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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Chali nidharak bunn dekhi sakhiri dwij pramudit
Part3-357
चलि निधरक बन देखि सखीरी द्विज प्रमुदित पिक बानी ॥ जमुना तीर सघन कुंजन बनि ठाढ़ौ छेल गुमानी ॥१॥ फूले बहुरंग कुसुम परामिन त्रिविधि पवन सुख सांनी ॥ “ब्रजाधीश' प्रभु सब सुख सागर दृगन शोभा रंग आनी ॥२॥
Basant
Aaj sakhee raajat srinandanandan..
NityaPad-239
आज सखी राजत श्रीनंदनंदन॥ खासाको कटि लसत पिछोरा अंग लगायें चन्दन ॥१॥| तामधि चित्र बनावत बनिता करत मदनको कंदन॥। द्वारकेश बिजनाजु ढुरावत चरन कमल करि बंदन ॥।१॥
Saarang
Chhaand mathani mathanade pyaare giridharlal .. tum jhulo suta
Part1-101
छांड मथानी मथनदे प्यारे गिरिधरलाल ॥ तुम झुलो सुत पालने गाउं गीत रसाल ॥१॥ मोहन मथकहा जानहे शूठे करतहो आरि ॥ सिंधु मथननकी सुध भई तब हसेहें मुरारि ॥२॥ रवि प्रगट्यौ सुरभी दोहु मोहे तिहारी आस ॥. हठ छांडो भोजन करों बलिवलि माधोदास ॥३॥
Bilawal
Aaj dashahara shubh dinn neeko ponyatau juji hoe gopal ..
Pustak1-314
आज दशहरा शुभ दिन नीको पॉँयतौ जूजी हो गोपाल ॥ ब्रजरानी ब्रजराज कुँवरकौ करो सिंगार परम रसाल ॥१॥ तब व्रजराज अश्व सिंगारे तापर चढ़े श्रीगिरिधरनलाल रसिक प्रीतम पिय चले कुदावत जहाँ बैठी वृषभान की बाल ॥२॥
Bilawal
Jey jey jan bichhure prabhu tein tey abhaidaan curran.
Part2-325
जे जे जन बिछुरे प्रभु तें ते अभैदान करन। कासी में प्रभु पत्रावलंबन कीनों माया-मत हरन ! श्रीभागवत पुरान वेद मथि श्रीगोवर्धन-धरन। को कहि सके गान आल आगम निगम-वरनन | 'छीत-स्वामी' प्रभु सर्योत्तम निधि -सदन ॥
Bihagaro
Praatasmein navkunj dwaar vhai lalitaalalit bajaai beena ..
NityaPad-022
प्रातसमें नवकुंज द्वार व्है ललिताललित बजाई बीना ॥ पोढेसुनत स्याम श्रीस्यामा दंपति चतुर नवीन नवीना ॥ १॥ अति अनुराग सुहाग भरे दोउ कोक कला जो प्रवीन प्रवीना ॥ चतुर्भुजदास निरख दंपति सुख तन मन धन न्योंछावर कीना ॥। २॥।
Bibhaas
Chhoote bund sondhe soun lapatai tedhhi tedhhi pagiya munn mohe | kanchan
NityaPad-169
छूटे बंद सोंधे सों लपटै टेढी टेढी पगिया मन मोहे | कंचन चोलना यह छबि निरखत काम बापुरो को है ॥१॥ लाल इजार गरे वनमाल गुंजमाल श्रुति कुंडल सोहे । रसिक रसाल गुपाल लाल गढ़यो कीमत कीमत जो है ॥२॥
Adano
Dhana dhana jasoda kaun punya tapa kinon .. jaake aangan
Part1-156
धन धन जसोदा कौन पुन्य तप किनों ॥ जाके आंगन मध्य रेगन करत गोविन्द गौरज भीने ॥१॥ गोद लिये हुलरावत गावतः सबहीन हीत चीत दिन ॥ नंददास प्रभु निपट निरंजन सोतें अंजनसें कर लीने ॥२॥ # राग आसावरी # आजु गई हों नंदभवनमें कहा कहूँ गृह चैनरी । चहूँ ओर चतुरंग लक्ष्मी कोटिक दुहिये बैनुरी ॥१॥ घूमि रहे जित तित दधि मथना सुनत मेघ धुनि लाजै | बरनों कहा सदनकी शोभा बैकुँठ हूते राजे ॥२॥ बोलि लई नव बधू जानिकें जहाँ खेलत कुँवर कन्हाई ॥ मुख देखत मोहनी गत रूप न बरन्यों जाई ॥३॥ लटकन लटकि रहौ भुवि ऊपर रंग रंग मनि गन पोहे । मानों शुक्र शनि भौम एक व्है लाल भाल पर सोहे ॥४॥ गोरोचनकौ तिलक भूकुटी बिच काजर बिंदुका लाग्यौं। मानों कमल कौ पिय पराग लै अलिसुत सोयन जाग्यौ ॥५॥ विधु आनन पर दीरघ लोचन नासा लटके मोती । मानों सोम संग करि लीनों जानि आपनौ गोती ॥६॥ सीपजमाल श्याम सुंदरके बघना छवि पावै | मानोहुँ बाल शशि जु नक्षत्र गन उपमा कहत न आबै ॥७॥ शोभा सिंधु अगाधि अंबुनिधि बरनत नाँहि न ओर । जित देखों मन तहीं तहींकौ भयो भरेको चोर ॥८॥ केतिक कहों कहा मति मेरी क्‍यों घेरों जलरास । मोहनलाल गोपालहि बरनत कवि कुल करौ जिन हास ॥९॥ जो मेरी अँखियन रसना होतीं तो कहतीं रूप बनाय । चिरजीयो जसुदाकौ नंदन मानदास बलि जाय ॥१०॥
Aasawari
Aaee gopi poyne paran ..
Pustak1-334
आई गोपी पॉयन परन ॥ सोई करौ जैसें संग न छूटे राखौ श्यामशरन ॥१॥ जब तुम बैन बजाय बुलाई अब जिय कित निटुराई ॥ तुमारे भजत पाप किहिं लागे किन यह बुद्धि उपाई ॥२॥ चित नहीं चलत चरण गति थाकी मन न जात गृह पास ॥ परमानंद स्वामी उदार तुम छाँड़ी बचन उदास ॥३॥
Malav
Aaj vrishbhaanken anand . badan prabhasi laagat maani pragatyau
Part1-185
आज वृषभानकें आनंद । बदन प्रभासी लागत मानी प्रगत्यौ पूरनचंद ॥१॥ एक जो दूब बँधावत गावत एक सुनाबत टेर । सुनि सब नारि बधावन आईं अपने अपने मेर ॥२॥ जो आवत सो करत नौछावर तृन तोरत बलि जात । परम भाग्य दंपति के यह कहि फूली अंग न मात ॥३॥ अपने अपने मनकौ भायौ करत सकल ब्रज लोग । सूरदास प्रगर्टीं भुवि ऊपर भक्तन के हित जोग ॥४॥
Saarang
Douu milli karat bhaamati batiyaan .. madangopal kunbari
Part1-359
दोऊ मिलि करत भामती बतियाँ ॥ मदनगोपाल कुँबरि राध्ेकें नखमनि अंक लिखत उर छतियाँ ॥१॥ तैसीय छिटक रही उजियारी पून्यौ चंद शरद की रतियाँ ॥ केलि रूपिनी यमुना श्रीभट वृंदावन फूल्यौ बहु भत्तियाँ ॥२॥
Kedaro
Prakate shrilakshman kulbhoop..
Part2-274
प्रकटे श्रीलक्ष्मण कुलभूप॥ श्रीवल्लभ गुण रास मनोहर विश्वको रूप स्वरूप ॥१॥ शोभा सुभग सुजान शिरोमणि रूप रह्यो तन यूप॥ जग हित प्रकट भये हितकारण तारण अंध जड कप पर ॥ भक्ति कीर्ति प्रवाह प्रकट किये लीला भाव अनूप॥ श्रीवल्लभको प्रकट आशा णतपोततम रूप ॥३॥
Devgandhar
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