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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Mero navrang bihaari .. balbal jaanuun tihari .. 1..
Part3-072
मेरो नवरंग बिहारी ॥ बलबल जांऊं तिहारी ॥ १॥ बाजे बहु भांत बजावें ॥ गाना रसरंग बढावें ॥ २॥ गावें गुण गीत रसाला ॥ भावे मोहि नंदको लाला ॥३॥ लिये संग राधा गोरी ॥ बोलें सब हो हो होरी ॥७॥ सोंधे सों भीनों वागो ॥ सारीरति रेनको जाग्यो ॥५॥ शोभा कहा बेन बखानें ॥ माधुरी के नयन ही जानें ॥६॥
Kafi
Dharat jawara shree govind ..
Pustak1-315
धरत जवारा श्री गोविंद ॥ आश्विन मास सुभग दशमी शुक्ल पक्ष घड़ी शुभकंद ॥१॥ केसर सोंधौ घोर यशोदा प्रथम न्हवाये कान्‍्ह गोबिंद॥ नाना विध शृंगार पाग बनी जरकसी बागौ पहरन छंद ॥२॥ कहत यशोदा सुनौ मेरे लाला जोई जोई भावे तिहारे मन || सोई सोई भोजन करो दोऊ भैया गावत गुण तहाँ परमानंद ॥३॥
Saarang
Boll liye sub gwal kanhai.. teko girigovardhan aaee ..1 ..
Part2-086
बोल लिये सब ग्वाल कन्हाई॥ टेको गिरिगोवर्द्धँन आई ॥१ ॥ आज सबे मिलहोहु सहाई ॥ हँसत देख बलराम कन्हाई ॥२॥ लकुट लियें कर टेकन जाई॥ कहत परस्पर लेहु उठाई॥३॥ वरखत इंद्र महा झर लाई॥ अति जल देख सखा डरपाई ॥४॥ नंदनंदन विन को गिरि धारे॥ एसे बलबिन कोन संभारे ॥५॥ नखतें गिरे कोन पुन राखे॥ वारवार यह कहिकहि भाखे ॥६ ॥ सूरश्याम गिरिवर कर लीनो॥ वबरखत मेघ चक्रित मन कीनो ॥७॥
Bilawal
Nand nandan-sadan harakh afullit lalit badan karat bhojan baithe bhogi haldharvir.
Part2-237
नंद नंदन-सदन हरख अफुल्लित ललित बदन करत भोजन बैठे भोगी हलधरवीर। लेत रुचि कोर दूरी देख जसोमति और कहत नीके । बने अपूप चीला खीर ॥१ ॥ और सब सोंज लेके आई हैं ब्रज की वधू कहत रोहिनी ठाडी धरत नाहिन धीर। मांग लेई लेई बोल निकट हु कृष्णदास भई आतुर निरख मिटी तन की पीर ॥२ ॥
Todi
Chhel chhabilo dhota sabharchyo baaki chitavani bhronh
Part3-296
छेल छबीलो ढोटा सभरच्यो बाकी चितवनि भ्रोंह मरोर ॥ खेलन मैं बहुछंद फंदकर लेजु गयो चितचोर ॥१॥ अरी वह बन बन आवे वेणु बजावें गावे चटक मटक की गार ॥ हो हो बोले गलियन डोले हँसत सखा किलकार ॥२॥ हों ठाडी अपने द्वारे भोरें थोरोसो घूंघटमार ॥ आंखिन मांझ गुलाल मुठीभर गयो अचानक डार ॥३॥ बाके बडरे नयना मधुरे बेना कह्मो कछुक मुसिकाय ॥ श्रीविट्डल गिरिधरन गये मेरे हियरे चटक लगाय ॥४॥
Gouri
Jopai raam rajaa houn paauun || naan karon shank lunk madh kii kachhu
Part1-297
जोपै राम रजा हों पाऊँ || न करों शंक लंक मढ़ की कछु सायर खोद बहाऊँ ॥।१॥ बढ़ूँ शरीर पैठ परमित कर सकल कटक पहोचाऊँ। कहौ तौ रावण कुल समेत सब बाँध चरण तर लाऊँ ॥।२॥ हौं सेवक हरि ऐसौ कहौ तौ रावण कुल समेत सब बाँध चरण तर लाऊँ ॥२॥ हों सेवक हरि ऐसौ तुम्हारा कहा एक मुख गाऊँ ॥ सुर और असुर सबै जुर आयें तो रण नहिं पीठ दिखाऊँ ।।३॥ रावण मारि सिया घर लाऊँ तौ तुमरों दास कहाऊँ ॥ सूरदास प्रभु बिन कीयें कारज मुख नहीं आन दिखाऊँ ॥४॥।
Maru
Phir basant kratu aaee sajani vrindavan sukhdai ..
Part3-067
फिर बसंत क्रतु आई सजनी वृंदावन सुखदाई ॥ चली जहैँँ तहँ बंसीबट श्री नंदकुमार कन्हाई ॥१॥ कोकिल कीर मराल मंडली रंग भोमि मन भाई ॥ ठोर ठोर बेली द्रुम फूले अबीर गुलाल सोंधाई ॥२॥ कहा बरनों कुंजन की सोभा कान्ह कुंवर मिलि खेलें || करत बिहार चले जमुना तट अंस अंस भुज मेलें ॥३॥ नीलांबर पीतांबर सोहे चंदन बंदन अति घोरी ॥ कही न जात दुहुन की सोभा श्यामा स्याम की जोरी ॥४॥ मंद सुगंध चलयों मलया निल सीत पवन सुख रासी ॥ 'मान दास' बलि यह गिरिधर प्रभु ब्रिंदा बीपिन बिलासी ॥५॥
Basant
Chandravali kahat naath radhajukon gaho haath kaheko
Part2-328
चन्द्रावली कहत नाथ राधाजूकों गहो हाथ काहेको दुरावों प्यारे जगत उजियारे | करो ब्याह लाल आप मेटो त्रिविध्व तनके ताप हरो दुख करो सुख नेननके तारे ॥१ ॥ तब ही कृष्ण अवतार कियो रास जमुनाघाट गोपिन प्रति रूप धर्यो आप प्राण प्यारे। आप द्विज तनु धार तरस रहि ब्रजनार करो ब्याह बहु रूप दिखावो मेरे बारे ॥२॥ कासी पधारो पिय तरसे मथुमंगल हि वे गेल देख रहे पिय बूझत सब कोय | कहां रहे प्राणनाथ वेगि मिलो ग्हो हाथ देहो जु प्राणदान प्यारे बचाय लेहो आय ॥३॥
Todi
Pyaari bhuj grieva melli nirtat piyaa sujan ..
Pustak1-319
प्यारी भुज ग्रीवा मेलि निर्तत पिया सुजान ॥ मुदित परस्पर लेत गति में गति गुणरास राधे गिरिधरन गुण निधान ॥१॥ सरस मुरली धुनि मिले मधुर स्वर रास रंगभीने गावै अब घर तान बंधान ॥ चतुर्भुज प्रभु श्यामाश्यामकी नटन देख मोहे खग मृग वन थकित व्योंम विमान ॥२॥|
Bhairav
Shyam achaanak aaye sajani phir paachhe kahoon bhaage.
NityaPad-056
श्याम अचानक आये सजनी फिर पाछे कहूं भागे। चोंक परी सपने में देखे बिमलवसन तन त्यागे ॥॥१॥ जरो यह नेना खुल गये मेरे पाये न ढिंय कहुं पागे ।। नंददास बिरहिन केसे जीये पंचबान उर लागे ॥२॥
Malkos
Jamuna tata syaam sunder useer rawati rachee raajat yuvati mandal madhya gopal laal pyaaro ..
NityaPad-266
जमुना तट स्याम सुंदर उसीर रावटी रची राजत युवति मंडल मध्य गोपाल लाल प्यारो ॥ फूलन के आभूखन अंगअंग 'फबि रहे कुंजन के छाजे बेंठे देखत अखारो ॥१॥ कबहुक टोक करत सुबल संग श्रीदामा बाहु मधुमंगल कहत ब्रज रखवारो ॥ कृष्णदास सोई विद्डलेश गृह राजत ईन बलल्‍लभीयनके नेंनन तारो ॥२॥
Kanharo
Hallery hulraave maataa . bali bali jaaruun ghosh
Part1-098
हालरी हुलरावे माता । बलि बलि जारऊँ घोष सुखदाता ॥१॥ अति लोहित कर चरन सरोजें ! जे ब्रह्मादिक मनसा खोजें ॥२॥ जसुमति अपनो पुन्य बिचारै । बारवार मुख कमल निहारै ॥३॥ अखिल भुवनपति गरुड़ा गामी । नंदसुबन परमानेंद स्वामी ॥४)
Bilawal
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