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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Tum begi queyon naan aavabon .. hoe horry khele | Part3-125 | तुम बेगि क्यों न आवबों ॥ हो होरी खेले
रसभरि ॥ साँजि समै सब जाय गोप लै, बदन-कमल दरसावों ॥ १॥ मधुरी
बैनु बजाई गाई कैं जुबती-जननि बुलाबवों ॥ दुंदुभि ढ़फ औ मृदंग सुनाई
कै स्वनन सुख उपजाबौं ॥|२॥| चोबा अबीर गुलाल अरगजा, स्याम-अंग
छिरकावौ ॥ “सूरदास' प्रभु रसिक सिरोमनि, रँंगमँगें नैंन दिखावों ॥३॥ | Bilawal |
Jasumati munn abhilakh karai. kaba merau laal ghutruvan renge | Part1-170 | जसुमति मन अभिलाख करै। कब मेरौ लाल घुटरुवन रेंगे
कब धरनी पग द्ैक धरे ॥१॥ कब दे दाँत दूधके देखों कब तुतरे मुख बेन
झै । कब नंद हि बाबा कहि बोलहे कब जननी कहि मोही रे ॥२॥ कब
मेरी अँचरा गहि मोहन जोइ सोइ मोसों कही झगरे | कबहुँ तनक तनक कर खैहै
अपने करलै मुखहिं भरे ॥३॥ कब हैँँसि बात कहेंगे मोसों वा छबि देख दुख
दूरि हरे । श्याम अकेले आँगन छाँड़े आपु गई कछु काज घरे ॥४॥ या अंतर
अँधवाई उठी एक गरजत गगनि सहित घहरे । सूरदास ब्रज लोग सुनत धुनि जो
जहाँ तहाँ सब अतिहिं डरे ॥५॥ | Bilawal |
Palana phool bharyau nandrani | taa madhiya jhoolat chhagan | Part1-111 | पलना फूल भर्यौ नंदरानी | ता मधिय झूलत छगन
मगनवा निरखत नैन सिरानी ॥१॥ नानाबिधके खिलोना लै ले खिलावत मूदु
मुसिकानी । रसिक प्रीतम झूलत मन फूलत किलकत ब्रज सुखदानी ॥२॥
| Aasawari |
Jaagiye gopallal gwal dwaar thaade.. rainandhkar gayo chandrama | NityaPad-019 | जागिये गोपाललाल ग्वाल द्वार ठाडे॥ रेनअंधकार गयो चंद्रमा
मलीन भयो तारेगण देखियत नही तरणि किरण बाढे ॥१॥
मुकुलित भये कमलजाल भवर गुंजत पुष्पमाल कुमुदिनी कुमलांनी ॥
गंधर्व गुणगान करत स्नान दान नेम धरत हरत सकल पाप बदत वेद विप्र वानी ।२॥
बोलत नंद बारवार मुख देखूं तुव कुमार गायन भई बडी वार बृंदावन जेबों |
जननी कहत उठो लाल जानत जिय रजनी तात सूरदारप्रभु गोपाल तुमकों कछु खेवो ॥३॥ | Bhairav |
Ladili naan maane laal aap paaundhaaro .. jaise hathatje | NityaPad-324 | लाडिली न माने लाल आप पाऊंधारो ॥ जैसे हठतजे
प्यारी सोई यतन विचारो ॥|१॥ बातेंतो बनाय कही जेती मति मेरी ॥ एकहूं
नमाने हो लाल ऐसी त्रिया तेरी ॥२॥ अपुनी चोपके काजें सखीभेष कीनो |।
भूषण वसन साजें बीना करलीनो ॥३॥ उतते आवत देख्री चकित निहारी ॥
कौन गाम वसत हो रूपकी उजियारी ॥। ४॥ गामतो है नंदगाम तहां कीहौं प्यारी ॥
नामहै सांवलसखोी तेरे हितकारी ॥५॥| करसो करजोरें स्थामा निकट बैठाई ॥।
सप्तस्वरन साज मिल स्वल्प बजाई ॥।६।। रीझ मोतीहार चारु उरले पहरावे ॥
ऐसेहीं हमारो भटू सांवरो बजाबे ।।४॥ जोड़जोड़ इच्छा होय सोई मांग लीजे ॥।
ऐसी बातें सांवरेसो कबहुं मान न कीजे ॥॥८॥| मुखसो मुखजोरें स्थामा दरपन
दिखावें।। निरख छबीली छबिप्रतिबिंब लजावें ॥॥९॥ छल तो उघर आयो हँस
पीठ दीनी॥ नंददास बलप्यारी आँकों भरलीनी ॥१०॥। | Bihagaro |
Totre bachan jasodaji boley kanakaun hularaaungi . apane | Part1-108 | तोतरे बचन जसोदाजी बोले कानाकौं हुलराऊँगी । अपने
लालकौ ब्याह करूँगी राधा दुलहनी लाऊँगी ॥१॥ गौतम गरग ऋषि सुरकौ
कुल दुरबासाकों बुलाऊँगी । श्री गिरिधर गोविंदकौ सेवक तापै जोग
पुछाऊँगी ॥२॥ लाड़कोट करि हों अपने कीं मन अभिलाख पुराऊँगी । जोड़ी
जुगल मनोहर देखों तादिन मंगल गाऊँगी ॥३॥ बहुत बधाई देहु बधैयन
सबहीकीौं पहिराऊँगी । नंदरायकौं कुल सबहीकौं चंदनसों चरचाऊंगी ॥४॥
नादवेद सुतसुख सबहीकों आनंदसो उपजाऊँगी। जनभगवान जसोदा भाखे संतनकों
सुख धाऊँगी ॥५॥ | Aasawari |
Gangaa fatitan kosukhdeni.. sevakarbhagirath | Part2-337 | गंगा फतितन कोसुखदेनी॥ सेवाकरभगीरथ
लाये पापकाटनको पैनी ॥१ ॥ सकल ब्रह्मांड फोरकेआवत चलत चाल
गजगयनी ॥ परभमानंद प्रभुचरण परसतें भई कमलदल नयनी ॥२ ॥ | Bilawal |
Dhani dhani vundavan key baasi .. | NityaPad-363 | धनि धनि वुंदावन के बासी ॥
निशिदिन चरणकमल अनुरागी स्यामास्थाम उपासी॥ १॥
अष्टमहासिद्धि द्वारे ठाडी रमाचरणकी दासी ॥।
या रसको जो मरम नजानो जाय बसो किन कासी ॥२॥
भस्मलगाय गरे लिंगबांधो निशिदिन फिरो उदासी ॥
परमानंददासको ठाकुर सुंदरघोषनिवासी ॥|३॥ | Bihaag |
Aaj hamaare vijay dashahara dhariye laal jabaare hoe .. | Pustak1-317 | आज हमारे विजय दशहरा धरिये लाल जबारे हो ॥
कर सिंगार श्याम सुंदरकों अपनो तन मन बारे हों ॥१॥
सब सखियन मिल मतो उपायो चलिये जमुनातीर हो ॥
परमानंद जसोमती अति प्रफुल्लित बहु गोपिनकी भीर हो. ॥२॥ | Saarang |
Sakhee nandanandan vrishbhan kunwarison baadhyo adhik | Part3-248 | सखी नंदनंदन वृषभान कुंवरिसों बाढ्यो अधिक
सनेह ॥ध्रु.॥॥ अबकितद्रत सांवरे ढोटा फगुवा हमारो देह ॥ जबतो गोंहन
नेंकनछांडत अबभज पकरसच्ोो ग्रे ॥१॥ सवे सखी मिल चली नंदपें मोहन
माँग्यो देह ॥ दिनाचार अवसर डोरीको बहोर आपनों लेह ॥२॥ प्यारी
मोहन माजेना मिलें घटेतो भरदेह तुम लाय तराजू तोल लेहु मोहन घटेतो
दूनोलेह ॥३॥ अधिक वार खिलवार होरी की पिचकारिन बाढ्योनेह ॥ गौर
स्याम मिलयों राजतहें ज्यों भादों को मेह ॥४॥ विग्हल भई तनमन नहीं
सूझे सब हिन विसरद्यो गेह ॥ सूरदास मोहनजू के बदले जो चाहो सो
लेह ॥५॥ | Sarang |
Maaee horry khele mohana liyein gulal abir .. | Part3-237 | माई होरी खेले मोहना लियें गुलाल अबीर ॥
बनवन चली सकल ब्रजवनिता पहरेंविविध पटचीर || १ ॥॥ अरमजबाद कुंकुमा
केसर चरचे स्याम शरीर ॥ मृद् मुसिकाय परस्पर सुंदरि दशन झलक
मुख हीर ॥।२॥ प्रेम पतंग पिचकारी छूटत ओर यमुना को नीर ॥ सूरदास
प्रभु रस बसकर लीने हरि हलधर के वीर ॥३॥ | Sarang |
Soodhen naan boll kahaa itaraane .. | NityaPad-074 | सूधें न बोल कहा ईतराने ॥
या ब्रज में कोन कोनते को वड़ो कहा रंग कहारांने ॥ १॥।
कोन टेव दिन दिन प्रति प्रति की ताकत अंग बिरानें ॥
जेजे हाल की एकहि देहों आन स्वामी रहे छांने ॥२॥। | Todi |
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