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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Laaee jasomati maiya bhojan keeje laal .. vinjan dharey
लाई जसोमति मैया भोजन कीजे लाल ॥ विंजन धरे चटपटे मीठे लीजे हो सुंदललाल ॥९॥ चंदन भवन बनाय स्वच्छ कर कर दिठोंना भाल ॥ परमानंद प्रभु ललित त्रिभंगी बहत चहूंदिस ख्याल ॥२॥ हक राग सारंग
Useer Chaak
NityaPad-219
Saarang
Shree jamuna puleen kii lonan baadhi jayman koun
श्री जमुना पुलीन की लोनन बाढी जेमन कों लाइ हरि छाक।॥ आड़ आज सीदोसी धर तें बैठन कों पायो इक ढाक ॥१॥ ताकी छांय गाम में बैठी तब कोऊ ग्वालन मारी हांक ॥ बोलो मल्हा नाब किन लावों स्रवन सुन्यों जब एसो वाक॥२॥ अतुर व्है जमुना तट आई देखत तुम इक टक रहे ताक॥ कुंभनदास प्रभु गोवरधनधर लेहो सँवार अपनो पाक ॥३॥
Naav ke Chaak
NityaPad-220
Saarang
Bhojan karjo oothe peeya pyaari ..|
भोजन करजो ऊठे पीय प्यारी ॥| कंचन नगन जराय कि झारी जमोदीक लाई ललतारी ॥ १ ॥ मुख परवार बिरीले ब्रजपत हीतसो कुंज बिहारी॥| छीत स्वामी नवकुंज सदन में विहेरत लाल बिहारी ॥२॥
Ushnakal - Bhog Sarayve
NityaPad-220
Saarang
Chhaak khaay bansivat phir chaley yamuna tata tahaan jaay dhowat mukh dheer samiran..
छाक खाय बंसीवट फिर चले यमुना तट तहां जाय धोवत मुख धीर समीरन।। फेंटा खोल पोंछत हाथ सखा सब लिये साथ चले जात दावानल खात मुख बीरन ॥ १॥ गाय बच्छ चरत जहां कुसुमनकी लता तहां बैठे जाय द्रुमनबीच बोलत पीक कीरन ॥ चत्रभुज प्रभु सखनसंग गावत सारंग राग धुनसुन मृग आये घेर सुधन रही शरीरन॥।२॥
Ushnakal - Bhog Sarayve
NityaPad-220
Saarang
Chhaaken khaay khaay dhaay dhaay jaay druman chadhat fentamukh
छाकें खाय खाय धाय धाय जाय द्रुमन चढत फेंटामुख पोंछत अंगोछत हैं करकर। आवरू दंडान डार दुरावत जाकी आर रोवनी रुवाय छांड हँसे सब हरहर।।१॥ सखा सब देत कूक एक तो विरामे दूक ख््रिजोरा खीज गारी देत कांपन हैं थरथर। जगजीवन गिरिधारी तुम पर बारी लाल याही पर राखो दाव कूदे सब धरधर।।२।॥।
Ushnakal - Bhog Sarayve
NityaPad-220
Saarang
Bhojan keeno ree girivar dhara..
भोजन कीनो री गिरिवर धर॥ कहा वरनो मंडलकी शोभा मधुबन तालकदंब तर ।। १॥ पहिले लिये मनोरथ व्यंजन जेपठये वब्रजघरघर | पाछे डला दियो श्रीदामा मोहनलाल सुघरवर ॥२॥ हँसत सयानो सुबलसेन दे लाल लियो दोनाकर॥ परमानंदप्रभु मुख अवलोकत सुरभी भीर पार पर॥३॥
Ushnakal - Bhog Sarayve
NityaPad-220
Saarang
Latak lalrahe sriradhake bhar...
लटक लालरहे श्रीराधाके भर।॥ सुंदरबीरी बनाय सुंदरी हँस हँस जातदेत मोहनकर।।१॥ गोपीसब सन्मुखभाई ठाढीतिनसों केलि करत सुंदरवर॥ ज्यों चकोर चंदा तन चितवत त्यों आली निरखत गिरिवरधर | २॥ कुंजकुटी और बाग बृंदावन बोलत मोर कोकिला तरतर।। परमानंदस्वामी मोहन की हों वारी या लीलाछ॒बिपर॥३॥
Useer Beeri
NityaPad-221
Saarang
Seetal sadanmein seetal bhojanbhayo seetal curran koo aisab sakhiyaan..
सीतल सदनमें सीतल भोजनभयो सीतल करन को आइसब सखियां।। छीरक्यो गुलाबजल नीले पीरे पाननमें बीरी अरोगत नाथ सीतल होत अखियां॥१॥ जल गुलाबघोर लाई अरगजा चंदन में नेक लगावो कंठ लपटाई॥ कुंभनदास प्रभु गोबरधनधर कीजे सुख सनेह हाथ पंख ढुराई ।॥२॥
Ushnakal - Bhog Sarayve
NityaPad-221
Saarang
Karat keli keeyo sub bhojan |...
करत केलि कीयो सब भोजन |॥। उठत भगे सब लरिका ब्रजके अचवन कीजें हो सुख सोधन॥।१॥ बहु बिंजन खाए ब्रजवासिन ओर खाए दधि ओदन। आसकरन जूठन मग जोवत बल बल चंदन खोरन।२॥
Ushnakal - Bhog Sarayve
NityaPad-221
Saarang
Harikon beeri khabawat baalaa ..
हरिकों बीरी खबावत बाला ॥ अतिसुगंध बहुविधिसों सँवारी लीजे हो नंदलाला॥१॥ खासाको कटिधर्‌यो पिछोरा उरराजतवनमाला ॥ मुरारीदास प्रभुकी छबिनिरखत मग्नहोत ब्रजबाला ॥२॥
Useer Beeri
NityaPad-221
Saarang
Krishnako beeri deit vrajnari .. pansupari
कृष्णको बीरी देत व्रजनारी ॥ पानसुपारी काथो गुलाबी लॉगन कील संवबारी॥।१॥। ब्रजनारीजो कुंजल ठाढी कंचनकीसीवारी।॥। लेले बीरी करन कमलमें ठाढी करत मनुहारी ॥ २॥ कहेत लाइडले बीरी लीजे मोहन नंदकुमार | परमानंदप्रभु बीरी आरोगत ब्रजकें प्राण आधार।॥३॥
Useer Beeri
NityaPad-221
Saarang
Baithe laal kalindike teeraa..
बैठे लाल कालिंदीके तीरा॥ ले राधे गिरिवर दे पठयो यह प्रसादी वीरा।।१॥ समाचार सुनि ये श्रीमुखके जे कही स्थाम शरीरा॥ तेरे कारण चुनचुन राखे जे निरमोलक हीरा॥२॥ सुंदरस्थाम कमलदललोचन पहिरेहै पटपीरा।। परमानंददासको ठाकुर लोचन भरत अधीरा ॥३॥
Useer Beeri
NityaPad-221
Saarang

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