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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Firat loga jahantahaan bidrane .. kohe apane cone viraane..1..
Part2-082
फिरत लोग जहाँतहाँ बिडराने ॥ कोहे अपने कोन विराने॥१॥ ग्वाल गये जे धेनु चरावन॥ तिनहिं पर्यो वनमांझ परावन ॥ गाय वच्छ कोऊ न सम्हारें॥ प्रलय कालके जलद निहारें ॥३ ॥ भागे आवत ब्रज भीतरकों ॥ विपति परी अति वन ग्वालनकों ॥४ ॥ अंध समा मग कहूं न सूझें ॥ न्नजभीतर ब्रजहीकों बूझें ॥५ ॥ जेसें तेसें ब्रज चानत॥ अटक रहे अटकरकर आनत॥६॥ खोजत फिरत आपने घरकों ॥ कहा भयो यह घोषनगरकों ॥७ ॥ रोवत डोलत घरहि न पावें॥ घर द्वारें घरकों विसराबें ॥८ ॥ सूरश्याम सुरपति विसरायो ॥ गिरिके पूजे यह फलपायो ॥९ ॥
Bilawal
Ghanmein chhip rahee jyon damini.. nand kunwarke paachhe
Part2-355
घनमें छिप रही ज्यों दामिनी॥ नंद कुंवरके पाछे ठाडी सोहत राधा भामिनी ॥१ ॥ बाल दिशा अपने रंग खेलत शरद सुहाई जामिनी ॥ परमानंद स्वामी रसभीजे प्रेम मुदित गजगामिनी ॥२ ॥
Goud Sarang
Banyon rasmandaln varr taamein mahaa mudit mridul radhapyari ..
Pustak1-335
बन्यों रासमंडल्न वर तामें महा मुदित मृदुल राधाप्यारी ॥ वरणों कहा बानिक आँग अँगकी एकरूप एकवेश एकरंग एकरास तामें लेत उपजत अति गति न्यारी ॥१॥ गावत तान तरंग निर्तत उरप तिरप लाग डाट उघटत शब्द उपज महारी ॥ यमुनापुलिन सुभग शीतल समीर मद चंद थक्‍यो निशि सब दिशि लागत उजियारी ॥२॥ मोरमुकुट माथें अंग अंग चित्र काछें ग्रीवा भुज मेलि दोउ निर्तत बिहारी ॥ कल्याण के प्रभु प्रिय प्रेम मगन द्वै लटकत फिरत करत रस क्रीड़ा ऐसे रीज्ञ वश भये गिरिधारी ॥३॥
Malav
Jaya jaya jaya shree vall‍labh prabhu vidvalesh saathen | nijajan parr karat kripa dharat haath maathen ..
NityaPad-002
जय जय जय श्री वल्‍लभ प्रभु विद्वलेश साथें | निजजन पर करत कृपा धरत हाथ माथें ॥ दोष सब दूर करत भक्तिभाव हिये धरत काज सब सरत सदा गावत गुणगाथें ॥१॥| काहेको देह दमत साधन कर मूरख जन विद्यमान आनंद त्यज चलत क्यूं अपाधें। रसिक चरण शरण सदा रहत हे बडभागी जन अपनो कर गोकुलपति भरत ताहि बाधें ॥२॥
Bhairav
Madanmohan gahwar vann khelat saras dhamaar .. sendur
Part3-135
मदनमोहन गहवर वन खेलत सरस धमार ॥ सेंदुर भर बहु मंगे आईं सकल ब्रजनार ॥१॥ फूली लता चहूंदिश वरणवरण बहु भांत ॥ भहो हलास सब जंतही कोकिल कुलकलकांत ॥२॥ ग़ुंजत मधुप सुहाये श्रवण सुनत सुखहोय ।।| वैभव निरखन यो रंग उठधाये सबकोय ॥३॥ बाजत ताल परखावज आवज डफ मुख चंग ॥ वेणु मधुर ध्वनि सुनियत स्याम सुंदर ता संग ॥४॥ नृत्यत नानाबानी गानी सुघर सुदेश ॥ बोलत हो हो होरी भयो अधिक आवेश ।|५॥ चोवा अगर अरगजा केसर मिलीहि सुरंग ॥ छिरकत भर पिचकाई शोभित छींट अनंग ॥६।॥ तब सखी पांच सात मिल मोहन पकरे जाय ॥ सोंधो छींट नयनन में मुरली लई छिनाय ॥७9॥ एक सख््री कर मेलत फिरत मंडली जोर ॥ तिनहीं मध्य व्रजपति गति लेत चिते चितचोर ॥|८॥ परसत करउर चोली बोली ठोली डारी ॥ मंदमंद मुसिक्याय के देत परस्पर गारि ॥॥ रहत चीर द्वुमद्गुम प्रति टूटत मोतिनहार । मगनभयो मनसबको तनकी तजी संभार ॥|१०॥ अंचल फेरत हरिपर सर्वस्व डारत वार ॥ प्रेममगन रस बस भई सबे मनोहर नार ॥ १ १॥ च्तुभुज प्रभु गिरिधर संग बाढ्यो रंग अपार ॥ देववधू अति लालच चाहत घोष बिहार ॥१२॥
Gouri
Maaee daan kahaa baat kaheen kii aani gahe bahinyaan .. joe kachhu
Part1-260
माई दान कहा बात कहीं की आनि गहे बहींयाँ ॥ जो कछु कहौ सुनौ ताकौ उत्तर देहु कहा रे है मुँहचहीयाँ ॥१॥ किधों और ही धोखे भूलि जिन बोलत बोल मुख मोतनि नहींयाँ ॥ गंगाराम श्रीगोपाल और बालक नीकें करि निहारि दे खोजत आपु मनहीं महीयाँ ॥२॥
Todi
Manharan chhel nandrayako chhabi sou nikasyo ayri moy
NityaPad-073
मनहरन छेल नंदरायको छबि सो निकस्यो आयरी मोय देखत ठाडो भयो तन चिते चिते मुसिकायरी ॥| १॥| चंपकली दल कुटिल अलक छबि भुजभरि एंडएडायरी सूधो कमल कमल दल लोचन पगिया के पेंच झुकायरी ॥२॥ छेल छबीलो सांभरो अंग प्रेम चुचायरी ॥३।।
bilawal
Gopalfiravathainvangi .. bhitarbhavan bharesababalak
NityaPad-189
गोपालफिरावतहैंवंगी ॥ भीतरभवन भरेसबबालक नानाबिधि बहुरंगी ॥ सहजसुभाव डोरीखेचत हैं लेत उठाय करपैकरसंगी ॥ कबहूं करले श्रवणसुनावत नानाभांतिअधिकसुरंगी ।। २ कबहुंकडारदेतहैं भयमें मुखहिबजावतजंगी ॥ परमानंदस्वामीमनमोहन खेलसर्‌योचले सबसंगी ॥ ३॥।
Bilawal
Bhojan karat kishore kishori |
NityaPad-079
भोजन करत किशोर किशोरी | मदन गोपाल राधिका बनी अनुपम जोरी ॥१॥ विविध पाक पकवानथार भर, सखियन आन धरे । जेंवत लाल लाडिलो रुचिसों स्वादित भोग खरे ॥ २।। यपुनाजल ललिता ले आई लेजलपान कर्यो ॥ पिय प्यारी को बीरी दे गोकुल पाय पर्यो ॥३॥
Aasawari
Horry yaa bugger mein maach rahee ree heen paniya bharani
Part3-344
होरी या बगर में माच रही री हीं पनिया भरनि कैसें जाँऊ री ॥ लाज लिये मेरे घूंघट पट की हों कैंसैक निकसन पाँऊ री ॥१॥ मिसिह्ठि मिसि रँग भरति साँवरों तिन सौं कहा कहाँऊ री ॥ नागरी कान्ह छूबे जिनि मानौं न्‍्याव कहति सब गाँव री ॥२॥
Kedaro
Areeye gaayan charaay aavat baneehen barni dhurri ..
NityaPad-286
अरीये गायन चराय आवत बनीहें बरनी धुररी ।। जब तें देखी तबतें यह छबि चिततें होत न दूररी ॥१॥ श्रमझलकत भरेरंगप्रेम पराग रहे पुररी ॥ उततें आवत धोंधीकोप्रभुस्थाम सु जीवन मूलरी ॥२॥।
Gori
Khelat basant niss piya sanga jaagi .. sakhee brind
Part3-023
खेलत बसंत निस पिय संग जागी ॥ सखी बृंद मोकुल की सीमा गिरिधर पिय पदरज अनुरागी ॥१॥ नवल निकुंज में गुंजत मधुप पिक विविध सुगंध छींट तन लागी ॥ कृष्णदास स्वामिनी जुबति जूथ चुडामनि रिझवत प्रान पति राधा बडभागी ॥२॥
Basant
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