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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Kaanh kamini sanga raas mandal madhya yuvati naachat tarani | Part1-337 | कान्ह कामिनि संग रास मंडल मध्य युवती नाचत तरणि
तनयाकूले ॥ उदित मन््मथ भाव सरस रंजित बदन देख मुख युवति जल कमल
फूले ॥१॥. क्वणित मधुर मुरलिका धकित मृगलोचनी शिधिल कटितट नीवी
वर दुकूले ॥ कनक बेलि मानों नव तमाल बिलसत रही लपटाय आनंद
मूले ॥२॥ कोटि कंदर्प लावण्य प्रकटित रूप संगीत सुरत हिंडोल झूले ॥
कृष्णदासनि नाथ लालगिरिधवरन निरख नभ सघन उड्डराज भूले ॥३॥ | Gouri |
Aise reejhe bheejhe aae ree laal gawat haye dhamaari .. | Part3-025 | ऐसे रीझे भीझे आए री लाल गावत हे धमारि ॥
होंजु गई री भोर ब्रिंदाबन भरि लिए अकवारि ॥ १॥ सुधरी अलक बदनपर
बिथुरी निज करसों अली आप सकोरी ॥ हरिदास के स्वामी श्यामा कुंज
बिहारी मिली हे विरह हिरदैरी ॥२॥ | Basant |
Abb houn kahaa karori maaee .. sunder sthaam kamaldal lochan | NityaPad-099 | अब हों कहा करोरी माई ॥ सुन्दर स्थाम कमलदल लोचन
मेरो मन लियो हे चुराई ॥१॥ लोग कुट्धम्ब सबन मिलके मोहे बारबार समुझाई ॥।
तोऊ मोहे उन बिन नाहिन परत रहाई ॥२॥ अबलों कठिन हिलगके कारन
लोकलाज बिसराई ॥ कुंभनदास प्रभु सैलधरनपिय मुसक ठगोरी लाई ॥३॥ | Aasawari |
Shyamason neh kabahu naan keeje || munn shyam tunn shyam shyamahi | NityaPad-099 | श्यामसों नेह कबहू न कीजे || मन श्याम तन श्याम श्यामही
सलोने टेढी प्रीत करे तन छीजे ॥१॥ श्याम पाग सिर छबिसों सांवरेकी
आली सर्वस् अपनो दीजे ॥। चतुर्भुज प्रभु गिरिधर सों हिलमिल अधरसुधारस
पीजे ॥२॥ | Aasawari |
Pragati adbhut kunwari chalo barasaane jaiye . mangal bhuv roopaki | Part1-200 | प्रगटी अद्भुत कुंवरी चलो बरसाने जैये । मंगल भुव रूपकी
रानी कीरति कंठ लगैये ॥१॥ भयो महा आनंद नंदके जसोमति भले नचैये!
फुली अंगनमें ऐसे ये ताल मृदंग बजैये ॥२॥ सब सुख मनभावन आवनको
सुन सुन अति सचुपैये । भादो भाग सबै व्रज खेती 'नंददास” बरसैये ॥३॥ | Khamaj |
Mohi kahaa varajataho kaanh queyon naan | NityaPad-307 | मोहि कहा वरजतहो कान्ह क्यों न
वरजोरी चितेवों छाँड़े ॥ नयन मोहनीरी मोहन कैसो जहांतहां बजाय
रिझ्ञाय काढे ॥१॥ जहां जाय दृष्टि परेसो कैसें धीर धरे मातापिता पति
लाजकी काने ॥ ब्रह्मदास प्रभु मन््मथको मनमथ्यो कौन गने मन्मथराने ॥२॥ | Kalyan |
Badan saroj upar madhupawal maano | NityaPad-228 | बदन सरोज उपर मधुपावल मानो
फिर आइ हो ॥ कुंचित कच बिच बिच चंपकली उरझाई हो ॥१॥ लाल के
नेन कृपा रंगभरे सुन्दर भ्रू भाई हो ॥ मकर कुंडल प्रति बिंबल श्याम कपोलन
झांई ॥२॥ लाल के मनि कौस्तुभ कंठ लसे हिरदे बनमाल रुराई हो ॥ सुन्दर
सब अंग अंग गोविन्द बलबल जाई हो ॥३॥ | Aasawari |
Dharein baanki paag baanki chandrika vaanke viharilal.. | NityaPad-105 | धरें बांकी पाग बांकी चंद्रिका वांके विहारीलाल॥
वांकी चाल चलत वांकी गति वांके बचन रसाल ॥। १॥
वांको तिलक वांकी भृगुरेखा वांकी पहिरे गुंजमाल ॥
गोबवरधन अपने कर धरकें वांके भयेहें गोपाल ॥२॥
वांकीखोर सांकरी वांकी हमसूधीहे गिरिधरलाल ॥
नंददास सूधेकिन बोलोहेंवरसानेकी ग्वाल ॥ ३॥ | Poorvi |
Herry baaje mandilra mahavan | nandrai grih putra bhayo haye harkhi | Part1-032 | हेरी बाजे मंदिलरा महावन | नंदराय गृह पुत्र भयो है हरखि
देत बहुधन ॥१॥ नाचत गावत ग्वालिनी मिलि बोलत मधुरे वचन । हरदी
दूध दही लपटावत उमगे प्रेममगन मन ॥|२॥ नवसत साजि सिंगार नारि मिलि
मंगल गावत मुनि जन । श्रीविहल गिरिधारी कृपानिधि नाम यशोदानंदन ॥३॥ | Asawari |
Bahut prasann bhaye piyrapyari todirag venudhargayo .. | NityaPad-071 | बहुत प्रसन्न भये पिय्रप्यारी टोडीराग वेणुधरगायो ।।
सुरसंगीत बधानमधुरस्वर ऐसो अद्भुत भेद बनायो ॥१॥
बीन तरंग उपजत नानारंग प्रतिछिन ओरसो ओर मिलायो ॥
चतुर्भुजदासस्वामिनीगुणनिधि रसिकराय गिरिधरण रिझायो ॥२॥ | Todi |
Mukhson mukh milaay dekhat rc...| | NityaPad-161 | मुखसों मुख मिलाय देखत आरसी।॥|
विकसत नीलकमल ढिंग उदित भयो कैधों शशी ॥१॥
निरख बदन मुसकाय परस्पर करत बिहार गिरि जात अंक हँसी।।
गोविंदप्रभु प्यारीजु परस्पर दंपति प्रेरि प्रेमफँसी ।। २।। | Bilawal |
Apanapo aapan prakat janaayo.. | Part2-294 | अपनपो आपन प्रकट जनायो॥
श्रीवल्लभ अवतार सनातन वेद पुराणन गायो ॥१ ॥
भक्त पूरण रूप पुरुषोत्तम श्री लक्ष्मण भट जायो।
श्रीभागवत सुदृढ करकें श्रुति जगत निशान बजायो ॥२ ॥
नाचत देव किन्नर मुनि नारद सबहिनके मन भायो ॥
हरखत अति प्रफुल्लित मन सुरपति बिविध कुसुम वरषायो ॥३ ॥
जयजयकार होत तिहपु तिहुंपुर में घरघर होत बधायो ॥
महाप्रसाद चरण रज पंकज माधोदास॥४ ॥ | Sarang |
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