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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Khelnakon dhauri akulani..
Part2-048
खेलनकों धौरी अकुलानी॥ डाढमेल सन्मुख आतुर ह्लै नंदनंदनकी सुन मृदुवानी ॥१ ॥ बडरे गोप चकित भये देखत एसी कबहू सुनी न कहानी॥ नाचत गाय भई नौतन ब्रज वरसों बरस कुशल यह जानी ॥२ ॥ नंदकुमार निवेर झार मुख जय जय शब्द करत कलगानी॥ चत्रभुज प्रभु गिरिधर अब यह त्रज राजकरों भक्तन सुखदानी ॥३ ॥
Sarang
Chamak aayo chandso mukh kunjate jaba niksi .. sunder saanvaro
NityaPad-069
चमक आयो चंदसो मुख कुंजते जब निकसी ॥ सुंदर सांवरो किशोर ग्रोहन लाग रहे चकोर ललितादिक कुमुदावलि निरख नयन विकसी ॥।१॥ पहिरें तन श्वेत सारी मानों शरद उजियारी मानों सुधासिंधु मध्य दामिनी धसी।। कहत भगवानहित रामरायप्रभु प्यारी वशकीने कुंजविहारी छबि निरख मंद हसी ॥२।।
Bhairav
Horry khele mohana rangbhine laal .. rasik
Part3-119
होरी खेले मोहना रंगभीने लाल ॥ रसिक मुकुट मनि राधिका अंगअंग ब्रजबाल ॥१॥ कपूर कुंकुमा घोरिकें सुगंध संभारी ॥ कीयो अरगजा रंगको विच मृगमद डारी ||२॥ रतन खचित करमें लई कंचन पिचकारी ॥| छिरकत कुंवर किसोरकों चंद्रावलि नारी ॥|३॥ भरत गुपाले भामिनी झकझोरा झकझोरी ॥ कोऊ करते मुरली लई कीऊ पीत पिछोरी ॥४॥ ललिता ललित वचन कहे फगुवा देह प्यारे ॥ के राधे के - पाय परो नैनन के तारे ||५॥ फगणुवामें मुरली लई रसबस पिय प्यारी ॥ नवल जुगलके रूप पर विचित्र बलिहारी ॥६॥
Bilawal
Kunwar baithe pyaareeke sanga angang bharey rung balbal bal tribhangi yuvatin sukhdai .|
NityaPad-229
कुंवर बैठे प्यारीके संग अंगअंग भरे रंग बलबल बल त्रिभंगी युवतिन सुखदाई ।| ललित गति विलास हास दंपतिअतिमन हुलास विगलित कच सुखदाई ॥ सुमनवास स्फटित कुसुम निकर तैसीई शरद रैन जुन्हाई ॥१॥ नव निकुंज भ्रमरगुंज कोकिला कलकूजत पुंज सीतलसुगंध मंद बहत पवन सुखदाई ॥। गोविंदप्रभु सरस जोरी नवकिशोर और नवकिशोरी निरख मदनफौज मारी छैलछबीले नवलकुंवर व्रजकुल मणिराई ॥२॥
Saarang
Yamunajal giridhar karat vihaar.. aspas
Part2-340
यमुनाजल गिरिधर करत विहार॥ आसपास युवती मिलि छिरकत हंसत कमल मुखचार ॥१ ॥ काहुकी कंचुकी बंदटूटे काहूके टूटेहार॥ काहुके वसन पलट मनमोहन काहु अंग न संभार ॥२॥ काहुकी खुभी काहुकी नकबेसर काहुके विथुरेवार॥ सुरदास प्रभु कहांलो बरनों लीला अगम अपार ॥३॥
Todi
Jaanati houn jese gunan bharey .. kaahe koo duraav karat
Part2-347
जानति हों जेसे गुनन भरे ॥ काहे को दुराव करत हो बलि जांउ सोई ब कहो काके जू ढरे ॥१ ॥ निस के उनी दे नेंन अरुन दोऊ आलस बस सब अंग भरे ॥ चंदन तिलक मिदयों काहू वंदन स्थाम सुभग तन नख उधघरे ॥२ ॥ अब तुम कुटिल किसोर नंद सुत कोन कोन के मन जु हरे ॥ अब एते पर समझ “सूर' प्रभु सोंह करन कों होत खरे ॥३ ॥
Suha
Aaj bunn bennu bajawat shyam .. yeh kaha chakrat bhaee vraj
Part1-294
आज बन बेंनु बजावत श्याम ॥ यह कह चक्रत भई ब्रज गोपी सुनत मधुर स्वर ग्राम ॥१॥ कोऊ ज्यौंनार करत कोऊ बैठी कोउ ठाढ़ी है धाम ॥ कोऊ जेंबत कोड पतिहिं जिमावत कोउ शुंगार में बाम ॥२।। मानों चित्रकीसी लिख काढ़ी सुनत परस्पर नाम ॥ सूर सुनत मुरली भई बौरी मदन कियौ तन ताम ॥३॥
Kedaro
Rung bheeni thaadhani atee ruchison chaaru mangalra gaavai hoe . laal
Part1-124
रंग भीनी ठाढ़नि अति रुचिसों चारु मंगलरा गावै हो । लाल जन्म सुनी नाचत आई झाँझ्ष मुदंग बजावै हो ॥१॥ उघटत मुख संगीत ललित गति देसी करी दिखरावै हो | चिरंजीयौ जसोदा तेरी सुत यों कहि मोद बढ़ावै हो ॥२॥ सुनि सुनि रीक्षि रीक्षि ब्रजपति अति आनंद उर न समाबै हो । अपने लाल पर करि न्योंछावर ढाढ़निकों पहरावै हो ॥३॥ देत असीस चली मंदिर ब्रजरानी नेग चुकावै हो । बारंबार बिलोकी ललन मुख नंददास मन भावै हो॥४॥
Jetashri
Sakhaakahatahain syamkhisyane .. aapahin aanlukebhayethade
NityaPad-190
सखाकहतहैं स्यामखिस्याने ।। आपहीं आनलुकेभयेठाडे अबतुम कहारिसाने ॥|१॥ बीचहीबोलउठे हलधरतब इनकेंमायनबाप ।। हारजीतको नेकनसमझत लरकनलावतपाप | २॥ आपनहार सखासों झगरतयह कहदियोपठाय ॥ सूरस्यामउठचलेरोयकें जननीपूछतधाय ॥। ३॥।
Bilawal
Nandrai lalaa vrajaraay lalaa tum radha russ
Part3-116
नंदराय लला ब्रजराय लला तुम राधा रस बस किनेहो ॥ नंदराय लला ब्रजराय लला गुन प्रेम रूप रस भीनेहो ॥१॥ यह सुरति समागम नीकी ॥ हों कहत तिहारे जीकी ॥२॥ यह कोक कला सबजाने ॥ ताते तुमरे मनमाने ॥३॥ यह प्रति छिन नौतनलागे ॥ भयो मदन विकल फिरिजागे |४॥ यह गौर वरन तन सोहे ॥ मुरलीधरको मनमोहे ॥५॥ नखसिख परमसुदेसा ॥ यह मदन मनोहर वेसा ॥६॥ यह भागि सुहागकी पूरी ॥ घनस्याम सुजीवनमूरी ॥७॥ यह खेलत पियसंग होरी ॥ बरसंग लिये सतगोरी ॥८॥ मिलि बंसीवट तर आई॥ सबसोंज फागकीलाई ॥९॥ तब पुलिन तिरोंछी धाई ॥ करलियें कनिक पिचकाई ।। १ ०|। गिरिधरन कल्प तरुतीरा || संगगोप कुंवर बलवीरा ॥११॥ डफताल वांसुरी बाजे ॥ कोऊ खेलत हँसत न लाजे ॥ १ २स॥ नवसतसजि आंई गोरी ॥ पति मातपिता की चोरी ॥|१ ३॥ कलगावत मीठी गारी ॥ रस खेल मच्यो अतिभारी ॥ १ ८॥ तहां ऊडत गुलाल अबीरा ॥ चोवा चंदन अरगजा नीरा ॥१५॥ तहां भरत भराबत नारी ॥ रंगरंजित भीनी सारी ॥१६॥ एक हो होरी बोलें ॥ लटकत पियकेसंगडोलें ॥१७॥ एकनाचत गाबतधावें ॥ पकरन पियकों नहीं पावें ॥१८॥ चंद्रावलि पीय संग दौरी ॥ राधा पकरे भरि कोरी ॥१५॥ श्रम छूटि गई उरणाती ॥ सुंदरमोहन रंग राती ॥२०॥ तब सुगह गहे गोपाला ॥ छीनी मुरली ओर माला ॥२१॥ नैना आंजि मांडि मुखरोरी ॥ हँसि तारी देतकिसोरी ॥२२॥ एक कुचक पोल कर परसे ॥ सब सुख पिय प्यारी विलसे ॥२३॥ एक अंचल सों पटजोरे ॥ ललितादि सखी त्रनतोरें ॥२४॥ मनको मान्यों हम करिहें ॥ नही लोक वेदतें डरहें ॥२५॥ तुम इन नेनन के तारे ॥ धनजीवन प्रान हमारे ॥२६॥ सब सखा छुड़ावन आए || मिलि सुबल श्रीदामा धाये ॥२७॥ फगुवाले मोहन मेले ॥ मिलि फाग भली विधि खेले ॥२८॥ वृखभान कुमारी जीती ।| यह्ट प्रगट प्रेम रस रीती ॥२९॥ विथुरी मनि मोतिन माला ॥ फिरि मुदित मर्दन गोपाला ॥|३०॥ कंचुकी कसि टूटी लर छूटी ॥ मानो मदन सुरति पथलूटी ॥३१॥ अंगअंग अनंगन मोहे ॥ ललिता प्रियके संग सोहे ॥ ३ २॥ ब्रजगोपिनको धनजीयो ॥ राधाबस मोहन कीयो ॥३३॥ यह लीला त्रिभुवन भावे ॥ जनमाधथो जुगजुण गावे ॥३४॥
Bilawal
Abb doodh laaee hoe yashoda maiya keeje ladile paan ..
NityaPad-304
अब दूध लाई हो यशोदा मैया कीजे लाडिले पान ॥ कनक कटोरा भर पीजे सुख दीजे बश्रजराज कुंवरवर तेरी बेनी बढेगी मेरे भैया ॥॥१॥ आछो नीको अति ओट्यो और तामें मधुरमिठैया ।। आसकरणप्रभु दूध पीजिये जननीकों सुख दीजिये प्रात उठत करों घैया ॥२॥॥।.
Kanharo
Aaj shyama bunny shyam sange .. pahari tunn kanchuki nilsari
Part1-343
आज श्यामा बनी श्याम संगे ॥ पहरि तन कंचुकी नीलसारी बनी बिबिध मोतिन गुही सुभग मंगे ॥१॥ मंद मुसिक्यान मूदु चणल मृगलोचनी लटकि लपटात हरि मूदुल अंग ॥ भेंट तन ताप हीयें भेंट भर भुजनसों करत मधुपान पीय लै उछंगे ॥२॥ किंकिनी कुनित कटि पेंजनी झनक पग निर्तत सुलप लेत थेई थुंगे | सकल सुख करन श्रीलालगिरिवरधरन दास कुंभन विपिन रास रंगे ॥३॥
Iman
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