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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Mohanlal key sanga lalana sohai jaisen taroo tamalke dhing phul sonjardakau .. | Pustak1-340 | मोहनलाल के संग ललना सोहै जैसें तरू तमालके ढिंग फुल सोनजरदकौ ॥
बदनक्रांति अनुप भाँति नहिं समात नीलांबर गगनमें जैसें प्रगस्यौशशि पूरन शरदकौ ॥१॥
मुक्ता आभूषण युति बिंबित अंग अंग चूने मिलेरंग दूनौ होत जेसें हरदकौ ॥
सूरदास मदन मोहन गौहन की छबि बाढ़ी मेंटल
दुख निरखि नैेन मैंन दरदकी ॥२॥ | Kalyaan |
Rangili teej gangaur aaj chalo bhamini kunj chhaak leey jaiye. | Part2-246 | रंगीली तीज गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक ले जैये।
विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझेये ॥१ ॥
ले कर बीन बजाय गाय पिय-प्यारी जेंमत रुचि उपजैये।
'कृष्णदास' वृखभानसुता संग घूमर दै नंदनंद रिझैये ॥२ ॥ | Saarang |
Manjjan curry chitra chauki vegi pyaari juu sahchari chitra vichitra | NityaPad-057 | मंज्जन करि चित्र चौकी वेगि प्यारी जू सहचरी चित्र विचित्र
शुंगार करावत रतन जठित मनिन के आभूषन सोहत तापर सुहा सारी चुनि पहरावत ॥१॥
सोडस विधि अलंकार रूप जीवन गुन अपार अपनी उपमां कोआपु अंत न पावत ॥
मुरारीदास प्रभु जाल रंध्र अवबलोकत अति आतुर आतुलित
छबि रई नेतिनेति निगम वनरानी को गावत ॥२॥। | Todi |
Nandlal bajaai baansuri sriyamunaju key teer ree .. adharkar | Part1-288 | नंदलाल बजाई बाँसुरी श्रीयमुनाजू के तीर री ॥ अधरकर
मिल सप्त स्वरनसौं उपजत राग रसाल री ॥|१॥ व्रजयुवतती ध्वनि सुन उठि धाई
रही न अंग संभार री ॥ छूटी लर लपटात बदन पर टूटी मुक्ता माल री ॥२॥
बहत न नीर समीर न डोलत वृंदाबिपिन संकेत री || सुनि थावर अचेत चेत भये
जेंगम भये अचेत री ॥३॥ अफल फले फलफूल भयेरी जरे हरे भये पातत री॥
उमंग प्रेम जल चल्यौ सिखरतैं गरे गिरिनके गात री ॥४॥ तृण न चरत मृगामृगी
दोऊ तानपरी जब कान री ॥ सुनत गान गिर परे धरणि पर मानों लागे बान
री ॥५॥ सुरभी लाग दियो केहरिकौ रहत श्रवणहीं डार री ॥ भेक भुजंग
फण चढ बैठे निरखत श्रीमुख चार री ॥६॥ खग रसना रस चाख बदन नयन
मूँद मौन धार री ॥ चाखत फलहिं न परे चोंचते बैठे पाँछ पसार री ॥७॥
सुर नर असुर देव सब मोहे छाये व्योंम विमान री ॥ चतुर्भुजबदास कही कोन वश
भये या मुरलीकी तान री ॥८॥ | Dhanashri |
Bansuri bajaai aachhe rangason murari .. suni kai dhuni chhooti gaee | Part1-294 | बांसुरी बजाई आछे रंगसों मुरारी ॥ सुनि कै धुनि छूटि गई
संकरकी तारी ॥१॥ वेद पढ़न भूलि गये ब्रह्मा ब्रह्मचारी ॥ रसना गुन कहि
न सके लगी है कटारी ॥२॥ रंभा सब ताल चुकी भूली नृत्यकारी ॥ यमुनाजल
उलटी वहै सुधि ना संभारी ॥३॥ श्री वूंदावन बंसी बजी तीन लोक प्यारी ॥
ग्वालबाल मगन भये व्रज़की सब नारी ॥४॥ श्याम सुंदर मोहनि मूरति
नटवर वपु धारी ॥ सूर' किशोर मदनमोहन चरनन बलिहारी ॥५॥ | Gouri |
Pyaare kaahekau abb daan | nita nita aavat jaat yahai mug | Part1-221 | प्यारे काहेकौ अब दान | नित नित आवत जात यहै मग
कबुँ न सुनि यह कान ॥१॥ जैसें चलि आई अपने ब्रज आज नई जिन
टान | बचन रचन मूदु कहत परस्पर हों वारी मुसिक्यान ॥२॥ जो चाहीं सों
लीजै लालन तुमहौ जीवन प्रान । श्री विदलगिरिधरन लालसों ग्वालिनि अति सुख
मान ॥३॥ | Devgandhaar |
Tuu mohi kitt lyrie yeh gully .. | NityaPad-322 | तू मोहि कित लाईरी यह गली ॥
जो जिय डरपतहीं सोईभई आगें ठाडे मोहन अब कैसे जैवो मेरी माई ॥ १॥॥
रशन दशनधर करसूं करमीडत दूतीसों खीजत आनंद उर न समाई॥
गोविंदप्रभु की तेरी हिलमिल बातेंहोँ सबजानत भलीकीनी भले नगसों भेट कराई ॥२॥ | Nayaki |
Ratankhachit kanchankau palana taamadhi jhoolat giridharlal . | Part1-101 | रतनखचित कंचनकौ पलना तामधि झूलत गिरिधरलाल ।
जसुमति हरखी झुलावती गावती सुंदर गुण दे दे करताल ॥१॥ करी गुलगुली
हँसावत हरिकों कबहुँक मुखसो चुँमती गाल । कुंभनदास किलकत नंदरानी अँगुरी
गहीकैं सिखावत चाल ॥२॥ | Bilawal |
Sabavraj kull key raay .. laal manmohana nikse | Part3-291 | सबब्रज कुल के राय ॥ लाल मनमोहना निकसे
खेलन फाग ॥ लाल मनमोहना ॥|ध्०॥ नवल कुंवर खेलनचले ॥ मनमोहना
मुदित सखा संग लाय ॥ लाल मनमोहना ॥ स्याम अंग भूषण सजे ॥
विसल वसन पहराय ॥१॥ निकसद्धार ठाडे भये ॥ मुरली मधुर बजाय ॥
श्रवण सुनत सब ब्रजवधू ॥ जहां तहांते चली धाय ॥२५॥ विविध भांत्त
बाजेबजे ॥ ताल मृद्दंग उपंग ॥ रुंज मुरज डफ दुंदुभी ॥ कर कंठताल
सुरंग ॥३॥ युवतियूथ मिल धाइयो ॥ भर पिचकाई हाथ ॥ चहुंदिसतें बे
छिरक हीं ॥ भरत कुंवर गोपीनाथ ॥४॥ बहुरि सखा सन्मुख्र भये ॥ आगें
दे बलबीर | युवती गणपर वरखहीं कुंकुम सुरंग अबीर ॥५॥ बहोरिसमिट
सब सुंदरी ॥ मोहन लीने घेर ॥ एकजु मुरलीले भजी ॥ एक कहें देहु फेर
॥६॥ एक पीत पट गहिरही ॥ फगुवा देहु कुमार ॥ एसे हम नपती जहीं ॥
दे जहने मोती हार ॥७॥ ललिता ललित वचन कहे ॥ तुम सुनो गोकुल
के राय ॥ तो हम तुमकों जानदें ॥ प्यारी राधा कों सिरनाय ॥८॥ प्यारी
कर काजर लियो ॥ आंजे पियके नयन ॥ अंचलपट सुख दे हंसी मिलवत
करदे सेन ॥॥ आलस अरुण अति रसमसे अंजन खरे विराज ॥ युगल
कमल कर मुकुलिता मानें बैठे युगल अलिछाज ॥|१०॥ अति रस भरि ब्रज
सुंदरी कछू बन अंग संभार ॥ खसत बलय कटि किंकिणी पिय संग करत
विहार ॥ १ १॥ कुचपरक चलर लटकहीं लागत परम सुदेश ॥| मानो भुजंगम
चुहुंदिसा अमीपीबन राकेश ॥ १ २॥ यह विध सब मिल खेलहीं गावत गोरी
राग ॥ नवल कुंवरपर अति बढ्यो प्रतिछिनु नब अनुराग ॥१३॥ युवती
यूथ मिल उलटेयो अपने अपने टोल ॥ पियमुखर देखे फूलही ॥ प्रमुदित
लोचन लोल ॥१४।॥ यह विध होरी खेलहीं ब्रजजन संग लगाय ॥ घोष
नृपति सुत वदनकी गोविंद बलबल जाय ॥१०॥ | Gouri |
Aeye douu saghan kunj key dwaar thaadhe karat | NityaPad-242 | ए दोऊ सघन कुंज के द्वार ठाढे करत
सिंगार परसपर ॥ सेत कुलहे सिर स्वेत पिछोरा मोतिन माल बिराजति उर पर॥१॥ नील जलद तन राजत तिहारो चंपक बरन तिहारी सोहत सुंदर बर ॥॥
“रसिक प्रीतम की बानिक निरखति लेति बलैयां दोऊ कर कर ॥। | Saarang |
Kanak puri horry rachee mohan vraj baalaa .. mathura | Part3-082 | कनक पुरी होरी रची मोहन ब्रज बाला ॥ मथुरा
काढ्यों जाए सुंदर राधिका मोहन ब्रज बाला ॥ १॥ काहे की तुम ग्वालिनी ॥
मोहन ॥ का दथ् ि बेचन जाई ॥ सुंदर ॥२॥ गोकुल की हम ग्वालिनी ॥
मोहन ॥ मथुर दध्चि बेचन जाई ॥ सुंदर ॥ ३॥ काहे के तुम दानेया॥ मोहन ॥
काह्े कों जु मुरार ॥ सुंदर ॥४॥ गोकुल के हम दानैया ॥ मोहन ॥ श्री
मथुराजी को मुरार ॥ सुंदर ॥५॥ लौंग सुपारी दानैया ॥ मोहन ॥ दचि
कौ दानी होय ॥ सुंदर ॥६॥ जाई पुकरो कंस पे ॥ मोहन ॥ पकर मंगाउ
तोय सुंदर ॥७॥ कंस को मार न सके ॥ मोहन ॥ करो मथुरा कों राज
॥८॥ सुंदर ॥ मैंन हमारे झूंड में || मोहन ॥ चोखी चोर मजीठ ॥ सुंदर
॥९॥ श्रीविद्डल पद पदम कै ॥ मोहन ।। पावन रैनु परताप ॥ सुंदर ॥१०॥
'छीतस्वामि' गिरिधर मिलै || मोहन मेंट्यों तन को ताप ॥ सुंदर ॥११॥ | Khat |
Aaj atee neeke baneri gopal . | NityaPad-288 | आज अति नीके बनेरी गोपाल ।
खासाको कटि बन्यो है पिछोरा उः मोतिनकी माल ॥।|१॥
पाग चौकरी सीसबिराजत चंदन सोहत भाल ॥
कुंडल लोल कपोल विराजत कर पहोंची वनमाल ॥२॥
थेनु चराय सखन संग आवत हाथ लकुटिया लाल ॥
परमानंदप्रभुकी छबि निरखत मोहि रही व्रजबाल ॥३॥ | Hameer Kalyan |
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