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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Podhe maaee preetam pyaari sanga .. rangmahal kii lalit thiwari | NityaPad-129 | पोढे माई प्रीतम प्यारी संग ॥ रंगमहल की ललित ठिवारी
परदा परे हे सुरंग ॥ १॥॥ जगमगात पावक अंगीठी धरि रति रसरंग ।। नन्ददास प्रभु
प्यारी जीति हे मुदित अनंग ॥। २॥ | Nayaki |
Saundhe kii hain uthati jhakaurain, mohan rung-bharey .. | Part3-126 | सौंधे की हैं उठति झकौरैं, मोहन रंग-भरे ॥
चोबा, चंदन, अगरू कुंकुमा, सोहैं माट भरे ॥१॥ रतन जटित पिचकारी
कर गह्ि, बालक वृंद खरे ॥ भरि पिचकारी रससौं डारी, सो मन प्रान
हरे ॥२॥ सब सखियनि मिलि मारण रोक्यौ, अरू मोहन पकरे ॥ अंजन
आँनजि दियौ अँखियन मैं, हा हा करि उबरे ॥|३॥ फगुवा बहुत मँगाई साँबरे,
कर ले अरज करे ॥ धनि धनि सूर, भाग ताके, प्रभु जाकैं सँग बिहरे ॥8॥ | Bilawal |
Jaba lugg yamuna gaay govardhan jablag gokul gaam gusain .... | NityaPad-351 | जब लग यमुना गाय गोवर्धन जबलग गोकुल गाम गुसांई ॥॥
जबलग श्रीभागवतकथारस तबलगि कलियुग नाहीं॥ १॥॥
जबलगि सेवारस नंदनंदनसों प्रीति लगाई ॥
परमानंद तासों हरिक्रीडत श्रीवल्लभचरण जिनपाई ॥२॥ | Bihaag |
Dekho ree mohan panghat parr thaado haye nava nikunj taisiye sarad suhai raat . | NityaPad-268 | देखो री मोहन पनघट पर ठाडो है नव निकुंज तैसीये सरद सुहाई रात ।
फूलको टिपारो बन्यो फूलनको मल्ककाछ फूलनके हार उर फूले 'फूले करत बात ॥१॥
फूलनको उपरैना फूलन पचरंग आन-आन भांति फूलके कुंडल छबि अति सुहात ।
फूलनकी बेनी सिर फूलन के बाजूबंद फूले फूले
“कृष्णदास' यह छबि कही न जात ॥२॥ | Kanharo |
Jhoolat doll naval kishore naval kishori .. | Part3-366 | झूलत डोल नवल किशोर नवल किशोरी ॥
बुंदा विपिन सुभग यमुना तट मुकुलित नूत माधवी मोरी ॥ १॥ कदली खंभ
ढिंग ठाडी तरूणी गण गावत दुद्टू ओरी ॥ पूरत अधर धरें मनमोहन मधुर
मुरली ध्वनि थोरी ॥२॥ हाथन गह्े कनक पिचकाई केसर सरस अगर
घस घोरी ॥ पृथक पृथक छिरकत जु परस्पर सुंदर स्याम राधिका गोरी
॥३॥ सुरंग गुलाल अबीर उडावत धन ज्यों जुर चढ गगन गयोरी ॥ जुगल
किशोर नवल बानिक पर ब्रजजन बल डारत तृणतोरी ॥४॥ | Kalyan |
Waman aaye balipain mogan .. atee anoop roop kahaa kahiye | Part1-215 | वामन आये बलिपैं मॉगन ॥ अति अनूप रूप कहा कहिये
ठाढ़े पौरके आँगन ॥१॥ पढ़त वेद धुनि कहत सुकंठन गावत मधुरे रागन ॥
सुनत राग मन लागत नीकौ बालक ग्रनियत जागन ॥२॥ सुन बलि राजा
म गन भये अति कहाँते आये भागन ॥ विद्या अधिक अगाध अंबुनिधि कोऊ
पावत थागन ॥३॥ लीये बोल होत यज्ञ जहाँ लिये कमंडल हाथन ॥ परमानंद
चक्रत बलि राजा कोउ नहीं संग साथन ॥४॥ | Dhanashri |
Merey laal chhabile munn haryo hoe .. doo sakhee ree | Part3-128 | मेरे लाल छबीले मन हर्यो हो ॥ डो सखी री
मोहे और कछु न सुहाय ॥भ्रु०)। आज सख्री मैं देख्यौ ढोटा एक साँवर
मात ॥ नंद पौरी आगे छत निकस्यौ चल्यो खरकि की जात ॥१॥ पियरी-
सी पाग पुरिये बागे पहरे लाल इजार ॥ फैंटा सरस कुसुम को सोहैे मानह
कोटिक मार ॥२॥ कुंडल लोल कपोल की झाँई मुक्ता दुलरी ग्रीव ॥ ऊपर
दीपत हार गुंजा कौ सुंदर है ताकी सीब ॥३॥ बाजूबंद अँथुरिन मुंदरी सोभा
बरनि न जाय ॥ छुद्र घंटिका राजत कंटि तट नूपुर बाज त पाँय ॥४॥ देखत
रूप ठमोरी लागत चरन चलल््यों नहीं जाय ॥ पूछत नाम कहा है तेरौ हँसि
मेरे ढिस आय ॥५॥ उर की माला मोहि पहिराई अधर सुभ्रा रस प्याय ॥
यह सुख तीन लोक में नाही 'श्यामदास” बलि जाय ॥६॥ | Kafi |
Suna sakhee papaiya boley .. pihu pihu curr | Part2-351 | सुन सखी पपैया बोले ॥ पिहु पिहु कर
पिय सूरत जनावे ॥ मेरो प्राण पात जिह डोले ॥९ ॥ सूरत समुद्र में मेरो मन
कर्कश, मदन वायु झकझौरे ॥ वाम भाग कोकिला पुकारे, सिथल सवित
टकटोरे ॥२ ॥ मोहनलाल गोबर्द्धनधारी, पदयो कौन आवे तुम तोले॥
कुंभनदास प्रभु गोवर्द्धनधर, दासी लेहो किन मोले ॥३ ॥ | Sughrayi |
Aapun naachai aapun gaavai . aisee bahut ghosh jubtinus tum | Part1-329 | आपुन नाचै आपुन गावै । ऐसी बहुत घोष जुबतिनसों तुम
कौन नाच गाय छिपावै ॥१॥ केलिकला कौतूहल नागर कुनित मुरलिका गति
उपजावै । चलत वसन कटिं मुखर मेखला तान तरंग अनंग बढावै ॥२॥
ब्रिजग मोह किये त्रिलोकी देवनागरि किन्नर मन भावै। गिरिधर पद पराग रस वासु
“कृष्णदास” नोछावर पावे ॥३॥ | Saarang |
Dinn sub jaat hoti haye raati .. kahaa bahut darr hott raatikau | Part1-248 | दिन सब जात होति है राति ॥ कहा बहुत डर होत रातिकौ
तुम्हें तो राति बहुत सुहाति ॥१॥ तुम हित बोलत अहो नैंदनंदन तुमतौ है
बैठे लियें दान ॥ जान न दैहों आजहों क्य ौंकर बहोरि बहुतेक आन ॥२॥
जान न देहों तो लेह कहाँते इहाँ तौ हमपै भूषणसारी ॥ मेरी दान बहुत सारिनपै
सो तुम दैहौ चंद्रावलि प्यारी ॥३॥ हाँ पै ही तुम रहौ सयानी दानदेहु हमें होत
अबार ॥! श्रीविदइलनगिरिधर हम जानत हम हारे लैहौ कर हार ॥४॥ | Nat |
Nandmahar ghar baaje badhaai . jasumati koonkh pragat bhaye srihari | Part1-044 | नंदमहर घर बाजे बधाई । जसुमति कूँख प्रगट भये श्रीहरि
आनंदकी निधिआई ॥१॥ मंगल साज लियें व्रजसुंदरि गावत गीत सुहाई ।
आनंद अधिक बढ्यौ निरखत हैं फूली अंग न माई ॥२॥ नंदराय बहु दान
देत हैं मानो घन झरलाई । हरखित भये सकल व्रजके जन क्रृष्णकौ किंकर
बलिजाई ॥३॥ | Sarang |
Dinn dinn aaeen gaeen yeh mug abb kachhu naee yeye thhathi .. jaise | Part1-255 | दिन दिन आईं गईं यह मग अब कछु नई ये ठठी ॥ जैसे
हो तैसें राज करौजू सदा अपने ब्रज तिहारे लाल लागियै दूरहीतें पण ॥१॥
अब कहा कहत सोई कहीयै लाड़िले कुँवरजू हमें तौ समुझ नाहीं बात अथग ॥
गोविंदप्रभु कहा अटपटी लटपटी चलिये चाल ऐसी को गिनैरी माई बड़ेई श्याम
नग ॥२॥ | Kalyan |
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