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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Gaari daihin gaari hansat gamaari rusgorus deeyau dhaar aeye hoe
Part1-254
गारि दैहीं गारि हँसत गमारि रसगोरस दीयौ ढार ए हो ये मुरार ॥ बुंदावन मेंझार उन मोसों कीनी रार एक एककी दैहौं चारचार ॥१॥ अति लेँगराई देतहै लंगर मोकों होत अबार ॥ जगन्नाथ कविराय के प्रभु माई मोही कानहर कार ॥२॥
Shyam Kalyan
Khelat basant aaye mohan apane rung .. karat
Part3-052
खेलत बसंत आये मोहन अपने रंग ॥ करत ताल कुनित बलिअबलि युवती मंडल संग ॥|१॥ मुरज मंजरी चंग महुवरि बैन विषान मृदंग ॥ झालरी जंत्र उपंग धुनि उपजत तान तरंग ॥२॥ उडति अबीर गुलाल कुमकुमा केसरि छिरके अंग ॥ गलित कुसुम सिरपाग लटपटी नाचत ललित त्रिभंग ॥३॥ कोऊ किज्नरि सरस गति मिलवत कोऊ चंग ॥ जन त्रिलोक प्रभु बिपिन बिहारी चितवत उदित अनंग ॥४॥
Basant
Ilamma srivallabh laalahi jhoolaave.. laale
Part2-325
इलम्मा श्रीवल्लभ लालहि झूलावे॥ लाले झूलावे मन कसा मत प्रमुदित मंगल गावे ॥१ ॥ गहि करडोर पाटकी करसों मनहि मन ॥ कुंभनदास प्रभुकी छबि निरखत ब्रज जन मंगल गावे ॥२ ॥
Aasawari
Phoolke bhawan giridharan navnagari phool singar curry atee hii raaje .
NityaPad-265
फूलके भवन गिरिधरन नवनागरी फूल सिंगार करि अति हि राजे । फूलनकी पाग सिर स्थाम के राज ही फूल की माल हियपें विराजे ॥१॥ फूल सारी बनी कंचुकी फूल की फूल लहेंगा निरख काम लाजे । छीतस्वामी फूल-सदन प्यारी संग विलसि मिलवत अंग काम दाजे ॥२॥
Kanharo
Horry khelei banegi roosen kesein banegi .. aisehi rung
Part3-359
होरी खेलेई बनेगी रूसें केसें बनेगी ॥ ऐसेही रंग रहेगो रंगीली तू बहुरंग सनेगीं ॥ १॥ ऐसें कैसें फनुआ पैयत तामे गुन ओगुन ना गिनेगी ॥ रसिक प्रीतम के संग होरी खेलत खेलिमें भोंह तनेगी ॥२॥ 9 (| राग बिहाग (घर) या ऋतु को सुख मान सखीरी त्तोय मान मनावन मोहि पठाई ॥ तू हठ मांड रही कबह्ू ते तोहि वीर नाहि बिसारी ॥१॥ तो बिन होरी को रंग न ज्हे है बिधिना कर तोए मान महारी ॥। प्रान प्रीया की प्रान पियारी मान मेरो कल्यमो बलिहारी ॥२॥
Bihag
Aayo haye abadhoot jogi kanhaiya dikhalaavai hoe maaee
Part1-115
आयो है अबधूत जोगी कन्हैया दिखलावै हो माई ॥प्रु.॥ हाथ ब्रिशूल दूजे कर डमरू सिंगीनाद बजावै | जटा जूटमें गंग बिराजै गुन मुकुंदके गावै हो माई ॥१॥ भुजंगकौ भूषण भस्म कौ लेपन और सोहै रुंडमाला । अर्द्धच॑ंद्र ललाट बिराजे ओढ़नकों मुगछाला ॥२॥ संग सुंदरी परम मनोहर वामभाग इक नारी | कहे हम आये काशीपुरीतें वृषभ कियें असवारी ॥३॥ कहै यशोदा सुनौ सखीयौ इन भीतर जिन लाऔ । जो माँगे सो दीजों इनकों बालक मती दिखाओ ॥४॥ अंत्तरयामी सदाशिव जान्यौ रूदन कियौ अति गाढ़ो । हाथ फिरावन लाई यशोदा अंतरपट दे आड़ौ ॥५॥ हाथ जोरि शिव स्तुति करतहैं लालन बदन उघारयौ | सूरदा
Aasawari
Nisake uneende nena duriduri jaat .. sub dinn
Part3-364
निसके उनींदे नेना दुरिदुरि जात ॥ सब दिन बीत्यो होरीके ओसर अंगअंग अलसात || १॥ रंग रगमगणे गुलाल सगमगे लग्यो अरगजा सांवल गात ले अंचर पोंछत पिय प्यारी पिय तन निरख मुसकात ॥२॥ बोहोत गई निस जान लाल संग पोढ़ी पिय अंग अंग लपटात ॥ कृष्णदास प्रभु फाग खेलकी अरसपरस बातें बतरात ॥३॥
Bihag
Chalari sakhee nandgam jaay vasiye khrik khelat vrajchandson
NityaPad-098
चलरी सखी नंदगाम जाय वसिये ख्िरक खेलत ब्रजचंदसों हसिये।।१॥ बसे बेठन सबे सुखमाई।। एककठिन दुःख दूरकन्हाई।। २॥ माखनचोरे दुरखुर देखूं॥ जीवन जन्म सुफल कर लेखूं॥। ३॥ जलचर लोचन छिनछिन प्यासा ॥ कठिनप्रीति परमानंददासा ।।४॥।
Aasawari
Srivrindavan chand khelein horry hoe ..|bhru0.. ita mohan
Part3-209
श्रीवृंदावन चंद खेलें होरी हो ॥|भ्रु०॥ इत मोहन सज सब ब्रज बालक बन बन आये टोल ॥ उतब्रज युवतिन वसन साजे पहरे चीर अमोल्ल ॥ १॥ तिनमें मुख्य वृषभान नंदनी शोभा वरनीन जाय ॥ गौर स्याम जोरी बनीहें उरआनंद न समाय ॥२॥ कनक कलश केशर के रंगसों भरलीने दोझओर || पिचकाई परस्पर छिरकत तक तक नवलकिशोर ॥ ३॥ बाजत ताल मृदंग झांझ डफ सुर मंडल कठताल ॥ वीना वेनरबाब किन्नरी बाजत वेणु रसाल ॥ 9४॥ चोवा चंदन ओर अरगजा भरिलीने कनक कचोल ॥ युवति यूथ सब मिलिकें धांई दियोहे श्याम सिरढोल ||५।॥| तब बलभद्र सखा सब उमड़े उडत अबीर गुलाल ॥ हो हो हो कह्ठटि बोल न लागे नाचत गोपी ग्वाल ॥६॥ सेनावेनी सब॒ सखियन मिल गिरिधर लीनेघर || नयन आंजि मुख मांडरोरी हसत वदन तनहेर ॥७॥ बहोरखचों मिलदसपांच सुंदरी बलदाऊ पकरें धाय ॥ मोहन की गति उनकी कीनी नीलांबर लिये छुडाय ॥८॥ दोउन लीनों फणुबा आभूषन ओर पटकूल ॥| अति रस प्रेमबढ्यो गोकुल में सुरपति वरखत फूल ॥९॥ यह विध स्वलत ब्रजजन सबमिल चले श्रीयमुनान्हान ॥ अति प्रफुल्लित नंदजू पहराये बिमतल वसन परिधान ॥१०|| तब नंदरानी नयन सिरानी भर मुक्ता फलथार ॥ आस्ती वारत प्रान पियापर त्रिभुवन जयजयकार ॥ १ १॥| युग युगराज करो ब्रज अबचल भक्तन देह आनंद | श्रीवललभ पदकमल मधुप मन हरिजन पीवे मकरंद || १ २॥
Kaafi
Sakhee sugandh jall ghorke chandan hari lagawat .
NityaPad-245
सखी सुगंध जल घोरके चंदन हरि लगावत । वदनकमल अलकें मधुपनसी टेढी पाग मन भावत।।१॥ कर बिंजना कुसुमन के ढोरत कुसुम भूखन ले ले पहिरावत ॥ मृदुवेली सी वृच्छतर क्रीडत ब्रजाधीश गुन गावत ॥२॥।
Saarang
Yashoda hari paalnen jhulaavai | hulraavai hulrai malhaavai joee
Part1-100
यशोदा हरि पालनें झुलावै | हुलरावै हुलराई मल्हावै जोई सोई कछु गबै ॥१॥ मेरे लालकों आऊ नींदरियां काहे न आई सुवाबै । तू काहे न वेगि सौं आवै तोकों कान्ह बुलावै ॥२॥ कबहुँ पलक हरि मूँदि लेतहें कबहूँ अधर फरकावै । सोवत जानि मौन छैकें रहे करिकरिं सैन बतावै ॥३॥ इहि अंतर अकुलाई उठे हरि जसुमति मधुर हलावै। जो सुख सूर अमर मुनि दुर्लभ सो नित जसुमति पावे ॥४॥
Bilawal
Dhani dhani shubh ghadee dhani aaj .. shree gokul
Part3-143
धनि धनि शुभ घड़ी धनि आज ॥ श्री गोकुल सुख वास बसे अब, श्री विट्लेश प्रभु महाराज ॥१॥ मोतिन चौक पूरे घर घर प्रति, कुमकुम हाथन शोभित द्वार ॥ मंगल कलश अरू ध्वजा पताका, घर घर बिथनि बंदनवार ॥२॥ बाजत ताल मृदंग झांझ ढफ, दुंदभी मदन भेरि सहनाई ॥ स्वस्ती वचन पढ़त ऋषिवर तहां निज जन नाचत गावत आई ॥३॥ तिहिं अवसर हरि जु को अलंकृत, बागो पाग केसरी रंग ॥ कुल्हे केसरी तीन चंद्रिका भूषन भूषित राधा संग ॥|४॥ वृजजन के उत्साह भाव सो मेवा मिठाई बह विधि भोग ।| बीरा धरि आरती उतारत आनन्द मगन सबे वृज सबे वृज लोग ॥५॥ छिरकत हैं गिरिधर प्यारे कों केसर चोवा अबीर गुलाल ॥ मनहु अरूण उदय घन बिजुरी कनिक बेलि संग श्याम तमाल ॥६॥ जुग जुग राज करो श्री गिरिधर श्री विद्वलनाथ सदा वृजवास ॥ श्री बलल्‍लभ पद रेणु कृपा बलि यह सुख मांगत है हरिदास ॥७॥
Aasawari
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