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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Thaadhaniyaan machal rahee ray moy nand ghar lai chalari . putra bhayo sub
Part1-133
ठाढ़नियाँ मचल रही रे मोय नंद घर लै चलरी । पुत्र भयो सब जगनें जान्यो तेंने मोसों क्यों न कहीरे | मोय मिलै नख सिखलों गहनौ लाऊं तो बात सहीरे । जरदौजीके वस्र मिलेंगे फरिया चोली एइरे | कृष्ण कृपा बिन को या जगमें जिन मेरी बॉह गहीरे ॥५॥
Desh
Pyaare harikau vimal yash gawat gopangana . manimay aangan
Part1-066
प्यारे हरिकौ विमल यश गावत गोपांगना । मनिमय आँगन नंदरायके बालगोपाल करें जहाँ रिंगना ॥१॥ गिरि गिरि उठत घुटुरुवन टेकत जानु पाणि मेरे छगनकौ मगना । धूसर धूरि उठाई गोद लै मात यशोदाके प्रेमको भाग्यना ॥३॥ त्रिपद भूमि मापी न आलस भयौ अब जो कठिन भयो देहरी उलंघना । परमानंदप्रभु भक्तवत्सल हरि रुचिर हार कंठ सोहे बधघनखना ॥३॥
Nayaki
Besar kau motee jug mojhau hoe merey lalnaan vrajajan
Part3-219
बेसर कौ मोती जग मोझौ हो मेरे ललनाँ ब्रजजन सब सुख देैंन ॥।भ्रु०॥| अंजन दै दृण खंजन बैठे बीरी दसन बनाई ॥ चंचल चपल देखि मनमोहन मनमथ रह्यो है लजाई ॥१॥ ऑअँगिया अजब कसूँभी सारी लहँगा लाल गुलाल ॥ मुजरा लेति स्यामा जु के आगे निरखौगी नंदलाल ॥२॥ ब्रिंदाबन में मुरली बाजे धुनि सुनि सही न जाई ॥ 'हरिदास' प्रभु बेगि मिलौ हो राखौंगी कंठ लगाई ॥३॥
Kafi
Annaprasana dinn nandlalkau karat yashoda maay . brahmin deva
Part1-140
अन्नप्रासन दिन नंदलालकौ करत यशोदा माय । ब्राह्मण देव पूजि कुलदेवी बोहोत दक्षना पाय ॥|१॥ कुटुंब जिमाय पाट्टंबर दीने भवन आपने आय । मायध भाट सूत सममाने सबहिन हरख बढ़ाय ॥२॥ जो जिहिं जाँच्यौं सो तिन पायी नंदराय बड़ दानी । भक्त हेत प्रगटे जग जीवन परमानंद गुन _गानी ॥३॥
Saarang
Huun duhi houn mohi duhan
NityaPad-294
हूं दुहि हों मोहि दुहन सिखावो ।। कैसे गहत दोहनी घुटुरुवन कैसे ले वछरा हाथनलावो ॥। १॥ कैसे लें नोई पग बांधत कैंसे वाय चरण अटकावो ॥ कैसे धार दूधकी वाजत सोसोबिधि तुम मोहि बताबो ॥।२॥ निपट भई अब सांझ कन्हैया गायनकी कहुँ चोट लगावो | सूरस्थामसों कहत ग्वाल यों धेनु दुहन भोरहीं उठ आवो ॥।३॥
Gori
Deepdan dey huttery baithe nann‍ndabavake saath..
Part2-061
दीपदान दे हटरी बैठे नन्‍न्दबावाके साथ॥ नानाविधके मेवा आने बांटत अपने हाथ॥१॥ शोभित सवबें शृंगार बनावत ओर चंदन दीये माथ॥ नंददास प्रभु सगरिन आगें गिरिगोवर्द्धन्‍ननाथ ॥२ ॥
Kanharo
Praatahi shree gokulesh gokulesh naam .
NityaPad-007
प्रातहि श्री गोकुलेश गोकुलेश नाम । सकल सुख निधान मान करत त्रिबिध दुःख की हान यह जिय जान भजो अष्टयाम ।॥।१॥ इन विना योग यज्ञ करत वैराग्य त्याग विविध भाँत नेम धर्म करत सब निकाम ।। निश्चय गहि चरण कमल भक्ति भाव हिये अमल गावत मुख निरख दास वारूँ कोटि काम ॥२॥।
Bhairav
Aaj nandraayaken dhota jaaye saban bohot sukhpaaye badade gopanke
Part1-051
आज नंदरायकें ढोटा जाये सबन बोहोत सुखपाये बड़डे गोपनके घरघरते आवत बजत बधाये ॥१॥ पूरन भाग्य सकल व्रजसुंदरि गावति गीत सुहाये ॥ सारी सुरंग नौतन चोली तन रचि सिंगार बनाये ॥२॥ सगरे घोख बढ्यौ यह आनंद जे चीते ते आये ॥ श्रीवि्डलगिरिधरन प्रगटिकें सोच बहाये ॥३॥
Sarang
Divya kanikako paalnau raani lalakon jhulaavai. nain nirakhi
Part1-105
दिव्य कनिकको पालनौ रानी लालकों झुलावै। नैन निरखि मन विहँसत पुलकित बालविनोदहि गावै ॥|१॥ लटकन कीर लगे मुक्ताफल हँसत निरखिकें चरन चलावै | पचरंग पाटके फोंदना नीके कर गहि मुख तन लावै ॥२॥ सुरंग हिंडोरा परम मनोहर बहु विधि सुत्तहिं खिलावै | जननी कर लखि मुकर मुद्रिका मुख प्रतिबिंब बतावै ॥३॥ अति सुख महरि मुदित नहिं समुझत कनियाँ लै हुलरावै । मेरे प्रान जीवन ब्रज बल्‍लभ कहिकहि लाड़ लड़यावै ॥४॥
Aasawari
Dhana dhana ladilike charan .. athi mridul surgandh seetal
Part1-212
धन धन लाडिलीके चरन ॥ अत्हि मृदुल सुर्गंध सीतल कमलके से बरन ॥१)| नखचंद चार अनुप राजत जोत जगमग करन ॥ नूपुर कंज बिहरत परम कोतिक करन ॥२॥ नंदसुत मनमोदकारी सुरत सागर तरन ॥ दास परमानंद छिनछिन श्यामताकी सरन ॥३॥
Bihaag
Hari mukh dekhiyau vasudev .. koti kaam swaroop sunder kouu
Part1-017
हरि मुख देखियौ वसुदेव ॥ कोटि काम स्वरूप सुंदर कोऊ न जाने भेव ॥१॥ चारिभुजा जाकें चारी आयुध देखि हो नर ताहि ॥ अजहूँ मन परतीत नॉही कहे नंदगृह लै जाहि ॥२॥ झरे तारे परे पहरुवा नींद व्यापी गेह ॥ निस अंधियारी बीज चमकै सघन बरसे मेह ॥३॥ कंस सोयौ स्वान सोये मुक्त भये दुवार ॥ बँधी बेड़ी छूटि गई यह कहो कौन विचार ॥४॥ सिंघ आगें शेष पाएँ बहै जमुनापूर ॥ नासिकालों नीर आयौ पार पहलौ दूर ॥५॥ श्रीमुखतते हुंकार कीनों दीयो जमुनापार ॥ वसुदेव मन परतीत आई बालक गृह अवतार ॥६॥ नंदसौ मनुहार कीनी कहत है वसुदेव ॥ कहै सूर सुत जानि अपनौ बाहोत कीजै सेव ॥७॥
Ramkali
Suni gopijan anand bhaee hain harizuki janm badhaai . curry
Part1-033
सुनि गोपीजन आनंद भई हैं हरिजूकी जन्म बधाई । करि सिंगार चारु अंगनमें देत असीस सुहाई ॥१॥ बदन तंबोल नैन अंजनदे सेंदुर मांग भराई । पिय अनुराग सुहाग भरी नव कुमकुम आड़ बनाई ॥२॥ अंचल तल कुंडल छबि झलकत परत कपोलन झाँई । मानों भोर भयौ रवि कंजन किरण पियूष पिबाई ॥३॥ ग्रथित कुसुम छूटत कबरिनते चरन परत छबि छाई । मानों सोहत मेघ नलिन पर फूल फुही बरखाई ॥४॥ मणि गण हार बिराजत उर पर कंचुकी नील कसाई । मानों श्याम प्रगट हृदय भयौ उर पर झलकत झाँई ॥५॥ झलकत बलय कंज नूपुर ध्वनि मोहन श्रवन सुहाई । मंगल थार संभारि दुहूं कर मंगल गावत आई ॥६॥ मंगल बदन निहारत बारत तन मन धन बिसराई । मंगल पूरब मिले सनेहीं मंगल रूप कन्हाई ॥७॥ मंगल गोप मगन मन नाचत मंगल दथि छिरकाई | मंगल भूषण बसन पहरि सब मंगल दरश दिखाई ॥८॥ मंगल श्रीयमुना गोवर्धन मंगल पुंज भराई । मंगल सुभग पुलिन वृंदावन मंगल लता द्रुम छाई ॥९॥ मंगल हरद तेल चूरन जल सींचत हरख बढ़ाई । मंगल नंद यशोदारानी मंगल निधि प्रकटाई ॥१०॥ मंगल वल्लभ ब्रज मंगल निधि चरन रज सीस चढाई । नित मंगल रसिकनके जीवन मंगल लीला गाई ॥११॥
Asawari
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