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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Aaee chhaak bulaaye sthaam .. | NityaPad-201 | आई छाक बुलाये स्थाम ॥
यह सुन सखवा सबे जुर आये सुबल सुबाहु श्रीदाम ॥१॥
कमलपत्र दोनापलासके सबके आगे धरे परोसत जात ॥।
ग्वालमंडलीमध्य स्यामघन सब मिल रुचिकर खात ॥२॥
ऐसी भूख मांझ यह भोजन पठाय दिये कर यशोदामात ॥
सूरस्याम अबलों नहीं जेंबत ग्वालिन करते लेले रद्रात ॥३॥ | Saarang |
Shrilakshmangrih badhaaye. srivallabh bhootal | Part2-277 | श्रीलक्ष्मणगृह बधाये। श्रीवल्लभ भूतल
आये॥ भक्तिप्रकाश विलासी |
सुंदर बदन मधुर किसी सी ॥टेक ॥
नयन नीके बेनमीठे रूपरंग सुहावनों॥
बालचरित्र बिनोद नीके प्राणपति जियभावनो॥
श्रीबल्लभ रसहीखेलें रसहीबोलें रसहीरसमें हुलसहीं ॥
धन्यमाय सुहाग ले. वादा" गोदले सुत विलसहीं ॥१ ॥
पूरव दिशा निधि आईं॥ श्रोगोकुल ॥
श्रीगोवर्धनधारी ब्जमें प्रकटे रासबिहारी ॥टेक ॥
बुलाय भक्त बिलासकीनों विविधभांत बनायकें ॥
नंदघरकी सुभगलीला प्रगट जनन दिखायकें॥
मेंट सबदुःख किये सबसुख शरण लीने तानकें॥
बलजाय चरणन दास दासी भाग्य अपने मानकें ॥२॥
श्रीवल्लभ प्रीतम प्यारे। बललभजगमें जगतउज्यारे॥
दैवीनके हितकारी ॥ प्रेमभक्तिके जयजयकारी ॥टेक ॥
प्रेमगावें प्रेमभावें प्रेममें अनुदिनरहें ॥ प्रेमस्नेही प्रेमदेही प्रेमबांनी नित्य कहें॥!
प्रेमसेवा करें करावें नंदसुत हृदेरहें ॥ वल्लभी निजदासदासी सुखसमूह कहा कहें ॥३ ।।
श्रीवललभके गुण गाऊँ॥ श्रीवल्लभ चरण हृदयमें लाऊं॥ मूरति हियमें बसाऊं॥
#वल्लभजूकीहों कीहों बलबल जाऊं ॥छंद ॥
बलजाऊं बल्लभनाथ प्रभुकी शरण बल्लभके रहुं॥
नयन वलल्लभ चेन बललभ बेन वल्लभके कहुं॥
वललभ मुखकी माधुरी हों निरख जिय आनंदलहुं॥
बलजायचरण निजदास व्हेकें शरण बल्लभके रहुँ ॥४ ॥ | Bilawal |
Sakhiri or sunon aeka baat.... aaj krishna merey grih aaye uthat | NityaPad-139 | सखीरी ओर सुनों एक बात।॥। आज कृष्ण मेरे गृह आये उठत
प्रातही प्रात ॥ १8 लटपटीपाग अटपटी बातन आलस वंत जूंभात ॥ काहेकूँ
तेरेनयन ऊनीदे मोहन गृहकों जात ॥। २॥ आगें नंदद्वारव्है ठाडे ताते गएन संकात |।
मानो साहराजगृह ठाडे देदे बीच भुजगात ॥ ३॥ ऐसी भीति कहांहें मोहनमें पूछी
मुसकात ॥ कहाकरों जो प्रकट जानियों सूरस्थामसकुचात ।।४॥। | Devgandhar |
Parav greesham aadi maani nidan ritraj vaishakh sud akshay tritiya .. | NityaPad-235 | परव ग्रीषम आदि मानि निदान ऋतराज वैशाख सुद अक्षय तृतीया ॥
कुंजके द्वार ठाडे लसत गिरिधरन राधिका अंस पर बाहु धरिया ॥१॥
पीत परिधान राजत सामल अंग कियें चन्दन लेप चित्र अवरेखीया ॥
हंस ममनी द्वारकेशकी स्वामिनी ठुमकि चलत तब बजत बिछीया ॥॥२॥। | Saarang |
Main tere ghar kau thaadhi moe surr karey koo aanaju | soee laihon joe munn | Part1-128 | मैं तेरे घर कौ ठाढ़ी मो सर करे को आनजु | सोई लैहों जो मन
भावे नंदरायपै दानजू ॥१॥ धन्य नंदजूथन्य जसोदा धन्य धन्य जायौ पुतजू।
धन्य भूमि ब्रजवासी धन्य धन्य आनंद करत अकूत जू ॥२॥ घर घर होत
आनंद बधाई जहाँ जहाँ मागध सुतजू | मनिमानिक पाटंबर लै लै देत बने न
कुहूतजू ॥३॥ हय गय भवन भंडार दिये सब फेरी भरेसे भातिजू | तबै देत
तब ही फिरि देखत संपति घर न समाति जू ॥४॥ ते मोहि मिले जात घर
अपने मैं बूज्ञी तब बात जू। हँसि हँसि दौरि मिले अंकनभर हम तुम एकै जात
जू ॥५॥ संपति लेहु रत्व ही एकौ अन्न वस्त्र किहि काज यू । जो मैं तुमपे
मॉगन आयौ सोई देहु नंदराय जू ॥६॥ अपने सुतकौ बदन दिखावहु बड़े महा
शिरताज जू । तुम साहिब मैं ठाढी तुम्हारी प्रभु मेरे ब्रजगाज जू ॥७॥ कृष्ण
बदन दरसन संपति दे सो लै मैं घर जाऊँ जू। जो सनकादिक दुर्लभ सो सब तुम्हरे
ठाऊँ जू ॥८।॥ जाकों नेति नेति श्रुति गावें तेई कमल पद ध्याउँ जू । हों तो
तेरों जन्म कौ ढाढ़ी सूरदास मेरौ नाम जू ॥९॥ | Maroo |
Yashumati suta mohi deejen darsan .. | NityaPad-357 | यशुमति सुत मोहि दीजें दरसन ॥
तनमन प्राणतपतहें निशदिन छिन एक होत बराबर वरसन ।॥॥१॥
सियरो होतों पहले हृदयों अबतो अंखियां लागी तरकन ॥
रसिकप्रीतम विनती चितधरिये तुमसे सरस कहां लगे अरसन॥२॥ | Gori |
Aaj nandanand mukhchand bunn raajain .. jatit mani mukut aur | Part1-352 | आज नंदनंद मुखचंद बन राजैं ॥ जटित मणि मुकुट और
सुभग कुंडल चटक बसन पट पीत भ्रुव मठक छाजें ॥१॥ रासमें रसिक वर
. ललित संगीत स्वर मधुर मुरली मृदंग ताल बाजैं ॥ श्रीविइलगिरिधरन क्वणित
नुपुर चरण सुनत भई घोष त्रिय थकित आजैं ॥२॥ | Kedaro |
Aroon uneede aaeho rasamse nisike chinh piya kahaan duraaye .. | NityaPad-146 | अरूण उनीदे आएहो रसमसे निसिके चिन्ह पिय कहां दुराये ॥
नखक्षत प्राणप्यारीके मोहन कांति न छिपत छिपाये ॥१॥ कुंकुम रंजित उर
बनमाला विलुलित सुरत्र मधुर जनाये ॥ गिरिधर नवकेलिकला रस प्रमुदित
कृष्णदास अलि गाये ॥२॥ | Bibhaas |
Raniju aachhe vasan bichhaaye . sunder suta apane hathan lai | Part1-092 | रानीजू आछे वसन बिछाये । सुंदर सुत अप ने हाथन लै
पलना माँझ सुवाये ॥१॥ आस पास बैठी ब्रज सुंदरि नीके मंगल गाये ।
आनैंदराय गोप बधुन मिलि सबहिन हुलसि झुलाये ॥२॥ फिरि आये ब्रजराज
नंद सब देखि बहोत सुख पाये | जिनने गढ्यो पलना जो लालकों ते सब हँसि
पहराये ॥३॥ ग्रृहगृहक्की तब भई आरती मोतिन पूरि सँभारी ।
श्रीविडलगिरिधरन झुलावत नंदरानी ब्रजनारी ॥४॥ | Ramkali |
Horry khele nandlal horry nand mahar kii pauri | Part3-238 | होरी खेले नंदलाल होरी नंद महर की पौरी
ठाडो संगलिये ब्रजबाल ॥१॥ वेणु बजाबे मधुरे गावे और उघटावे ताल
हरें हरें युवति में धस कें चुंबनदे भजेगाल ॥ वदन उघारे बिंदुलीनि हारे
तिलक बनावे भाल ॥ कबहंक आलिंगनदे भाजे आय मिले ततकाल ॥ ३॥
कबहुंक ढिंग व्है अचरा खेंचे छुवावे नीरज नाल ॥ कबह्दू आय बलैयां
लेले पहरावे वनमाल ॥४॥| कबहुंक नाचे भाव दिखाबे कबह्दू बजाबे ताल ॥
कबहं अबीर अरगजा लेकें ओर उडावे गुलाल ॥५॥ कबहुंक हाथाजोरी
नाचे मंडल मध्य प्रतिपाल ॥ श्रीवललभ पद कमल कृपाते गावें रसिक
रसाल ॥६॥ | Sarang |
Neekede haan mereen iduri ....| lejaihen chashumatighar aagein | NityaPad-269 | नीकेदे हां मेरीं ईडुरी ॥॥| लेजैहें चशुमतिघर आगें
बहुरीमिलएके गुलरी ॥१॥ काहू नहीं डरात कन्हाई वाट घाट तुम करत
अचगरी ॥ यमुनादईईंड्री फटकारी और फोरी सब गगरी ॥२॥ भलीकरी
यहकुंबर कन्हाई आज मेटिहौं तुम्हारी लगरी ॥ चली सूर यशोमतिकेआगें
उराहनो ले तरुणी ब्रजसगरी ॥३॥ | Bilawal |
Chandan mahal banyon atee sunder .. taa madhe baithen bunny madan | NityaPad-243 | चंदन महल बन्यों अति सुंदर ॥ ता मधे बैठें बनी मदन
गुपाल॥१॥ अति रमनीय पुनित किसोरी अंग नवल बनी राधे बाल ॥ कटि
धोती उपरना केसरी (सीस) किरीट कुंडल बन माल ॥ 'कृष्णदास' रसरास
रसिक दान निरतत गावत परम रसाल ॥२॥ | Saarang |
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