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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Hari tunn mohani maaee angang anang satsat varani | Part2-366 | हरि तन मोहनी माई अंगअंग अनंग सतसत वरनी
नहीं जाई ॥१ ॥ कोऊ निरख विथुरी अलक मुख अधिक सुखपाई ॥
कोऊ निरख रही भाल चंदन एक चितलाई ॥२ ॥ कोऊ निरख रही चारु
लोचन निमिष भरमाई ॥ सूरप्रभुकी निरख शोभा कहत नहीं जाई ॥३ ॥ | Sorat |
Kaun daan daanikon .. curran laage naee reet anokhe doodh | Part1-240 | कौन दान दानीकों ॥ करन लागे नई रीत अनोखे दूध
दहींको महीको अजहु हम जानीकों ॥१॥ करतहो विचित्र चाल सुबल तोककें
चखाय काहुसों कहेत गाठो जमायो कहुसों कहेत पानीकों ॥ नंददास आसपास
लटक रही कनक बेलि भोंहनकी अमेठनमें सबही अरुझ्ानीकों ॥२॥ | Bilawal |
Milahi nagri ! | NityaPad-334 | मिलहि नागरी !
नवल गिरिधर सुजान सो । कुंज के महल में रसिक नंदलाल को, भेटि अंक, मन
करि बहुत सनमान सो ॥ गीत में राग केदार चर्चरी ताल, करत पिय गान, रचि
तान बंधान सों। छीत-स्वामी' सुघर, सुघर सुंदरि ! रीझि, रिझबत सुघर भेद
गति ठान सों॥ | Kedaro |
Binn gopal naheen koee apuno .. | NityaPad-359 | बिन गोपाल नहीं कोई अपुनो ॥
कौन पितामात्ा सुतथघरनी यह सब जगत रैनको सपनो ॥१॥
धनकारन निसदिन जग भटकत वृथा जन्म योंही सब खपनों ।।
अन्त सहाय करे नहिं कोई निश्चय काल अग्निमुख झपनों॥ २॥
सब तज हरिभज युगल कमलपद मोहन निगड चरणनते कपनों ॥
कहत दास श्रीवल्लभविद्डल श्रीगिरिधर रसना मुखजपनों॥३॥ | Bihaag |
Jaahi tunn munn dhana deeje aalee taason rusno kaise bunny aave ..| | NityaPad-231 | जाहि तन मन धन दीजे आली तासों रूसनो कैसे बनि आवे ॥|
घोष नृपति सुत एते पर बहु नायक ताते कहतहों समुझ चितें अनखन कैसे पिय पाते ।
नवलनिकुंज नवलबैठे ताते हों पठई ऐसो समयो तोहिसी बडभागिन पावे ॥
सोईतो विचित्रगुण रूप त्रियाजो गोविंदप्रभुको रिझावे ॥ १॥ | Saarang |
Kaho kahaan kheleho laalan baat kaho moson banaki ... | NityaPad-292 | कहो कहां खेलेहो लालन बात कहो मोसों बनकी ॥।
आवो उछंग सांवरे मोहन गोरज पोछूं वदनकी ।।१॥
सुंदर वदन कमल कुम्हलानो और दशा भई या तनकी ॥
रसिकप्रीतमसों कहत नंदरानी बलबल छगन मगनकी ॥।२॥। | Gori |
Hari kii madhuri gaavani . | NityaPad-283 | हरि की मधुरी गावनि ।
सुनहु सखी ! मन मोहत मेरौ मधुरी बेनु बजावनि ॥
गोप-भेष-नट-लीला-बिग्रह वृंदावन ते आवनि।
धातु प्रबाल कुसुम गुंजामनि देह-सिंगार बनावनि ॥
गावत ग्वाल गोविंद की कीरति तीरथ ते अति पावनि ।
'परमानंददास' अंतरगत अबिरल प्रीती बढावनि॥। | Gori |
Mohanrai maniri teree batiyaan .. madanmohan piya baithe | NityaPad-123 | मोहनराय मानीरी तेरी बतियां ॥ मदनमोहन पिय बैठे
एकांतव्है दीनो सुहस्त जाय पतियां | ९॥ जबलग धीरजधररी सयानी दिनगत
याम जोलों होय अधरतिया॥ कुमनदासप्रभु दूती के वचनसुन परमसीतल भई
छतियां ॥२॥। | Bihagaro |
Uthhe nandlal sunat janani mukh-vaani .. | NityaPad-018 | उठे नंदलाल सुनत जननी मुख-वानी ॥
आलस भरे नयन उठे शोभा की खानी ॥|१॥|
गोपीजन थकित भई चितवत सखी ठाढी ।।
नयन कर चकोर चंदवदन प्रीत बाढी ॥|२॥
माता जल झारी लिये कमलमुख पखोारें ॥
मीरहू को परस करत आलस विचाोरें ॥३॥
सखा द्वारे ठाडे सब टेरतहें तुमकों ॥।
यमुनातट चलो स्थाम चारन गोधनकों ॥४॥
सखा सहित जेबत बल भोजन
कछू कीनो ॥ सूरस्याम हलधरसंग सखा बोल लीनों ॥५॥ | Bhairav |
Jamuna tata dhoom mutchy haye ree maaee krishna saanvaro | Part3-146 | जमुना तट धूम मची है री माई कृष्ण साँवरो
खेले होरी ॥ चलो सरख्री मिल दे खन जेयै नीकी बनी राधा गोरी ॥१॥ घर घरतें बनिता बनि आई अबीर लिए भरि भरि झोरी ॥ बदन उघार
उघार निरखत मुँख माँड़त अपनी रोरी ॥५॥॥ एक नाचत एक मृदंग बजावत
एक गावत हैं धुनि थोरी ॥ 'कृष्णजीवन लछीराम' के प्रभु प्यारे आनंद
सिंधु झकझोरा झकझोरी ॥३॥ | Dhanashri |
Gawat vasant chalivanevir baage.. ballabh reejhaayve | Part3-016 | गावत वसंत चलीवनेवीर बागे॥ बल्लभ रीझायवे
को मिली अनुरागे ॥ १॥ एकतो पहरावे वागो एकसोंधोलावे ॥ एकतो वंदन
छिरके एक अबीर उडावे ॥२॥ एकतो पान खवाबे एक दरपन दिखावबे ॥
एकतो पंखाकरे एक चमर ढुरावे ॥३॥ आरती करिकेंसबव किये मनभाये ॥
बृंदावन चंद बहुभांति रिझाये ॥४॥ | Basant |
Aaj naindanand govind girivardharan tarani tanaya nikat adhar murali | Part1-325 | आज नैंदनंद गोविंद गिरिवरधरन तरणि तनया निकट अधर मुरली
धरी )| सुनत स्वर श्रवण त्यज भवन सुरसुंदी आन आकाश तैं सुमन बरखा
करी ॥१॥ थेंनु अरु बच्छ खग मृग नि सुन सबै रहे धर ध्यान नहीं चरत
तृण मुख परी ॥ भूल प्रतिकूल जल अनिल थक्यो ता समैं शिला ड्रुम द्रवत रजनीश
: गति मति हरी ॥२॥ सकल द्रुमबेलि प्रफुलित मुदित भ्रमखर गुंज मत्तपान
मधु करत शुभ ता घरी ॥ नाथ वारिजबदन मदनमोहद और मोहे कोटिक मदन
हरत अधघवूंदरी ॥३॥ | Khat |
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