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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Vrij byauhar nirastra nainan vidhi koabhiman gayo . | वृज ब्यौहार निरस्त्र नैनन विधि कोअभिमान गयो ।
गोपी ग ्वाल गोसुत परचारग हू हों क्यों न भयो ॥
फल अंगुरिन अंगुरिन बीच राखे ओदन माज दयो ।
आपुन खात खवबावत ग्वालन बाल विनोद ठयो ॥
अहो भाग्य महोभाग्य ननन््दजू तप को फल जू लीयो ॥
ललिता ललित सूर के प्रभू की ब्रजजन गाय जीयो ॥२॥ | Nitya Chaak | NityaPad-212 | Saarang |
Chhaakalen ghar gwal pathaaye .. | छाकलेंन घर ग्वाल पठाये ॥
कहीयों भूखलागी है भैया अति आतुर हम आये ॥१॥
बोल लिये जसुमति रोहिणी पनवारो सब साज।
सावधान जैयो मारग में दृष्टी न लागे आज ॥२॥
पहोचेजाय पारोसोली में देखे ग्वाल गोपाल भैया सुनो
छाक आई आनंद सब ग्वाल ॥३॥
नवल प्रीया प्रीतम दोऊ विलसत नवमंगल गावत ब्रजबाला ॥
परमानंददास तीहे ओसर निरखत ओर धुरि त्रिय जाला | ४॥ | Nitya Chaak | NityaPad-212 | Saarang |
Vrajmein kaachhani bechan aaee .. | ब्रजमें काछनी बेचन आई ॥
आनउतारी नंदगृह आंगन ओढी फलन सुहाई ॥१॥
ले दौरे हरिपेट अंजुली शुभकर कुंवरकन्हाई ॥
डारतही पुक्ता फल हवे गये यशुमति मनमुसकाई ॥॥२॥
जे हरि पदारथ दाता फल वांछित न अघाई ।।
परमानंद याको भागबडोहे विधिसोंकहावस्याई ॥३॥ | Fal Falaare | NityaPad-212 | Saarang |
Kharbuja mishree aarogat ravija tata kunjanmein giridhar .. | खरबूजा मिश्री आरोगत रविजा तट कुंजनमें गिरिधर ॥
'ललिताचन्द्रभगा चन्द्रावली लावत डला डलैया भर भर ॥१॥ कोउ गोवत
'कोउ बेनु बजावत कोउ ढोरत विजना ले ले कर ॥ कोउ करत मनुहार जोर कर
कोउ खवावत हसि वलल्लभवर ॥॥२॥ कोउ लावत कर तोर कुसुमकली
कोउ गुहत वनदामभ बैठकर ॥ कोउ पहेरावत कोउ मुख निरखत कोउ देखावत
ले दर्पण कर ॥३॥ कोउ आबत कोउ फिरत कुंजनमें कोउ बातें करत
परस्पर ॥ 'कृष्णदास' ठाड़ो अवलोकत लेत बलेया बार फेर कर ॥४॥ | Fal Falaare | NityaPad-213 | Saarang |
Jamuna tata kunjanmein giridhar aarogat kharbuja buraa .. | जमुना तट कुंजनमें गिरिधर आरोगत खरबूजा बुरा ॥
ललितादिक गावत और बजावत ले कर बीन पखावज तंबुरा ॥१॥ भामिनी
मेवा भर डलियनमें लाई पहरे चटकीलो चुरा ॥ 'कृष्णदास प्रभु बनठन सुंदरि
आई गुंथि कुसुम सिर जुरा ॥२॥ | Fal Falaare | NityaPad-213 | Saarang |
Kouu maaee ambabechanai .. | कोऊ माई आंबबेचनआई ॥
टेर सुनत मोहन उठथाये भीतरभवन बुलाई ॥१॥
मैयामोहि आंब लेदेरी संगसखा बलभाई।।
परमानंद यशोमति आनदिये खाये कुं बरकन्हाई ॥२॥।
| Fal Falaare | NityaPad-213 | Saarang |
Lyaay kinn deree maiya moko aeka gathaya aambaki .. | ल्याय किन देरी मैया मोको एक गठया आंबकी ॥
नंद हँसत मन मुदित जसोदा सुन सुन बतियां श्याम की ॥१॥
तज खोबा बांसोदी मेघा बलिहारी या नाम की ॥
अटकत मांगत मिसी रोटी भुरकि हैं सो मेरे काम की॥।२॥
धन धन ब्रज धन धन गोपीजन ब्रज समीप नंद गाम की ॥
सुख बिलसत हुलसत मुख निरखत सब संपत सूर स्थाम की ॥३।॥। | Fal Falaare | NityaPad-213 | Malhaar |
Bhaave mohe guda garde (sherdi) aru bair .. aur bhaave mohe send kachariya laaye nandju hair ..1.. madhu meva | भावे मोहे गुड़ गार्डे (शेरडी) अरु बेर ॥ और भावे मोहे सेंद कचरीया लाये नंदजु हेर ॥१॥ मधु मेवा
पकवान मिठाई और बिंजन की ढेर।॥ परमानन्ददास को ठाकुर पील्ला लायो
घेर ॥२॥ | Fal Falaare | NityaPad-213 | Saarang |
Kouu maaee bair bechan aaee ... sunee tair nandravar mein bheetar | कोऊ माई बेर बेचन आई ॥। सुनी टेर नंदरावर में भीतर
भवन बुलाई ।॥। ९ ॥ सूखत धान पर््यो आंगनमें कर अंजुली बनाई ॥ ठमकठमक
चलत अपने रंग यशोमति लेतबलाई ॥|२॥ लये उठाय चुचकारहियो भर मुख
चुंबत मुसकाई ॥ परमानंद यशोमति आनदिये खाये कुंवरकन्हाई ॥३॥। | Fal Falaare | NityaPad-213 | Saarang |
Jugal russ bharey bhojan karat kunj mein tarani | जुगल रस भरे भोजन करत कुंज में तरनि
तनया तीर अति सुहायो ॥ लेत झुक झुक कौर झपटी दोऊ हाथ ते बहु भांति मन
करत लायौ॥१॥ करत मनुहार बहु भांति मिलि सुन्दरी लीजिये लाल बहुविध
बनायो॥ दीजिये कृपाकरि रसिक के दास को सेस यह परम फल मुनिन गायो ॥ २॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-214 | Saarang |
Chiksoli mein chanaa churaaye .. | चिकसोली में चना चुराये ॥
गारी दे दौड़ी रखवारन ग्वाल सहित गोपाल भजाये ॥१॥
हरे बुट दाबे बगल में स्वास भरे गहवर बन आये॥
नागरिया बैठी छक हारिन छील छील नंद लाल खबाये।। २॥ | Fal Falaare | NityaPad-214 | Saarang |
Bhojan kunjabhavanmein bhaanvate karat bhale nanabhavanason . | भोजन कुंजभवनमें भांवते करत भले नानाभावनसों ।
अरसपरस कौर मधुररस देत समीर चलें चायनसों ॥१॥।
तब हट करत हठीली हठसों पिय पसरत दृग पायनसों ॥
करत पानरस रूपमाधुरी हिलमिल चलत सुभायनसों ॥२॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-214 | Saarang |
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