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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Yashodakahanlon keyzecon | | यशोदाकहाँलों कीजेकान |
दिनप्रतिकेंसेसही परतहै दूधदहीकी हान ॥ १॥
अपनेया बालकीकरनी जोतुमदेखो आन ।।
गोरसखबाय जगायलरिकनकों भाजनभाजतभान ॥२१॥
मैं अपने मंदिर्केकौरें राखो माखनछान ॥
सोईजायतुम्हार ढोटा वबहीलियोपहचान . ॥३॥
बूझेंकहतबालनजोमहिया_ आयेसंकामान ॥
सूरदासप्रभुऔरनआवों चेटीकाढतपान ।।४॥ | Urhaane | NityaPad-195 | Dhanashree |
Kahenbarjat honandarani .. | काहेनबरजत होनंदरानी ।।
एकगामवसेवास कहांलों करेहे नंदजूकी कानी ॥ १॥।
बचनविचित्र कमलदललोचन कहतसरसबानी ॥
अचरज महरि तिहारे आगें अबहीजीभ तुतरानी ॥२॥
नाजानो कहांधों सीखे मोहन नमंत्रसयानी ।
कोटिकामरूपधरतहै बालकलीलाठानी ॥। ३॥
कहां तूरी ग्वाल तेरो मोहन यह विपरीत नजानी ॥
ब्रह ्मदास उरहाने मिस नागरी मोहन तन मुसकानी ।॥।४॥ | Urhaane | NityaPad-195 | Dhanashree |
Yashodachanchalteroput .. ananandyotra weethandolat karey atpatesoot ..1.. | यशोदाचंचलतेरोपूत ॥ आननंद्योत्रआ वीथनडोलत करे अटपटेसूत ॥१॥
दषह्योदुधलेघृत आगेंकर जहांतांहधरयोदुराय ॥
अंधियारेघरकों उन जानें तहांपहिलेहीजाय ।॥२॥
गोरसके सब भाजनफोरे माखनखायचुराय ॥
लरकनके करकान मरोरत तहांतेचले रुवाय ॥।३॥
बांटदेतवलचरनकौतुक करत विनोदविचार ॥
परमानंदप्रभुगोपीवल्लभ भावेंमदनमुरार ।। ४॥ | Urhaane | NityaPad-195 | Dhanashree |
Aiselarikanako aadeshkije .. | ऐसेलरिकनको आदेशकीजे ॥
भयेदरशन देखियेपायलाग मांग - कछूलीजे ॥१॥
अबहीहरिढंढोरमांटसयब याक्षणमौनधरबैठे ॥
होंपचिहारी कह्योनहींमानत बिनतीकरतजात हैं ऐंठे ॥ २॥॥
सुनोंहोयशोदा करत बयासुतके चोरी करसाधकहाये ॥
यद्यपियहगुण कमलनयनके परमानंदजियेमें भाये ॥३॥ | Urhaane | NityaPad-195 | Dhanashree |
Jhoothehi dosh gopal lagawat jahinjahin khelein mero mohan tahintahin uthh dhawat .. 1..| | झूठेही दोष गोपाल लगावत जहींजहीं खेलें मेरो मोहन तहींतहीं उठ धावत ॥ १॥|
कब तेरो दधिमाखन खायों ऐसेंई आवत हाथ नचावत ॥
परमानंद मदममोहनकों ब्रजकी लीलाभावत ॥।२॥ | Urhaane | NityaPad-195 | Saarang |
Kabahu akele paay preetam gopi leey bethi god | कबहु अकेले पाय प्रीतम गोपी ले बेठी गोद
उराहनो' सिखवत चोरी मिस मिस आवो गहे।॥
सामग्री घर राखी छींकन पर, भावे सो लीजिये यह तुम्हारी देह ॥१॥
जिन कोऊ ओर छीये यही बडो ताप हीये अकेलेही भोजन करो बरसावो मेह !।
रसिक प्रीतम हम आवेंगी उराहने के मिस जसुमति के आगें
तुम मनमें मत दीजों छेह | २॥ | Urhaane | NityaPad-196 | Todi |
Tumakon lalkaryohaigheya .. | तुमकों लालकर्योहैघेया ॥
आबवोबेग जातमुरझानो बोलतयशोदा मैया ॥१॥|
आनपतूकीपातनकीकर फिरलैहैंबलदाऊभैया ।।
बावाकहत पहिलेजोपीवे सोगोकुलकोरैया ॥|२॥
यहसून दौरभवनमें आये गोदबैठे प्यारो कुंवरकन्हैया ॥
श्रीविद्ठलगिरिधरनलालको प्यावनबावाबहुत सुखपैया ॥। ३ | Gaiiya | NityaPad-196 | Bilawal |
Yashodamathmathpyavat ghaiya .. | यशोदामथमथप्यावत घैया ॥
कर त्तबकडी धरतहैं आगें रुचिसोंलेत कन्हैया ।। १॥
बहोर धरत हरि लेत है पुनिपुनिसुंदरस्याम सुहैया ॥
ओट्योदूध धर्योबेलाभर पीवत कान्ह नन््हैया ॥२॥|
मनमोहनभोजनकों बैठे परोसतले कर मैया ।।
खट रसके प्रकार धरे सब निरख रसिक बल जैया ॥ ३।। | Gaiiya | NityaPad-196 | Bilawal |
Maiya nipatburo baladaau .. kahat haye vann badotmaso sub larkajur-aaoo ..| 1.. | मैया निपटबुरो बलदाऊ ॥ कहत है वन बडोतमासो सब लरकाजुर-आऊ ॥| १॥
मोहूको चुचकारचलेलै जहां बहुतबनझाऊ ॥
बाँहीतेकहि छाँड चले सब काठिखाउरेहाऊ | २॥
डरकांपकें उठ ठाडो भयो कोऊ न धीर धराऊ ॥
परपर गयो चल्यो नहीं जाई वे भाजेजात अगाऊ ॥३॥
मोसों कहत मोलको लीन्हों आप कहावत साऊ ||
परमानंद बलरामचवाई तैसेईमिले सखाऊ ॥।४॥ | Baldevji | NityaPad-197 | Bilawal |
Duhi duhvi lawat dhori gaitha . | दुहि दुह्वि लावत धोरी गैथा ।
कमल नैनको अति भावत है मथि मधि प्यावत घैया।।
मोहन भूख अधिक जबलागी छाक बांटि पियोरे मैया।
ऐसो स्वाद हम कबहु न चाख्यो अपनीसोंह कनैया ॥
हंसि हंसि ग्वाल कहेत हे मोहन सो सुनि गोकुल के रैया।
परमानंद दास को ठाकुर पुनि पुनि लेत बलैया ॥ | Gaiiya | NityaPad-197 | Aasawari |
Khelan abb merrie jaay balaiya .. | खेलन अब मेरी जाय बलैया ॥
जबही मोहि देखत लरिकनसंग तबही खीजत है बलभैया ॥ १॥
मोसों कहे तात बसुदेवको देवकी त ेरी मैया ।॥।
मोललियो कछूदे बसुदेवहिं करकर यतन बढैया ॥ २॥
अब बाबा कहत नंदसों यशुमतिसों कहि मैया ॥|
ऐसे कहि तब मोहि खिजाबत तब उठ चलल््यो खिसेया ॥३॥।
पाछे नंदसुनत हैं ठाडे हँसत हँसत उरलैया ॥
सूरनंद बलरामहि खीजत योसुनहरखबढैया ।।४॥। | Baldevji | NityaPad-197 | Saarang |
Karat ghaiya bharat dona gwalanko detari manmohan .. | करत घैया भरत दोना ग्वालनको देतरी मनमोहन ।।
हरखत निरखत निरख निरख फूल जब उपरत चलत सब दोना ॥१॥
उफनत उपफेन हँसत कमलनैन सखामंडली सब जोहना ॥।
हरिनारायण स्यथामदास' के प्रभुमाई लाग्यो री मनभोहना ॥। २॥ | Gaiiya | NityaPad-197 | Bilawal |
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