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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Tanak kanakaki dohni deree maiya ..
तनक कनककी दोहनी देरी मैया ॥ तातदोहन सिखवन कह्मोमोहि धोरी गैया । १॥| हरि विषमासन बैठकें मुदुकर थनलीनो ॥ धार अटपटी देखके ब्रजपति हँसदीनों ।। २।। गृहयृहते आंईसब देखत ब्रजनारी ॥ सकुँचतसब मनहरिलियो हंसि घोख विहारी ॥ ३॥। द्विज बुलाय दच्छिना दई विधि मंगलगावे |। परमानंदप्रभु सांवरो सुखसिंधु बढावे ।।४॥।
GauDohan
NityaPad-187
Bilawal
Dhota merrie dohni durai ..
ढोटा मेरी दोहनी दुराई ॥ मौपेते लीनी देखनको यह धोंकों नवडाई ॥१॥ निपट सवेरीहों उठ आतुर खिरक दृह्ावन आई ॥ जान अकेली याढो टानें बहुत भांति खिजाई ।।२॥ द्वार उघार खोलदीये बछराव खटगैया चुखाई ।। हों पचचिहारी कहीनहीं मानत वर्जत नाके आई ॥।३।। घर मेरी सास त्रासेगीहौं कहा उत्तर देहूं जाई ।। परमानंदप्रभु तब हँसदीनो भई बात मनभाई ।॥।४।।
GauDohan
NityaPad-188
Bilawal
Anokhe duhaiya maidekhe sokhundhar kahundohani kahundrishti ..
अनोखे दुहैया मैदेखे सोकहूंधार कहुंदोहनी कहुंदृष्टि ॥ देहोताहि कहादुहिआबे ऐसीभईपयप्रष्टि ।। १॥ ऐसीतो ध्यान मान ताहींसो लंगर हिये जाके होतुमइष्टि ।। कृष्णजीवन प्रभुहरिकल्याण कछुतुम्हें नखोर यहसो नई भई कछुसृष्टि ॥ २।॥॥
GauDohan
NityaPad-188
Bilawal
Aeka dinn aapune khirak koo jaat ree milgayo sambro houn akeli ..
एक दिन आपुने खिरक को जात री मिलगयो सांबरो हों अकेली ॥ देखिब मोहे मंद घुसकाय नेंनन हस्यो के धोरी हे तु कनक बेलि ॥१॥। अति ही जगमग रही चुनरी रंग भरी कंचुकी कुचन पर अति विराजे ॥ शरद से चंदसो बदन झगमगी रहो देख या रूप को कोन ब्राजे ॥२॥ मासिक नथक विराजे झलमल रहो एसो बडो मुक्तातें कहां पायो।। एसो न देखयो सुन्यो या देश में लगत ही लपट मन लटक आयो ॥।|३॥ चाल गज राज की बंक मृगराज की चिबुक की छबि देख चित्त चुरायो ॥| बंक अवलोकनि बड़ी अँखियन मांग कौन के ठगन अंजन बनायो ॥।४॥ जानती नाहि में नाथ तुम कौन हो करत हो जान जाकी बड़ाई ॥ या गाम की री रसरीत सब कहेंगे नेक बैठो चलो कुंज छांही ॥।५।॥ जान गई बात मग चल्यो जा सांबरे कुंज तर हमें कछु काज नांही ॥। मुसकि ठाड़ी भई धाय भुज गहि लई अधरन पान दे उर लगाई ॥६॥ दई एक फूल की माल पहेराय के कही में हाथ अपुने बनाई ॥। ता दीनतें लाल उर मांझ जगमग रहो रेंन दिन कछु नांहिन सुहावे ॥ ७॥। सूर किशोर यह प्रेम रस छांड के अब तज कौन को नींब भावे ॥८॥
GauDohan
NityaPad-188
Bilawal
Gopalmai khelat hain chaugan || vrajkumar baalak sangaline
गोपालमाई खेलत हैं चौगान || ब्रजकुमार बालक संगलीने बृंदावनमयदान ॥१॥ चंचलबाजीनचाबत आजबत होडलगाबतयान ॥ सबहीहस्तलेगेंदवलावत करतवावाकी आन ॥ २॥ करतनशंक निशंकमहाबल हरत नृपतिकुलमान ॥ परमानंददास को ठाकुर गुण आनंदनिधान ॥३॥
Gwaal
NityaPad-189
Bilawal
Gopalfiravathainvangi .. bhitarbhavan bharesababalak
गोपालफिरावतहैंवंगी ॥ भीतरभवन भरेसबबालक नानाबिधि बहुरंगी ॥ सहजसुभाव डोरीखेचत हैं लेत उठाय करपैकरसंगी ॥ कबहूं करले श्रवणसुनावत नानाभांतिअधिकसुरंगी ।। २ कबहुंकडारदेतहैं भयमें मुखहिबजावतजंगी ॥ परमानंदस्वामीमनमोहन खेलसर्‌योचले सबसंगी ॥ ३॥।
Gwaal
NityaPad-189
Bilawal
Demaiyabhavarachakadori .| jayleu aareparrakhyo kaal molalerakhi corey ..1..
देमैयाभवराचकडोरी ।| जायलेउ आरेपरराख्यो काल मोललेराखी कोरी ॥१॥ लेआयेहंसस्थामतुरतही देखरहेरंगरंग बहुडोरी ।। मैयाबिनाऔरकोलावे बारबारहरिकरतनिहोरी ।।२॥ बोल लिये सब सखासंग के खेलत कान्ह अपनी पौरी ॥ तैसेई हरितैसेई ब्रजबालककरभँवरा चकरिनकी जोरी ॥३॥ देखतजननी यशोदा यहसुखविहँस विहेंसमुखमोरी ॥। सूरदासप्रभु देखेखेलत व्रज़वनिता डारततृुणतोरी ।।४॥।
Gwaal
NityaPad-189
Bilawal
Gopalmai kheltahaichkadori ..
गोपालमाई खेलतहैचकडोरी ॥ लरकापांचसातसंगलीने निपटसांकरी खोरी ॥|१॥ चढघर होरी झरोखा चितयो सखी लियोमनचोरी |॥। बांएहाथवलैयालीनी अपनोअंचरछोरी ॥|२॥ चारोंनयनमिले जबसन्मुख रसिकहँसे मुखमोर ।। परमानंददासरतिनागर चितेंलईरतिजोर ।। ३॥।
Gwaal
NityaPad-189
Bilawal
Kanakkatora pratahiddhighritmithai ..
कनककटोरा प्रातहिदधिघृतमिठाई ॥ खेलतखात गिरायदेत झगरतदोउभाई ।। १॥। अरसपरसचुटिया गहेदोउ बरजतहैंमाई | महाढीठमानतनहीं कछुलोहोरबडाई ।॥। २॥ अल्प-स्वल्पदशनावलि सुंदरकिलकाई ॥ देखतबोली रोहिणी यशुमति मुसकाई ॥३॥ घरघरतेव्रजसुंदी देखनकोआईं ॥ महासिंधुआनंबद्यो गृहसुधि बिसराई ॥४॥। गोविंदकेचरणारविंद तजअनतनजाई ॥ धरणीधरश्रीजगन्नाथ माधोबलजाई ।।५॥॥
Gwaal
NityaPad-189
Bilawal
Sakhaakahatahain syamkhisyane .. aapahin aanlukebhayethade
सखाकहतहैं स्यामखिस्याने ।। आपहीं आनलुकेभयेठाडे अबतुम कहारिसाने ॥|१॥ बीचहीबोलउठे हलधरतब इनकेंमायनबाप ।। हारजीतको नेकनसमझत लरकनलावतपाप | २॥ आपनहार सखासों झगरतयह कहदियोपठाय ॥ सूरस्यामउठचलेरोयकें जननीपूछतधाय ॥। ३॥।
Gwaal
NityaPad-190
Bilawal
Khelatmein kau kako gusaiyan ..
खेलतमें कौ काको गुसैयां ॥ हरिहारे जीतेश्रीदामा वरबट ही कित करत हसैयां ॥ १॥ जातपाँत हमसों बडे नाहीं नाहम वसत तुम्हारी छैया ॥। अतिअधिकार जनावत याते अधिक तुम्हारे हैं कछु गैया ॥ २॥ रूटकरे तासों को खेले रहो सखासब ठाके ठैया ॥ सूरदासप्रभु खेल्योई चाहत दाव दियो कर नंददुहैया ।। ३॥
Gwaal
NityaPad-190
Bilawal
Shyam sunder bunn khelat sakhan sanga bibidh kell ..
श्याम सुन्दर बन खेलत सखन संग बिबिध केल ॥ कालिंदनी तट बांधी फेंट पट करत जुध भुज ज़ु परस्पर पेल ॥१॥ काहुकी मुरली चोरत काहुकी संग षष्ठी काहुको छीको नाडो काहुकी चोरत सेली ।। गोविंद पिय रस भरे निर्तत सखाके ग्रीवा भुज मेली ॥२॥
Gwaal
NityaPad-190
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