत वचन प्रिय रसाल जागे अतिशय दयाल भागे जंजाल विपुल दुःख कदंबटारे ॥ त्याग भ्रमकंद हूंद निरखकें मुखारविंद सूरदास अतिआनंद मेटे मदभारे ॥५॥।
Jagayeve
NityaPad-018
Bhairav
Praatasmein ghargharte dekhanakon aanihen gokulnari ..| apano krishna
प्रातसमें घरघरते देखनकों आंईहें गोकुलनारी ॥| अपनो कृष्ण जगाय बशोदा आनंद मंगलकारी ॥१॥ सब व्रजकुलके प्राण जीवनधन यासुतकी बलहारी ॥ आसकरण प्रभु मोहननागर गिरिगोवर्द्धनधारी ॥२॥
Jagayeve
NityaPad-019
Bhairav
Jaagiye gopallal pragat bhayo hans baal mitt gayo andhkaar
जागिये गोपाललाल प्रगट भयो हँस बाल मिट गयो अंधकार उठो जननी मुखदिखाई ।। मुकुलित भये कमलजाल कुमुद वुन्दवन विहाल मेटोजंजाल त्रिविधताप तन नशाई ।।१॥। ठाडे सब सखा द्वार कहत नंदके कुमार टेरतहें वारवार आइये कन्हाई ॥ गैयन भई बडीवार भरभर पय थनन भार बछरा गनकर पुकार तुम बिन यदुराई ॥२॥| ताते यह अटक पारी दोहन काज हंकारी उठ आवो क्‍यों न हरि बोलत बलभाई॥ मुखते पट झटक डार चंदवदन दे उघार यशुमति बलहारजाय लोचन सुखदाई ॥।३॥ थेनु दुहन चले धाय रोहिणीकों लई बुलाय दोहनी मोहि दे मंगाय तबहींले आईं।। बछरा दियो थनलगाड़ दुहत बैठकें कन्हाइ हसतहै नंदराय तहां मातादोऊ आई ॥|४॥ कहुं दोहनी कहूं धार सिखवत नंद वारवार वह छबि नहि पारवार नंदघर बधाई ।। तब हलधर कह्मो सुनाय धेनु वन चलो लिवाय मेवा लीने मंगाय विविध रस मिठाई ।।५॥ जेंबत बलराम स्थाम संतनके सुखद धाम धेनु काज नहि विश्राम यशोदा जललाई ॥ स्यथाम राम मुख पखार ग्वालबाल लये हंकार यमुनातट मन विचार गायन हकराई ॥६॥ शुंग शंख नाद करत मुरली स्वर मधुर भरत ब्रजांगना मन हरत ग्वाल गावत सुघराई ॥ बुंदावन सुर्त जाय धेनु चरत तृण अघाय श्याम हरख पाय निखर सूरज बलजाई ॥७॥
Jagayeve
NityaPad-019
Bhairav
Chiraiya chuhchahanni suna chaktaiki baani kahat yashoda raani jaago merey laalaa.
चिरैया चुहचहांनी सुन चक्तईकी बानी कहत यशोदा रानी जागो मेरे लाला। रविकी क्रिरण जानी कुमुदिनी सकुचानी कमलन विकसानी दशिमथेंबाला ॥१॥ सुबल श्रीदामा तोक उज्ज्वल बसन पहहरखें द्वारेंठाडे टेरतहे बाल गोपाला ॥ नंददास बलहारी उठो क्‍यों न गिरिधारी सब कोऊ देख्यो चाहे लोचन विशाला ॥ २॥
Jagayeve
NityaPad-019
Bhairav
Jaagiye gopallal dekhon mukh tero ..
जागिये गोपाललाल देखों मुख तेरो ॥ पाछें गृह काज करों नित्य नेम मेरो ॥।१॥ अरूण दिशा विरूगत निशा उदय भयो भान ॥ कमलनतें भ्रमर उडे जागिये भगवान ।। २॥ बंदीजन द्वार ठाडे करत यश उच्चार॥ सरस भेद गावतहें लीला अवतार ॥३॥ परमानंद स्वामी गोपाल परम मंगलरूप ॥ वेद पुराण गावतहें लीला अनूप ॥॥४॥
Jagayeve
NityaPad-019
Bhairav
Jaagiye gopallal gwal dwaar thaade.. rainandhkar gayo chandrama
जागिये गोपाललाल ग्वाल द्वार ठाडे॥ रेनअंधकार गयो चंद्रमा मलीन भयो तारेगण देखियत नही तरणि किरण बाढे ॥१॥ मुकुलित भये कमलजाल भवर गुंजत पुष्पमाल कुमुदिनी कुमलांनी ॥ गंधर्व गुणगान करत स्नान दान नेम धरत हरत सकल पाप बदत वेद विप्र वानी ।२॥ बोलत नंद बारवार मुख देखूं तुव कुमार गायन भई बडी वार बृंदावन जेबों | जननी कहत उठो लाल जानत जिय रजनी तात सूरदारप्रभु गोपाल तुमकों कछु खेवो ॥३॥
Jagayeve
NityaPad-019
Bhairav
Praatasame krishna rajeev lochan.. sanga sakhaa thaade gau mochan ..1..
प्रातसमे कृष्ण राजीव लोचन।। संग सखा ठाडे गौ मोचन ॥१॥ विकसत कमल रटत अलि सेनी ॥| उठो गोपाल गुहेंर तेरी बैनी । २।। खीन खांड घृत भोजन कीजे ॥ सद्य दूध धौरीको पीजे ॥३।। सुतहि जान जगावत रानी ॥परमानंदप्रभु सब सुखदानी ।।४॥
Jagayeve
NityaPad-020
Bibhaas

© 2026 Krishnadham-VYO

bottom of page