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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Lalke fentaontha ametha banyo fabyo bhragutibhal parr naval | NityaPad-065 | लालके फेंटाओंठा अमेठा बन्यो फब्यो भ्रगुटीभाल पर नवल
नंदलाल के आबत बनते बने सांझ सुरभिन मांझ |
अटक लटक नरहि डगन ब्रज बालक ॥|१॥
चलत गजगति चाल मन हरत तेहि काल बाहु अंसन धरें सखा प्रिय ग्वाल के ।
गोपीजन युध जुरे द्वार द्वार खडा निरख नंदलाल युवति जन जालके ॥२॥ | Gori |
Harisang khelan jaany arrie chali bemi chhabili | Part3-149 | हरिसंग खेलन जांय अरी चलि बेमि छबीली
॥ध्रु०॥ निकस्यो मोहन सामरो हो फाग खेलन ब्रज मांझ ।। घुमड्यो अबीर
गुलाल गगनमें मानो फूली सांझ ॥ १॥ बाजत ताल मृदंग मुरण डफ कहीन
परत कछुबात ॥ रंगरंगभीने ग्वाल बाल सब मानो मदन बरात ॥२॥ जुरि
आंई ब्रजसुंदरी करिकरि अपनोठाट ॥ खेलत नहीं कोऊ कान्ह कुंबर सों
चाहत तिहारी वाट ॥ ३॥ बिनराजा दलकोन काज बलि उठिये छांडीये ओंड ॥
उमग्योहे निधि ज्यों नवलनंदको रुकतरावरी मेंड ॥४॥ उठीहे विहंसि वृषभान
कुंवरिवर करपिचकाई लेत ॥ सह्दटि न सकत कोऊ महासुभट लों सुनत
समर संकेत ॥५॥ आई रूप अगाधा राधा छबि बरनी नहीं जाय ॥
नवलकिसोर अमलचंदे मानो मिली डे चंद्रका आय ॥६॥ खेल मच्यो ब्रज
बीथनि महियां बरखत प्रेम आनंद ॥ दमकत भाल गुलाल भरे मानों वंदन
भुरके चंद ॥७॥ दुरिमुरिभरन वचावन छबिसों बाढ्यो रंग अपार ॥ मेनमुनीसी
बोलत डोलत पगण नूपुर झनकार ॥ ८॥ ओर रंग पिचकारिन भरिभरि छिरकत
हरि तनतीय ॥ कुटिल कटाक्ष प्रेमरंग भरिभरि तकितकि पियको हीय ॥९॥
सिव सनकादिक नारदसारद बोलत जयजयजे ॥ नंददास अपने ठाकुरकी
जीयूं बलैयांले ॥१०॥ | Dhanashri |
Aarti karat yasoda pramudit phooli anga naan samaat.. | NityaPad-222 | आरती करत यसोदा प्रमुदित फूली अंग न समात॥
बलबल कहि दुलरावत आनंदमग्न भई पुलकात ॥१॥
कनक थार रत्नदीपावली चित्रत घृत भीनी बात॥।
कलि सिंदूर दूब दि अक्षत तिलक करत बहु भांत ॥ २॥
अन्न चतुर्विध विविध भोग दुंदु भी वाजत बहुजात ॥
नाचत गोप कुंकुमा छिरकत देत अखिल नगदात ।। ३ ॥
वरखत कुसम निकर सुर नर मुनि ब्रजयुवती मुसकात।।
कृष्णदास प्रभु गिरिधरको श्रीमुख निरख लजत शशिकांत।।४॥ | Saarang |
Bhairi aalee tamchar bunn khaga ror .. aavan kaha gaye ajahu naan | NityaPad-053 | भईरी आली तमचर बन खग रोर ॥ आवन कह गये अजहू न
आये जागत भयो मोहि भोर ॥ १॥ किन सोतनके बस परे प्रीतम चितबत चन्द
चकोर || रसिक प्रीतम कुमुदिनी सकुचानी फूले कमल रवि भोर ॥२॥॥ | Lalit |
Khelati saras basant syaam brishbhanu key aanei | Part3-025 | खेलति सरस बसंत स्याम बृषभानु के आँए
देखें री ॥ चलौं सिरावन नैन सखी री जनम सुफल करि लेखें री ॥१॥
सौंधे भीने केस साँवरो मदन मनोहर भेरैं री ॥ कृपावंत रस नैन चूहचूह़े
कछुक उठत मुख रेखें री ॥२॥ ब्रज बनिता बनि बनि आँई सब स्यामसुँदर
मुख पेखें री ॥ कहि भगवान हित राम राई प्यारी राधाकौ भाग बिसेखें
री ॥३॥ | Basant |
Chandancharchit nilkalevar pitavasanavanmali .. | NityaPad-329 | चंदनचर्चित नीलकलेवर पीतवसनवनमाली ॥
केलिचलन्मणिकुंडलमंडित गंडयुगस्मितशाली ॥१॥ हरिरिह मुग्धवधूनिकरे
विलासिनि विलसति केलिपरे ॥|ध्रु.॥ पीनपयोधर भारभरेण हरि परिरभ्य
सरागम्।। गोपवधूरनुगायतिकाचिदु्दंचितपंचमरागं ॥।२॥ कापिविलास
विलोलविलोचन खेलनजनितमनोजं ॥ ध्यायतिमुग्धवधूरधिकं मधुसूदन-
बदनसरोज॑ ॥३॥ कापिकपोलतलेमिलितालपितुंकिमपिश्रुतिमूले ॥
चारुचुचुंबनितंबबती दयितंपुलकैरनुकूले ॥४॥ केलिकलाकुतुकेन च काचिदमुं
यमुनाजलकूले ॥ मंजुलवंजुलकुंजगतं॑ विचकर्षकरेण दुकूले ॥५॥
करतलतालतरल वलयावलि कलितकलस्वनवंशे ॥। रासरसे सह नृत्यपरा हरिणा
युवति प्रशंसे ॥६॥ स्लिष्यति कामपि चुंबति कामपि रमथतिकामपिरामां ॥
पश्यतिसस्मित चारुतरामपरामनुगच्छति वामां ॥७॥ श्रीजयदेवकवेरिदमद्भुत
केशवकेलिहरहस्यं ।। बुंदावनविपिमेललितं वितनोतुशुभानि यशस्यं ॥८॥ | Bihagaro |
Rasrang kanhsang nrityat vrajbhamini .. megh chakr madhya bunny | Pustak1-340 | रासरंग कान्हसंग नृत्यत व्रजभामिनी ॥ मेघ चक्र मध्य बनी
मानों सौदामिनी ॥ अवघर गति उरप तिरप लेत चपल भ्रोंह भामिनी ॥
हुलसत मानों मदन केलि शरद विमल यामिनी ॥१॥
गोवर्द्धधरनलाल रिझवत वर कामिनी ॥
थकित निरखि उड़ुपति सुख कृष्णदास स्वामिनी ॥२॥ | Iman |
Chalori vrindavan vasant aayo .. phooli rahey phoolanke | Part3-058 | चलोरी वृंदावन वसंत आयो ॥ फूलि रहे फूलनके
झोंरा मरूत मकरंद उडायो ॥ १॥| मधुकर कीर कोकिला ओर खणग कोलाहल
उपजायो ॥ नाचत स्याम नचावत श्यामा राधाजू राग जमायो ॥२॥
चोबाचंदन बूकाबंदन लालगुलाल उडायो॥ व्यास स्वामिनी की छबि निरखत
रोमरोम सुख पायो ॥३॥ | Basant |
Taari dey jaari jaavahin .. ekate aeka bunny vraj | Part3-247 | तारी दे जारी जावहीं ॥ एकते एक बनी ब्रज
बनिता नाना रंग वरसावहीं ।|१॥ बाजत ताल मृदंग झांझ डफ मोहन वेणु
बजावहीं ॥ चोवा चंदन अगर कुंकुमा सुरंग गुलाल उडावहीं ॥२॥ इतमोहन
उत सखी समूह मिल खेलें हँसें हँसाबहीं ॥ सूरदास प्रभु तुम बहु नायक
फगुवा दे घर आवहीं ॥३॥
| Sarang |
Nand mahochav hoe barh keejai | aapane lalpar vaari nochhaavari | Part1-047 | नंद महोच्छव हो बड़ कीजै | आपने लालपर वारि नोछावरि
सब काहूकों दीजे ॥१॥ विप्रन देहु गाय और सोनों भाटन रूपौ दाम ।
ब्रजजुबतिन पार्टंबर भूषण पूजे मनके काम ॥२॥ नाचो गावों करो बधाई
अजन जन्म हरि लीनों | यह अवतार बाललीला रस परमानंद हि भीनों ॥३॥
| Sarang |
Dekhari dekh hariko mahal... chahuun or phooli drum wellie | NityaPad-258 | देखरी देख हरिको महल।॥ चहूं ओर फूली द्रुम वेली
तरुमाल सोहें हरल ॥। १ ॥ कुंदमालकी बनी तिबाही बीच सुमन युथिका सहल॥
भीतर भवन गुलाब निवारों करण केतकी पहल॥२॥ बहुत्त भांत फूलनके
झरोखा तापर कलशा रहल | वंदनवार संवारी छाजे छबिसों छहल॥ ३ ।॥ बोलत
मोर कोक िला अलिगण ओर खगनकी चहल ॥। गोविंदप्रभु प्यारीसों मिलकें
मधुर बचन हसकहल।॥।४॥ | Saarang |
Laal yeh chandaa leho .. kamal nayan baljaay yashoda niconec chiteho ... 1.. | NityaPad-293 | लाल यह चंदा लेहो ॥ कमल नयन बलजाय यशोदा नीकोनेक चितेहो ॥। १॥
जा प्रकार तुम सुन सुंदर वर कीनी इतनी अनेहो ॥। सोई सुधाकर
देख दामोदर या भाजनमें लेहो ॥।२।।
नभतें निकट आन राख्योहै जलपुट यतनजुगहेहो ॥
ले अपने कर काढ चंदको जोभावें सो केहो ॥| ३॥
गगन मंडलतें गहिआन्योहै पंछी एक पठेहो ॥
सूरस्याम प्रभुडतनी बातको कित मेरो लालहठेहो॥४॥ | Iman |
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