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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Jaago krishna yashodaju bolein yeh osar kouu soveho .. | जागो कृष्ण यशोदाजु बोलें यह ओसर कोऊ सोवेहो ॥
गावत गु न गोपाल ग्वालिनी हरखत दह्लो विलोवेहो ॥१॥
गोदोहन ध्वनि पूररहो ब्रज गोपी दीप संजोवेहो ॥
सुरभी हूंक वछरूवा जागे अनमिष मारगजोबेंहो ॥२॥
वेणु मधुर ध्वनि महूवर वाजे बेत गहे कर सेलीहो ॥ अपनी गाय
सब ग्वाल दुहतहें तिहारी गाय अकेली हो ॥३॥
जागे कृष्ण जगत के जीवन अरूण नयन मुख सोहेहो ॥
गोविंद प्रभु दुहत धेनु धोरी गोपबधू मन मोहेहो ।।४॥। | Jagayeve | NityaPad-020 | Bibhaas |
Janani jagawat utho kananhaaee .. prakatyo tarani kiran gann | जननी जगावत उठो कनन््हाई ॥ प्रकट्यो तरणि किरण गण
छाई।॥१॥ आवो चंद्र बदन दिखराई ॥ वारबार जननी बलजाई ।। २॥। सखा द्वार
सब तुमहि बुलावत ॥ तुम कारण हम द्वारे आवत ।।३॥ सूरस्थाम उठ दर शन
दीन्हो ॥ माता देख मुदित मन कीन्हो ॥४॥ | Jagayeve | NityaPad-020 | Bhairav |
Yeh bhayo paachhilo pahar. kaanh kaannhh cutty terron laage baava | यह भयो पाछिलो पहर। कान्ह कान््ह कटि टेरन लागे बावा
नंदमहर॥।१॥ गोपवधू दधि मंथन लागी गोपन पुरे वेणु || उठो बलश्याम बछरूवा
मेलो रांभण लागी थेनु ॥२॥ ब्रह्म मुहूरत भयो सवारो विप्र पढन लागे वेद ॥
परमानंददासको ठाकुर गोकुलके दुःख छेद ।। ३॥ | Jagayeve | NityaPad-020 | Bibhaas |
Hariju koo darsan bhayo sabero.... | हरिजू को दरसन भयो सबेरो।॥।
बहुत लाभ पाऊंगीरी माईदह्ो बिकेगो मेरो ॥१॥
गली सांकरी एक जनेकी भटु भयो भट भेरो ॥
दे अंक चलीसयानी ग्वालिन कमलनयन फिर हेरो ॥ २॥
भोरही मंगल भयो भटूरीहे सबकाज भलेरो॥
परमानंदप्रभु मिले अचानक भवसागरको बेरो ॥३॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Bhor bhaye yashodaju boley jaago merey giridharlal ... ratna | भोर भये यशोदाजू बोले जागो मेरे गिरिधरलाल ॥। रत्न
जटित सिंघासन बैठो देखनकों आंयी ब्रजबाल ॥। १॥ नियरें आय सुफेंती खेंचत
बोहोर्यो हरि ढांपत बदन रसाल ॥ दूध दहीं माखन बहु मेवा भामिनी भरभर
लाई थाल ॥२॥ तब हरखत उठ गादी बेठे करत कलेऊ त िलकदे भाल ॥ देवी
आरती उतारत चतुर्भुजदास गावें गीत रसाल ॥३॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Houn parbhaat samein uthh aaee kamal nayan tumhaaron dekhan mukh .. | हों परभात समें उठ आई कमल नयन तुम्हारों देखन मुख ॥
गोरस वेचन जात मधुपुरी लाभ होय मारग पाऊं सुख ॥ १॥॥
कमलनयन प्यारोकरत कलेऊ नेक चिते मोतनकी जेरूख ॥
तुम सपने में मिलकैं विछुरे रजनीजनित कासों कहीयें दुःख ।।२॥
प्रीति जो एक लालगिरिधरसों प्रकट भई अबआय जनाई ॥
परमानंदस्वामी नागर नागरिसों ममनसा अरूझाई ॥। ३॥। | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Uthhe praat: alsaat kahet meethi totri baat mangtahe sadd | उठे प्रात: अलसात कहेत मीठी तोतरी बात मांगतहे सद
माखन लाईहें यशोदामात ॥। वाजत नूपुर सुहात नाचत त्रैलोकनाथ देखत सब
गोपी ग्वाल नाहीनें अघात ।। १॥ नंदनंदन सुखदाई चिरजीयोरी कन्हाई निरखत
मुख या ढोटाको जीजतहें माई ॥ बालकेलि देखन आई रोम रोम सचुपाई
वललभ मुख हरख निरख लेत हें बलाई ॥।२॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Jagaavan aavegi vrajnari atee rasrang bharee .. atihi roop | जगावन आवेगी ब्रजनारी अति रसरंग भरी ॥ अतिही रूप
उजागर नागर सहज शुंगार करी ॥१॥
अतिही मधु स्वर गावत मोहनलालकों
चित्तहरे ॥ मुरारीदास प्रभु तुर्त उठ बैठे लीनी लाय गरे ॥२॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Laal hii naanhi jagaay sakat sunason batasjani .. apane | लाल हि नांहि जगाय सकत सुनसों बातसजनी ॥ अपने
जान अजहु कान मानत सुख रजनी ॥१॥ जब जब हों निकट जाऊँ रहत लाग
लोभा॥ तनकी सूधि बिसर गई देखत मुख शोभा ॥।२॥ वचननको जिय बहुत
करत सोच मनठाढी ॥ नयनन नयन विचार परे निरखत रूचि बाढी ॥।३॥ यह
विध बदनारविंद यशुमति जियभावे ॥ सूरदास सुखकी रास कहत न
बनिआवे ॥४॥ | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Praatasmein navkunj dwaar vhai lalitaalalit bajaai beena .. | प्रातसमें नवकुंज द्वार व्है ललिताललित बजाई बीना ॥
पोढेसुनत स्याम श्रीस्यामा दंपति चतुर नवीन नवीना ॥ १॥
अति अनुराग सुहाग भरे दोउ कोक कला जो प्रवीन प्रवीना ॥
चतुर्भुजदास निरख दंपति सुख तन मन धन न्योंछावर कीना ॥। २॥। | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Bhor bhayo jaago nandanand .. sanga sakhaa thaadhe jug bund ..1.. | भोर भयो जागो नंदनन्द ॥ संग सखा ठाढे जग बंद ॥१॥
सुरभिन पय हित वत्स पिवाये ॥ पंछी यूथ दसों दिश धाये ॥॥२॥
मुनि सरतके तमचर स्वर हारये | सिथिल धनुष रति पति गहि डार्ये ॥ ३॥
निशही घटी रविरथ रूचि राजे ॥ चंद मलीन चकई रति साजे ॥।४॥
कुमुदिनी सकुची वारिज झूले ॥ गुंजत फिरत अलिगण झूले ॥५॥
दरशन देहो मुदित नर नारी | सूरदासप्रभु देव मुरारी ॥६॥। | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Praat samay uthh sowat sutako badan ughaarat nand .. rahi naan sakey | प्रात समय उठ सोवत सुतको बदन उघारत नंद ॥ रहि न सके
अतिसे अकुलाने नयन निशाके इन्द ॥१॥ शुभ्र सेज मध्यते मुख निकरे गड़
तिमिर मिट मंद । मनहुं पयोनिधि मथन फेन फट दई दिखाई चंद ॥।२॥ सुनत
चकोर सूर उठ धाए सखीजन सखा सुछंद ।। रही न सुधि शरीर अधीर मन पीवत
किरन मकरंद ॥३॥ | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
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