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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Bhojan
भोजन करत नंदलाल संगलियेग्वाल बाल करतहें ख्याल बेठे सीतल छैया ॥ पातन पर धरत भात दधि सीखरन लिये हाथ मांगत मुसक्यात जात सांवरोकन्हैया । १॥ बिजन बहों भांत भांत अनुपम छबिकहीनजात रूचसो लेत फिर खात हीर्देसोपठई मैया ॥ छीतस्वामीगिरवर धर मंडल मध्य बिच सोहत सबन को मन मोहत मोहन निरख लेत बलैया ॥१॥
Nitya Chaak
NityaPad-210
Saarang
Vundaavan navan
वुन्दावन नवन कुंज भमर भ्रमत करत गुंज कुसम पुंज ललित लता गहेबर बन नीको ॥ जमुनातीर आजन खरीःहरी गाय चखेेको: प्यारी को धाम लाल भांवतो हे जीको ॥१॥ रूच ऊपजत छाक खात सखन सहेत अत अघात प्रमुदित मन होत आनंद क्थोंन परत हीयको ॥ कृष्णदास गिरधरको कोटिक सुरपुर विमान कुसम वृष्टि करें ओर या सुखते फीको ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-211
Saarang
Chalatamen laagat chhaak
चलतमें लागत छाक सुहाई ॥ संजो वटमें केसो लागत सुख बिजनसकल मिठाई ॥१॥ अति आनंद नंदजुकी घरनि धरत बनाय बनाई ॥ बालकेहेत चलो अति आतुर बेगहो पोचो जाई ॥२॥ निकसे ग्वाल कंधन पर कावर सुख लागतहें माई ॥ श्रीविट्टल गिरधर दाऊपे बेग पोहोचो जाई ॥३॥
Nitya Chaak
NityaPad-211
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Aho ghar ghar
अहो घर घर तें आई छाक ॥ खाटे मीठे ओर सलोने बिविध भांतके पाक ॥१॥ मंडल रचना कर जमुना तट सघन कंदब की छांह ॥ गोपीग्वाल सकल मिल जेवत मुख ही सराहत जात ॥२॥ बांटली मोहन दोऊ भैया कर: दोना अत ही सीहात ॥३॥ टेंटी साक संधानो रोटी गोरस सरस महेरी ॥ कुमनदास गिरधर लिपटत नाचत देदे फेरी ॥४॥
Nitya Chaak
NityaPad-211
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Mohan chhaak baantat jahaan...
मोहन छाक बांटत जहां॥। सुबल सुबाहो श्रीदामा टेरत कर कर ऊंची बाह ॥१॥ गोवर्धनकी सिखर पर बेठे तरु कदंब की छाह ॥ हंस हंस भोजन करत परसपर ले लेकरतल मांह ॥ २॥ सिवसनकादीक से निज सेवक या सुख कों ललचाय ॥ सूरदास गिरधरकी जूठन मांगे हंस हंस खाय ॥३॥
Nitya Chaak
NityaPad-211
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Akeli bunn bunn
अकेली बन बन डोल रही ॥ गाय चरावत कहां रहे हरि काहु ने न कही ॥१॥ बड़े सवारे निकसे घरतें पठयहे माय दई ॥ मुख लागी हेहे लालनकों दुपहरी घाम सई ॥२॥ इतनो बचनसुनत मनमोहन नागर वृथा लई।॥। परमानंद दासको ठाकुर गोकुल रतनबई ॥३॥
Nitya Chaak
NityaPad-211
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Pranpyari prannath douu sanga mill karat bhojan saghan kunjamen russ bharey ..
प्राणप्यारी प्राणनाथ दोऊ संग मिल करत भोजन सघन कुंजमें रस भरे ॥ कनक पात्रन मध्य बिविध बिजन सजे: सरस पकवान ओदन आद घृत बरें ॥१॥ खीरनवनीत दघि दुध सिखरन आद: दार ओदन कडी बड़ी पापरधरे ॥ रसिक को दास तहां करत मनुहार बहो: लेत दोऊ कोर छबि निरखत मनमथ टरें ॥२॥ देख चल सखी दोऊ ऊसीर के मेहेलमें करत भोजन अंस भुजन दीये ॥ परसपर देत दोऊ कोर मुख मधुर अति हसत ऊरलसत रति रसन किये ॥३॥ फेलरह्यो मधुर सौरभ सघन कुंजमें: फुल रहे फुल बहो रंग किये ॥ रसिक को दास कहां कहे देखे बने रसिक दोऊ रस भरे बसो हीये | ४॥
Nitya Chaak
NityaPad-211
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Subal girdhari chadhat terat .. aavno
सुबल गिरधारी चढत टेरत ॥ आव्नो बेग चतुर छक हारी गिरधर पेंडो हेरत ॥१॥ भई अवार भुख लागी जब तबही ऊपरना फेरत ॥ कुम्भनदास ओसर पोची रस में दान निवेरत ॥२॥
Nitya Chaak
NityaPad-211
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Jugal russ bharey bhojan karat kunj mein tarran tanaya teer att
जुगल रस भरे भोजन करत कुंज में तरन तनया तीर अत सुहायो॥ लेत झुक झुक कोर झपट दोऊ हाथतें हसत बहु भांत मन करत भायो।॥१॥| करत मनुहार बहो भात मिल: सुन्दरी: लिजीये लाल बहो बिध बनायो ॥ दिजीये कृपा कर रसिक के दासको सेस ये परम फल मुनिन गायो॥ २॥।
Nitya Chaak
NityaPad-211
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Bhojan key bhatin kii kraanti kachhu kahee naan jaat ..
भोजन के भातिन की क्रान्ति कछु कही न जात ॥ भांति भांति राखे पनवारे परोसिके मंजुल मूदुल मधु मोदक सलोने साद सरस रस राखे रस के ॥१॥ अरस परस कछु जेमत रसिकवर सब रहो वूंदाविपिन बरसिकें। कोर के उठायवेते कर ना कह्यो करत विवस है जात मुख माधुरी दरसिकें।।२॥
Nitya Chaak
NityaPad-212
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Puck‍wakhajurjambubadrifal leho kaachhan terridwar ..
पक्‍्वखजूरजंबूबदरीफल लेहो काछन टेरीद्वार ॥ लरका यूथसंग बलमोहन चोके करत विहार।। १ ॥ सुंदर कर जननीकेनोंदीनों ले धाये तब नंदकुमार | हीरारत्ननपूरीत भाजन ऐसे परमउदार ॥।२॥ उरसों लगाय खातखातचले मीठे परम रसाल ॥ जूठी गुठली मारत गोविंद के हँसत हँसावत
Fal Falaare
NityaPad-212
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Aaj vrindavipin kunj adbhut naee ..
आज वृन्दाविपिन कुंज अद्भुत नई ॥ परम सितल सुख श्यमसो भीत तहां माधुरी मधुर ओर पीत फुलन छई ॥१॥ बिविध कदली खंभ झुमका झुक रहे: मधुप गुजांरसुन कोकीला धुन ठई ॥ तहाँ राजत वृषभान की लाडइली मनो घनस्यथामढीग ऊलही सोभाजई ॥२॥ तरन तनया तीरधीर समीर जहां सुनत ब्रजब्रधु अतहीं हीये हरखत भई ॥| नंददासनिनाथ ओर छबि को कहे निरख सोभा नैनपंगुगत व्हे गई ॥३॥
Nitya Chaak
NityaPad-212
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