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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Mohan nandrai kumar pragat brahm nikunj naayak bhakt hita | Part1-081 | मोहन नंदराय कुमार प्रगट ब्रह्म निकुंज नायक भक्त हित
अवतार ॥१॥ प्रथम चरण सरोजवंदो श्यामघन गोपाल । ललित कुंडल
गंडमंडित चारुनेन विसाल ॥२॥ बलराम सहित विनोद लीला शेष संकर देत।
दास परमानंद प्रभु हरि निगम बोलत नेत ॥३॥ | Malav |
Dekh sakhee goraski aangan baathi keach maharaken . harad dahee | Part1-049 | देख सखी गोरसकी आंगन बाठी कीच महरकें । हरद दही
माखन मधि छिरकत भरे सबमांट डहरकें ॥१॥ ढोटा भयौ नंदबाबाके सुनिसुनि
प्रीत पहरकें । घरघरते गोपी सब धाई रही न ज्ञाति गहरकें ॥२॥ जसुमतिकी
इच्छा मन पूजी लागी हुती अहरकें | गिरिधरदास कल्यान जो सुख ब्रजमें सो सुख
न ब्रह्मा हरकें ॥३॥ | Sarang |
Maaee samadhyaanten brahmam aayo bharhori key beach | Part3-106 | माई समध्यानतें ब्राह्मम आयो भरहोरी के बीच
भरूवा॥ घेरलियो घरमांझ लुगांईन मूंडलगाई कीच ॥ १॥ काडू लई खसकाय
परदनी काहू कियो कजरारो ॥ पिसी पिठी गोंछन लपटाई ब्राह्मन को कहा
चारो ॥२॥ काहू गुदीझगुला पहेरायो काहू गूलरी माला ॥ तारी देदे महीगन
गावें हँसि हँसि ब्रजकी बाला ॥३॥ जसुमति लियो बचाय बापरो निरमल
नीर न्हवायो ॥ नये वसन पहेराय गुदीते झगुला आनि छिडायो ॥४॥ तब
ब्राह्मग निधरक व्हे बेठ्यो पहरि ऊजरे कपरा ॥ एक ग्वालिनि ने आनि
उलेड्यो सरीकीचको खपरा ॥५॥ देख विमल गह्मो चतुरंग ने भलें भले
करि गावें ॥ अति खिलवार मोधुवापांडे खेलेंहीं सुख पावें ॥६॥ पेजबांधि
जो सुरपति नाचे तो ऐसी फागणन माचे ॥| पेट फुलाय वदन टेढोकर विफरदो
ब्राह्मग नाचे ॥७॥ गहेन जोई माई देपांडे हमतो फणुवा चाहें ॥ एकनकान
पकर गुलचायो काहू ओंठी बाहें ॥८॥ जानि सासुरेको यह ब्राह्मन मोहन
कछु बन कहहीं ॥ कृष्ण जीवन लछी राम के प्रभु हरि सकुच सकुच जिय
रहहीं ॥९॥ | Kafi |
Giridhar peeya rishwat sumukhi alapat raag kaanharon . | Pustak1-347 | गिरिधर पीय रिश्वत सुमुखी अलापत राग कानहरों ।
मन अटक्यौ मनमोहन महीयाँ लेत तान है गयो तानरों ॥॥॥
चपलनैन पल्रकन लगत बिगल्ित भ्रुव करत गानरो ॥
कृष्णदास प्रभु रसिक मुकट मणि गाढ़े आलिंगन दे बन्यौ बानरों ॥२॥ | Kanharo |
Karat kaleu kunwar kanhaiya ... | NityaPad-032 | करत कलेऊ कुंवर कन्हैया ।॥
संकरसन के संग विराजत ओर राजत गोपन के छैया।। १॥
मधुमेवा पकवान मिठाई बहुविधि विंजन सरस सुहैया।।
ओद्यो द ूध सद्य धोरि को तातो मिश्री बहुत मिलैया ॥ २॥॥
अरस परस दोऊ खात खबावत निरख रोहिनी जसुमति मैया ।।
यह छबि देखिनंद आनंद परमानंददास बलिजैया ।। ३॥। | Ramkali |
Jyeshth maas tapat ghaam | NityaPad-250 | ज्येष्ठ मास तपत घाम
कहांकुं सिधारो लाल ऐसी कोन चतुर नार बाको बीरा लीनों ॥ नेंकतो कृपा
कीजे हमहुँको दरश दीजे जाईये फीर बाके धाम जासु नेह नवीनों ।।९॥ बांह
पकर भवन लाई शबय्यापर दीये बेठाई अरगजा लगाय अंग हियो सीतलकीनो ।।
रसिक प्रितम कंठलाय लीनों रससों मिलाय अरस परस केलि करत प्रीतम
बसकीनों ॥२॥ | Saarang |
Srivallabhako naam lait shrivallabhakon dhyaandharat | Part2-314 | श्रीवललभको नाम लेत श्रीवल्लभकों ध्यानधरत
श्रीवललभ श्रीवललभ श्रीवल्लभ गुन गाऊं॥ वल्लभके लेत नाम पूरण
होत सकल काम श्रीवल्लभ श्रीवल्लभ रटत रहो अचल पद निभाऊं ॥।१ ॥
श्रीवल्लभ महा अति उदार वल्लभ गृह देत दान इनते छांड ओरन ध्यावे
सोड़ अति अभागे॥ रसिकराय विनती कीनी दास छाप शिर दीनी
श्रीवललभ रटत हीये ओर पंथ त्यागे ॥२ ॥ | Hameer |
Jamunan nadiya key tata . panyo bharati akeli aughat gahizu sthaam merrie lutt ..1.. sir dhari | NityaPad-271 | जमुनां नदिया के तट । पान्यो भरति अकेली औघट गहिज़ु स्थाम मेरी लट ॥१॥ सिर धरि
गगरी मारग डगरी पहरि लिए पीरे पट । देखत देह अधिक छबि लागी कछुक
बने कंचुकी -कट ॥२॥ फूल जु एक ग्वालिनिके जिय जनु रन जीते कोऊ भट।
“परमानंद गोपाल आलिंगी सफल किए कंचन घट ॥३॥ | Saarang |
Doori khelan jinn jaau lalaa merey aayo haye haau ..dhri... | Part1-151 | दूरि खेलन जिन जाऊ लला मेरे आयो है हाऊ ॥धृ.।।
कुँजन कुंजन गौ चराईं निशदिन यमुना जाऊँ | बैठि पाताल कालीनाग नाध्यो
तहाँ न देखे हाऊ । मैया कैसे है हाऊ ॥१॥ वामनरूप छल्यो बलि राजा तीन
पेंड बसुधाऊ । बाँधि समुद्र सबै दल लूटे तहाँ न देख्यो हाऊ ॥२॥ राम रूप
है रावण मास्बो दश मस्तक बीस भुजाऊ | सुबरन लंका विघन करी है तहाँ न
देखे हाऊ ॥३॥ बालकपन में माटी खाई तीन लोक दिखराई । सूरदास प्रभु
अद्भुत लीला मोपै बरनी न जाई ॥४॥ | Bilawal |
Douu mill jemat kanchan thaari | madhumeva pakwan mithaai parosatahe | NityaPad-083 | दोऊ मिल जेमत कंचन थारी | मधुमेवा पकवान मिठाई परोसतहे
ललितारी || १॥ भोजन करत छहो रससो मिल सुन वृषभान दुलारी ॥| अचवनको
यमुनाजल सीतल कनक रत्न जरी झारी ॥२॥ अतिसुगंध कपूर लोग युत प्रीतिसो
रुचिर सवारी ॥ हस मुसकाय दशन खंडित बीरी सूरदास बलहारी ।।३॥ | Saarang |
Esso bhakt tarey aur taare. | NityaPad-369 | एसो भक्त तरे और तारे।
परम कृपाल परम दीनबंधु शरण ग्रहे वाको दुःख निबारे |
सबसू मैत्री शत्रु नहीं कोई वादविवाद सबनसुं हारे ।
हरिको नाम जपे निशवासर संशय शोक संताप निवारे ॥
काम क्रोध ममता मद मत्सर माया मान मोह भ्रम टारे।
निरलोभी निरवैर निरंतर कृष्ण रूप जब हृदय विचारे।
हरि को नाम सुने अरु गावे कृष्ण भजन करी दुःखहि दुरावे ।
सूरदास हरिरूप मग्न भये गुन ओगुन का पर नव आवे।॥ | Kanharo |
Tum param chatur vrajnari .. nagari daan dey .. teree daani | Part1-227 | तुम परम चतुर ब्रजनारि ॥ नागरि दान दे ॥ तेरी दानी
श्री नंदकुमार ॥ नागरि दान दे ॥धरु.॥ गोरस बेचन ले चलीं गोकुल मथुरा
बीच । मूटुकी ढोरी शीशतें गोरस की मची कीच ॥१॥ पीठि मोरि आगें चली
उत्तर नारि बनाय | सारी झलकें बदनपै शोभा बरनी न जाय ॥२॥ टेढ़ी
पाग बनायकैं दान कहत हो लैन । ललित ब्रिभंगी ठाढ़े भये सो ग्वालन दे दे
सैन ॥३)॥| काजर दीयें रगमगौ बोलत उलटे बैन । कर पल्लव दीये बदनपै
तातें लटकि नचावत नैन ॥४॥ झगा झलमले बंदसों चितवनि नयन विशाल।
चटक मटक लकुटी गहे हठ रोकी है ब्रजबाल ॥५॥ शिर श्रीमंत जड़ाव कौ
बेंदी दियें लिलार । तिरछी पूँघट चितवनी नव मोहे नंदकुमार ॥६॥ सखी
सहेली जो मिलें जो कहूँ प्रीतम होय । नवकिशोर और नवबधू तामें यह मिस
मिलनौ होय ॥७॥ चमकि चली चंद्रावली पायल पॉय बजाय । बैनी लटके
पीठि पै देखि मोहन रहे ललचाय ॥८॥ सब सुख पायौ सुंदरी वृंदाविपिन
विलास | प्रभु मुकुंद गिरिधर मिले बल बल माधोदास ॥९॥ | Bilawal |
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