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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Abb key fair leejo sunder paak
अब के फेर लीजो सुंदर पाक सलोने ॥ मीठो भात मधुर दधि मीठे मीठो सिखरन आदि अलोने ॥१॥ मिश्री रोटी माखन ताजो कीनो आज बिलोने ॥ 'रामदास' प्रभु आज छाकमें केतेक कोतिक होने ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-208
Saarang
Gwalin gharaten kaun bulaai .. jaay jimaavo apane patiko
ग्वालिन घरतें कौन बुलाई ॥ जाय जिमावो अपने पतिको यहां क्योंरी तुम आई ॥१॥ यह मर्यादा वेदकी नाही करो अपनी मन भाई ॥ निज पति छांड औरनको चाहत यह तुम कौन बताई ॥२॥। दीन बचन ग्वालिन बोली हम सुत पति छांडके आई ॥ जान्यो मनमोहन भूखे हैं अखिल लोकके राई ॥३॥ वचन सुनत मोहन मुसकाने कर गहि हदें लगाई ॥ दोऊ संग मिली छाक अरोगत दास निरख बलि जाई ॥४॥
Nitya Chaak
NityaPad-208
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Hariko gwalin bhojan laaee .. baithe jahaan govardhan oopar kaanh kunwar sukhdai ..1..
हरिको ग्वालिन भोजन लाई ॥ बैठे जहां गोवर्धन ऊपर कान्ह कुंवर सुखदाई ॥१॥ सखा मध्यतें निकसे मोहन ग्वालिन निकट बुलाई ॥ मिलि एकान्त जेंवत रसबससों 'कुंभनदास बलि जाई ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-208
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Hariko jiwawat vitwalnath ..
हरिको जिवावत विट्वलनाथ ॥ मध्य बैठे मनमोहन राजत सखा मंडली साथ ॥१॥ खट रस विंजन आदि सलोने कोर देत है हाथ ॥ 'रामदास' यह लीला निरखत नेनन किये सनाथ ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-208
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Gharaten chhaak leey aaee gwalan ..
घरतें छाक ले आई ग्वालन ॥ दूरतें ग्वालिन मोहन देखी नेनन सेन बुलाई ॥१॥ सखा संग कोऊ नहीं स्यामके गये चरावन गाई ॥ जब एकान्त देख मोहनको ग्वालिनी मन मुसिकाई ॥।२॥ दोऊ हिलमिल छाक अरोगत बैठ कदमकी छांही ॥ रहस्य निकुंज भवनकी लीला कापे बरनी न जाई ॥३॥ सिव सनकादिक नारद सारद उनहु न देत दिखाई ॥ हरिनारायण स्थामदास _ के प्रभु माई गोपी महा निधि पाई ॥४॥
Nitya Chaak
NityaPad-208
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Mandal madhi chhaiyaan kadamki chhaak arogat ruchi upajaai ..
मंडल मधि छैयां कदमकी छाक अरोगत रुचि उपजाई ॥ विंजन बांट सबनको दीने अद्भुत स्वाद मुख बरन्यो न जाई ॥१॥ जानत वार जेबनकी मैया ताही बेर दई छाक पठाई ॥| तेसीय भूख लागी तेसी ले दीनी हाथ छाक ले आई ॥२॥ अधिक अघाने कहत सखा सब एसो स्वाद हम कब हुन पायो ॥ चत्रभुज' प्रभु गिरिधरके जेंबत आनंद मन हिये हरख बढायो।। ३ ॥
Nitya Chaak
NityaPad-209
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Kaun bunn jaiho bhaiya aaj .. kahat gopal
कौन बन जैहो भैया आज ॥ कहत गोपाल सुनोहो बालक करो गमन को साज ॥१॥ ऐसो चतुर कौन नन्दनन्दन जो जाने रस रीति ॥ तहां चलो जहां हरखि खेलिये अरु उपजे मन प्रीति ॥२॥ पूरे बेनु बखान महुवरी छींक कंध चढाये ॥ रोटी भात दही भरि भोजन और आगे दे ग्वाल गाये ॥३॥ ठौर ठौर कूकैं दे प्रहसत आये जमुना तीर ॥ 'परमानन्द' प्रभु आनन्द रूप राम कृष्ण दोऊ बीर ॥४॥
Nitya Chaak
NityaPad-209
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Kaho tou kadam tarr abb hii chhaak leey
कहो तो कदम तर अब ही छाक ले आऊं ॥ बहुत अवार भई मनमोहन सांझ होत अब विनति कर घर जाऊं ॥१॥। जसोमति पूछत लाल कहां है उनको कहा बताऊं ॥ कहियो जाय हम बसे कुमुदवन बहुत भांत तृण जल सुख पायो यांही गाय चराऊं ॥२॥ ग्वालिन जाय कही जसुमति सो लाबों छाक लालको पहोंचाऊं ॥ पूछत जननी लाल कहां है तब कही लाल जाय बसे कुमुदबन उर आनंद न समाऊं ॥३॥ ले गई छाक स्याम आगे धर हरि मुसकाय कहत बलदाऊ ॥ आवो भैया सब छाक खाय अब सब गायन बछरन वन छोडो चरेंगी जाय बनलोऊ ॥|४॥ बैठे लाल परोसी पातर खात खवबावत हँसत सखाऊं ॥| जूठो कौर मुख देत स्यथाम के 'रामदास या बदन कमल पर निरख निरख बलि जाऊं ॥॥५॥
Nitya Chaak
NityaPad-209
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Srivundavan navanikunj bhramar bhramat karat gunj kusum punj
श्रीवुंदावन नवनिकुंज भ्रमर भ्रमत करत गुंज कुसुम पुंज ललित लता गहवर वन नीको ॥ जमुनातीर अंजन खर हरे गाय चरवेको प्यारीको धाम लाल भावतोहे जीको ॥९॥ रूचि उपजत छाक खात सखन सहित अति अघात परम मुदित फिर खात पठई मैया नीको ॥ कृष्णदास गिरिधरको कौतुक देख सुरपुर विमान कुसुमवृष्टि करत और या सुखतें फीको ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-209
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Mandal jore jore bethore bhaiya sub mill bhojan keeje .. veejan munn ranjan leey aaee rangili gwalan
मंडल जोर जोर बेठोरे भैया सब मिल भोजन कीजे ॥ वीजन मन रंजन ले आई रंगीली ग्वालन बदननिरख जीजे ॥१॥| आपुन खात खवावत ग्वालन फिर चाखत रसिकराय बदन निरखनअधघैजे ॥ हरिनारायण स्थामदासके प्रभुकी लीला परमत बाड़ी जाय जमुना जल पीजे ॥३॥
Nitya Chaak
NityaPad-209
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Aii gwal mandali mein
ऐ ग्वाल मंडली में भोजन करत गुपाल ॥ पठई छाक जसोधामैया बिजन बोहत रसाल ॥१॥ मधुमेवा पकवान मिठाई लाई सुन्दर बाल ॥ खात खवावत हसत परसपर तारी दे नंदलाल॥२॥ रूच ऊपजत तब बतियां मीठी करत सबे बिध ख्याल ॥ रसिक 'सिरोमणी मिरि की छैयां राजत ऊरबनमाल ॥३॥
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NityaPad-210
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Chhakakon bhaee aver aaee naanhe
छाककों भई अवेर आई नांहे छक हारी मोहें लागी भुक भारी केसके रहोंगो ॥ ऐगैयां मेरे मनकी छैयां दोहेगे बलदाऊ भैया दुध पीय रहुंगो।॥१॥ बावा सों कहा कहों मैया सुधभुल गई मथत हे दूध मधुर माखन होहु चहुंगो ॥ श्रीविद्ल गिरधरन लाल कहे दाव मेरो पर्‌योहे तब सोही सोही करुंगो ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-210
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