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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Chhaak lai jaahu ree merrie maaee jahaan ree milai merau
छाक लै जाहु री मेरी माई जहाँ री मिलै मेरौ कुंवर कन्हाई इह मोदक पकवान मिठाई खीर संजावलि अधिक बनाई आनिहु खिचरी बहुत संधाने पापर सेकि धर्‌यों गुन लाई । पूप सस्कुली पूरी दधि ओवदन बहुत जु रुचि करे खाई ॥ दूरहि तें देखे बलदाऊ देखि कन्हैया छाक है आई । 'परमानंद' मन की सब जानी ऐसी मैया की हों लेऊँ बलाई ॥।
Nitya Chaak
NityaPad-206
Saarang
Bhojan karat nandlal sanga liye gwalball
भोजन करत नन्दलाल संग लिये ग्वालबाल करत हे ख्याल बैठे बंसीवट छेया ॥ पातनपें धर्यो भात दधि सान लिये हाथ मांगत मुसक्यात जात सांवरे कन्हैया ॥१॥ बिंजन सब भांति भांति अनुपम अति कही न जात रुचिसों करी खात मुदित पठड मैया ॥ छीत-स्वामी गिरिधर पिया मधि मंडली बिच शोभित सबको मन मोहे निरखि निरखि लेत बलैया॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-206
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Kawan
कवन बन जैबौ भैया ! आजु । कहत गोविंद सुनों रे गोपौ करहु गबन कौ साजु ॥ ऐसौ कौन चतुर नंद-नंदन ! जो जाने रस-रीति । तहां चलहु जहां हरखि खेलिये अरु उपजै मन-प्रीति ॥ पूरे बेनु विखान महुबरि छीके कंध चढाई । रोटी भात दह्यौ भरि भोजन अरू आगे दे गाइ ॥ ठौर-ठौर कूक देत हैं प्रहसित आए जमना-तीर। परमानंद प्रभु आनंद रूपी राम-कृष्ण दोउ बीर ॥
Nitya Chaak
NityaPad-206
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Seetal
सीतल सदन परम रुचिकारी तहीं जेंमत श्रीगिरिवरधारी ॥ मधुमेवा दधि ओदन बिंजन सीतल परम मधुर सुखकारी ॥॥९॥ सीतल नीर सुगंध सुवासित अपने करले प्यावत प्यारी ॥ कृष्णदास प्रभु प्यारी की छबि पर तन मन धन कीनो बलिहारी॥।२॥
Nitya Chaak
NityaPad-206
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Duhi- duhi lyawati dhauri gaiya |
दुहि- डुहि ल्यावति धौरी गैया | कमल-नयन को अति भावतु है मथि-मधि प्यावति घैया ॥ हँसि-हँसि ग्वाल कहत सब बातें सुनु गोकुल के रैया ! ऐसौ स्वाद कबहुं न चखायो अपनी सौंह कन्हैया ! मोहन! भूख अधिक जो लागी छाक बॉटि लेहु भैया ! परमानंददास' कौं दीजै फुनि - फुनि लेत बलैया ॥
Nitya Chaak
NityaPad-207
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Jembat mohanvarki chhaiyaan dupahareeki biriyaan .. mathat dohni
जेंबत मोहनवरकी छैयां दुपहरीकी बिरियां ॥ मथत दोहनी दूध एक बांटत फल चबेना एक झगरि लेत अपनी अपनी कामरके आसनियां॥ १॥ रससों बेनु बजाबे गावे सारग॑ राग तान रंग लेत मोर मुकटु सीस दीने ॥ 'रामदास' ग्वालबाल मंडल मधि बार बार वारत है सकल मिलि पहोपन दल बीने ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-207
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Syamlal aaou
स्यामलाल आओऔ हो आई छाक सलौनी । डला लाल के घर तें आयो मारग में दै दौनी ।। सियरे भए स्वाद नहीं पैयतु रसके गए रसाइनि नहीं हौनी 'परमानंद' छकहारी बाँकी टेरति टेर सलौनी ॥
Nitya Chaak
NityaPad-207
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Chhaak gwalini laal dhing laaee .. bansivat baithe douu bhaai
छाक ग्वालिनी लाल ढिंग लाई ॥ बंसीवट बैठे दोऊ भाई उपमा कही न जाई ॥१॥ मोर मुकुट मकराकृत कुंडल उर वनमाल सोहाई ॥। संग सखा गायन पाछे तें बोल लिये दोऊ भाई ॥२॥। ग्वाल मंडली कर मनमोहन जेंवत सुखदाई ॥ कोऊ लूटत कोऊ खात परस्पर बात करत मनभाई ॥३॥ देखी ग्वालिनी हु सुख पावत रही ठगी मुरझाई ।। बार बार बलराम स्याम पै रामदास बलि जाई ।॥।४॥
Nitya Chaak
NityaPad-207
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Subal pathaai diyo sudhi laine ajahun chhaak kinny aaee .
सुबल पठाई दियो सुधि लैन अजहुँ छाक किनि आई । स्रमित भई बिरमी नेकु छहियां ग्वारि कदम-तर पाई ॥। क्‍यों री ! कबके मधु चाहत हैं जसुमति कुँवर कन्हाई ॥ जीभ दाबि द्विग भरि लीनेहैं उनिहीं पॉइनि धाई ॥ सखा-वबृंद अंचलु फेरत हैं आगे गई बधाई । “परमानंद' बलि-बलि पूछनि पर कहि कहा व्यंजन लाई ॥।
Nitya Chaak
NityaPad-207
Saarang
Akeli bunn-vann doli rahee . gaain
अकेली बन-वन डोलि रही । गाँइ चरावत कहां रहे हरि काहूने न कही ॥ बडे सवारे निकसे घर तें पठ्यो माई दही। भूख लगी ह्वै है लालन को दुपहर जाम सही ॥ इतनौ वचन सुनत मनमोहन नागरि-बिथा लही। 'परमानंददास' कौ ठाकुर गोकुल रति निबही |
Nitya Chaak
NityaPad-207
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Chhaak khaat govardhan oopar . vaha baapai voe vaa oopar jhapatat
छाक खात गोवर्द्धन ऊपर । वह बापै वो वा ऊपर झपटत गिरनि न देत भू पर ॥ आछे मीठे कहि-कहि नाचत लै-लै कर तें भाजत । सुबल सुबाहु तोक श्रीदामा ग्वाल-मंडली राजत ॥ विविध केलि करत मनभाई परमानंद' हि दीनी । रहसि मन मीनी ॥
Nitya Chaak
NityaPad-207
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Bhojan karat shyam kunjanmein .. gwalan chhaak awaar bhaee tou hoo sakuch naan aaeen manmein ..1.. jamuna
भोजन करत श्याम कुंजनमें ॥ ग्वालन छाक अवार भई तो हु सकुच न आईं मनमें ॥१॥ जमुना जल भरते भई देरी चली थार ले दोऊ करनमें ॥ सुंदर पाक सिद्ध कर लाई लेहो लाल भुजनमें ॥२॥ भली भांति भोजन करवायो जल भर दियो घटनमें ॥ ओक मांड जल पीवत 'रसिकराय_ दई सेनन नेननमें ।३॥
Nitya Chaak
NityaPad-208
Saarang

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