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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aajaskhiri pratasamendadhimathave uthakulai .. | आजसखीरी प्रातसमेंदधिमथवे उठअकुलाई ॥
भरभाजन प्रणिखंभ निकटधरि नेतलियोकरजाई ॥१॥
सुनतशब्दहरितासमीप हँसउठआयेहरुबवाई॥।
मोहीबालविनोदमोद अतिनयनननुृत्य दिखाई।॥। २॥
भूलीतन प्रतिबिंबविलोकत रीझीसहजसुभाई ।।
चितवनचित्तहरेंछबि चंचलचितेरही चितचाई ॥३॥|
माखनपिंडलयोदोऊकर तबग्वालिन रहीमुसकाई ।|
सूरदास प्रभुसर्वस्वको सुखसकेन हृदयसमाई ।।४॥॥ | Dadhi Manthan | NityaPad-182 | Bilawal |
Joe tum sunon yashodagauri .. nandanandan merey mandir mein aaj kartahain chori ..1.... | जो तुम सुनों यशोदागौरी ॥ नंदनंदन मेरे मंदिर में आज करतहैं चोरी ॥१॥॥
होंभई आन अचानकठाडी रह्योभवनमें कोरी ॥
रहे छिपायसकुँचरंचक हवे मानोभई मतिथोरी ॥२॥
मोहिभयो माखनकोपछिताबो रीतीदेखकमोरी ॥
जबगहिबा ंह कुलाहल कीनो तबगहि चरणनिहोरी ॥ ३॥
लागे नयनजल भरभररोवन महरिकाननतोरी ॥।
सूरदासप्रभु देखत निशिदिन ऐसीअलकसलोरी ॥।४॥ | Makhaan Chori | NityaPad-183 | Ramakali |
Mohiddhimthanade balgai .. jaauun balbalkamalmukhpar chhaand mathanirai ..1.. | मोहिदधिमथनदे बलगई ॥ जाऊं बलबलकमलमुखपर छांड मथानीरई ॥१॥
देहुँगीनवनीतलोंदा आडकित तुमठई ॥ अतिआनंदित होतयशोमति प्रेमपुलकित भई ॥। २॥
लिये उछंगलगायउरसों प्राणजीवन जई ॥ बालकेलिगोपालहरिकी आसकरन नित्यनई ॥३॥ | Dadhi Manthan | NityaPad-183 | Ramkali |
Gopale makhankhande .. | गोपाले माखनखानदे ॥
बांहपकरकर उहां लै जैहों मोहियशोदा पैजानदे ॥ १॥।
सुनरीसरब्री मौनहवेरही सगरोवदन दह्योलपटानदे ॥।
उनपेंजाय चौगुनोलेहों नयनन तृषाबुझानदे ॥२॥
ज्योज्योंकहत हरिलरका है सुनतमनोहर कानदे ॥
परमानंदप्रभु कबहुनछांडूं राखोंगी तनमनप्राणदे ॥। ३॥। | Makhaan Chori | NityaPad-183 | Ramakali |
Prathamchalehari makhan chori .. | प्रथमचलेहरि माखन चोरी ॥
ग्वालिनिमन इच्छापूरणकर आपभजेहरिवक्रजकी खोरी ॥१॥
मनमन यहविचारकरत प्रभुव्जघरघरसबगाऊं ॥
गोकुलजन्मलियो सुखकारण सबकेंम ाखन पाऊं | २॥
बालरूपयशोमतियोंजानें गोपिन मिलसुखभोग॥
सूरदास प्रभुकहत प्रेमसों ये मेरे ब्रजलोग ॥। ३।। | Makhaan Chori | NityaPad-183 | Ramakali |
Mathatgwal haridekhi jaay || | मथतग्वाल हरिदेखी जाय ||
गयेहते माखनकीचोरी देखतरहेनयनलजाय ॥१॥।
डोलततन सिरअचराउघर्यो बेनीपीठ डोलतमनभाय ।।
बदनडइंदु पयपान करनको मानोउरगउठ लागतपाय ॥ २॥
निरख स्याम अंगअंग प्रतिशोभा भुजभरके लीनी उरलाय ||
चितेरही युवतीहरिको मुखनयनसन देचितहिचुराय ॥ ३॥
तनमनधन गतिमतिविसराई सुखदीनों अरुमाखनखाय |।
सूरदासप्रभु रसिकशिरोमणि तुम्हारीलीलाको कहे गाय ॥।४॥। | Makhaan Chori | NityaPad-183 | Ramakali |
Chorikarat kanhgharpaye .. | चोरीकरत कान्ह्घरपाये ॥
निशवासरमोहि बहुतसतायो अबहरि हाथहि आये ॥१॥
माखनदधि मेरोसबखायो बहुत अचगरीकीन्हीं ॥
अबतो हाथपरेहोलालन तुमहीभलेमैंचीन्हीं ॥ २॥
दोऊभुजपकरकेंकह्ञों माखन लेहों मँगाय ॥
तेरीसों मैनेंकनचाख्यो सख्ागयेसबखाय ।॥३॥
मुखतनचिते विहँसहँसदीनो रिसत बगईबुझाय ||
लियेस्थाम उरलायग्वालिनी सूरदास बलजाय ॥॥४॥ | Makhaan Chori | NityaPad-183 | Ramakali |
Aajahari pakaranpayechori .. | आजहरि पकरनपायेचोरी ॥
लेगयोचोर चोरमनमाखनजो मेरेंधन होरी॥।१॥
बांधे कंचनखंभ कलेवर उभयभुजा टूढडोरी |
राखोंगी कठिन कठोर कुचनबिच सकेंन कोऊछोरी ॥२॥
खंड्यो अधरदशन रसगोरस छियेन काहूकोरी ॥
कामदंड देंड्यो परघरकों नामनलेहेंबहौरी ॥३॥
तबकुलकान आनतिरछीभई क्षमाअपराधकिशोरी ।
शिवपर हाथ धराय सूरप्रभु सोचमोच सबतोरी॥४॥ | Makhaan Chori | NityaPad-183 | Ramakali |
Mohan choryori mammakhan urajmathani .. | मोहन चोर॒योरी मममाखन उरजमथानी ॥
दुहूँकर दृढकर लाग्यो अधररस चाखन॥।१॥
नेतीलाज तोरसबसूत्योनेकुनरह्योरवाई आंखन।॥।
जाय कहूँगी ब्रजपतिजूके आगे नाहिकोऊसाखन ॥॥२॥। | Makhaan Chori | NityaPad-183 | Ramakali |
Fulifirat gwalmanmeri .| | फुलीफिरत ग्वालमनमेरी ।|
पूछतसखी परस्परबातें पायोपरूयो कछू कहूंतेरी ॥१॥
पुलकितरोमरोम गदगदमुख बानी कहतनआवबै ॥
ऐसो कहा याहिसोसख्री मोकोंक्योनसुनावे ॥|२॥।
तनम्यारोजोएकहमारो_ हमतुमएकहीरूप ॥
सूरदासकहैं. ग्वारिसखीसूं देख्योरूपअनूप ॥॥३॥ | Makhaan Chori | NityaPad-184 | Bilawal |
Mayamoko makhanamishribhave .. | मैय ामोको माखनमिश्रीभावे ॥
जो मेवापकवानदेततू मोहिनहीं रुचिआवे ॥|१॥
व्रजयुवती एक पाछेठाढी सुनत स्थामकी बात ॥
मनमनकहतकबहू मेरेघर देखोंमाखनखात ॥।२॥
बैठें जाय मथनि याकेढिंग मैंतबरहूंछिपाय ॥
पाछेआन अचानकहरिको गहूँओचकाथधाय ॥३॥
राखों कठिनउरोजनकेबिंच तजूँ वेदकुलकान ॥।
सूरदासप्रभु अंतरयामी ग्वालिनमनकी जान ॥|४॥ | Makhaan Chori | NityaPad-184 | Bilawal |
Chalivraj gharghar yeh baat .. nandsut sabaskhaaleene | चलीब्रज घरघर यह बात ॥ नंदसुत सबसखालीने
चोरिमाखनरत्रात ॥ १॥ कोऊकहत मेरे भवनभीतर अबहीपैठेधाई ॥ कोऊकहत
मोहिदेखछोरकें उतहीगये पराई ॥ २॥। कोऊकहत किर्हिभांतिहरिकों देखों अपने
धाम॥ हेरहेरमाख नदेहों आछो खायें जितनोस्थाम ॥३॥ कोऊकहतमैं
बांधराखों को सकेनिरबार ॥ कोऊकहत मैदेखपाऊंभर धरू अंकवार ॥४।॥
सूरदास प्रभुकेमिलनकारन करतबुद्धिविचार॥ जोरकर बिधिकूँगनावत
पूरणनंदकुमार ।। ५॥॥ | Makhaan Chori | NityaPad-185 | Bilawal |
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