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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Srivallabh prabhu atee dayal deeje darshan kripal, deen zaan
NityaPad-006
श्रीवललभ प्रभु अति दयाल दीजे दरशन कृपाल, दीन जान कीजे आपनो दोष जिन विचारी। होंतों अपराध भर्यो धर्म सबे परहयों कीयो न कुछ भलोकाज जाहिचित्त धारो ॥ १॥ दूरि परें पल पल दुख पावत हो प्राणनाथ,तुमही ते होड़ हे प्रभु रसिक को निवारो ॥ मेरो पकर्यो हे हाथ बांध्यो पद कमल साथ हाथ, हों अनाथ ताहि भूल जिन विसारो ॥२॥
Bilawal
Hoton horry nandlalason khelongi .. bharoon bharaaun
Part3-076
होतों होरी नंदलालसों खेलोंगी ॥ भरूं भराऊं गत्ति उपजाऊं जग उपहास संकेलोंगी ॥ नाचूं उघरि बजाऊं गाऊं पतिब्रत पायनोंपे लोंगी॥ कृष्णजीवन लछीराम के प्रभुसों रीझि मालगूलरी मे लोंगी ॥२॥
Bhairav
Akhiyaan kaahu kii naan lago .. saanvaro sou dhota kaahu koo jasir
NityaPad-162
अखियां काहू की न लगो ॥ सांवरो सो ढोटा काहु को जासीर ग्वाल पगो ॥ रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोम रोम प्रति मदन जग्यो ॥ सुनि कृष्णदास लाल गिरिधर विन को काहु को न सगो ।।२॥
Saarang
Ghee abke pheri leeje hoe sugharrai vahee taana .. saras madhur
NityaPad-227
घी अबके फेरि लीजे हो सुघरराय वही तान ॥ सरस मधुर नीकि चोखपरी है तामें तानबंधान ।॥९॥ अवघर सरस बिकट गिरिधरपिय तुमहीपें बनि आवे मोहि तिहारी आन ॥ गोविंदप्रभु प्रिययसिकशिरोमणि मदनमोहन पिय अतिहि सुजान ॥२॥
Saarang
Horry khelati dolati sambro dhota nand koo laal ..
Part3-312
होरी खेलति डोलति सांबरो ढोटा नंद को लाल ॥ कैसें के जाऊँ भरनि जमुना जल परआओर री रहति मेरे ख्याल ॥|१॥ अरी यह लंगर मोहि ढिंग आई हेरि इंसि तोरी मोतिनमाल ॥ हों सकुचाई रही मुख चितवति परसि भज्यौ दोऊ गाल ॥२॥ अरी वे सनमुख होई पिचकारी छोड़े डारे सुरंग गुलाल ॥ औचका आई भेटि मुख में निज मुख दीनों उगाल ॥३॥ अरी बे तब तैं मोहि चटपटटि लागी परी प्रेम कैं जाल ॥ जो तू हितू हमारी मिलाई 'रसिक' गुपाल ॥४॥
Gouri
Mohi lai inn nainanki saine .. sravan sunat sudhbudh bisari sub
NityaPad-099
मोही लै इन नैननकी सैन ॥ स्रवन सुनत सुधबुध बिसरी सब हौं लुबधी मोहन मुख बैन ॥। १॥| सुंदर बदन घूंघट पट कीनौ चलरी सखी प्रीतम सुख दैन। अंगअंग प्रति सहज माधुरी तेरी सौंह चित रहत न चैन ॥। २॥ कर गहि कमल खरिकके मारग उनसों बात कही कछु मैंन । परमानंद प्रभु सौंह बबाकी मेरी या गांई कही दुृहि दैन ॥३॥
Dhnashree
Taruni nicus sarbetat aaee .. punpun kahatalehu patbhushan yuvatisthambulai .. 1..
NityaPad-035
तरुनी निकस सर्बेतट आई ॥ पुनपुन कहतलेहु पटभूषण युवतीस्थामबुलाई ॥ १॥ जलतेनिकस भई सब ठाढी करअंग ऊपरदीनो ॥ वसन देहोआभूषणराखहु हाहापुनपुनकीनों ॥२॥ ऐसेंकहाबतावतहो मोहिबांहउठायनिहारों ॥ करसो कहाअंग उरमूंदे मेरे कहें उघारो ॥३॥। सूरस्थामसोईसोईहम करहे जोई जोई तुमसब केहो लेहोंदावकबहु तुमसों हम बहुरकहातुमजेहों ।।४॥।
Ramkali
Sobhit laalan lalit tribhangi. phool gulabi dhoti pahire topi
NityaPad-169
सोभित लालन ललित त्रिभंगी। फूल गुलाबी धोती पहिरे टोपी धरे सुरंगी ॥ १॥॥ चंदनको तन लेप कियो है सोहत सीस कलंगी। परमानंद प्रभु बालरस क्रीडत हाथ फिरावत बंगी ॥२॥
Saarang
Chadhchadhi akhiyaan tinn madhi pootari dekhayat cock padhisi |.
NityaPad-056
चढचढी अखियां तिन मधि पूतरी देखयत कोक पढीसी |। श्याम अरुन डोरे अछरसी पाटी मदन गढीसी ॥। १॥ मृग जे सबे लजाय निहारो मानो मीन पढीसी ॥ द्रजाधीस हम कछु कहेगी देखियत प्रेम बढीसी ।।२॥
Malkos
Chalau navnagari roop guna aagari raas thaanyau laal subhag jamuna teer ..
Pustak1-354
चलौ नवनागरी रूप गुन आगरी रास ठान्यौ लाल सुभग जमुना तीर ॥ साज भूषन सकल मुदित करि मुख कमल बिबिध सौरभ मिलयी पहरि दक्षिण चीर ॥१॥ अधर मुरली लसे प्रान तो में बसे नहिं भावै कछु बढ़ी अति समर पीर ॥ जाय मिलि बिमल मति ठाठ सब अगम गति ज्यों जीय सुख लेहु मीन पाबै नीर ॥२॥ कटि जटित पीतपट सीस लटकत मुकुट क्वणित नूपुर मधुप हंस कोकिल कीर ॥ दास कुंभनप्रभु सप्तसुरसों मिले गावत केदारो राग गिरिवरधरन धीर ॥३॥।
Kedaro
Chalari singh pori chacharamchi jahaan khelat dhota
Part3-240
चलरी सिंघ पोरि चाचरमची जहां खेलत ढोटा दोय | जोन पत्याय सुनें किन श्रवणन हो हो हो हो होय ॥१॥ अपने नयन निरख हों आई कहत न बात बनाय ॥ तोसों मोहन सेना देखकें मन धीरज धरयों न जाय ॥२॥ एक न किये बनायतिलोना एक अरगजा भीन ॥ एक न करी खोर चंदन की चोवा बेंदी दीने | ३|| तहां वाजत वीन रबाब किन्नरी अमृत कुंडली जंत्र ॥ अधर सुधायुत बांसुरी हरि करत मोहनी मंत्र ॥४॥ सुर मंडल पिनाक मह॒वर जल तरंग मन मोहे ॥ मदन भेरि राय गिड गिड्दी सहनाई सुरसोहे |५॥ कठतार तार करतारीदेदे बजत चुटकिन चुटकार ॥ झांझ झनक खंजीर बजें भई झालर की झनकारें ॥६।। एक शुंग संरब ध्वनि पूर रही अधर धरें मुखचंणा कर ले छुफ ही बजाब ही एक डिम डिम ढाल मूंदगा ॥७॥ तहां चुरें निसान-नगारे की ध्वनि रह्मो घोख सब गाज ॥ दंदभी देव बजावहीं सब व्योम विमान न साज ॥८॥ तहां बहुविध भरे रंग सोधे केसर कुंकुमनीर ॥ मृगमद मेदलयो वेलाभर अरगजा अरक उसीर ॥९॥ रत्न जटित पिचकारिन भरभर छिरकत सुंदर स्याम ॥ *्वालिन सुरंग अबीर गुलाल मुठीभर भर डालत बलराम || 8 ० | एक बूका वंदन कुंकुमजल घार कलश भरलावे ॥ अचकां आय पीठ पाछेते मोहन के सिरनावे ॥ १ १॥ फिर सुमन सुगंध फुलेल अरगजा लयो करन लपटाय ॥ नेंक मोहनसों बतराय भजी बलदाऊ बदन लगाय ॥१२॥ सब होरी के रंग राते माते डोलत करत कलोलें ॥ रंग रंगीली गारी देदे हो हो होरी बोले ॥१३॥ सुख समूह कछु कड॒त न आवे निरख नयन सचुपैये ॥ पूजे मन अमिलाष तबे ब्रजपति सो स्लेलनजैये ।। १ ४॥॥
Sarang
Sakhee milli jhulavati apune ragya .. jhulavat doll
Part3-375
सखी मिलि झुलवति अपुने रज्ञ ॥ झुलवत डोल लाडिलो गिरिधर राधे लै अरधंग || १॥ अंब मोर फल लता माधुरी रचि फूलन करि संग ॥ नाँचत गाबति करत मनोरथ भाव दिखावत अंग ॥२॥ प्रथम खेल स्यामा प्यारी कौं केसर चोवा बंद ॥ अबीर गुलाल उडाबति है बलि रिझय गोकुल चंद ॥| ३॥ दूजो खेल रच्यों चन्द्राबली अद्धुत बन्यों स्वरूप || दोऊन के मन प्रीति बढ़ावत लागति परम अनूप ।।४॥| तीजो खेल रच्यो ललितादिक को करि संके बखान॥ और अकोर काहा लो दीजे नोछावरि करि प्रान ॥५॥ चोथो खेल मदनमोहन कौं बरखत रज्ज अपार ॥ छूटति पिचकाई चहूँ दिस तें अबीर गुलाल ध्रुमार ॥६॥ यह रस रीति काहा कोऊ जाने श्रुति हूं गावति नेति 'द्वारिकेस' प्रभु झुलि पधारे निज मन्दिर संकेत ॥७॥
Devgandhar
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