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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Maiya daau bahut khijaayo .. | मैया दाऊ बहुत खिजायो ॥
मोसों कहत मोलको लियो तोय यसोमति कब जायो ॥ १॥
कहा करों यह रसिके मारें खेलनहू नहीं जात ॥।
पुनपुन कहत कौन है माता कौन है तेरो तात ॥। २॥
गोरे नंद यशोदा गोरी तुम कित श्याम शरीर ॥
चुटकी दैदै ग्वाल सब हेँसतहैं हँसत सिखे देत बलवीर ।।३॥।
तू मोहीको मारन सीखी दाऊ एकबहु नखीजे ॥
मोहनकों मुखरिसमेंत लखि जसुमति मनमन रीझे ॥४॥
सुनहूं कान्ह बलभद्र चवाई जन्मतही को धूत ॥।
सूरस्थाम मोहि गोधनकीसों मैं जननी तू पूत ॥५॥। | Baldevji | NityaPad-197 | Bilawal |
Tumakon terter main haaree .. kahanjo rahey ablo manmohan lehon chhaak tumhari .. 1.. | तुमकों टेरटेर मैं हारी ॥ कहांजो रहे अबलो मनमोहन लेहोन छाक तुम्हारी ॥ १॥
भूल परी आवत मारगमें क्योंहुं न पेंडो पायो ॥।
बूझत बूझत यहां लों आई तब तुम वेणु बजायो ॥२॥।
देखो मेरे अंगके पसीना उरको अंचल भीनो ॥
परमानंदप्रभु प्रीतिजानकें धाय आलिंगन कीन्हों ॥।३। | Nitya Chaak | NityaPad-198 | Saarang |
Harikon terat firat guwari ..| | हरिकों टेरत फिरत गुवारी ॥|
आन लेहो तुम छाक आपनी बालक बल बनवारी ॥ १॥॥
आज कलेऊ कियो प्रातही बछरा लेबन धाये ॥।
मेवा मोदक मैया यशोमति मेरे हाथ पठाये ।। २
जब यह वानी सुनी मनोहर चल आये तहां पास ॥
कीनी भली भूख जब लागी बलपरमानंददास ।।३॥ | Nitya Chaak | NityaPad-198 | Saarang |
Dekhari rohanimaiah kaisehain baldaaubhaiya yamunaketir mohi jhujhuvaavtaayori .. | देखरी रोहणीमैया कैसेहैं बलदाऊभैया यमुनाकेतीर मोहि झुझुवावतायोरी ॥
सुबल श्रीदामासाथ हँसहँस बूझतवात आप डरपे औरमोहि डरपायोरी ॥ १॥
जहींजहीं बोले मोर चिते रहत याही ओर भाजोरे भाजोरे भैयावह देखो आयो।।
आप गये तरुचढमोहि छाड्योवाही तर धरधर छातीकरे दोर्यो घरआयो ॥२॥
उछंगसो लिये लगाय कंठसों रहे लपटाय बारीरेवारी मेरोहियो भर आयो।॥
परमानंद रानी द्विजबुलाय वेदमंत्र पढाय बछियाकी पूँछगहि हाथहि दिवायो ॥३॥ | Baldevji | NityaPad-198 | Saarang |
Harizuko gwalin bhojan laaee .. | हरिजूको ग्वालिन भोजन लाई ॥
वुंदा विपिन विशद यमुनातट सुन ज्यों नार बनाई ॥१॥
सानसान दधिभात लियोहै सुखद सखनके हेत ॥
मध्यगोपालमंडली मोहन छाक विहंसिमुखदेत॥ २॥
देवलोक देखत सब कौतुक बालकेलि अनुरागे ॥
गावत सुनत सुखद अतिमानो सूरदुरत दुःखभागे ।। ३।। | Nitya Chaak | NityaPad-198 | Saarang |
Baant baant sabahin koo deit.... | बांट बांट सबहिन को देत॥॥
ऐसे ग्वालहरिहें जो भावत शेष रहत सोई आपन लेत॥।१॥
आछोदूध सद्य धोरीको ओट जमायो अपने हाथ ||
हंडिया मूँद यशोदामैया तुमको दें पठई ब्रजनाथ ॥। २
आनंदमग्न फिरत अपने रंग बूंदावन कालिंदीतीर ॥
परमानंददास झूठोले बांह पसार दियो बलवीर ।।३॥। | Nitya Chaak | NityaPad-198 | Saarang |
Laalan ketik dooh bunn aavat .. | लालन केतिक दूह बन आवत ॥
यशोमति औसेर करतहैंढिंगही क्यों न चरावत ।॥। १॥
हार परीहों यहां लो आवत द्योस चदयो लखधाबत
ब्रजजन त्यज क््थों दूर आयो सो तुमही कूं भावत ॥३॥
चलहु न उठ क्यों ठोर लाडिलो जहींये छाक धरावत ॥
कर गहि चलें कुंजभवनमें अद्भुत भावजनावत ॥|३॥।
छाक धराय यहालों आयो दोनों क्यों न बतावत ॥
सीतल ठौर देख भोजनकी सवें होहुँ समरावत ।।४॥
गरेंबांह धर चले रसिक प्रीतम प्रिय परस प्रमोद बढावत ।॥
गूडचरण गोचरणको यह दासमुदितमनभावत ।।५॥॥ | Nitya Chaak | NityaPad-199 | Saarang |
Aagein auri chhakahaari ... | आगें आउरी छकहारी ॥।
जब तुम टेरे तबमैं बोली सुनी न टेरतिहारी ॥ १॥|
मैया छाक सवारे पठई तूं कित रही अवारी ॥
अहो गोपाल गैल हों भूली मधुरे बोलन परवारी ॥ २॥
गोवर्धनउद्धरणधरीसों प्रीति बढी अतिभारी ॥।
जनभगवान मग्न भई ग्वालिनी तनकी दशाविसारी ॥। ३॥। | Nitya Chaak | NityaPad-199 | Saarang |
Tumakon maiya chhaak pathaai.... | तुमकों मैया छाक पठाई।॥।
टेरत फिरत ग्वालनंदलाल क्ित तुम दोऊ भाई ॥१॥
नईनई भांत नये डबरनमें अपने सिर धर आई ॥
नेक कहत सुनिहो भ्रवणनसुख पावत ताही ठौर बुलाई ॥।२॥
बानी समझ हँस सुखपावत ताही ठौरहि धाई॥
श्रीविद्डनगिरिधरनलाल को अद्भुत रुचि उपजाई ॥३॥ | Nitya Chaak | NityaPad-199 | Saarang |
Biharilal aavahu aaee chhaak .. | बिहारीलाल आवहू आई छाक ॥
गैया दूरगईहै मोहन वगदावो दे हांक ॥१॥
अर्जुन भोज सुबल श्रीदामा मधुमंगल एक ताक ।।
खटरसख्त्रीर खांड घृत भोजन बहुपकवान पराक ॥२॥
अपनी अपनी पातर लेकें बैठे फैल फराक ॥।
सूरदासप्रभु जेंबत रुचिसों प्रेमप्रीतिके पाक ॥। ३॥। | Nitya Chaak | NityaPad-199 | Saarang |
Biharilal aaee chhaak saloni.. | बिहारीलाल आई छाक सलोनी॥
अति अद्भुत पठई चंद्रावलि एक गांठ है दोहनी ॥१॥
टेरत स्थाम भुजा ऊंची कर गई सुबास आग्योनी ॥
कृष्णदास गिरिधरजूको मनहरद्यो विधिना रसिक रिझोनी ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-199 | Saarang |
Ladile tumko chhaak leey aaee .. | लाडिले तुमको छाक ले आई ॥
बहुत वारके भूखे जानके यशुमति मोहि पठाई ॥१॥
बीचमिले मृगनाद विमोही जिन यह ठौर बताई ॥
चरणकमलके चिन्ह विलोकत श्रम सब गयो भुलाई ॥
ढिंग आये सुन वचन मनोहर आरति अति उपजाई ॥
वेणुनाद मध्य श्रवण सुधा धसि विरहे अग्नि बुझाई ॥३॥
मुखनिरखत अपने मोहनको छाकजो तरे उतराई ॥
मुखचुंबनदे रसिकशिरोमणि ग्वालिन गरे लगाई ॥।४॥। | Nitya Chaak | NityaPad-199 | Saarang |
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