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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Kumudaban bhalee pahunchi aaya .. sufal bhaee haye chhaak tihari laal kadamtar paay ..1.. tahaante | कुमुदबन भली पहुंची आय ॥ सुफल भई है छाक तिहारी लाल कदमतर पाय ॥१॥ तहांते
उठ चले मानसरोबर संग सखा सब लाय ॥ बैठत तहां ठौर गिरिऊपर चरत चहूं
दिश गाय ॥२॥ खेलत खात हँसत परस्पर बातें कहत बनाय ॥ रामदास
बलबल बूझनकी कहा कहा व्यंजनलाय ॥३॥ | Nitya Chaak | NityaPad-202 | Saarang |
Giripar | गिरिपर
चढ गिरिवरधर टेरें ॥ अहो भैया सुबल श्रीदामा लाओ गाय खिरकके नेरें ॥१॥
भई अवारजो छाक खायें कछुक घेया पियें सबेरें || परमानंदप्रभु बैठ सिलनपर
भोजन करत ग्वाल रहे घेरें ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-202 | Saarang |
Kaanvardvav bharaken chhaak | कांवरद्वव भरकें छाक
प्रठाई नंदरानी आपमोहि मिले मारगमें मधुबनके कूल ॥॥ सुबल तोक तरुण
वेष आवत कछु भोजन लिये चंचलगति चलत दोऊ दरसन के फूल ॥१॥
कनकथार पीरे जगमगात बेलनकी भातकांति भरेहें नंदगनी आपदोऊ समतूल ॥
पचरंग पाटकी डोरी चोसर चहूं ओर खचित पवन गवन बिकस जात रेसमके
झूल ॥२॥ छोटी छोटी द्वय गांठ त्तामें पठवन सब ब्रजजन की आसपास लटकरहे
फोंदा मखतूल ॥ सकल पाक परमानंद आरोगत परमानंद परमानंद जानत सब
बातनको मूल ॥।३॥ | Nitya Chaak | NityaPad-202 | Saarang |
Shyam dhaaktar | श्याम ढा कतर
छाक अरोगत लेकर थारी ठाढीहै ललिता।। भोजन व्यंजन केलके पातनमें
चहुंधा चपलासी ब्रजबनिता ॥९॥ निरखत अंबुज मोहनको मुखलोचन भये
मानों मगृकेसे चकृता ॥ श्रीविद्डलगिरिधरन अरोगत निकट वहत कालिंदी
सरिता ॥१॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Govardhan girishung shilanpar baithe chhaak khaat dadhiodan |. | गोवरधन गिरिशुंग शिलनपर बैठे छाक खात दधिओदन |।
आसपास ब्रजबालक मंडली मध्यवहीं बलिमोहन बैठे व खात खबावत प्रेम
प्रमोदय ॥१॥ काहको छीको नोय छोर गहि डारत वह वापर वह वाकी
कोदन ॥ बालकेलि क्रीडत गोविंदप्रभु हँस गिर जात सुबलकी गोदन ॥॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Sunder silaa khelki thaur .. madangopal jahaan madhyanayak | सुंदर सिला खेलकी ठौर ॥ मदनगोपाल जहां मध्यनायक
चहुंदिश सखामंडली जोर ॥१॥ बांटत छांक गोवरधनऊपर बैठत नानाविधिकी
ठौर ॥ हँसहँस भोजन करत परस्पर चाखचाखले रुचिसों कोर ॥२॥ कबहूँ
सिखर चढ टेरत गायन लेले नाम धूमरी धौर॥ चतुर्भुजप्रभु लीलारसरीझे
गिरिधरलाल रसिक सिरमौर ॥३॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Sub vrajgopi rahee takitak .. | सब ब्रजगोपी रही तकिताक ॥
करकर गांठ लसत सबहि न के बनको चलत जब छाक ।।१॥ मधुमेवा पकवान
मिठाई घरघरा ले निकसीं थाक ॥ नंददासप्रभुको यह भावत प्रेमप्रीतिके
पाक ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Chhaak leaai gwalin gori .. yashumati sub pakwan chhaab bhar pathai terat | छाक लेआई ग्वालिन गोरी ॥ यशुमति सब पकवान छाब भर पठई टेरत
भोरी ॥ १ ॥ जबही आन अरोगत प्यारो गोरस कनक कमोरी ॥ ब्रजाधीशप्रभु
स्थामढाकतर भली बनी यह जोरी ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Silaa pakhaaro bhojan keeje .. | सिला पखारो भोजन कीजे ॥
नीके व्यंजन बने कौनके चारत्र धाख सबहिनकों दीजे॥१॥
अहो अहो सुबल अहो श्री श्रीदामार्जुन भोज विशाल ॥
अपने अपनेओदन लाओ आज्ञा दईहै गोपाल ॥२॥
फल अंगुरिन अंजलिनबिच राखे वांटवांट सबहिन को देत।।
परमानंदस्वामी रसरीझे प्रेमपुंजकों बांध्योसेत ॥३॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Bansivat baithehen nandlal .. bhayohain madhyan | बंसीवट बैठेहें नंदलाल ॥ भयोहैं मध्यान
छाककी बिरियां अपनी अपनी गैया छैया लेआवो व्रजबाल ॥।१॥।
ग्वालमंडलीम ध्यविराजत करत परस्पर भोजन नवत्न बने गोपाल ॥।
आसकरण प्रभु मोहनमागर सबसुखरसिक रसाल ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Baithe srigovardhan giri god .. mandali | बैठे श्रीगोवरधन गिरि गोद ॥ मंडली
सखामध्य बलमोहन खेलत हँसत प्रमोद॥।१।॥| भई अबार भूख जब लागी
'चितये घर की कोद || गोविंद तहां छाक ले आये पठई मातयशोद ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-203 | Saarang |
Mohan jenwat chhaak saloni .. | मोहन जेंवत छाक सलोनी ॥
सखन सहित हुलसे दोऊभैया झपटत करते दोनी ॥१॥
आछे आछे फलले चाखत चाहत हरिकी कोनी ॥
परमानंदप्रभु कहत सखनसों पहिलेकरलेहु पोनी ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-204 | Saarang |
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