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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aaj merey mill baithe maheman ..
आज मेरे मिल बैठे महेमान ॥ चंदन भवन मांझ सीतल व्यंजन धरे गोपीजन आन ॥१॥ धन्य भाग्य हे आज हमारे चंदन धर्यो है सान॥ परम हुल्लास भई गोपीजन गावत जन कल्यान ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-218
Saarang
Yamuna tata bhojan karat gopal ..
यमुना तट भोजन करत गोपाल ॥ विविध भांतदे पठयो यशोमति व्यंजन बहोत रसाल ॥|१॥ ग्वालमंडली मध्य बिराजत हँसत हँसावत ग्वाल ॥ कमल नयन मुसकाय मंदहँस करत परस्पर ख्याल ॥२॥ कोउ ब्यार दुरावत ठाडी कोउ गावतगीत रसाल ॥ नंददास तहां यह सुख निरखत अखियां होत निहाल ॥३॥
Useer Chaak
NityaPad-218
Saarang
Shobhit hain anga anga chandan .. binjan
शोभीत हैं अंग अंग चंदन ॥ बिंजन साज धरे पनवारे बहु विध सीरे खंडन ॥१॥ पीत पिछोर रंगी केसर रंग जोजो भावे सोई सोई लेहुन॥ सुरदास निरख निरख छबि करों चरन रज बंदन ॥२॥।
Useer Chaak
NityaPad-218
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Bado meva aeka vrajmein tenty ..
बडो मेवा एक ब्रजमें टेंटी ॥ जाको होतहे साग संधानो ओर बेझरकी रोटी ॥१॥ भरिभरिडला जब पीवनलागी बडेगोपकी बेटी ॥ कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर भुजओढनीलपेटी ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-218
Saarang
Tapan lagyo dhaam parat atee dhoop bheya kahu chheya sheetal
तपन लाग्यो धाम परत अति धूप भेया कहु छेया शीतल देखो।। भोजन को भड वार लागीहे भूख भारी मेरी और तुम पेखो ॥१॥ बरकी छैयां दुपहरीकी विरियां गेया सिमिट सबही जहां आवबे ॥ नंददास प्रभु कहत सखनसो सोड़ ठोर मोहि भावे ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-218
Saarang
Chhaak khaay bansibat phir chaley
छाक खाय बंसीबट फिर चले यमुना तट तहां जाय धोवत मुख धीर समीरन ॥ फैंटा खोल पोंछत हाथ सखा सब लिये साथ चले जात दावानल खात मुख बीरन ॥१॥ गाय बच्छ चरत जहाँ कुसुमनकी लता तहाँ बैठे जाय ड्रमनबीच बोलत पीक कीरन ॥ चत्रभुजप्रभु सखनसंग गावत सारंग राग धुनसुन मृग आये घेर सुधन रही शरीरन ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-218
Saarang
Thaadhi gopi nipat sayani laai chhaak bhalee
ठाढी गोपी निपट सयानी लाइ छाक भली बीरियां ॥ भूख लागी अब ही देखत री चढि कदम की डरीयाँ ॥।१॥ बैठी पार आइ हों कब की आई नाव यह घरीयां ॥ दीजे बांट छाक घर घर की जब झारी भर धरीयां ॥२॥ ग्वाल सखा सब कहत स्याम सों जेवो पायन परीयां ॥ छीत स्वामी गिरिधरन श्री विड्डल बहुत निहोर करीयां ॥३
Naav ke Chaak
NityaPad-219
Saarang
Tum pein curry haye bhayo tumaro kaam ..1.. pratham naav tum hii pein laayo gaee beet jug
तुम पें करी है भयो तुमारो काम ॥१॥ प्रथम नाव तुम ही पें लायो गई बीत जुग जाम ॥ कछुक लेहो मिलहे फिर देहें सब सुख सुंदर स्याम ॥।२॥ नाम चंद्रावली गोप गोधन घर रीठोडा मेरो गाम ॥ 'छीत स्वामी गिरिधरन श्री विड्ल कहा कोन सो धाम ॥३॥
Naav ke Chaak
NityaPad-219
Saarang
Tapan lagyo ghaam parat atee dhoop
तपन लाग्यो घाम परत अति धूप भैया कहं छांह सीतल किन देखो ॥ भोजनकुं भई अवार लागी हे भूख भारी मेरी ओर तुम्र पेखो ॥१॥ बरकी छेयां दुपेर की बिरियां गैयां सिमिट सबही जहां आवे॥ नंददास प्रभु कहत सखनसों यह ठोर मेरे जीय भावे ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-219
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Dekh chali sarbi douu
देख चलि सरबी दोऊ उसीर के महल में करत भोजन अंसर भुजन दीये ॥ परस्पर देत दोऊ कोर मुख मधुर अति हँसत उर लसत रति रसन पीये ॥ ९ ॥ फेल रहो मधुर सौरभ सघन कुंज में फूल रहे फूल बोहोरंग कीये ॥ रसिक को दास कहा कहे देखे बने रसिक दोऊ रस भरे बसो हीये ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-219
Saarang
Bunn bunn terat firat gwalni leeje hoe sunder vraj naayak ..
बन बन टेरत फिरत ग्वालनी लीजे हो सुंदर ब्रज नायक ॥ आज अबार भुली हों मारग पावत नहि सुखदायक ॥।१॥ चंदन कुंजमें मिलि बैठे त्रज बालक संग लिये ब्रज नायक ॥ चतुर बिहारी गिरधारीजु लेहो किन पाछे जेंहों घर सास रीसायक ॥२॥
Useer Chaak
NityaPad-219
Saarang
Gopi nipat sayani laai chhaak bhalee
गोपी निपट सयानी लाइ छाक भली बीरियां ॥ भूख लागी अब ही देखत री चढि कदम की डरीयाँ ॥।१॥ बैठी पार आइ हों कब की आई नाव यह घरीयां ॥ दीजे बांट छाक घर घर की जब झारी भर धरीयां ॥२॥ ग्वाल सखा सब कहत स्याम सों जेवो पायन परीयां ॥ छीत स्वामी गिरिधरन श्री विड्डल बहुत निहोर करीयां ॥३॥
Naav ke Chaak
NityaPad-219
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