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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Daan deuun thaheri iktaiyaan .. shramjal bindu parat mukhparaten baithi | Part1-247 | दान देऊँ ठहेरी इकटैयाँ ॥ श्रमजल बिंदु परत मुखपरतें बैठी
आय कदमकी ऐयाँ ॥१॥ कुचकलशनकों छँँक धरे क्यों चाखन देहु पलोट्ट
पैयोँ ॥ यह रस तुमकों नाहिं मिलैगो छाँड़ौ लाल हमारी बैयाँ ॥२॥ बहुत
अबार भई घर जैहों मोकों आज लड़ैगी मैया ॥ माँड़ी ओक प्याऊँ दधि मीठौ बेग
करो आवत बलभैया ॥३॥ प्यारी दि प्यावत करि हि तसों श्याम सुंदर पीवत
न अधैया ॥ यह सुस्वाद कछु कहत न आवत नंददास आनैँद न समैया ॥४॥ | Saarang |
Mandal vaajyo ree ! vrajajan kein, pragate sribalram . rohini-koonkhi | Part1-173 | मांदल वाज्यो री ! ब्रजजन कें, प्रगटे श्रीबलराम । रोहिनी-कूंखि
प्रगट पुरुषोत्तम व्रजजन-मन अभिराम ॥ जो जन विनय करत, दुख तिनके काटत
हैं तिहे जाम । टेरत कोउ जात तहाँ भाजे, और कछ्टू नहिं काम ॥ स्याम राम
को भेद न जानत, करत जुदाई मन में । 'छीत स्वामी” मुख सों कहा वरनों !
आगि लगौ ता तन में ॥ | Saarang |
Rasikani radha palana jhoole .. dekhi dekhi gopijan phoole | Part1-205 | रसिकनी राधा पलना झूले ॥ देखि देखि गोपीजन फूले
॥१॥ रतनजरितको पलना सोहे | निरखि निरखि जननी मन मोहे ॥२॥
शोभा की सागर सुकुमारी ॥ उमा रमा रति वारि डारी ॥३॥ डोरी ऐंचत
भोंह मरोरे ॥ बारबार कौरति तृण तोरे ॥४॥ तिहिं छिनुकी शोभा कछु
न्यारी ॥ अखिल भुवन पति हाथ सवारी ॥५॥ मुख पर अंबर वारति मैया॥
आनंद भयौ परमानंद भैया ॥६॥ | Aasawari |
Merey ree ! munn mohan maaee . sanjhaa samey dhenu key paachhen aavat hain sukhdai ..| | NityaPad-284 | मेरे री ! मन मोहन माई । संझा समे धेनु के पाछें आवत हैं सुखदाई ॥|
सख्वा-मंडली मध्य मनोहर मुरली मधुर बजाई ।
सुनत स्रवन तन की सुधि भूली, नैन की सैन जताई ॥
कियौ प्रवेश नंद-गृह-भीतर जननी निरखि हरषाई ।
छीत-स ्वामी गिरिधर के ऊपर सरवसु देत लुटाई ॥ | Gori |
Praatasmein bhayo samliaho jaago .. gaay duhunakon bhajan | NityaPad-022 | प्रातसमें भयो सांमलियाहो जागो ॥ गाय दुहुनकों भाजन
मांगो ॥ १॥ रविके उदय कमल प्रकासे ॥ भ्रमर उठ चले तमचर भासे ॥ २॥ गोप
वधू दथधि मंथन लागी ॥। हरिजूकी लीला रसपागी ॥|३॥ बिकसत कमल चलत
अति सेनी ॥| उठो गोपाल गुहूं तेरी बेनी ॥ परमानंददास मन भायो॥ चरण
कमल रजते क्षणपायो ॥५॥। | Bibhaas |
Teree houn balibali jaauun giridharan chhabile | kulahi chhabili | NityaPad-060 | तेरी हों बलिबलि जाऊं गिरिधरन छबीले | कुलहि छबीली
अरु पाग छबीली अलक छबीली तिलक छबीलो माई री नैन छबीले प्यारी जू
के रंग रंगीले ॥ १॥॥ अधर छबीले बसन छबीले बेन छबीले हो अति सरस सु
ढीले। गोविंद प्रभु नखसिख अंग अंगन लालन अति ही रसीले ॥।२॥ | Adano |
Sakal sakhee milli aadhu nakh sikh bhekh banaai .. | Part3-311 | सकल सखी मिलि आद्हु नख सिख भेख बनाई ॥
इंडि औसर देखन नंद के ग्रह मोहन राइ ॥१॥ नंद गांव नव मन्दिर सुंदर
सिंखरि सुढार ॥ मंगल कलस बिराजत, उपर मुकता हार ॥२५॥ सकल
साज की सौंज ही लै आइ सुकुमारी ॥ चोवा चंदन छिरकति मोहन बदन
निहारी ॥३॥ मृद् बोलनि मुसिकावनि हाथन कुंमकुम बारी ॥ जाल रंध्र
छाजन चढ़े गावति मीठी गारी ॥४॥ ताल, मृदंग, उपंग, चंग, मुरली बहु
मोल ॥ महुवरि झां झ झालरी बाजति दुंदुभि ढोल ॥५॥ झख करदम की
कीच मची खेलति अब नंदलाल ॥ “आसकरन' प्रभु मोहन ललितादिक
गुपाल ॥६॥ | Gouri |
Myrie praatkaal nandlal pagbandhawat baldikhawat darpan bhalarholasi .. | NityaPad-154 | माईरी प्रातकाल नंदलाल पागबंधावत बालदिखावत दर्पण भालरहोलसि ।।
सुंदर नवकरनबीच मभंजुमुकरकीछबि रहीफबिमानों गहि
आन्योहै युगकमलनशशि ।॥|१॥
बिचबिचचितकेचोर मोरचंद्र माथेंदिये
तिनढिंगरत्न पेचबांधतहैंकस ।।
नंददासललितादिक ओटभये अवलोकत
अतुलितछबिकहिनजात फूलझरेंहँस ॥ २॥ | Bilawal |
Kahaante adharanako rung khoyo .. mein jaani parirambhan chumban | NityaPad-054 | कहांते अधरनको रंग खोयो ॥ में जानी परिरंभन चुम्बन
उरको चित्र सब धोये ॥१॥ तेरे संगम सुन व्रजसुन्दर लालन अनत न सोयो ॥
कृष्णदास पिय गिरिधर पियको करतल चिबुक परोयो ॥।२॥ | Malkos |
Hans peak daari | NityaPad-311 | हँस पीक डारी
अचरापरी चलि ये जात ही गली मोहन बैठे छाजें।। निरख बदन गृह कल न परत
तन कछुक संकुचमें गुरुजनकी जियमें धरी ॥। १॥| सुंदर कर कमल फेरकें सेन दई
जहां निबिड निकुंजदरी ॥ लें चली सखी मोहि जहांरी गोविंदप्रभु रह्मो न परतरी
प्रियाप्रेम हृदय उमगभरी ॥२॥ | Iman |
Aaj atee shobhit hain nandlal... | NityaPad-177 | आज अति श़ोभित हैं नंदलाल।॥
क्रीट मुकुट सिर सुभग विशजत गरे फुलनकी माल ॥१॥
ठाडे कुंजद्वार राधा संग बेनु बजायो रसाल।
कमल लिये कर परमानंद बल बल बल गई बव्रजबाल ॥। २॥। | Saarang |
Rasik shiromani nandlal rangbhineho .. | Part2-242 | रसिक शिरोमनि नंदलाल रंगभीनेहो ॥
लाड लडयाये नवल बाल लाल रंगभीनेहों ॥१॥
भले मनाये भूरि भाग रंगभीनेहों ॥
रूपछके लोचन घुमात लालरंग० ॥२॥
अलक सीस रहीं शोभा देत रंगभीनेहों ॥
कामकेत के बीज बये लालरंग० ॥३ ॥
वाहुदंडगढयो करन फूल रंगभीनेहो ॥
असिस रंग को मूल लालरंग० ॥४॥
मदनमथ डग मगी चाल रंगभीनेहो ॥
उरसि मरगजीमाल लालरंग० ॥५ ॥
मेहेकत तन मिली सुवास रंगभीनेहों॥ अलिगावत कौरत आसपास
रंगभीनेहो ॥६ ॥ ताही सों मिलि हैं हमें चेन रंगभीनेहो ॥ सहिन सकत यह
शूढ सेन रंगभीनेहों ॥७ ॥ रामराय प्रभु सुनहंसे रंगभीनेहों ॥ भाग्यवानके
हीय बसे रंगभीनेहो ॥८ ॥ | Kaafi |
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