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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Nurityat laal gopal raas mein sakal vraj baidhu sange .. | Pustak1-335 | नुृत्यत लाल गोपाल रास में सकल ब्रज बैधू संगे ॥
गिडगिड तकथुंग तत थेई तत थेई भामिनि रति रस रंगे ॥१॥
शरद बिमल नभ उडुपति राजत गावत तान तरंगे ॥
तालमृदंग झाँस और झालर बाजत सरस सुधंगे॥२॥
शिव विरंचि मोहे सुर नर मुनि रतिपति गति मति भंगे ॥
गोविंद प्रभु रसरास रसिक मणि भामिनि लेत उछंगे ॥३॥ | Malav |
Aaj vrajajan anandbhare.. | Part2-269 | आज ब्रजजन आनंदभरे॥
अग्निरूप श्रीवल्लभ प्रगटे मायिक तूलजरे ॥१ ॥
पूरण पुरुषोत्तम गोकुलपति चरण कमल अनुराग राग॥
दृढ विश्वास दियो भक्तनकों जाके हें बडभाग ॥२ |
ज्ञानकर्म ओर भक्ति उपासन भयो विवेक विचार॥
मिथ्या जगत कहे तत्वतें सब होय गये निरधार ॥३ ॥
रूप नाम लीला गिरिधरकी फिरकीनी कलिमांझ ॥
नाम प्रताप प्रकाश भयेतें गई मोहकी सांझ ॥४ ॥ | Devgandhar |
Hoe horry key khilar merrie angiyaa ranga bhari daari | Part3-148 | हो होरी के खिलार मेरी अँगिया र ँग भरि डारी
हो ॥ बहियाँ मरोरी मेरी चुरियाँ तोरी और दींनी हैं गारी हो ॥१॥ चोवा
चंदन अगर कुँमकुमा पिचकाईनि भरि मारी हो ॥ खेलि मच्यों जमुना तट
कुंजन 'रसिक राई! बलिहारी हो ॥२॥ | Sohani |
Barsaanain tain vrishabhaanu puraa kii horry khelani niksi | Part3-081 | बरसानैं तैं वृषभानु पुरा की होरी खेलनि निकसी
हो ॥ बरन बरन बन ठन आभूषन कनक बेल सी बिणसी हों ॥१॥ जोबन रूप मदन मनमथ कौं उर मोहन मदमाती हो ॥ ऐंड़त चले चाल गरबीली
मंद मंद मुसिंकाती हो ॥ २॥ झोरी भरि अबीर कुँमकुमा करन कनक पिचकाई
हो ॥ आवति चंग उपंग बजावति गाबति हरि कौं गारी हो ॥३॥ ठाड़े
जहाँ सखा संग लीनें चतुर खिलारि कन्हाई हो ॥ सीस नवाइ दूर भई
ठाड़ी हँसि हँसि निकट बुलाई हो ।॥४॥ उमड़े हैं गोपी ग्वाल परसपर भारी
खेलि मचायौ हो ॥ उड़ति गुलाल अबीर अरगजा अति ही अंबर छायो
हो ॥५॥ गोपीन मतो बनाई धाई कैं मनमोहन गहि लीनें हो। आँखि ऑजि
मुख मॉँडि महावर हो करि तजि दीनें हो ॥६॥ अपुने दाव श्याम हु पाए
तब गजहि लीने राधे हो ॥ जेतेक दाव चाब चित उपजे सकल मनोरथ साधे
हो ॥७॥ बेनी गुही बनाइ उलटि कैं कछुक सेंधानी कीनीं हो ॥ दुईं और
दिठौना दै कैं तब छॉडि रंग भीनीं हो ॥८॥ तारी दै दै ग्वाल हँसति है
गोपिन मन मुसिकानी हो ॥ मन में मुदित भई बाहिर लैं राधा कछु कुमलानी
हो ॥९॥ नँद नंदन वृषभानु लली की सोभा कहा बखानें हो ॥ 'ब्यासदास'
प्रभु रीझि भिंजि स्रों वारति तन मन प्रानें हो ॥१०॥ | Khat |
Sukhanidhi srigokulko basavo .. | NityaPad-367 | सुखनिधि श्रीगोकुलको बसवो ॥
छिनछिन वारंवार सखीरी श्रीवललभसुत निरख हुलसवो ॥। १॥
गृहनगृहन प्रतिकुंजनकुंजन पियसंग केलि परस्पर हँसवो॥
ऐसीकनक कसौटी ऊपर सुभग प्रेमवलित तन कसवो ॥। २॥।
यमुनातीर महागजसों मिलि भावें अंगोअंग परसवो ॥
दंपतिरूप रासि सुखसीमा माधोदास यहौ रंगरसवो ॥ ३॥॥ | Kedaro |
Bhojankar uthhe douu bhaiya .. | NityaPad-086 | भोजनकर उठे दोऊ भैया ॥
हस्त पखार सुद्ध अचमन कर बीरी लेहु कन्हैया ॥१॥
मातयशोदा करत आरती पुनपुन लेत बलैया ॥
परमानंददासको ठाकुर ब्रजजन केलि करैया ॥२॥ | Dhanshree |
Tihaaro daras mohi bhaave sriyamunaji .. | NityaPad-010 | तिहारो दरस मोहि भावे श्रीयमुनाजी ॥
श्रीगोकुलके निकट बहत हो लहरनकी छबि आवे ॥१॥
सुखदेनी दुःखहरनी श्रीजमुनाजी जे जनप्रात उठ न्हावे।
मदनमोहनजुकी खरी हु पियारी पटरानी जु कहावे ॥। २॥।
बृंदावनमेंरास रच्यो हे मोहन मुरली बजावें ॥
सूरदास प्रभु तिहारे मिलनकों वेद विमल जस गावें ॥३॥ | Ramkali |
Harr aaj nagri kishore bhaanvati vichitra jore kahaa kahon anga anga param madhuri .. | Pustak1-322 | हर आज नागरी किशोर भाँवती विचित्र जोर कहा कहों अंग अंग परम माधुरी ॥
करत केल कंठमेल बाहुदंड गंडमंडल परस सरस लास्य हास रास मंडली जुरी ॥१॥
श्याम सुंदरी बिहार बाँसुरी मृदंग तार सकल घोष नूपुरादि किकिणी चुरी ॥
देखत हरिवंश आलि नृत्यत सुधंग ताल वार फेर देत प्राण 'देह सुंदरी ॥२॥ | Bilawal |
Podhiye piya kunwarkanhai .. | NityaPad-339 | पोढिये पिय कुंवरकन्हाई ॥
नवनव वसन नवल कुसुमावलिहो अपनेकर सेज बनाई ॥१॥
नाहिनसमें सखी काहूको ग्वालमंडली सब बोराई॥।
आसकरणप्रभु मोहमनागर नागरिकू ललिता लेआई।॥॥२॥ | Kedaro |
Doll jhulat shyama shyam saheli.. raajat naval nikunj | Part3-380 | डोल झुलत श्यामा श्याम सहेली॥ राजत नवल निकुंज
बृंदावन विहरत गर्व गहेली ॥ १॥ कबहुंक प्रीतम रबक झुलावत कबहुँकऊ नवल
प्रिय हेली | हरीदास के स्वामी स्यथामा कुंज विहारी कहि कहि बोलत हेली।। २॥
४ (| राग सारंग (छ्ु) हरि को डोल देख वृजबासी फूले ॥ गोपी झुलावें
गोविंद झूलें ॥१॥ नंद चंद गोकुल में सोह़े ॥ मुरली मनोहर मन्मथ मोहें
॥२॥ कमल नयन को लाड लड्घावें ॥ प्रमुदित प्रीत मनोहर गावें ॥३॥
रसिक शिरोमणि आनंद सागर ॥ रामदास प्रभु मोहन नागर ॥8॥ | Sarang |
Aaj baney giridhar doolhe chandanke vaage .. | NityaPad-237 | आज बने गिरिधर दूल्हे चंदनके वागे ॥
टूटत तुण रोमरोम मन्मथ रस पागे ॥ १॥। भामिनी
करत तहां मंडप अति शोभा ॥ फिर फिर झंकार करत मधुप वास लोभा ॥२॥॥
थह विध मिल मिथुन वपु विविध रंग बाढे ॥ नागरी निजभभाव रबन ऊपर लखकाढे ॥३॥
उपमाकों कोन कहे कोटि मन्मथ मन लाजे ।।
लघुगोपाल नयनन लख सहचरी सुखकाजे ॥४॥ | Saarang |
Merey grih aavo nandanandan chandan curr rakhu atee sheetal. | NityaPad-319 | मेरे गृह आवो नंदनंदन चंदन कर राखु अति शीतल।
अपने कर लगाउ सब अंग झीनो बसन दीपत झांइकल ॥। १॥
मेवा मिठाई बहु सामग्री कपूर सुवास मिश्रीपना
सु भल। करहुं बयार पहुप बिंजना ले गरे पहराउ माल तुलसी दल ॥ २॥
कमल दलनकी सेज़ विछाउं बाहं धरो श्रीराधाकी गल ॥
गिरिधरलाल ल ाडिले की छबिि देखत श्रीवल्लभ शिर पद पल ॥३॥ | Kanharo |
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