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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Khelankonchale balgovind ..| sakhapriyabulawat dwaare | खेलनकोंचले बालगोविंद ॥| सखाप्रियबुलावत द्वारे
घोषब ालकवुंद ॥ १॥॥
तरसत हैं सबदर्शकारण चतुरचातकदास ॥| वरख छबि
नवबारिधरत न हरत लोचनप्यास ॥।२॥
बिनें बचनसुनत कृपानिधिचलो
मनोहरबाल ॥ ललितलघुलघु चरनकरउरबाहु नयनबिशाल ॥३॥
अजरपद प्रतिबिबं राज़त चलत उपमापुंज ॥ प्रतिचरणमानों हेमबसुधादेत
आसनकुंज ।।४॥
सूरप्रभुकी निरख शोभा रहे सुर अवलोक ॥ सरदचंद
चकोर मानो रहे थकितवलोक ।॥५॥ | Gwaal | NityaPad-190 | Bilawal |
Khelanjahu gwalsbutterat .. yahasunkanhabhayye atiatur | खेलनजाहु ग्वालसबटेरत ॥ यहसुनकान्हभय्े अतिआतुर
द्वारेतनफिरफिरजबहेरत ॥|१॥॥
बारबार हरिमातहिबूझत कहिचौगानकहाँहै ॥
दश्धिमथनीकेपाछेदेखो लेमैंथरूयो तहांहे ॥ लेचौगान आपनेकरप्रभु
आयेघरतेंबाहर ॥| सूरस्यामबूझतसबग्वालन खेलेंगेकिहिठाहर ।। २।॥। | Gwaal | NityaPad-190 | Bilawal |
Khelansyam durgayori .. sangsangdhawat dolatkaidhombahut | खेलनस्याम दूरगयोरी ॥ संगसंगधावत डोलतकैधोंबहुत
अबेरभयोरी ॥१॥
पलकओटछांडतनहिंमोकूं कहाकहूं तोहिबात ॥ नंदहितात
तातकर बोलत मोहिकहतहैमात ॥२॥
इतनीकहत स्थामघनआये
ग्वालसखासंगचीन्हों ॥ दौरजाय उरल्नाय सूरप्रभु हरखयशोदा लीन्हों ॥। ३॥ | Gwaal | NityaPad-190 | Bilawal |
Mahari tohibadikripan mampy .. | महरि तोहिबडीकृपन मैंपाई ॥
दृधदहीदियों जोविधातातोहि.. सोतोधरतछिषपाई ॥१॥
बालकबहुत नहीरीतेरे एकहिकुंवरकन्हाई ॥
सोहतो घरहीघरडोलत माखनखातचुराई ॥॥२॥
बृद्धबेषपूरवपुन्यनतें यह निधि भाग्यन पाई ॥
ताहूके खैवेपीवेकों एती कहाचतुराई ॥ ३॥।
सुनतबचन चतुरनागरीके जशुमतिनंदसुनाई ॥
सूरस्यामको चोरीकेमिसदेखनको यह आई ॥॥४॥ | Urhaane | NityaPad-191 | Bilawal |
Apanogamalehunandarani... | अपनोगामलेहुनंदरानी॥।
बडेबाप की बेटी याते पूतहिंभली पढावतबानी ॥।१॥
सखाभीरलेपेठत घर में आपख्राय तोसहिये ।
जबमैंचली स्थामहिपकरन तबक ेकहागुण कहिये ॥२॥
भाजगयो दुरदेखत कितहू मैंपोढी जब आय ॥
हरेहरेबेनीगुही पाछेंबांधीपाटीजाय ।।३॥ सुनमैया याकेगुणमोसों इनमोहिलियो बुलायी ।।
दथिमेंपरी सहतकीचेंटी मोपेसबैकढायी ।।४।॥।
टहलकरत याकेघरकीमें यह पतिसंग मिलसोई ॥
सूरबचनसुन हँसीयशोदा ग्वालरही मुखजोई ।॥५॥॥ | Urhaane | NityaPad-191 | Bilawal |
Garimatidijo mogaribanikojayohai.. | गारीमतिदीजो मोगरीबनीकोजायोहै।।
जिततोबिगारकियो आनकहोमोसोतुम मैंतोकाहूबातनमें नाहीं तरसायोहै ॥१॥
दधिकी मटकीभरी आंगनमें आनधरीं तोलतोललीजोंभदू जेतोजाको खायोहै ॥
सूरदासप्रभुप्यारे निमिष नहूंजे न्यारे कान्ह जैसोपूत मैंतोपूरेपुन्यनसो ंपायोहै ।। २॥। | Urhaane | NityaPad-191 | Bilawal |
Tererilalmeromakhankhayo .. | तेरेरीलालमेरोमाखनखायो ॥
भरदुपहरीलखसूनोघर ढोरढंढोर अबही उठधायो ॥ १॥
खोलकिवार अकेले मंदिर दूधदह्योसबलरकन खायो ॥
छीकेतेंकाह खाटचढमोहन कछूखायो कछुभूढरकायो ॥२॥
नित्यप्रतिहानि कहॉलोसहिये यहढोटा ऐसे ढंग लायो ॥
परमानंद रानीतुमबरजो पूत अनोखोतेंही जायो ॥ ३॥। | Urhaane | NityaPad-191 | Bilawal |
Gwalini aaptandekh merey laltandekhari bheet jyonhoy tochitraabarekhari ..bhru... | ग्वालिनी आपतनदेख मेरे लालतनदेखरी भीत ज्योंहोय तोचित्रअबरेखरी ॥भ्रु.॥
मेरोललनहै पांचही बरसको रोयकें अजहू पयपानमाँगें
तूतोअतिढीठ जोवनमत्तग्वालिनी फिरतइतरात गोपालआगें | १॥|
मेरे ललनकी तनकसीअंगुरि ये बडेनखनकेचिन्ह तेरें ।
मष्टकर हँसेंगेलोग अगवारको यह भुजाकहांपाई स्याममेरे || २॥
झुकवलीग्वालिननयनन हँसी नागरी उराहनेकेमिस अधिकप्रीतिबाढी ॥
एकसुन सूरसर्वस्वहरयो सांवरे. अनउत्तर महरिकेद्वारठाढी ॥३॥ | Urhaane | NityaPad-192 | Bilawal |
Maiya mainnahinmakhankhayo .. | मैया मैंनाहींमाखनखायो ।।
ख्यालपरे यहसखासबे लेमेरेमुखल पटायो ॥ १॥
देखतही छीकेपरभाजन ऊंचेधरलटकायो ॥
तूहीदेख नयन कर अपने मैंकैसेंसोपायो ॥२॥
मुखदधिपोंछ बुद्धि एककीनी दोनापीठदुरायो ॥|
डारसांट मुसकाय यशोदा स्थामहि कंठलगायो ॥३॥
बालविनोदभावकरमोह्ो मातामनहिरिझायो ॥
सूरस्याम यह यशुमतिकोसुख देवनदुर्लभगायो ।॥।४॥। | Urhaane | NityaPad-192 | Bilawal |
Dindinden urahano aavein .. | दिनदिनदेन उराहनो आवें ॥
यह ग्वालिनी जोबनमदमाती झूठेदोषलगावें ॥१॥
यह कहि भाजनधरेपराये कहामेरोमोहन पावे॥
लरकाअतिसुकुमार गृहततन हलधरसंग खिलावे ॥२॥
कबहुंकरईमथनीलेके आंगनहाथनचावे ॥
कबहुंक कहतकंचुकीफारी कबहुँक और बतावे ।। ३॥
मन लाग्यो कान्हकमलदललोचन उत्तरबहुतबनावे ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरमुख यहमिस छिनछिन देखनआवजे ।।४॥ | Urhaane | NityaPad-192 | Bilawal |
Kaheaay nadekhiyeraniju apanesutakekaram .. | काहेआय नदेखियेरानीजू अपनेसुतकेकरम ॥
भाजन भवनएको नरहो कह्योतोआगें हंसपरीहे ऐसे जानेंको काहूकोमरम ॥१॥।
दिनदिनकीहानि दूजेंराखतन नेककान कहोजु बसबेकोकौन धरम ॥।
नंददासप्रभु मैयाके आगें साधुहवेबैठे चोरीको कहाभरम ।। २॥। | Urhaane | NityaPad-192 | Bilawal |
Bhajgayomerobhajanfor || | भाजगयोमेरोभाजनफोर ||
कहारीकहूं सुनमातयशोदा और माखन खायोसबचोर ॥। १॥
लरका पांचसातसंगलीने रोकेरहत सांकरीखोर ॥।
मारगमें कोऊचलननपावत लेत हाथतेदूध मरोर ॥२।॥
समझनपरत याढोटाकी रातदिवसरहे गोरस ढंढोर ॥
आनंदेफिरतफागसों खेलततारीदेत हँसतमुखमोर ॥३॥
सुंदरस्यापरंगीलोढोटा सबब्नजबांध्यो प्रेमकीडोर ॥
परमानंदसयानीग्वालिनी लेतबलैया अंचरछोर ॥।४॥। | Urhaane | NityaPad-193 | Bilawal |
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