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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Rasaheemen vash keene kunwarkanhai .. rasik gopal rasahi reejhat rasmil russ tyaj maaee ..1..
NityaPad-276
रसहीमें वश कीने कुंवरकन्हाई ॥ रसिक गोपाल रसही रीझत रसमिल रस त्यज माई ॥१॥ पियको प्रेम रस सुन्योहै रसीली बाल रसमें वचन श्रवणन सुखदाई ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधर सब रसनिधि रसता मिलहै रहसि हृदय लपटाई ॥२॥
Nat
Mohanlal mille hoe, tere unmad firat gwal hathh chhaand deho.
Part1-237
मोहनलाल मिले हो, तेरे उन्मद फिरत ग्वाल हठ छांड देहो। कबके तुम दानी भये कब तुम लीनो दान । गैयां चरावो नंदकी, हम सुने अनोखे कान्ह ॥१॥ मोहन जानदे. ॥ यह गैयां त्रिलोकतारनी तुम चारो जुग की नार । दान हम छांडे नहीं, तेरों गहने राखो हार ॥२॥ नागरी दानदे. ॥ नैन नचाव हो चातुरी, तुम बड़डें बोलत बोल ! मेरो हार करोरको तेरी सब गायन को मोल ॥३॥ मोहन जानदे. ॥ यह गैयां ब्रैलोककी, सब बिध पूरे काम। दूध देहें त्रैलोकमें तेरो हार लहे दश दाम ॥४॥ नागरी दानदे. ॥ रतनजटितकी इठोनीयां मेरों हीरा जड़ियो हार | ताको तू राखन कहत है, कँमरीको ओढनहार ॥५॥ मोहन जान है. ॥ ब्रह्मा तानो पूरीओ बुनीओ बैठि महेश। सो हम ओढे कामरी जाको पार न पावे सेस ॥६॥ नागरी दानदे. ॥ लाल लकुटियां कर धरी बांस फूंकनी फेट । सीस मोरकी चंद्रिका अब एते साज पर एँट ॥७॥ मोहन जानदे. ॥ गर्व करत कित ग्वालनी जमुना तीरे नहाई ॥ चीर हरे हम तीरतें अब एतो कहा इतराय ॥८॥ नागरी दानदे. ॥ जसोदा बांध्यो वामने, दामोदर सुकुमार । हाहा करी रोयो परे तब हमही छुड़ावनहार ॥९॥ मोहन जानदे. ॥ गर्व करत कित ग्वालनी जब आवेगी यह घाट । दान हम छोड़े नहीं तेरे बाबासों न डरात ॥१०॥ नागरी दानदे.॥ हम जु सुता वृषभानकी तुम नंद महरके लाल । प्रेम प्रीत रस मान लै ठोटा जिन करे ईतनों आल ॥११॥ मोहन जानदे. ॥ बूंदावन क्रीडा करीहो, रचियों रासबिलास । जे जे जे सुरनर करे गुन गावे माधोदास ॥१२॥
Bilawal
Chala angaduraaye sanga merein ...
NityaPad-103
चल अंगदुराये संग मेरें ॥। मुखही मौन धर अधर ओटदे दशन दामिनी चमकत तेरें॥।१॥ त्यज नूपुर कटि क्षुद्रघंटिका श्रवण सुनत खगमृग हेरें॥। चतुर्भुजदास स्वामिनी शृंगार सोंज निपटनिकट गिरिधर पियनरें ॥२॥
Nat
Jhoolat douu naval kishore ..
Part3-373
झूलत दोऊ नवल किशोर ॥ रजनी जनित रंग रस सूचित अंग अंग उठ भोर ॥१॥ अति अनुराग भरे मिल जगावत सुर मंडल कल घोर ॥ बीच बीच प्रीतम चित चोरत प्रिया नयन की कोर ॥२॥ अबला अति सुकुमार डरपत बरहिं डोल झकोर || पुलक-पुलक प्रीतम उर लागत दे नव उरज अकोर |॥|३॥ अरुझी विमल माल कंकण सों कुंडल सों कचडोर ॥ वे पथ युत क्‍यों बने विवेचित आनंद बढ्यो न थोर ॥४॥ निरख निरख फूलत ललितादिक बिब मुख चंद्र चकोर ॥ दे असीस हरिवंश. प्रशंसित कर अंचल की छोर ॥५॥
Devgandhar
Govind chhirkat chheent anoop .. ita vrishbhan nandini
Part2-340
गोविंद छिरकत छींट अनूप ॥ इत वृषभान नन्दिनी सोहत उत घनश्याम सरूप ॥१॥ पावन जल यमुनाकों निर्मल करत बिविध बिधि केलि॥ सजल सुमन शोभिद अंगनमें उडत तरंगन रेलि॥२॥ कीने सबे गोवरधनधारी बेद शृंखला पेलि॥ गोविंद प्रभु आनन्द सिंधुमें रहे मगनमन झेलि ॥३ ॥
Todi
Aaj houn adhik hansee ree maaee .. kaam vivas moun soun
Part2-346
आज हों अधिक हँसी री माई ॥ काम विवस मों सों रति बाढी अवलोकत समझाई ॥ १॥ रवि ससि काँति भई जू सखी री कांच भवन में माई॥ विस्मय भयो प्रतिबिंब बिंब सों अंक भरे जदुराई ॥२ ॥ कर अंचल मुख मुंद रही हों ठाढी ही इक ठांई ॥ 'सूरदास' प्रभु निश्चय जानी तब ही उर लपटाई ॥३ ॥
Suha
Shyam kahaa chahatsedolat ..
NityaPad-186
श्याम कहा चाहतसेडोलत ॥ बूझे हुते बदनदुराबत सूधेबोल नबोलत ॥ १॥ सूनेनिपट अंध्यारेमंदिर दधिभाजन में हाथ | अबकाकोतुम उत्तरकरहो कोऊसंगनसाथ ॥।२॥ मैंजान्यो यहमेरोघरहैं तिहिंधोखेमैं आयो ॥ देखतहीगोरसमेंचेंटी काडनकोंकरनायो॥ ३।।| सुनसुनचतुर वचनमोहनके ग्वालिन मुरमुसकानी ॥ सूरदास प्रभुहोरतिनागर सबैबातहमजानी ।।४॥।
Bilawal
Adbhut dekhyau nandbhavanmein larika aeka bhalaa . kahaa kahuun
Part1-098
अदभुत देख्यौ नंदभवनमें लरिका एक भला । कहा कहूँ अँगअँग प्रति शोभा कोटिक काम कला ॥१॥ गावति हँसति हँसावति ग्वालिनि झुलवति पकरि डला । परमानंददासकौ ठाकुर मोहन नंदलला ॥२॥
Ramkali
Nandanandan nabal naagar kisor barr khelati basant banyon rung atee bhaari ..
Part3-037
नंदनंदन नबल नागर किसोर बर खेलति बसंत बन्यों रंग अति भारी ॥ राग हिंडोल गावति नवल नागरी अति हिं रस भीज रही है दति तारी ॥१॥ लाल गुलाल रह्यो गगनलों घुमडि कैं केसरि कुँमकुमा भरि हो पिचकारी ॥ ताल किन्नर मुरज बीन ढफ बाज हीं बिचमोहन मुरली सप्त सुर धारी ॥२॥ सुभग जमुना तीर ठौर ब्रिंदा बिपुन बाल सुक कोकिला कीर किलकारी ॥ गहे द्वरुम डार ठाढे नंद लाल जहाँ राधिका सब सरिब मधि सुकुमारी ॥३॥ बढ्थों दुहूँ दिस खेलि अधिक सोहावनी हँसति मुसिकाय यौं ब्रज नारी ॥ मदन मोहन गिरिधर वर पीय जु देव मुनि करति कुसुम बरखा री ॥४॥
Maaee ree horry khelani jaaiye jahan slelati nand kumar ..
Part3-328
माई री होरी खेलनि जाईये जहँ स्लेलति नंद कुमार ॥ राग रँग अर सुर संगार बाजति मृदंग धु धु कार ॥१॥ रँँग भरे ओ रंगन सौ छिरकति पिचकारिन सौं देति है मार ॥ 'कृष्ण जीवन लछीराम' के प्रभु कों मुख मांड्यो हौ अरू दैउ गारि ॥२॥
Iman
Ladile tumko chhaak leey aaee ..
NityaPad-199
लाडिले तुमको छाक ले आई ॥ बहुत वारके भूखे जानके यशुमति मोहि पठाई ॥१॥ बीचमिले मृगनाद विमोही जिन यह ठौर बताई ॥ चरणकमलके चिन्ह विलोकत श्रम सब गयो भुलाई ॥ ढिंग आये सुन वचन मनोहर आरति अति उपजाई ॥ वेणुनाद मध्य श्रवण सुधा धसि विरहे अग्नि बुझाई ॥३॥ मुखनिरखत अपने मोहनको छाकजो तरे उतराई ॥ मुखचुंबनदे रसिकशिरोमणि ग्वालिन गरे लगाई ॥।४॥।
Saarang
Taisaui trivat mukh ughatat poyne lait taisaui mridang baaje
Part1-343
तैसौई त्रिवट मुख उघटत पॉयन लेत तैसौई मृदंग बाजे धाधिलांग ॥ जहीं जहीं हस्तक तहीं तहीं दृष्टि मन तहीं भाव गति बिलास ग्रीव टक भ्रकुटी भंग ॥१॥ ऊरप तिरप हुर्मईस लाग डाट कर सुदेश लेत अनाघात फरकत सब अंग ॥ सूरदास मदन मोहन रीझे हाथ धर माथ बाँह जोरी कीयें डोलत प्यारी के संग ॥२॥
Iman
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