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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Roop ujyaaron deep jagamage kheltahen piya pyaari .. | Part2-064 | रूप उज्यारों दीप जगमगे खेलतहें पिय प्यारी ॥
दाव पर्यो सुंदरि राधाको रूदयों कुंजबिहारी ॥१॥
केलि करत हँसत चहुंदिशतें रंग बदयो अति भारी ॥
कल्यानदास बल-बल बानिकपर नाहीं को समतारी ॥२ ॥ | Kanharo |
Mohan tilak gorochan mohan mohan lalaat atee raajai | mohan | NityaPad-166 | मोहन तिलक गोरोचन मोहन मोहन ललाट अति राजै | मोहन
सिर पर मोहन कुलही मोहन सुरंग अति भ्राजै ॥। १॥ मोहन स्वन कुसुम जु मोहन
कपोल अवतंस विराजै। मोहन अधरपुट पै मोहन मुरलि मोहन कल बाज ॥२।।
मोहन मुखारबिंद पै झूमत मोहन अलक अलि मधु काजै। गोविन्द प्रभु नखसिख
जु मोहन मोहन घोख सिरताजै | ३॥। | Gori |
Sunari aalee dupaharki | NityaPad-240 | सुनरी आली दुपहरकी
बिरियां बैठी झरोंखन पोवतहार ॥ ओचक आय गए नंदनंदन मोतन
चिते कांकरीडार ॥१॥ हों सकुची लज्जीत भई ठाडी गुरुजन मनमें कियो
बिचार ॥ गोविदप्रभु पिय रसिक शिरोमनी सैन बताई भुजापसार ॥२॥ | Saarang |
Mill khelein faag banamen srivallabh baalaa .. sanga | Part3-195 | मिल खेलें फाग बनमें श्रीवल्लभ बाला ॥ संग
खरे रसरंग भरे नवरंग तृभंगी लाल || ६॥ बाजत बांसुरी चंग उपंग पखावज
आवज ताला ॥ गावत गारी दे दे ब्रजनारी मनोहर गीत रसाला ॥२॥ कंचन
बेलि करे जानों केलि परे बिच स्यथाम तमाला ॥ धाइ धरें हसि अंक भरें
छूटे केस टूटी उर माला ॥३॥ सींचत अंगन रंग भरे बाढ्यो प्रेम प्रवाह
रसाला ॥ मेन सेन खुर रेणु उडी नभ छायो अबीर गुलाला ॥४॥ देखि
थकी भवरी सबरी मृगी मोरी चकोरी नजाला ॥ राधा कृष्ण बिलास सरोज
गदाधरमन्न मराला ॥५॥ | Kaafi |
Gwalin maangat busson aapane .. | NityaPad-033 | ग्वालिन मांगत बसन आपने ॥
सीतकाल जलभीतरठाडी आवतनहीं दयाने ॥ १॥
तुम व्रज॒राज कुमार प्रबल अतिकोन परी यहबाने ॥|
हम सब दासी तिहारी व्रजपति तुम बहुनिपटसयाने ।।२॥ | Bibhaas |
Piya merey lankaa banchar aayou .. curr prapanch hari tey seetaa | Part1-303 | पिय मेरे लंका बनचर आयौ ॥ कर प्रपंच हरी ते सीता
लंका कोट ढहायौ ।।१॥ तबहीं मूढ़ मरम नहीं जान्यौ जबही मैं समुझायौ ॥
अब किन मिल अपराध क्षमा वे रामचंद्र चढ़ि आयौ ॥।२॥। ऊँची ध्वजा देख
रथ ऊपर लक्ष्मण धनुष चढ़ायौ॥ गहि पद सूरदास भामिनि कहै राज बिभीषण
पायौ ॥३॥ | Maru |
Yashodakahanlon keyzecon | | NityaPad-195 | यशोदाकहाँलों कीजेकान |
दिनप्रतिकेंसेसही परतहै दूधदहीकी हान ॥१॥
अपनेया बालकीकरनी जोतुमदेखो आन ।।
गोरसखबाय जगायलरिकनकों भाजनभाजतभान ॥२१॥
मैं अपने मंदिर्केकौरें राखो माखनछान ॥
सोईजायतुम्हार ढोटा वबहीलियोपहचान . ॥३॥
बूझेंकहतबालनजोमहिया_ आयेसंकामान ॥
सूरदासप्रभुऔरनआवों चेटीकाढतपान ।।४॥ | Dhanashree |
Balipai jonchat waman baal .. teen paind bhoomi mohi deeje adhik | Part1-217 | बलिपै जॉँचत वामन बाल ॥ तीन पैंड़ भूमि मोहि दीजे अधिक
कहा कहीं भूपाल ॥१॥ त ्तीन पैंड मोपै कहा माँगत बहोत देहु लेहु इहि काल॥
शुक्राचारज कह्मी राजसों छल करि आये श्रीगोपाल ॥२॥ मोय छलन श्रीपति
आये हैं यातैं पदवी कहा विशाल ॥ यौं कहि दीनौ वामन लीनोौ दोय पेंड़में किये
बेहाल ॥३॥ एक चरन बलि सिर पर धरिकें ततक्षन राख्यौ मुतल रसाल ॥
यदुपति द्वारपाल ढ्ै रहिहें द्ारिकेश प्रभु बड़े दयाल ॥४॥ | Saarang |
Munn mohan lalana munn haradyo hoe .. hanradyo munn sakal ghosh sirtaj .. shru0 .. grih grihaten sundari chully dekhan vrajraj kumar ..! | Part3-187 | मन मोहन ललना मन हरद्यो हो ॥ हंरद्यो मन सकल घोष सिरताज ॥ श्रु० ॥ गृह गृहतें सुंदरि चली देखन ब्रजराज कुमार ॥!
निरख बदन बिथकित भई हरिठाड़ें सिंघ दुवार ॥१॥ डिमडिम पटह झांझ
डफ बीना मृदंग उपंगन तार ॥ गावत चेत सुबल श्रीदामा बाढ्यो रंग अपार
॥२॥ रत्न जटित प्रिचकाईं कर लियें छिरकत घोख कुमार || मदन मोहन
पिय अति रसकमाते कछु बन अंग सह्यार॥ ३॥ इत राधा प्रभृति चंद्रावली
ललिता गोपि अपार ॥ उत हलधर मोहन दोऊ भैया खेल मच्यो दरबार
॥४॥ शिथिलित कंटि तट बसन मेखला उरगज मोत्तिन हार ॥ बिथुरी अलक
बदन छबि राजत गलित कुसुम सिरभार ॥५॥ मोहन प्यारी सेनदे हलधर
पकरे जाय ॥ आपुन हसत पीतपट मुखदे आये हैं आंखि अँजाय ॥६॥
बहोरच्यों सिमटि सकल सखियन मिल मोहन पकरे धाय ॥ अधर माधुरी
पीबत पिबाबत मुरली लई है छिनाय ||७॥ परिवा सिमिटि सकल ब्रजबासी
चले जमुना जल न्हान ॥ बार कुंवर नंदरानी हो देत बिप्रन बहु दान ॥८॥
द्वितीया पाट सिंघासन बैठे छत्र चबचर सिरताज || राजत सभा सहित श्रीदामा
बल बल बल युवराज ॥९॥ स्याम सुभग तन अति राजत हैं अरगजा पीत
सुवास गोविंद प्रभु पर सकल देवता बरखत कुसुम अकास ॥१०॥ | Kaafi |
Nirtat mohan raas bilas . yun gaavati vrishabhaanu-nandini | Part1-330 | निर्तत मोहन रास बिलास । युन गावति वृषभानु-नन्दिनी
उधरत सब्द ताथेई तास ॥ कस्तल ताल मिलत मुरली-सेंग बिच-बिच
मोहन-मुख-मृदु-हास । जै-जै करत कुसुम सुर बरषत गुन गावत “परमानँददास”॥ | Saarang |
Anand aaj bhayohon bhayo jagati parr | Part2-293 | आनंद आज भयोहोीं भयो जगती पर
जयजयकार ॥ श्रीलक्ष्मणगृह प्रकट भयेहें श्रीवललभ सुकुमार ।१ ॥ धन्य
धन्य माधवमास एकादशी कृष्ण पक्ष रविवार॥ गुणनिधान श्रीगिरिधर
प्रकटे लीला द्विजतन धार ॥२ ॥ | Sarang |
Mahamahochav srigokulgam .. premamudit jubati jass | Part1-019 | महामहोच्छव श्रीगोकुलगाम ॥ प्रेममुदित जुबती जस
गावत श्यामसुंदरकों लै लै नाम ॥१॥ जहातहाँ लीला अवगाहत खरिक खोरि
द्िमंथन ठाम ॥ करत कुलाहल निस अरु बासर आनंदमें बीतत सब
जाम ॥२॥ नंदगोप सुत सब सुखदायक मोहन मूरति पूरन काम ॥ चतुर्भुज
प्रभु गिरिधर आनंदनिधि सखी स्वरूप शोभा अभिराम ॥३॥ | Bilawal |
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