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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Aaj sakhee shyama sanga sriradha navalkunwari karat hain | Part1-353 | आज सखी श्यामा संग श्रीराधा नवलकुँवरि करत हैं
बिहार दोऊ यमुना जलकेलि ॥ हावभाव ग्रीव लटक नयनसैन भ्रौंह मटक
हासरंग प्रेम उमग ग्रीवा भुज मेलि ॥१॥ अंतरंग सखी ठाढ़ी देखत अति तृषा
बाढ़ी बारबार कहत आज नीकौ बन्यौ खेल ॥ चत्रभुज प्रभु बन बिलास
उपजत है अति हुलास श्रीगिरिधर गजराज बाहु युवती दलपेल ॥२॥ | Kedaro |
Aaj baneri laalan girdhari yaa baanak parr balhari ..| champakbhari | NityaPad-059 | आज बनेरी लालन गिरधारी या बानक पर बलहारी ॥| चंपकभरी
कुल्हे सिर लटकत कुसुंबी पाग छबभारी | १॥ वरूहा पीत स्याम अंग पर अरगजा
मोजे मोहे मनमथ मनुहारी ॥ योविंदप्रभु रीझी वृषभान नंदनी सोह कंचुकी
छोरत भरत अंकवारी ॥२॥। | Nat |
Podhe laal sez surang .. adharamrit paavat piwawat pranpiya | NityaPad-128 | पोढे लाल सेज सुरंग ॥ अधरामृत पावत पिवावत प्राणपिया
के संग ॥|९॥ जगमगात आगे अंगीठी परदा परे पचरंग ॥। रंगमहेल में फीरत दोउ
बढी प्रेम तरंग॥२॥ ओढ रजाई। (ओढे) दोउ पोढे लिपटाय अंगसो अंग॥ सुरत
रस विलसत जबही तब मनही उठत तरंग ॥। ३॥। | Nayaki |
Nrityamaan bhamini gopal sanga subhag raas .. | Pustak1-341 | नृत्यमान भामिनी गोपाल संग सुभग रास ॥
तरणि तनया पुलिन बिमल बिगसत्त जाती सुवास ॥१॥
लेत सुलप उरप तिरप दरसत बर ईषद हास ॥
बदनजोति स्वच्छ कृत मोहे उड़पति आकाश ॥२॥
नीलपटकसि कंचुकी उतंग नव बिलास ॥
गोवर्द्धधरनलाल रििवत प्रभु कृष्णदास ॥३॥ | Iman |
Hari leela gawat gopijan aanandamen nishi dinn jaaee. | Part1-150 | हरि लीला गावत गोपीजन आनंदमें निशि दिन जाई।
बालचरित विचित्र मनोहर कमल नैन व्रज जन सुखदाई ।॥॥१॥ दोहन मथन
खंडन गृह लेपन मंडन सुत पति सेवा। चारि याम अवकाश नहीं पल सुमिरत
कृष्ण देवदेवा ॥२॥ भवनभवन प्रति दीप बिराजत कर कंकन नूपुर बाजें ।
परमानंद घोष कौतूहल निरखि्र भाँति सुरपति जिय लाजें ॥३॥ | Bilawal |
Chitako chor abb joe paau .. dwaar kapaat banaay jatan curr | NityaPad-099 | चितको चोर अब जो पाउ ॥ द्वार कपाट बनाय जतन कर
नीके मांखन दूध चखाऊं ॥१॥ जेसे निसंक धसत मंदिर में तिहें ओसर जो
अचानक आउं ॥ गहि अपने कर सुदृढ मनोहर बहोत दिननकी रूचि
उपजाऊं ॥ २॥ ले राखों कुचबीच निरंतर प्रति दिननको ताप बुझाऊं।॥। परमानंद
नंदनंदनको घर घर ते परिभ्रमन मिटाउं ॥ ३॥ | Aasawari |
Aisehi aise raine bihani .. chandra maleen chiraiyan bollie shoonya | NityaPad-048 | ऐसेही ऐसे रेन बिहानी ॥ चंद्र मलीन चिरैयां बोली शून्य
कोककी वानी ॥१॥ बे रसलुब्ध मानत नहीं काहू ममकी आस भुलानी ॥
कोकिल स्थाम स्यांम अलि देख्यो एयाम रंगहे पानी ॥ २॥| स्थाम जलद अरू
स्थाम कहावत सूरस्थामकी वानी ॥ स्थामास्थाम रंगरस क्रीडत
स्यामहेतकीजानी ।।३॥ | Lalit |
Maaee meethe hariju key bolna . paany painjani runjhun baajain | Part1-103 | माई मीठे हरिजू के बोलना । पाँय पैंजनी रुनझुन बाजैं
आँगन आँगन डोलना ॥१॥ काजर तिलक कंठ कठुला मनि पीतांबरकौ
चोलना। परमानंददासकौ ठाकुर गोपी झुलावै झोलना ॥२॥ | Aasawari |
Jeye vaahi thaur jahaan key jaage nandkisore .. saanj | Part2-349 | जेए वाही ठौर जहाँ के जागे नंदकिसोर ॥ सांज
कहि गए आवेंगे तेरे आए निपट उठि भोर॥१॥ लटपटी पाग अटपटे
भूषन ओढे पीत पटोर॥ पीक कपोल अधर मिस काजर अरुन भए दग
॥२ ॥ आधे बचन कहत तुतराते चितवत जाकी ओर ॥ ताहि पें जू
सिधारीए प्यारे, 'रसिक' राय सिर मोर ॥ ३ ॥ | Suha |
Bhogi bhog karat sub rasako .. | Part2-233 | भोग ी भोग करत सब रसको ।।
नंदनंदन जसोदाको जीवन गोपीन मान पति सर्वसको ।।१॥।
तिलभर संग तजत नही निजजन गान करत मनमोहन जसको ।।
तिलतिल भोग धरत मन भावत परमानंद सुख ले यह रसको ।।२।। | Aasawari |
Arujhi kundal lutt besari soun peet putt banmala beach aana asujhe hain douu jan .. | Pustak1-330 | अरुझी कुंडल लट बेसरि सों पीत पट बनमाला बीच आन असुझे हैं दोऊ जन ॥
नयनन सों नयना प्राणन सों प्राण अरुझि रहे चटकीली छबि देख लटपटात श्यामघन ॥१॥
होड़ा होड़ी नृत्य करें रीझरीझ आकों भरें तत थेई तत थेई रटत मगन मन !।
सूरदास मदनमोहन रास मंडल में प्यारीकौ अंचल लै लै पोंछत हैं श्रमकन ॥२॥ | Saarang |
Chalo sakhee baaj tamaasen pyaaro mohan khelat | Part3-248 | चलो सखी बाज तमासें प्यारो मोहन खेलत
होरी ॥ सगरी सखी मिल देखन निकसी पातरी पवारी गोरी भोरी ॥१॥
काहपें गुलाल काहूपें केसर अबीर लियें भरभर झोरी ॥ कृष्ण जीवन लछी-राम के प्रभु बने किशोर किशोरी ॥२॥ | Sarang |
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