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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Srivrindavan navanikunj bhramar bhramat karat gunj kusum punj lalit lataa gahwar bunn neeko .. | श्रीवृन्दावन नवनिकुंज भ्रमर भ्रमत क रत गुंज कुसुम पुंज ललित लता गहवर बन नीको ॥
जमुनातीर आंजनखर हरे गाय चरवेको प्यारीको
धाम लाल भावतहे जीको ॥१॥ रुचि उपजत छाक खात सखन सहित अति
अघात परम मुदित फेर खात पठई मैया नीको ॥ कृष्णदास गिरिधरको कौतुक
सुरपुर विमान कुसुम वृष्टि करत ओर या सुखतें फीको ॥२ ॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-214 | Saarang |
Mill jembat ladililal duhunkar vyanjan chaaru sabai sarasen .. | मिल जेंबत लाडिलीलाल दुहुंकर व्यंजन चारु सबै सरसें ।।
करकंपत हाथते छूट परे कबहुं ग्रास मुखसों परसें ॥१॥
हठके मनमोहन हार परे सखी हाथ जिमावन को तरसें ॥|
सख्त्री माधुरी कुंजनमें बरसें ॥२॥
सखीसोंझलियेचहुँओरखरी निरखेहरखे दरसेपरसें ॥
बहसुखसिंधुकही न परे सब सखियन तहांहरिवंशलसें ॥३॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-214 | Saarang |
Bhojan karat bhaanvate jiyake navalnikunj mahal mein ..| | भोजन करत भांवते जियके नवलनिकुंज महल में ॥|
अरसपरस दोऊ खात खवबावत जोसुख उपजत लोचन हियमें ॥१॥
कीनो कछुक मनोरथ मोहन हेत सवार ग्रास मुख तियके ॥
हँस चितयो जब रूपमाधुरी रहे गयो कोर हाथही पियके ॥२॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-214 | Saarang |
Baithe laal kunjanmein joe paauun .. | बैठे लाल कुंजनमें जो पाऊं ॥
स्थामास्याम भावती जोरी अपने हाथ जिमाऊं ॥१॥
चंदन चर्च पहोपकी माला हरख हरख पहराऊं ॥
श्रीभट देत पानकी बीरी चरणकमल चितलाऊं ॥२॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-214 | Saarang |
Dhoryon satuake sanga jewat bejarki rotty nandlal .. tenty saak sandhaano modak laaee | धोर्यों सतुआके संग जेवत बेजरकी रोटी नंदलाल ॥ टेंटी साक संधानो मोदक लाई
डलियन भर ब्रजबाल ॥१॥ मेवा अमरस गोरस बूरा दधि ओदन पकवान
रसाल । 'कृष्णदास' प्रभु कुंज भवनमें निरख अखियां भई निहाल ॥२॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-215 | Saarang |
Jugal russ bharey bhojan karat kunj mein | जुगल रस भरे भोजन करत कुंज में
तरनि तनया तीर अति सुहायो । लेत झुक झुक कोर झपटि दोऊ हाथ तें बोहों
भांति मन करत लायो॥१२॥ करत मनुहार बहु भांति मिलि सुंदरी लीजिये
लाल बहुविध बनायो। दीजिये कृपा करि रसिक के दास को शेष यह परम
फल मुनिन गायो ॥२॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-215 | Saarang |
Srigovardhangiri kandara mein bhojan | श्रीगोवरधनगिरि कंदरा में भोजन
करत है पिय प्यारी । आसपास जुवति सब राजत देत परस्पर कर मनुहारी ॥ १॥
सखिन के भावकी सामग्री लेत श्रीललिता निहार निहारी । कुंभनदास प्रभु
लाल गिरिधर को देत श्रीराधा प्यारी ॥३॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-215 | Saarang |
Kunj mein jembat sthamastham . aas-paas maalati madhvi bibidh kusum banyo dhaam .. | कुंज में जेंबत स्थामास्थाम । आस-पास मालती माधवी बिबिध कुसुम बन्यो धाम ॥
पय पकवान मिठाई मेवा भरि-भरिं थाल जु पाए। रुचि सों परस्पर खात
खबावत जुगल रूप मन भाए ॥| सखी एक सनमुख भई अचवति जमुनाजल
झारी लै हाथ । बीरी देति सम्हारि दुहुँनि मुख उर आनंद न समात ॥ बैठे जाइ
कुसुम-सिज्ञा पर दंपति सब सुख-रास । बिविध बिहार किये मन भाए बलि
“परमानंददास' ॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-215 | Devgandhar |
Kunj mein baithe | कुंज में बैठे
जुगल-किशोर । अरस-परस दोउ खात खवावत रूचि सों दै-दै कौर ॥
ललितादिक सब सखी परोसति लोचन कियें चकोर । मधु मेवा पकवान मिठाई
लावति हैं चहुँओर ॥ हास बिलास बिविध रस पीवत मधुर बचन चितचोर । तन
मन धन बारति 'परमानंद' करि अंचल की छोर ॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-215 | Saarang |
Aho subal aho sridama parivrit arjun bhoj madhumangal tokbahu or kachhu | अहो सुबल अहो श्रीदामा परिवृत अर्जुन भोज मधुमंगल तोकबहु ओर कछु
लीजे ॥ चल भैया भावत सो लेहो देहो सबहिन को सोंज रही ब्होत बांटि
ग ्वाल को दीजे ॥१॥| अबहि ओद करत पान अति अघान रुचि न रही अचवन
करी पान लेहो यह आज्ञा कीजे॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधर अब बैठे श्रम होत
पान खाय कुंजन में नेक लोटि लीजे ॥२॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-215 | Saarang |
Kunjan kunjan maadho dolan . gwal baal sanga khelat mohan | कुंजन कुंजन माधो डोलन । ग्वाल बाल संग खेलत मोहन
बोलत मधुरे बोलन ॥१॥ लेले नाम बुलावत गायन धोरी धुमर मदन गोपाल
दूरि ग्वाल जान जीन । देहूं धरो सबमिल ग्वाल ॥२॥ बहोत बेर भई है बहोरि
भुखे हे नंदलाल । जन गोविन्द छाक ले आयो बाट देहो वृजलाल ॥३॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-216 | Saarang |
Jaani mesh sankraati | जानि मेष संक्राति
श्री विद्डल धरत भोग सतुवाको गिरिधर । धूप दीप तुलसी संखोदक कर
संकल्प दान दे द्विजबर ॥१॥ मेवा मोदक ले कर अपने अरोगत हैं स्थाम सुन्दर
वर | 'कृष्णदास' प्रभु कुंज भवनमें अति आनंद भरे धरनिधर ॥२॥ | Kunj Bhavan | NityaPad-216 | Saarang |
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