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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Khelanmein kau kako gusaiyan. | Part2-238 | खेलनमें कौ काको गुसैयां।
हरिहारे जीतेश्रीदामा बरवटही कित करत हसेयां ॥१ ॥
जातपाँत हमसों बडे नाहीं नाहम वसत तुम्हारी छैया ॥
अतिअधिकार जनावत याते अधिक तुम्हारे हैं कछु गैया॥२॥
रूटकरे तासों को खेले रहो सख्रासब ठाके ठेया।॥
सूरदासप्रभु खेल्योई चाहत दाव दियो कर नंददुहैया ॥३ ॥ | Aasawari |
Dekhodekho vrajki veethani veethani khelat hain hari | Part3-084 | देखोदेखो ब्रजकी वीथनि वीथनि खेलत हैं हरि
होरी ॥ गीत विचिन्न कोलाहल कौतिक संग सखा लख कोरी ॥९॥ आईं
झूमि झूमि झुंडन जुरि अगनित गोकुलगोरी ॥ तिनमें जुबती कदंबसिरोमनि
राधा नवलकिशोरी ॥२॥ छिरकत ग्वालबाल अवलनपर बूकावंदनरोरी ॥
अरून अकास देखि संध्याभ्रम मुनिमनसा भइबौरी ॥|३॥ रपटत चरन कीच
अरगजा की केसरि कुंकुमघोरी || कहीनजाय गदांधरपे कछु बुधिवल मति
भरई थोरी ॥७॥ | Pancham |
Subhag shabyapempodhe kunwar rasikavar rasamse angsang jaay raine | NityaPad-126 | सुभग श ब्यापेंपोढे कुंवर रसिकवर रसमसे अंगसंग जाय रेन
जागेहें ॥ शिथिल बसन बिचभूषण अलकछबि सोये मुखसुखसो लपट
उरलागेहें ॥१॥ झुकझक आवें नयन आलस झलक रहो लटपटी बात कहेत
अति अनुरागेहें। सूरदास नंदसुवन तुहयारो यश जानों प्राणपिया सुखहीमें रसपागे
हें॥२॥ | Bihaag |
Betty bhaee bhaan kein arr nand key farjand . hodgy wahwa haaji | Part1-133 | बेटी भई भान कें अर नंद के फरजंद । हॉजी वाहवा हाजी
वाहवा । किस्तकों कन्या भई जसोदाकें कान्ह ।हॉँजी.॥१॥ मिटे दुखदंद
भयौ व्रजकें आनंद ।हॉजी.। हरद दही दूध घृत रंगे सब ग्वाल ।हॉजी.॥२॥
हमतौ ढाढ़ी व्रजके तुम व्रजके सिरदार ।हाँजी.। आये नंदराय दान देत लाय लाय
हॉजी.॥३॥ नंदराय भानराय जीयौ महाराज ।हॉजी ढाढ़ी! मांझ जनम
जनम जाचुँ. व्रजराज ।हॉजी.॥४॥ | Desh |
Horry khele mohana sunder giridhari .. nakh | Part3-127 | होरी खेले मोहना सुन्दर गिरिधारी ॥ नख
सिख सुभग सिंगार सजै सोंधे सुखकारी ॥९। सीस कुल्हें छबि अति
बनी सोहे ललित लिलारी ॥ केसरको वागा बन्यो सोहे अति जू भारी
॥२५॥ लाल गुलाल उड़ावहीं रंग रह्मो सरसाई ॥ यह सुख सोभा निरखिके
सूरदास बलि जाई ॥३॥ | Bilawal |
Aaj chhati jasumatike sutaki chalau badhaavan maaee. bhushan busson | Part1-087 | आज छटी जसुमतिके सुतकी चलौ बधावन माई। भूषन बसन
साज मंगल लै सकल सिंग ार बनाई ॥१॥ भली बात विधि करी बैस बड़ सुत
पायौ नैंदराई । पुन्य पुंज फूले व्रजवासी घर-घर होत बधाई ॥२॥ पूरनकाम
भये निजजनके जीवेंगे यश गाई । परमानंद बात भई मनकी मुद मरजाद
नसाई ॥३॥ | Saarang |
Jaakon veda ratat brahma ratat shambhu ratat shesh ratat | Part1-081 | जाकों वेद रटत ब्रह्मा रटत शंभु रटत शेष रटत
नारद शुक व्यास रटत पावत नहीं पाररी ॥
ध्रुवजन प्रत्हाद रटत कुंतीके कुंवर रटत
द्रुपदसुता रटत नाथ अनाथन प्रतिपालरी ॥१॥
गणिका गज गीध रटत गौतमकी नार रठत
राजनकी रमणी रटठत सुतन देदे प्याररी ॥
नंददास श्रीगोपाल गिरिवरधर
रूपजाल यशोदाको कुंवरलाल राधा उरहाररी ॥२॥ | Sarang |
Barsaneki nabal naari milli horry khelani | Part3-146 | बरसानेकी नबल नारि मिलि होरी खेलनि
आंई हो ॥ बरबट धाय जाय जमुना तट घेरे कुंवर कन्हाई ॥|१॥ अतिझीनी
कैसरि रंग भीनी सारी सुरंग सुहाई ॥ कंचन बरन कंचुकी उपर झलकत
जोवन झांई ॥२॥ केसरि कस्तुरी मलयागर भाजन भरि भरि लाई ॥ अबीर
गुलाल फेंट भरि भामिनी करन कनिक पिचकाई ॥३॥ खेलत खतेलत रसिक
सिरोमनि राधाजु निकट बुलाई ॥ ऋषिकेस प्रभु रीझि श्यामघन बनमाला
पहराई ॥४॥ | Aasawari |
Kaahe koun daant anguriyan chaampat giridhar piyaa hansi kachhuk kadyo | Part1-256 | काहे कों दांत अंगुरियां चांपत गिरिधर पिया हँसि कछुक कद्यो
री ॥ हों पठई नव रंग लाडिले भलो सुन्यों तेरों जम्यों दह्यों री ॥१॥ वर
बिनोद टाढ़े मण जोवत देखत हि मन बिथकि रह्यो री ॥ क्रृष्णदास' प्रभु कों
भज भॉमिनी भर जोबन तेरों जात बह्मों री ॥२॥ | Adano |
Maaee samadhyaaneten brahmam aayo bhar chhori key beach | Part3-088 | माई समध्यानेतें ब्राह्मम आयो भर छोरी के बीच
भरूवा ॥ घेर लियो घर मांझ लुगांइन मूंड लगाई कीच ॥१॥ काहूलई
खसकाय परदनी काहूकियो कजरारो || पिसीपिठी गोंछन लपटाई ब्राह्मनको
कहाचारो ॥२॥ काहूगुदी झणजुला पहेरायो काहू गूलरी माला ॥ तारीदेंदे
महीगन गावें हँसिहँसि ब्रजकी बाला ॥३॥ जसुमति लियो बचाय बापरो
निरमल नीरन्हवायो ॥ नयेवसन पहेराय गुदीते झगुला आनि छिडायो ॥४॥
तव ब्राह्मन निधरक व्हे बेठ्यो पहरि ऊजरेकपरा ॥ एक ग्वालिनि ने आनि
उलेड्यो सरीकीचको खपरा ॥५॥ देख विमल गद्यो चतुरंगने भरलेंभलें
करिगाबें ॥ अति खिलवार मोधुवा पांडे खेलेंहीं सुखपावें ।|६॥ पेजबांधिजो
सुरपति नाचे तो ऐसी फागन माचे ॥ पेट फुलाय बदन टेढोकर विफरद्यो
ब्राह्मग नाचे ॥७॥ गहने जोई माई दे पांडे हमतो फगुवा चाहें ॥ एकन
कान पकर गुलचायो काहू ऐंठी बांहें ॥८॥ जानि सासुरे को यह ब्राह्मन
मोहन कछु बन कहहीं ॥ कृष्णजीवन लछीराम के प्रभुह्रि सकुच सकुच
जिय रहहीं ॥९%॥ | Kafi |
Dekhari dekh shobharasi .. kaam putt tarr kahaa deeje | Part2-360 | देखरी देख शोभारासी ॥ काम पट तर कहा दीजे
रमा जिनकी दासी ॥१ ॥ मुकुटसीस सिखंड सोहे निरख रही ब्रजनार ॥
कोटि सूरज चंद्र आभा निरख डारों वार ॥२ ॥ केश कुंचित विथुरी भ्रूपर
बीच शोभित भाल ॥ मानों चंद्र अबही लजानों राहु घेरयो जाल ॥३॥
चारु कुंडल सुभग श्रवणन को सके उपमाय॥ कोटि कला सूर छबि
देखत रहो मन भरमाय ॥४ ॥ सुभग मुखपर चारु लोचन नासिका यह
भांत॥ मीन खंजन बीच शुक्र मिल बैठे एकही पांत ॥५ ॥ सुभग नासातर
अधर छबि रसभरे अरुणाय ॥ मानों निहार शुक छुवत नहिं भ्रूघनुष देख
डराय ॥६ ॥ हँसन दशन चमक ताई त्रजकण रची पांत ॥ दामिनी दाडिम
नहीं सम कियो अति मन भ्रांत ॥७ ॥ चिबुक पर चित लियो चुराये नवल
नंदकिशोर॥ सूरप्रभुकी निरख शोभा तन्नजतरुणी भई बोर ॥८ ॥
| Sorat |
Aaj kahuunte yaa gokulmein adubhut barkha aiho .. manigan | Part1-069 | आज कहूँते या गोकुलमें अदूभुत बरखा आईहो ॥ मणिगण
हेम हीर धाराकी व्रजपति अति झरलाई ॥१॥ बानी बेद पढ़त द्विज दादुर हिये
हरखि हरियारे ॥ दध्ि घृत नीर क्षीर नानारंग बहि चले खार पनारे ॥२॥
पटह निसान भेरि सहनाई महा गरजकी घोरें ॥ मागध सूत वद चातक पिक
बोलत बंदी मोर्ें ॥३॥ भूषन बसन अमोल नंदजू नरनारिन पहराये शाखा
फल दल फूलन मानों उपवन झालर लाये ॥४॥ आनंद भरी नाचत व्रजनारी
पहरें रंगरंगकी सारी ॥ वरनवरन बादरन लपेटी विद्युत न््यारी न््यारी ॥५॥
दरिद्र दावानल बुझे सबनके याचक सरोवर पूरे | बाढ़ी सुभय स ुजस की सरिता
दुरित तीरतरु चूरे ॥६॥ उल्हौं ललित तमाल बाल एक भई सबन मन फूल॥
छायाहित अकुलाय गदाधर तक्यौ चरनकौ मूल ॥७॥ | Maroo |
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