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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Karataharigwalan sangvichar .. chori makhankhahu subamil | करतहरिग्वालन संगविचार ॥ चोरी माखनखाहु सबैमिल
करोब ालविहार ॥९१॥ यहसुनत सबसखाहरखे भलीकहीकन्हाई ॥
हरिपरस्परदेततारी सोहकरीनंदराई ॥ २॥ कहांतुमयहबुद्धिपाई स्पामचतुरसुजान ॥।
सूरप्रभु मिलग्वालबाल करतहैं अनुमान ॥। ३॥ | Makhaan Chori | NityaPad-185 | Bilawal |
Andhiyaregharsyamarhedur .. abahimaidekhe nandanandan charitra | अंधियारेघरस्यामरहेदूर ॥ अबहीमैदेखे नंदनंदन चरित्र
भयोगमन ही मनजूर ॥। १॥। पुनपुनचक्रित होत अपनेजियकैंसेहै यहबात ।। मटुकी
केढिंग बैठ रहे हरि करीआपनीघात ॥|२॥ सकलजीव जलथलकेस्वामी
चेंटीदईउपाय ॥ सूरस्यामतबदेखग्वालिनी भुजपकरेतबआय ॥। ३॥ | Makhaan Chori | NityaPad-185 | Bilawal |
Aajahari manikhambhanikatahave jahaan goraskigori ... | आजहरि मणिखंभनिकटहवे जहां गोरसकीगोरी ॥।
निजप्रतिबिंब सिखावत योशिशु प्रकटकरो जिनचोरी ॥ १॥ अर्धविभागआजते
हमतुम भलीबनीहै जोरी । माखनख्ाओ कितहींडारतहो छांडहेहोमत भोरी ॥। २॥।
हिस्सासबै लिये चाहतहो यह बात है थोरी॥ मीठो परमअधिक रुचिलागे देहूं
काढकमोरी ॥। ३॥। प्रेमठमग धीरज नरह्योतब प्रकटहँसी मुखमोरी ॥ सूरदासप्रभु
सकुंचनिरख भजगए कुंजकीखोरी ॥।४॥। | Makhaan Chori | NityaPad-185 | Bilawal |
Dekhatfiregwalinidware | tabayahabuddhi rachee apneman bheetar | देखतफिरेग्वालिनिद्वारे | तबयहबुद्धि रची अपनेमन भीतर
डाक परोपिछवारे | १॥। सूने भवनकहूंकोउनाहीं मानोयाहीकोराज ॥
भांडेधरत उघारतमूंदत दधिमाखन के काज ॥२॥ रैनजमाय धरबोहोगोरस परयो
स्यामकेहाथ ॥ लेलैखात अकेलेआपुन सखानहीं कोउसाथ ।|३॥ आहट सुन
युवतीघर आई देख्योनंदकुमार ॥ सूरस्याममंदिर अंधियारो निरखेवारंबार ॥४॥। | Makhaan Chori | NityaPad-185 | Bilawal |
Sakhaasahit gayemakhanchori .. | सखासहित गयेमाखनचोरी ॥
देखोस्याम वापंथहैगोपी एकमथत दथधिभोरी ॥१॥
हेरमथानी धरीमांटतें माखनहैउतरात ॥
आपगई कमोरीमाँगन हरिपाईतहांघात ॥
पैठसखनसहित घरसूनो माखनदधिस बखाये ।।
छूंछीछांड मट॒ुकियादधिकी हससबबाहिर आये | ३॥
आयगई कर लियेकमोरी घरतेनिकसेग्वाल ॥|
माखनकरदधि मुखलपटानो देखरहेंनेंदलाल ।।४॥
कहांआये वृद्ध बालकसंगले माखन मुखलपटानो ॥
खेलतते उठभाजोसखा यहीघर आय छिपानो ॥५।॥।
भुजागहिलिये कान्ह एकग्वालिन निकसेब्रजकीखोरी ।।
सूरदासठगिरही ग्वालिनी मनहरलियो करचोरी ॥।६॥। | Makhaan Chori | NityaPad-186 | Bilawal |
Gwalinjodekheghar aaya .. | ग्वालिनजोदेखेघर आय ॥
माखनखाँय चुरायस्यामतब आपुन रही छिपाय ॥ १॥|
ठाडीभई मथानीकेढिंग रीतीपरीकमोरी ॥
अबहीगई आईइनपायन लेगयोको करचोरी ।। २॥
भीतरगई तहांहरिपाये स्थामपरेगहिपाय।।
सूरदासप्रभुग्वालिन आगे अपनोनामसुनाय ॥।३॥ | Makhaan Chori | NityaPad-186 | Bilawal |
Saanvaro govind lolamai |... | सांवरो गोविंद लोलामाई |॥।
ग्वालठाडी हँसेंप्राण हरिमेंबसे कामकीबावरी चारुबोला ॥। १॥|
आवरी ग्वालिनी मेलदे बाछरा आनदे हो दोहनी हाथ मेरे॥
थेनुदोरी दुहूं प्रेमबातें कहूं मेरे चित्तलग्योहै रूप तेरे ॥ २॥॥
बाललीला भली सैनदेके चली आन देहो दूधघर आय प्याऊं।॥
दासपरमानंद नंदनंदन केलि चोरचित्तचारु योमिलन पाऊं |। ३॥ | GauDohan | NityaPad-186 | Bilawal |
Shyam kahaa chahatsedolat .. | श्याम कहा चाहतसेडोलत ॥
बूझे हुते बदनदुराबत सूधेबोल नबोलत ॥ १॥
सूनेनिपट अंध्यारेमंदिर दधिभाजन में हाथ |
अबकाकोतुम उत्तरकरहो कोऊसंगनसाथ ॥।२॥
मैंजान्यो यहमेरोघरहैं तिहिंधोखेमैं आयो ॥
देखतहीगोरसमेंचेंटी काडनकोंकरनायो॥ ३।।|
सुनसुनचतुर वचनमोहनके ग्वालिन मुरमुसकानी ॥
सूरदास प्रभुहोरतिनागर सबैबातहमजानी ।।४॥। | Makhaan Chori | NityaPad-186 | Bilawal |
Maiyari dohini duhilaaun gaiya .. makhankhay balbhayo | मैयारी दोहिनी दुहिलाऊं गैया ॥ माखनखाय बलभयो
तोहि नंददुहैया ॥।१॥ सेंदुर्काजर धूंमरीधौरी मेरी गैया ॥ दुहिलाऊं तुरतहि तब
मोहि करदेघैया ।। २॥ ग्वालनके संग दुहतहों बूझो बलभैया ॥ सूरनिरख जननी
हँसी तबलेत बलैया ॥।३॥ | GauDohan | NityaPad-187 | Bilawal |
Uthee praatahi radhika dohni karlai .. mahari sutason taba | उठी प्रातही राधिका दोहनी करलाई ॥ महरि सुतासों तब
कह्यों कहांचली अतुराई ॥॥१॥ खिरक दुहावन जातहों तुमरीसेबकाई ॥ तुम
ठकुराईन घररहो मोहि चेरीपाई ॥२॥ रीतीदेख दोहनी कित खोजत धाई ॥
कालगई अवेरके हां उठे रिसाई ॥३॥ गायगई सब प्यायकें प्रातही नहीं आई ॥
ताकारनमें जातहूं अतिकरत चढाई ॥४॥ यह कहि जननी
सोचलीब्रजको समुहाई ॥। सूररयाम गुहद्वारही गौ करत दुहाई ।॥५॥ | GauDohan | NityaPad-187 | Bilawal |
Bavajumohi duhansikhavo .. | बावाजूमोहि दुहनसिखावो ॥
गाय एक सूधीसीमिलवो होहूँ दुहूँ बलदाऊ दुहावों ॥१॥
लईनोई मेलचरण में लाडिलों कुंवरनोवत बछराऊ ॥
पाणिपयोधर धरें धेनुको भाजन बेगहीसो उपटाऊ॥। २॥
तब नंदरानी नयनसिराये द्विज बुलाय दई दक्षिणावाहू ॥
वारफेर पीतांबर हरिपर परमानंद ग्वालपहराऊ ॥। ३।। | GauDohan | NityaPad-187 | Bilawal |
Dhenuduhat dekhat hari gwal .. aapun baith gaye tinake | धेनुदुहत देखत हरि ग्वाल ॥ आपुन बैठ गये तिनके
ढिंगसिखवो मोहि कहत गोपाल ॥।१॥ काल देहों तोब गोदोहन सुखबे आज
दुहींसबगाय॥ भोर दुहो जिननंद दुहाई उनसों कहत सुनायसुनाय ॥२॥ बडोभयो
अब दुहतरहूंगो आप आपनी धेनुनिवेर ॥ सूरदासप्रभु कहतसीखदे मोहि
लीजियेटेर ॥३॥ | GauDohan | NityaPad-187 | Bilawal |
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