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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Chali dekhi sakhi vidhi aajbhali navkunjan mein millie jein matari ..
चलि देखि सखि विधि आजभली नवकुंजन में मिली जें मतरी ॥ पिय हाथ हठीली कीजे मनको पंगु शीज्ष धरे नहीं चितबत ही ॥१॥ ललितादि सखी करजोरी रही अरु करे विनति नहीं हितवतरी ॥| यह सुख माधुरी जो न लहे वब्रथादिन योही वितवतरी ॥२॥
Kunj Bhavan
NityaPad-216
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Bhojan karat nandlal sanga leeye gwalball karat hein khyaal baithe bansivat chhaiya .
भोजन करत नंदलाल संग लीये ग्वालबाल करत हें ख्याल बैठे बंसीवट छैया । पातनपें धर्यो भात दधि सानलीये हाथ मांगत मुसक्‍्यात जात सांवरे कन्हैया ॥१॥ बिंजन सब भांति भांति अनुपम अति कही न जात रुचसो करी खात मुदित पठई मैया । छीतस्वामी गिरिधर पीना मधि मंडली बिच शोभित सबको मनमोहे निरखी निरखी लेत बलैया ॥२॥।
Kunj Bhavan
NityaPad-216
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Dhauryon satuba rotty sanga arogat vrajrajkumar . madhur misht sunder
धौर्यों सतुबा रोटी संग अरोगत ब्रजराजकुमार । मधुर मिष्ट सुंदर अति ग़ाढो लाई परम चतुर ब्रजनार ॥१॥ सखी सहचरी ले कर अपने ढोरत विजन बदन निहार । कृष्णदास' प्रभु कुंज भवनमें जेबत उपजी रुचि अपार ॥२॥
Kunj Bhavan
NityaPad-216
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Bhojan karat naval piya pyaari . naval neh navkunj singhasana
भोजन करत नवल पिय प्यारी । नवल नेह नवकुंज सिंघासन नवरंग बैठे रसिक बिहारी ॥१॥ नवलथार नवलखटरस बिंजन परोसत नवल सखि ललितारी॥ भ्रकुटी अरस परस चितवन पर परमानंद दास बलिहारी ॥ २॥
Kunj Bhavan
NityaPad-216
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Vrajnari ghar gharaten aaeen satuba bhog dharanko giridhar .
ब्रजनारी घर घरतें आईं सतुबा भोग धरनको गिरिधर । बहोत सुगंध डार ता भीतर कर कर मोदक लाई थार भर ॥१॥ बैठे जहां निकुंजभवनमें श्री ब्रजराज कुंवर वर कुंवरी ॥ 'कृष्णदास' प्रभु प्रेममुदित दोऊ आरोगत पिय प्यारी ॥ २॥
Kunj Bhavan
NityaPad-216
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Aeye gwal mandali jore raaje kardambakhandi
ए ग्वाल मंडली जोर राजे कर्दंबखंडी मधि दुपहरीकी बिरियां बटतररावटी रची बनाय उसीरकी ॥ खटरस व्यंजन अद्भुत मनरंजन पठये नंदरनी आपडलाधरे सीस आवतकल किंकनी मंजीरकी ॥ १ ॥ सींचेप्यासे खसखानेत्रिविध समीर बहत अतर गुलाबसींचे चंदनके पंक रपटी करकी ॥ छुटतफुहारेफूंही कुसुमन बनमाल गुंही जेंवत घनस्थाम सुंदर धोंधी करत बींजनाकरके समीर की ॥१॥
Useer Chaak
NityaPad-217
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Seetal
सीतल सदनमें जेंबत मोहनग्वाल मंडली लेसंग जोर ॥ सीतल छांहसीतल बिंजनभाव सीतलतन मुदीतहोतलेतकोर ॥॥१॥ सीतल सुगंधमंद बहत वायुसीतल अंग अरगजा लेप चंदन खोर ॥ सीतल होत नयन सीत अंग अंग चेन गिरिधर पर कुंभनदास डारत तुनतोर ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-217
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Useer
उसीर महल में बिराजे मंडल मध्य मोहनछाकखात ॥ ओदनरोटी जंघाधरेलाल शाकपाक फल रसाल सीलापर गोरसकेपात ॥१॥ चहुंओर मेंघज्यों छूटत फुहारे फुंहीकबहु सुबलगोद हसिढरजात ॥ नंददासप्रभु स्वामहाकतर आपुन हँसत हँसावत ग्वालन सरस बनावत बात ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-217
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Shayamadhaktar chhaak aarogat mandaliruchi prem sukhakaari ..
शयामढाकतर छाक आरोगत मंडलीरुची प्रेम सुखकारी ।। उसीर महेल मध्य कुसुमरावटी बनी सधनकुंजलतामें राजत पियाप्यारीकेलि मनुहारी ॥१॥ जाई जुई चमेली बेलि रायबेलि कदम सिखंडी मध्य गुलाब फूलरी॥ ब्रजाधीश सुख विलास जेंवत हरि मंडल मध्यतामें समीप ठाडी ढोरत बींजनारी ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-217
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Peet uparna baare dhota kabahuki terat gwalni ..
पीत उपरना बारे ढोटा कबहुकी टेरत ग्वालनी ॥ छाक बनायलेआई विविध विध कार्लिंदीनी तीर उपहारनी ॥१॥ कहा लेओगे एसीगाय चरावेमें जाय समालोकयोंन एसी छकहारनी ॥ रसिक प्रीतम तुमरूप बिमोही कुंजनकुंजबिहारनी ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-217
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Ladilochhakkhat banmaanh .. apane sanga key sakhan bulawat karkar unchibaanh ..1... mereri
लाडीलोछाकखात बनमांह ॥ अपने संग के सखन बुलावत करकर ऊंचीबांह ॥१॥। मेरेरी सनमुखनंदनंदन बेठ कर्दंबकीछांह ॥ अति कोमल लटकत उरऊपर सघन पांतकीलोंह ॥२॥ आइरी देखतुं उनको, मोहे अचंभों आवे ॥ श्रीविद्डल गिरिधरनलालकी मनसगरी सुधि लावे ॥३॥
Useer Chaak
NityaPad-217
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Shyam`dhaaktar mandal jore jore bethe abchhakkhat dadhee odan ..
श्याम`ढाकतर मंडल जोर जोर बेठे अबछाकखात दधी ओदन ।। सघन कुंजमध्य चंदनके महेल रचिउसीर रावटी चहुँओर छीरकत गुलाब जलसोदन || १ ॥ आसपास मिल बेठे सखासब रुचिरडला भरे प्रेम प्रमोदन । परमानंद प्रभुगोपल अद्भुतगुन रूपरसाल आरोगत मंडल मध्य. सुबल सुगोधन ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-217
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