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SPIRITUAL BENEFACTOR
VAISHNAVACHARYA HDH PUJYA GOSWAMI 108 SHRI VRAJRAJKUMARAJI MAHODAYASHRI




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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Jaago krishna yashodaju bolein yeh osar kouu soveho .. | जागो कृष्ण यशोदाजु बोलें यह ओसर कोऊ सोवेहो ॥
गावत गुन गोपाल ग्वालिनी हरखत दह्लो विलोवेहो ॥१॥
गोदोहन ध्वनि पूररहो ब्रज गोपी दीप संजोवेहो ॥
सुरभी हूंक वछरूवा जागे अनमिष मारगजोबेंहो ॥२॥
वेणु मधुर ध्वनि महूवर वाजे बेत गहे कर सेलीहो ॥ अपनी गाय
स ब ग्वाल दुहतहें तिहारी गाय अकेली हो ॥३॥
जागे कृष्ण जगत के जीवन अरूण नयन मुख सोहेहो ॥
गोविंद प्रभु दुहत धेनु धोरी गोपबधू मन मोहेहो ।।४॥। | Jagayeve | NityaPad-020 | Bibhaas |
Janani jagawat utho kananhaaee .. prakatyo tarani kiran gann | जननी जगावत उठो कनन््हाई ॥ प्रकट्यो तरणि किरण गण
छाई।॥१॥ आवो चंद्र बदन दिखराई ॥ वारबार जननी बलजाई ।। २॥। सखा द्वार
सब तुमहि बुलावत ॥ तुम कारण हम द्वारे आवत ।।३॥ सूरस्थाम उठ दरशन
दीन्हो ॥ माता देख मुदित मन कीन्हो ॥४॥ | Jagayeve | NityaPad-020 | Bhairav |
Yeh bhayo paachhilo pahar. kaanh kaannhh cutty terron laage baava | यह भयो पाछिलो पहर। कान्ह कान््ह कटि टेरन लागे बावा
नंदमहर॥।१॥ गोपवधू दधि मंथन लागी गोपन पुरे वेणु || उठो बलश्याम बछरूवा
मेलो रांभण लागी थेनु ॥२॥ ब्रह्म मुहूरत भयो सवारो विप्र पढन लागे वेद ॥
परमानंददासको ठाकुर गोकुलके दुःख छेद ।। ३॥ | Jagayeve | NityaPad-020 | Bibhaas |
Hariju koo darsan bhayo sabero.... | हरिजू को दरसन भयो सबेरो।॥।
बहुत लाभ पाऊंगीरी माईदह्ो बिकेगो मेरो ॥१॥
गली सांकरी एक जनेकी भटु भयो भट भेरो ॥
दे अंक चलीसयानी ग्वालिन कमलनयन फिर हेरो ॥ २॥
भोरही मंगल भयो भटूरीहे सबकाज भलेरो॥
परमानंदप्रभु मिले अचानक भवसागरको बेरो ॥३॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Bhor bhaye yashodaju boley jaago merey giridharlal ... ratna | भोर भये यशोदाजू बोले जागो मेरे गिरिधरलाल ॥। रत्न
जटित सिंघासन बैठो देखनकों आंयी ब्रजबाल ॥। १॥ नियरें आय सुफेंती खेंचत
बोहोर्यो हरि ढांपत बदन रसाल ॥ दूध दहीं माखन बहु मेवा भामिनी भरभर
लाई थाल ॥२॥ तब हरखत उठ गादी बेठे करत कलेऊ तिलकदे भाल ॥ देवी
आरती उतारत चतुर्भुजदास गावें गीत रसाल ॥३॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Houn parbhaat samein uthh aaee kamal nayan tumhaaron dekhan mukh .. | हों परभात समें उठ आई कमल नयन तुम्हारों देखन मुख ॥
गोरस वेचन जात मधुपुरी लाभ होय मारग पाऊं सुख ॥ १॥॥
कमलनयन प्यारोकरत कलेऊ नेक चिते मोतनकी जेरूख ॥
तुम सपने में मिलकैं विछुरे रजनीजनित कासों कहीयें दुःख ।।२॥
प्रीति जो एक लालगिरिधरसों प्रकट भई अबआय जनाई ॥
परमानंदस्वामी नागर नागरिसों ममनसा अरूझाई ॥। ३॥। | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Uthhe praat: alsaat kahet meethi totri baat mangtahe sadd | उठे प्रात: अलसात कहेत मीठी तोतरी बात मांगतहे सद
माख न लाईहें यशोदामात ॥। वाजत नूपुर सुहात नाचत त्रैलोकनाथ देखत सब
गोपी ग्वाल नाहीनें अघात ।। १॥ नंदनंदन सुखदाई चिरजीयोरी कन्हाई निरखत
मुख या ढोटाको जीजतहें माई ॥ बालकेलि देखन आई रोम रोम सचुपाई
वललभ मुख हरख निरख लेत हें बलाई ॥।२॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Jagaavan aavegi vrajnari atee rasrang bharee .. atihi roop | जगावन आवेगी ब्रजनारी अति रसरंग भरी ॥ अतिही रूप
उजागर नागर सहज शुंगार करी ॥१॥
अतिही मधु स्वर गावत मोहनलालकों
चित्तहरे ॥ मुरारीदास प्रभु तुर्त उठ बैठे लीनी लाय गरे ॥२॥ | Jagayeve | NityaPad-021 | Bibhaas |
Laal hii naanhi jagaay sakat sunason batasjani .. apane | लाल हि नांहि जगाय सकत सुनसों बातसजनी ॥ अपने
जान अजहु कान मानत सुख रजनी ॥१॥ जब जब हों निकट जाऊँ रहत लाग
लोभा॥ तनकी सूधि बिसर गई देखत मुख शोभा ॥।२॥ वचननको जिय बहुत
करत सोच मनठाढी ॥ नयनन नयन विचार परे निरखत रूचि बाढी ॥।३॥ यह
विध बदनारविंद यशुमति जियभावे ॥ सूरदास सुखकी रास कहत न
बनिआवे ॥४॥ | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Praatasmein navkunj dwaar vhai lalitaalalit bajaai beena .. | प्रातसमें नवकुंज द्वार व्है ललिताललित बजाई बीना ॥
प ोढेसुनत स्याम श्रीस्यामा दंपति चतुर नवीन नवीना ॥ १॥
अति अनुराग सुहाग भरे दोउ कोक कला जो प्रवीन प्रवीना ॥
चतुर्भुजदास निरख दंपति सुख तन मन धन न्योंछावर कीना ॥। २॥। | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Bhor bhayo jaago nandanand .. sanga sakhaa thaadhe jug bund ..1.. | भोर भयो जागो नंदनन्द ॥ संग सखा ठाढे जग बंद ॥१॥
सुरभिन पय हित वत्स पिवाये ॥ पंछी यूथ दसों दिश धाये ॥॥२॥
मुनि सरतके तमचर स्वर हारये | सिथिल धनुष रति पति गहि डार्ये ॥ ३॥
निशही घटी रविरथ रूचि राजे ॥ चंद मलीन चकई रति साजे ॥।४॥
कुमुदिनी सकुची वारिज झूले ॥ गुंजत फिरत अलिगण झूले ॥५॥
दरशन देहो मुदित नर नारी | सूरदासप्रभु देव मुरारी ॥६॥। | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Praat samay uthh sowat sutako badan ughaarat nand .. rahi naan sakey | प्रात समय उठ सोवत सुतको बदन उघारत नंद ॥ रहि न सके
अतिसे अकुलाने नयन निशाके इन्द ॥१॥ शुभ्र सेज मध्यते मुख निकरे गड़
तिमिर मिट मंद । मनहुं पयोनिधि मथन फेन फट दई दिखाई चंद ॥।२॥ सुनत
चकोर सूर उठ धाए सखीजन सखा सुछंद ।। रही न सुधि शरीर अधीर मन पीवत
किरन मकरंद ॥३॥ | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
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