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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aigh! egwalmandali mohansang leaney
एघ्! एग्वालमंडली मोहनसंग लीने बैठे बरकी छैया ठीक दुपहरीकी विरियां ॥ एक दोहनी मथत दूध एक बाँटत फल चबीना एकन कर झगर लेत आप अपने कामर के आसन कीने ॥१॥ आनंद वेणुबजावत गावत सारंगकी गतिभेदन छाकें खात करछीने ॥ धोंधीके प्रभुपर कुसुमवरषत एकपहिराबत पहुपदलनवीने ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-204
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Chitravichitra batrajaki balmandali rachana rachee sorchi .. dadhi payas navneet
चित्रविचित्र बत्रजकी बालमंडली रचना रची सोरची ॥ दधि पायस नवनीत मध्यशर्करा पलासपत्रनके पुटनकी पंगति सची ।॥१ ॥ नानापकवाननके पनवारे लोनीवारे खाटेखारे व्यंजन अनगिन गणना नाहींबची ॥ मुरारीदासप्रभु प्यारी भोजनकर बैठे शेष लेन सहचरी निकट आय ललची ॥|२॥
Nitya Chaak
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Bhawat haye banavan kii
भावत है बनवन की डोलन ॥ मदनगोपाल मनोहरमूरति ही ही धोरी धेनुकी बोलन ॥१॥ करपर प्रात भात ताऊपर बिचबिच व्यंजन धरराखे ॥ बालकेलि सुंदर व्रजनायक ग्वालिन देत आपही चाखे ॥२॥ कहा बैभव बवैकुंठलोकको भवन चतुर्दशकी ठकुराई ॥ शिवविरंचि नारदपदवंदित उपनिषद्‌ कीरतिगाई ॥३॥ यह पुरुष लीलाअवतारी आदि मध्य अवसान एकरस ॥ परमानंदप्रभु बालविनोदी गोकुलमंडन भक्त प्रेमवश ॥४॥
Nitya Chaak
NityaPad-204
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Hansat paraspar karat kalol ..
हंसत परस्पर करत कलोल ॥ व्यंजन सब सराए मोहन मीठे कमलवदन के बोल ॥१॥ तोरे पलासपत्र बहुतेरे पनवोरा जोर्‌यो विस्तार ॥ चहुंदिश बैठी ग्वालमंडली जेंबन लागे नंदकुमार ॥२॥ सुर विमानसब कौतुकभूले यज्ञपुरुषहैं नीके रंग ॥ शेष प्रसादरह्मोसो पायो परमानंददासहो संग ॥३॥
Nitya Chaak
NityaPad-204
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Virajat gwalmandali aho balmohan chhaake khaat .. silaa
विराजत ग्वालमंडली अहो बलमोहन छाके खात ॥ सिला ओदन जंघन रोटी अंगुरिन बिच फलधरे और गोरसके पात ॥१॥ काहूको ले देत स्थाम काहूको डहकाबत कोऊ झटक खातहाथतें तब लालन मुसकात जात ॥ रामदासप्रभुकी लीला लख कहत शिवब्रह्मादिक हम न भये अहीर ब्रजमें योंकहि कहि पछितात ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-204
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Aaj dadhi meetho madangopal ..|
आज दधि मीठो मदनगोपाल ॥| भावत मोहि तिहारो जूंठो चंचल नयन विशाल ॥१॥ आने पात बनाये दोना दिये सबनको बाँट ॥ जिन नहींपायो सुनोरे भैया मेरी हथेरी चाट ॥२॥ बहुत दिनन हम बसे कुम्॒ुदवन कृष्ण तिहारे साथ॥ ऐसो स्वाद हम कबहू न चाख्यो सुन गोकुल के नाथ॥३॥ आपन हँसत हँसावत ग्वालन मानस लीलारूप ॥ परमानंदप्रभु हम सब जानत तुम त्रिभुवन के भूप ॥४॥
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NityaPad-205
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Sakhansahit hari jenwat hain chhaak .. premasahitamaiya depthai hitason bahuvidhakeene paak ...1.. subal
सखनसहित हरि जेंवत हैं छाक ।। प्रेमसहितमैया देपठई हितसों बहुविधकीने पाक ।॥१॥ सुबल सुदामा संग सखामिल भोजन रुचिकर खात ॥ ग्वालन करते छाक छुडावत मुखमें मेल सरावत जात ।।२॥ जे सुख कान्ह करत बुंदावन सो सुख तीन लोक विख्यात ॥ सूरस्याम भक्तन वश ऐते ब्रह्म कहावतहैं नंदतात ॥।३॥
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NityaPad-205
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Banamen sthaam charawat gaiya .. bundaavanmein
बनमें स्थाम चरावत गैया ॥ बुंदावनमें बंसी बजाई बैठे क्दंबकी छैया ॥१॥ भांति भांति के भोजन करकें पठये यशोमति मैया ॥ सूरदास प्रभु तुम चिरजीयो मेरो कुंवरकन्हैया ॥३॥
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Ratanjatit giriraj manohar taa madhya ratna singhasana bhaari .. taa parr jugalkishore
रतनजटित गिरिराज मनोहर ता मध्य रत्न सिंघासन भारी ॥ ता पर जुगलकिशोर बिराजत चहुं दिश फूल फलित फुलवारी ॥१॥ झरना सुभग सरोवर सुंदर ता मध्य कमल फूल रहे भारी ॥ हंस चकोर मोर चातक पीक कीर परेवा भंवर गुंजारी ॥२॥ विविध भांत मेवा रस खोबा साज धर्यो सखियन मिल कंचनथारी ॥ हंसत परस्पर प्रेम मुदित मन लेत जात करके मनुहारी ॥३॥ भोग धर्यो प्रीतम प्यारीको श्री जमुनाजल भरी कंचन झारी ॥ पूछत जात आरोगत रुचिसे दास “निजजन_ बलिहारी ॥४॥
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Lalgopal hain anandkand .. baithe hain kalindike tata baantat
लालगोपाल हैं आनंदकंद ॥ बैठे हैं कालिंदीके तट बाँटत छाक यशोदा नंद ॥१॥ हँस हँस भोजन करत परस्पर रस बाढ़्यो रतिरंग ॥ श्री विद्डलनाथ गोवर्धनधारी बैठे जेंबत एक हि संग ॥२॥
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Leeje laal chhaak
लीजे लाल छाक हों लाई । भर भर डला सीस पै धरके जसुमति मात पठाई ।॥।१॥ मूंग भात घृत कढी सलोनी रोटी लीटी अधिक सिकाई ॥ उरदके बडा दहीमें बोरे आदो नीबू सरस खटाई ॥२॥ शाक सुरन बेंगन बथुवा अरु मेथी सरस मूदु चौराई ॥ पूरी पापडी रुचिर रुचिर कचोरी पापड बड़ी पकौडी भुजाई ॥३॥ लुचई मोदक मगद जलेबी गुंजा मठडी अधिक पठाई ॥ माखन खीर खांड बासोंदी दधि शिखरण ओटूयो दूध मलाई ॥।४॥ भोजन बिंजन सब हि मनोहर बीरी सोंधे सरस बंधाई ॥ अ्री विट्वल गिरिधरन' आरोगत भक्तनके सुखदाई ॥५॥।
Nitya Chaak
NityaPad-205
Saarang
Maiya daha dey chhaak pathaai .. badey badey maat badey dabran mein apane
मैया डह दे छाक पठाई ।। बडे बडे माट बड़े डबरान में अपने सिर धर ल्याई ॥९ ॥ गुंजा माट जलेबी लड़॒आ बहुर्यो बहुत मिठाई ॥ सद्य दूध दोहन कीनो हे ऊपर बहुत मलाई ॥।२॥ बेसन के बिंजन बहुतेरे संधानो सुखदाई ॥ जोर मंडली जेबन बैठे हषघीकेस बलि जाई ॥३॥
Nitya Chaak
NityaPad-206
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