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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Samey bhayo mangal mangalanidh jagahu laal raine dhara aaee .. | NityaPad-054 | समे भयो मंगल मंगलनिध जागहु लाल रेन ढर आई ॥
आरती वदनकमल देखनको अरु सुरंग लोचन अरुनाई ॥९१॥ नवरस केलि
बिलास किये छब प्रगटत जग सुन्दर ताई॥। बल्लभ सीलरूप गुन पूरन देहो सरस
भागिन सुखदाई ॥ २॥॥ | Malkos |
Mathatadhimathaneetekaren .. | NityaPad-180 | मथतदधिमथनीटेकअरें ॥
आरकरोजिन स्थाममनोहर वासुकी शंभुडरे ॥१॥
मंदरडरत सिंधुतनकांप्यो अबबलकहाकरें।।
तीनलोकदेख विस्मयभयो फिरजिनमथनकरें ॥ २।।
सुरअरुअसु रदेख पुनकांपत प्रभुमरयादटरें॥
सूरदासप्रभुमुग्थ यशोदा ह॒वैमुखबिंदुगरें ॥३॥। | Bilawal |
Ritu vasant brindavan viharat vrajraj kaaj saaje dwum | Part3-055 | ऋतु वसंत बृंदावन विहरत ब्रजराज काज साजे द्वुम
नवपलल्लब प्रफुल्लित पोहो पन सुवास॥ कलापी कपोत कीर कोकिल कमनीय
कंठ कूजत श्रवनन सुनत होत है हो हिय हुलास॥| १॥ तेसोई त्रिविधि पवन बहत
तेसोई सीतल सुगंध मंदरंग उपजत है हो अति उजास ॥ प्रभु कल्यान गिरिधर
उत्त जुबति जूथ मध्य राधा केसारि छिरकत अबीर गुलाल उडाबत आवबत हे हो
करें रंग रास ॥२॥ | Basant |
Paachhali raat parchhaahi paatan kii lalju rangbhine dolat drumdrum | NityaPad-137 | पाछली रात परछाही पातन की लालजू रंगभीने डोलत द्रुमद्रुम
तरन ॥ बने देखत बने लगत अद्भुत मने जोतकी सोतमें मिकस रही
सबघरन।। १॥ कृष्ण के दरसको अंग के परसको महा आरति मानचली मज्जन
करन॥ नुपुरध्वनि सुनत चक्रतव्है थकिरही परगयो दृष्टि गोपाल
सांवलवरन ॥ २॥। जरगसी पागपर मोरचंद्रिका बनी कमलदल नयनभ्रूवबंक
छबि मनहरण ॥ धाई सब गहन को रसबचन कहनको भामिनी बनी अति
छबि सुधारत चरण ।॥।३॥। रोमरोम रमरह्यो मेरोमन हरलियोनाहिं विसरत वाकी
झुकनमें भुजभरन | कहे भगवानहित रामरायप्रभुसों मिली लोकलाज भाजगई
प्राण परवस परन ॥४।॥। | Khat |
Ranchak chakhan dairi dahyau . adbhut swaad shravan suni mopai | Part1-220 | रंचक चाखन दैरी दह्यौ । अद्भुत स्वाद श्रवन सुनि मोपै
नाहिन परत रह्ौ ॥१॥ ज्यों ज्यों कर अंबुज उर ढाँकत त्यों त्यों मरम लशौ।
नंदकुमार छबीलौ ठोटा अँचरा धाय गदह्मौं ॥२॥ हरि हट करत दास परमानंद
यह में बहुत सह्ौ । इन बातन खायौो चाहत हो सेंत न जात बच्मौ ॥३॥ | Devgandhaar |
Aaj badhaiko dinn neekau . nandgharani jasumati jaayau haye laal | Part1-077 | आज बधाईको दिन नीकौ । नंदघरनी जसुमति जायौ है लाल
भामतौ जीकौ ॥१॥ पंच शब्द बाजे बाजत घरघरते आयौ टीकौ । मंगल
कलश लियें व्रजसुंदरि ग्वाल बनावत छींकी ॥२॥ देत असीस सकल गोपीजन
चिरजीवो कोटि बरीसौ । परमानंददासको ठाकुर गोप भेष जगदीसौ ॥३॥
# राग सारंग & धन्यहो नंद जगवंदते सुकृत फल आज ब्रज चंद आनंद पूरन
सुदृठ । नभसि वदी बसु बुद्ध रोहिनी नक्त मधि होत प्रादुर्भाव सप्रफुलित
परिवृद्ध ॥१॥ लग्न द्रग चंद युत सिंघ रवि सुवन बुध केतु कवि मंद रिपु
नासकीनों । मकर मंगल मीन देव गुरु सम युक्त सफल सुफल करि मानि
लीनों ॥२॥ सुनत पत्निका मृदंगादि शंखध्वनि झालरी भेरि कर आदि दैकें ।
पंच जे शब्द उच्छाहसों बाजहीं नाचत त्रिय गोप गावत अनेकें ॥३॥ पढ़त
द्विज वेद यश बदत मागध सूत पूत गुणरूप आकृति विराजै। ये अनुभव दारकेशकौ
अब्द प्रति वल्लभाधीश कृपयैक छाजे ॥४॥ | Saarang |
Raavalmein baajat kahaan badhaai. pragatbhai vrishbhan gopaken nandasuvan | Part1-195 | रावलमें बाजत कहाँ बधाई। प्रगटभई वृषभान गोपकें नंदसुवन
सुखदाई ॥१॥ घरघरतें आवत ब्रजनारी आनंद मंगल गावें ) एक एक कुंकुम
रोरी लै मोतिन चौक पुराबैं ॥२॥ हरखत लोगनगरके बासी भेट बहोत बिधि
लावैं | परमानंददासको ठाकुर बानी शुभ गुण गावें ॥३॥ | Saarang |
Chitaichite chitchorat aliri baanke lochan neeke .. | NityaPad-307 | चितैचिते चितचोरत आलीरी बांके लोचन नीके ॥
यह मूरत खेलत नयननमें लाल भावते जियके ॥१॥
ए कबार मुसकाय चलेजब हृदय गडे गुणपीके ॥
परमानंद कोऊ आनमिलाओ प्रड्डबरसयी तोके । | Kalyan |
Aaj sir sohat topi laal .. | NityaPad-290 | आज सिर सोहत टोपी लाल ॥
रूपनिधान स्थाम घन सुंदर उर राजत बनमाल ॥१॥
बनतें आबत कमलफिराबत गावत गीत रसाल ॥
रामदास प्रभुकी छबि निरखत मोही रहीब्रजबाल ॥२॥ | Hameer |
Aachhebane dekho madangopal.. bahut | NityaPad-257 | आछेबने देखो मदनगोपाल॥ बहुत
फूलफूले नंद नंदन तुमकों गूथोंगी माल ॥।१॥। आय बैठे तरुवरकी छैँया अंबुज
नयन विशाल ॥ नैंक वियारकरों अंचलकी पाय पलोटोंगी लाल।।२॥ आछे
तब राधामाधव सों बोलत वचन रसाल ॥ परमानंदप्रभु यहां आयहो ब्रज तज
ओर न चाल॥३॥ | Saarang |
Aise kaisen kahiyatu vrajbadhun soee tey aaye thon pichhaudi .| barbat | Part1-260 | ऐसे कैसें कहियतु ब्रजबधून सोई ते आये थों पिछौड़ी ।| बरबट
रोकत मोकों करिहों कहा रिसाय को है बाबाकी लोड़ी ॥१॥ दिन दिनकौ
पैड़ोंरी माई नहीं जानत कछु बातरी औंड़ी ॥ नंददास प्रभु वे त्रिय और जो नचाय
सब तुम कीनी कनीौंड़ी ॥२॥ | Todi |
Jembat nand kaanad aeka thhoren .. | NityaPad-076 | जेंबत नंद कानड एक ठोरें ॥
कछुक खात लपटात तुहूं कर बालकेलि रसभोरें ॥१॥
बरा वदनमें मेल्यो जबही मिर्च दशन टक टोरें ॥
तीक्षणलगे नयनभर आये खीजत बाहिर दोरें ॥२॥
फूक कपोलन देत रोहिणीलिये लगाय अंकोरें॥
सूरस्यामको मधुरे कोरदे कीने तात निहोरें ॥३॥ | Dhanshree |
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